Monday, 29 October 2012

72 घंटे में भुगतान के दावे हवा, छह-सात दिनों की पेमेंट अटकीं


- समाना में 'रूपैÓ कार्ड की हुई शुरुआत
- राजपुरा में 14 अक्टूबर तक तो शेष में 11, 12 अक्टूबर तक की फसलों का भी पूरा भुगतान नहीं हुआ
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हर साल किसान का पसीना सूखने से पहले उपज की कीमत का दावा करने वाली सरकार के इस बार भी 72 घंटे में भुगतान करने के दावे हवा हो रहे हैं। हालांकि इस बार कारण तकनीकी ज्यादा हैं और लापरवाही कम है। मंडियों में किसानों की छह-सात दिन पुरानी पेमेंट भी अटकी पड़ी है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि 'रूपैÓ कार्ड के लांच के बाद से ऑनलाइन हो रहे सिस्टम से अभ्यस्त न हो पाना मुख्य समस्या बन पड़ी है। याद रहे कि पिछले साल तत्कालीन खाद्य एंव आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों ने पटियाला की नई अनाज मंडी से 'रूपैÓ कार्ड की शुरुआत की थी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरु करने के बाद इस साल राजपुरा से फसल के आन लाइन भुगतान की शुरुआत की गई।
सूत्रों का कहना है कि राजपुरा में 14 अक्टूबर तक की फसल का लगभग सारा भुगतान हो चुका है। जबकि शेष लगभग सभी मंडियों में 11-12 अक्टूबर तक के बाद की फसलों का पूरा भुगतान नहीं हुआ है। पटियाला, सनौर आदि मंडियों में जहां धान की आवक पहले शुरु हुई वहां पर हालत कुछ ज्यादा बेहतर है। जबकि शेष में हालात ठीक नहीं कहे जा सकते। यहां पर किसानों को खासा इंतजार करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर जिला खाद्य एंव आपूर्ति अधिकारी डा.अंजुमन भास्कर कहती हैं कि भुगतान तेजी से किया जा रहा है। आज भी वे राजपुरा में हैं और करीब डेढ़ करोड़ रूपये की पेमेंट कर चुकी हैं। वे आढ़तियों से भी लगातार कह रही हैं कि उनके पास बिल जितनी जल्दी हो सके भिजवाएं। जिससे किसानों को उनकी फसल का शीघ्र भुगतान किया जा सके। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय से भी यही अपील जारी करवाई गई है।
डीएफएसओ का कहना है कि फिर भी अगर किसी मंडी में भुगतान में देरी हो रही है तो उनसे संपर्क कर सकता है। भुगतान तेजी से हो और ऑन लाइन हो इसके लिए समाना में भी 'रूपैÓ कार्ड की शुरुआत आज से करवा दी गई है।

अवैध पार्किंग: जिला प्रशासन-नगर निगम आमने सामने


 -जिला प्रशासन ने कहा हमने 25 हजार रूपये जमा करवाए अब अवैध पार्किंग रोकना निगम का काम
-निगम ने कहा जिला प्रशासन अधीन मेला और पार्किंग दोनों
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
एतिहासिक शीश महल में आयोजित किए जा रहे सरस मेले में पार्किंग को लेकर नगर निगम व जिला प्रशासन जहां आमने सामने आ गए हैं वहीं मेयर से लेकर मुख्यमंत्री तक की मौजूदगी में मेले के ठीक मुख्य द्वार के बाहर सरेआम अवैध वसूली जारी है।
सरस मेले पर किए जा रहे प्रबंधों अधीन जिला प्रशासन की ओर से पहले कहा गया कि इस बार किसी तरह की पार्किंग संबंधी समस्या नहीं आने दी जाएगी और ना ही सड़क पर खड़े किए जाने वाले वाहनों से ही ट्रैफिक में व्यवधान आने दिया जाएगा। एडीशनल डिप्टी कमिश्नर अननंदिता मितरा से जब अवैध रूप से बनने वाली पार्किंग व मनमाने दामों की होने वाली वसूली पर पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासन की ओर से 10, 15, 20 रूपये तय कर कोटेशन ली है और केवल एक व्यक्ति को ठेका दिया गया है।
मेले के आसपास खाली प्लाटों में बनने वाली व अवैध पार्किंग पर वे कहती हैं कि अवैध पार्किंग पर अंकुश लगाना नगर निगम का काम है। मेला में चूंकि पार्किंग के रूप में व्यवसायिक गतिविधि चल रही है। ऐसे में उनकी ओर से 25 हजार रूपये निगम के पास टेक्स के रूप में जमा भी करवाया गया है। अब अगर कोई साइकिल स्टैंड अथवा पार्किंग चलाता है तो उसे रोकना नगर निगम का काम है उनका नहीं।
वहीं कमिश्नर गुरलवलीन सिंह सिद्धू कहते हैं कि पार्किंग का काम नगर निगम का नहीं है। पिछले दो तीन सालों से मेले लग रहे हैं नगर निगम ने कभी पार्किंग अपने हाथ में नहीं ली है। इस बार भी नहीं। ऐसे में वे इसे नियंत्रित नहीं कर रहे। मेला और पार्किंग दोनों ही जिला प्रशासन के अधीन है। जिला प्रशासन की ओर से नगर निगम को पार्किंग के टेक्स के रूप में 25 हजार रूपये जमा करवाए जाने के सवाल पर निगम कमिश्नर कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं हुआ।
उल्लेखनीय है कि सरस मेले में हर दिन किसी ना किसी मंत्री के औपचारिक रूप से दौरे करने की डयूटी लगी हुई है और उनके साथ ही जिला प्रशासन के लगभग सभी अधिकारी हर रोज दौरे कर रहे हैं। इनमें डिप्टी कमिश्नर व एसएसपी के दौरे तो अवकाश के दिनों में भी शामिल हैं और सरस मेले के मुख्य प्रवेश द्वार से ठीक पहले ही अवैध पार्किंग उपज आई है, जबकि प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्था में सबसे अंत में पार्किंग बनी हुई है।

पंजाब में बिजली मीटर नहीं, तो कनेक्शन नहीं


-पीएसईआरसी ने पावरकाम से कहा दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करो
- इस साल मई से चल रही कमी, स्टाक शून्य हुआ
-पावरकाम ने कहा 80 हजार मीटर आने को हैं
- जले अथवा खराब हुए मीटरों वाले एक लाख 76 हजार 930 उपभोक्ताओं के लिए चार से छह महीने पूरे मजे के
- बिजली बोर्ड के पूर्व सुपरिटेंडिंग  इंजीनियर ने पीएसआरसी के पास दायर की याचिका कहा पावरकाम ने दिया 'चोर रास्ताÓ
भूपेश चट्ठा, पटियाला
उप मुख्यमंत्री की ओर से एक ओर जहां राज्य को बिजली सरपल्स राज्य बनाने के लगातार दावे किए जा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत ये है कि पंजाब में बिजली मीटर ही नहीं है। ऐसे में नए कनेक्शन देना तो दूर की बात पुराने, जले व खराब मीटर बदलने का भी कोई साधन नहीं है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पास उपभोक्ताओं के यहां लगाने व खराब हुए सिंगल फेस मीटरों को बदल नए मीटरों लगाने का स्टाक खत्म होने पर अब पंजाब स्टेट इलेक्ट्रीसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन- पीएसआरसी ने पावरकाम से इस संदर्भ में दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं। पीएसईआरसी की अध्यक्ष रोमिला दूबे ने उक्त आदेश जारी किए हैं।
 हालांकि तीन फेस के मीटरों की भी कमी है, लेकिन सिंगल फेस मीटरों के मामले में हालत खासी पतली चल रही है। इससे एक ओर उपभोक्ताओं की मौज लगी है, वहीं पावरकाम को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस साल मई से ही कमी चल रही थी, लेकिन अब स्टाक शून्य हो गया है। एक नोटिस पर पावरकाम की ओर से पीएसईआरसी के पास यही जबाव दायर किया गया है कि मीटर खत्म है और 80 हजार मीटर आने को है। आर्डर दिया जा चुका है।
वहीं सूत्र बताते हैं कि नवंबर तक हालात कुछ इसी तरह के ही रहने वाले हैं। जले अथवा खराब हुए मीटरों वाले उपभोक्ताओं के लिए चार से छह महीने पूरे मजे के चल रहे है। उपभोक्ता को बिजली मीटर से ना आने की सूरत में एसी से लेकर माइक्रो वेव तक सब जम कर चलने वाली स्थित होती है।
बिजली बोर्ड के ही एक पूर्व सुपरिटेंडिंग इंजीनियर गुरनेक सिंह बराड़ ने इस संबंध में पीएसआरसी के पास याचिका दायर की थी। कहा गया कि खुद पावरकाम प्रबंधन ने ही राजस्व जाने देने का 'चोर रास्ताÓ सुझा दिया है। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 181 के तहत दायर की गई याचिका के साथ ही धारा 142 का हवाला देकर यह भी कहा गया कि पीएसईआरसी मामले में हस्तक्षेप कर सुनिश्चित करे की सीधी सप्लाई ना दी जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि टेस्ट रिपोर्ट के बाद नए मीटर लगवाने वालों की फेहरिस्त और लंबी होती जा रही है। इस साल 31 मार्च को जनरल केटेगरी में टेस्ट रिपोर्ट पेंडिंग के जहां 10411 मामले लंबित सूची में थे वहीं 30 जून तक यह आंकड़ा 17 हजार बढ़ कर 27233 पर आ गया। सिंगल फेस मीटर ना होने की सूरत में नए कनेक्शन जारी नहीं हुए। इसी प्रकार खराब मीटरों का आंकड़ा एक लाख 76 हजार 930 पर आ पहुंचा है।
तकनीकि रूप से खराब, ठप, जले हुए, सील टूटे व बिलकुल खपत ना दिखाने वाले मीटरों का आंकड़ा कुल उपभोक्ताओं की तुलना में एक फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए, जबकि इस समय यह 2.96 फीसद पर जा पहुंचा है।
पावरकाम को जहां दो लाख मीटरों की तुरंत जरूरत है वहीं वास्तविक स्टाक 31 मई को 2223 सिंगल फेस, 3820 थ्री फेस, 29 जून को 3389 सिंगल फेस, 1453 थ्री फेस, 30 जुलाई को 12495 सिंगल फेस, 466 थ्री फेस, 31 अगस्त को 2397 सिंगल फेस, 893 थ्री फेस और सात सितंबर को 1888 सिंगल फेस और 2193 थ्री फेस के मीटर स्टाक में हैं।

लॉ यूनिवर्सिटी की छात्रा ने की यौन उत्पीडऩ की शिकायत


-वाइस चांसलर से लिखित में कहा युनिवर्सिटी के सुपरिटेंडेंट ने किया सेक्सुअल हैरासमेंट
-वीसी ने कहा शिकायत आई है, कार्रवाई करेंगे
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राजीव गांधी नैशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की छात्रा ने यूनिवर्सिटी के ही एक कर्मी के खिलाफ यौन उत्पीडऩ की शिकायत की है।
यूनिवर्सिटी के विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार यूनिवर्सिटी में बीए एलएलबी के पांचवें वर्ष की एक छात्रा ने यूनिवर्सिटी के ही सुपरिटेंडेंट के खिलाफ वाइस चांसलर से लिखित में यौन उत्पीडऩ की शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि युनिवर्सिटी के प्रशासनिक विभाग में पुर्न नियुक्ति लेने वाले एक सुपरिटेंडेंट ने उसके साथ सेक्सुअल हैरासमेंट किया है।
सूत्रों का कहना है कि उक्त कर्मी इससे पहले पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में वाइस चांसलर के कार्यालय में सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत रहा है और उक्त नौकरी से सेवा मुक्ति के बाद ही राजीव गांधी नैशनल युनिवर्सिटी आफ लॉ में सेवा दे रहा है।
वहीं वाइस चांसलर डा. पीएस जसवाल ने उक्त जानकारी की पुष्टि करते हुए कहा है कि उनके पास शिकायत आई है और वे इस मामले पर जांच कर रहे हैं और जल्द कार्रवाई भी करेंगे। कर्मी के निलंबन अथवा पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाने के सवाल पर वे कहते हैं कि एक प्रक्रिया है जो जारी है। उसी के तहत बनती कार्रवाई की जाएगी।

'हिंदुस्तानी पंजाब में पगडिय़ां दिखती हैं और महिलाएं वाइक चलाती हैं'


फ्लैग: लाहौर के एचीशन कालेज के विद्यार्थी पहुंचे वाईपीएस पटियाला में
-काजू की बर्फी और आर्टीफीशियल ज्वेलरी लेकर जाएंगे: अरशद चौधरी
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
'हिंदुस्तानी पंजाब में पगडिय़ां दिखती हैं और महिलाएं वाइक चलाती हैं...बुर्का हमारे यहां से भी गायब हो चुका है और यहां भी नहीं है।Ó लाहौर के एचीशन कालेज के विद्यार्थियों संग वाईपीएस पटियाला में पहुंचे लाहौर के शिक्षक अरशद चौधरी पहली बार भारत आए हैं और देख कर हैरान हैं कि इस पंजाब और उनके पंजाब में कोई अंतर नहीं है।
'दैनिक जागरणÓ के साथ विशेष बातचीत में वे कहते हैं कि 'कोई फर्क नहीं है,  कस्टम सेम है, कल्चर सेम है और लोगों की हरकतें भी सेम है, फिर पता नहीं क्यों...समझ में नहीं आता...लेंग्वेज भी देखो सेम हैÓ। भारत में लोगों विशेष रूप से स्कूल की ओर से की जा रही मेहमाननवाजी से वे खासे प्रभावित हैं। पंजाबी खाने के सवाल पर पहली बार में ही स्पष्ट करते हैं कि वे वेजीटेरियन हैं, ऐसे में खाना भी वैसा ही है जैसा उनके यहां पर है।
पंजाब से की जाने वाली खरीददारी को लेकर वे खासे उत्साहित हैं। बताते हैं कि एक बार उनके एक मित्र ने बैंग्लोर से काजू की बर्फी लाए थे तब स्वाद देखा था आज भी याद है। पाकिस्तान में हर कोई उनसे काजू की बर्फी लाने की फरमाइश किए हुए है। अरशद चौधरी कहते हैं कि काजू की बर्फी ले जाने के अलावा हिंदुस्तान की आर्टीफीशियल ज्वेलरी की मांग पाकिस्तान में खासी है।
दिलचस्प है कि वाईपीएस स्कूल में आयोजित की जा रही 23 वीं वार्षिक कर्नल फ्रेंक वॉन गोल्डस्टीन इंटर-पब्लिक स्कूल इंग्लिश डिबेट प्रतियोगिता में भाग लेने आए तीन छात्रों के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य हमजा बाजवा अपनी पहचान तलाश रहे हैं। भारतीय पंजाब में अगर चौधरी गोत्र आम है तो बाजवा गोत्र के लोगों की भी कमी नहीं है। हालांकि दो अन्य छात्र हमाद असलम और बिलाल कासिम खान पहले भी वाईपीएस पटियाला में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हुए आ चुके हैं।

सरस मेला 11 अक्टूबर से, शीश महल में




-18 राज्यों के चार सौ कलाकारों की लगेंगी 165 दुकानें
-13 को दलेर मेंहदी नाइट
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
देश भर के गरीब हस्त शिल्पकारों की चीजों की बिक्री के लिए उत्साहित करने वाला सरस मेला एतिहासिक शहर पटियाला के शीश महल में 11 अक्टूबर से शुरु होने जा रहा है। जिला ग्रामीण विकास एजेंसी व केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से लगाए जके वाले 12 दिवसीय मेले की तैयारियां लगभग पूरी की जा चुकी हैं।
इसी संबंध में जिला प्रशासन के अमले के साथ पहुंचे ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा है देश भर में अब तक हुए पांच मेलों में से केवल पंजाब में ही लगने वाला ये तीसरा मेला है। मेले का औपचारिक उद्घाटन मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल 12 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे करेंगे। इसके अलावा हर दिन राज्य का कोई ना कोई मंत्री मेले में अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करवाएगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के आने का भी कार्यक्रम है लेकिन प्रधानमंत्री के साथ बैठक के चलते समय की दिक्कत आ रही है।
रखड़ा ने बताया कि मेले पंजाब के अलावा जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तामिलनाडू, उड़ीसा, गुजरात, बिहार, केरल सहित 18 राज्यों के करीब चार सौ शिल्पकार भाग ले रहे हैं। गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले दस्तकारों की चीजें इस मेले में बेची जाएंगी। इन लोगों को 160 स्टाल अलाट किए गए हैं।  
पहली बार उड़ीसा व पश्चिमी बंगाल के लोक नृत्यों की प्रस्तुति के अलावा 13 अक्टूबर को दलेर मेंहदी नाइट का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का प्रदर्शन भी किया जाएगा। 65 लाख रूपये के अनुमानित खर्च वाले इस मेले में केंद्र सरकार की ओर से 20 लाख रूपये का योगदान दिया जा रहा है।
सरस मेले में मिट्टी के बर्तन, बांस, तिनकों की बनी वस्तुएं, कपड़ा, चमड़ा, शीशे व टेराकोट से तैयार की गई वस्तुएं व झूले विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होंगे। प्रवेश के लिए दस रूपये की टिकट रखी गई है लेकिन दस साल से छोटे बच्चों व सरकारी स्कूलों के  बच्चों के लिए ये निशुल्क होगा।
वहीं एडीसी अनिंनदिता मितरा ने बताया कि फायर ब्रिगेड से लेकर चिक्तिसा तक की लगभग हर व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर पनसीड के चेयरमैन सुरजीत सिंह अबलोवाल, मखन सिंह लालका, कर्मजीत सिंह रखड़ा, रवि आहलुवालिया सहित जिला व पुलिस प्रशासन के मुखी मौजूद रहे।
प्रचार में साम, दाम, दंड, भेद के साथ पूरे प्रबंध
-हर बीडीओ को थमाए टिकट, कहा गांवों में बेचो
-गुरुद्वारों के लाउड स्पीकरों से होगी घोषणा, सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त प्रवेश
-सरपंचों व पंचों को निमंत्रण पत्र भेज कहा मुख्यमंत्री होंगे मुखातिब
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सरस मेले को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए अधिकारी किस कदर जुटे हैं। इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि मेले को जन जन तक पहुंचाने के लिए साम दाम दंड भेद का हर उपाय किया जा रहा है।
पिछली बार के सरस मेले की तुलना में ज्यादा लोगों को मेले तक खींच लाने के किए जा रहे प्रयास में इस बार जिले के लगभग हर गांव तक सरस मेले का प्रचार किया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ब्लाक डेवलेपमेंट अफसरों की डयूटी लगाई गई है कि वे जिले के एक हजार से ज्यादा सरपंचों के पास निमंत्रण पत्र पहुंचाए। इनमें से शिरोमणि अकाली दल से नजदीकी रखने वालों के पास पहुंचा है या नहीं इसकी पुष्टि भी कर ली जाए। कहा गया है कि 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इन सरपंचों से मेले में ही मुखातिब होंगे। प्रशासनिक प्रयास हो रहे हैं कि करीब एक हजार सरपंच व पंचों का सम्मेलन पहले ही दिन हो जाए। मुख्यमंत्री से सीधे संवाद का मौका शायद ही कोई सरपंच खोना चाहेगा।
एक एफएम रेडियो को भी मीडिया पार्टनर के रूप में शामिल किया गया है उक्त रेडियो से दिन भर में दस बार विज्ञापन निशुल्क प्रचारित करने का समझौता हुआ है।
जिले में हर बीडीओ को पांच-पांच हजार टिकट थमा दि गए हैं और गांवों में बेचने के लिए कह दिया गया है। हालांकि इस संबंध में एडीशनल डिप्टी कमिश्नर अनिनंदिता मितरा ने तो यह तक कह दिया है कि गांव स्तर तक प्रचार करने के लिए ये जरूरी है। वे चाहती हैं कि हर गांव तक इसका प्रचार हो। जिले व आसपास के क्षेत्रों के गांवों में मौजूद गुरुद्वारा साहिब के लाउड स्पीकर से सरस मेले के बारे में घोषणा करवाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
सरकारी स्कूलों के बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने के अलावा मेले में आने वालों की गिनती दो लाख से बढ़ा कर तीन लाख करने की कवायद में शहर भर में फलैक्स लगाए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में एडीसी कहती हैं कि कोई भी फलैक्स अवैध जगह पर नहीं लगाया गया है। केवल उन्हीं जगहों पर लगाए गए हैं जहां पर नगर निगम अनुमति देता है। इसके लिए नगर निगम को 25 हजार रूपये का भुगतान भी किया गया है।


मौसम साफ पर गीला आ रहा धान


-17 की बजाए 22-23 फीसद नमी वाला आ रहा है धान
-सरकारी खरीद एजेंसियों ने नहीं की खरीद
-एफसीआई से राजपुरा में करवाई है खरीद: डीएफएसओ
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उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
प्रदेश में बारिश बंद हुए दो सप्ताह बीत जाने के बाद और मौसम के पूरी तरह से साफ रहने पर भी जिले की मंडियों में किसान गीला धान ही लेकर आ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से धान के तय किए गए मापदंड और राज्य सरकार की ओर से जारी की गई धान की खरीद नीति अनुसार धान में 17 फीसद तक की नमी होनी चाहिए लेकिन मंडियों में आने वाले धान में 22-23 फीसद नमी पाई जा रही है।
वहीं जिला मंडी बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि कुल 106 मंडियों में से केवल 13 में ही धान की आवक शुरु हुई है और पिछले साल की तुलना में एक तिहाई धान ही आ रहा है। इसमें से भी एक तिहाई की ही खरीद हुई है, वो भी निजी क्षेत्र में। मंडी में लाए जा रहे धान की हालत ऐसी है कि इसे कम से कम दो दिनों तक सुखाना पड़ रहा है। जिले में अब तक धान की कुल आवक 2332 टन हुई है, इसमें से केवल हुई निजी खरीद 867 टन है जबकि पिछले साल आज ही के दिन तक 6894 टन धान मंडियों में आ चुका था।
वहीं राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान सत प्रकाश गोयल कहते हैं कि अभी तो मंडी में जगह है, ऐसे में आप फैला कर जैसे तैसे सुखा लेते हैं पर ये घाटे का सौदा है। पांच रूपये प्रति कट्टा अथवा 15 रूपये प्रति क्विंटल का खर्च बढ़ जाता है। 22 फीसद नमी वाले धान को 17 फीसद पर लाने के साथ ही पांच किलो वजन भी कम हो जाता है। 12 रूपये 80 पैसे किलो के हिसाब से पांच-छह किलो का यह नुकसान भी खरीददार को झेलना पड़ता है। इसके अलावा धान के बदरंग होने का खतरा रहता है सो अलग।  
दूसरी ओर राज्य सरकार की पांचों खरीद एजेंसियों के फील्ड कर्मियों की ओर से धान की खरीद का बायकाट आज तीसरे दिन भी जारी रहा है। ऐसे में सरकारी एजेंसियों की ओर से धान का दाना भी नहीं खरीदा गया है।
जबकि जिला खाद्य एंव आपूर्ति अधिकारी डा. अंजुमन भास्कर ने बताया कि नमी की वजह से ही सरकार धान की खरीद नहीं कर पा रही है। किसानों से भी सूखा धान मंडियों में लाने की अपील की गई है। हालांकि राजपुरा में फूड कारपोरेशन आफ इंडिया ने करीब एक सौ टन की खरीद कर ली है और शेष स्थानों पर निजी क्षेत्र में ही खरीद की जा रही है।

पुर्न मुल्यांकन में पास भी दे रहे री-अपियर की परीक्षा!


-दो दो जगह जमा करवाई फीस फिर भी सांसे अटकी
-अगर पास होने वाले पर केस बना तो पास होने की मान्यता नहीं, पर केस चलेगा: नियम
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में शुरु हुई री-अपियर की परीक्षाओं में ऐसे परीक्षार्थियों की कमी नहीं है जो संभावित रूप से पुर्न मुल्यांकन की परीक्षा में पास हो चुके होंगे। दिलचस्प है कि री-अपियर की परीक्षा देने वाले अपने शौक से नहीं बल्कि मजबूरी में दो दो बार फीस जमा करवाने के बावजूद दो दो जगहों से आने वाले परिणाम के इंतजार में अपनी सांसे थामे हैं।
कारण स्पष्ट है कि पुर्न मुल्यांकन का परिणाम आया नहीं है और री-अपियर की परीक्षाएं शुरु हो गई हैं। परीक्षा शाखा के ही एक कर्मी बताते हैं कि कैंपस में परीक्षा देने आने वाले प्राइवेट छात्रों की संख्या कम नहीं है। जिन्हें लगता है कि उनका मुख्य पेपर ठीक हुआ था पर कुछ नंबरों से फेल हो गए हैं। ऐसे में पांच सौ रूपये फीस के जमा करवा पुर्न मुल्यांकन भर दिया पर री अपियर की परीक्षा इसलिए देनी पड़ रही है क्योंकि ढ़ाई-तीन महीने हुए पुर्न मुल्यांकन का परिणाम नहीं आया है। विभाग के कर्मी इस संबंध में मौजूद नियम पर बताते हैं कि 'किसी भी सूरतÓ में पास होने का प्रयास करने वाला परीक्षार्थी अगर री अपियर की परीक्षा में धरा जाता है और यूएमसी केस बन जाता है तो पुर्न मुल्यांकन में पास होने की मान्यता नहीं रहती पर यूएमसी का केस जरूर चलता है। ऐसे में दोधारी तलवार पर चलना होता है।
वहीं चीफ कंट्रोलर परिक्षाएं पवन सिंगला कहते हैं कि पुर्न मुल्यांकन का री-अपियर से कोई संबंध नहीं है। विद्यार्थी के जिसमें अधिक नंबर आते हैं वही जुड़ जाते हैं। रिजल्ट मेंं देरी व पुर्न मुल्यांकन का परिणाम पहले आया होता तो डबल फीस ना लगती जैसे सवालों पर भी वे कहते हैं कि दोनों अलग अलग चीजें हैं। लेकिन  अगर पुर्न मुल्यांकन में पास होने पर री-अपियर का तगमा स्वत: हट जाता है। लेकिन अगर छात्र गड़बड़ी करता पकड़ा जाए तो यूएमसी जरूर बनता है, फिर पुर्न मुल्यांकन का कोई महत्व नहीं रहता।

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डुप्लीकेट रोल नंबर लेना हो तो फिर फीस

यूनिवर्सिटी में किसी भी परीक्षा के लिए फीस जमा करवाने पर परीक्षार्थी एक प्रकार से उपभोक्ता बन जाता है। ऐसे में रोल नंबर पहुंचाना भी यूनिवर्सिटी की ही जिम्मेदारी बनती है। दिलचस्प है कि साधारण भारतीय डाक व्यवस्था चाहे सदियों का अनुभव रखती हो पर समय से डाक पहुंचाने के लिए चंद ज्यादा रूपये, मात्र 20 रूपये में रजिस्टर्ड डाक की व्यवस्था भी इसी के अधीन की गई है। लेकिन यूनिवर्सिटी साधारण डाक का ही प्रयोग करती है और रोल नंबर ना पहुंचने की सूरत में उम्मीदवार ना केवल भटकता है अपितु 250 रूपये जमा करवा कर फिर से डुप्लीकेट नंबर जारी करवाता है वो भी परीक्षा की तैयारी करना छोड़, ठीक एक दिन पहले।

आने वाला बिजली बिल अंधेरी करेगा दिवाली


घरेलू उपभोक्ता को दो और इंडस्ट्री को आठ किश्तों में चुकाना होगा बकाया
-आने वाले बिल में 12.8 फीसद की बढ़ी दर के अलावा छह महीनों का आधा बकाया
-10 पैसे प्रति यूनिट मंहगी बिजली अलग से जुड़कर आएगी
-पावरकाम ने जारी किया सर्कुलर
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब के बिजली उपभोक्ताओं के लिए त्यौहारों के दिनों में अब आने वाला बिजली बिल दिवाली को अंधेरी करने वाला आना तय है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से इस संबंध में सकुर्लर जारी कर दिया है कि एक अप्रैल 2012 से बढ़ाई गई बिजली दरों की अब वसूली कर ली जाए। आने वाले दिनों में बिजली के कम से कम दो बिल हर किसी को रुलाने वाले होंगे। जहां देरी से आ रहे हैं वहां साधारण से दो गुने तक भी हो सकते हैं।
पावरकाम ने एरियर को बराबर की किश्तों में हर महीने एडजस्ट करने की बजाए घरेलू उपभोक्ताओं को अगले दो बिलों के साथ दो किश्तों में बढ़ी बिजली दरों का बकाया चुकाने का फरमान जारी कर दिया है। यह बढ़ी हुई दरें उपभोक्ता को अपने सामान्य बिजली बिल के साथ देनी होंगी। हालांकि इंडस्ट्री के लिए इस बकाये को आठ किश्तों में करने की छूट दे दी गई है।
उल्लेखनीय है कि पावरकाम ने इस साल एक अप्रैल से बिजली दरों में औसतन 12.8 फीसद की बढ़ोतरी कर दी है। चूंकि इन्हें अगस्त में घोषित किया गया लेकिन लागू पिछली तारीख से किया गया है। ऐसे में अभी तक उपभोक्ता को च्यादा बिजली शुल्क का अहसास नहीं हुआ है। लेकिन अब बिजली का झटका लगना तय है। वो भी जोर से। बढ़ी हुई दर के अलावा आने वाले बिलों में पिछले छह महीनों का आधा बकाया भी जुड़ कर आएगा। इसमें एक सितंबर से ईंधन पर सरचार्ज के नाम पर 10 पैसे प्रति यूनिट मंहगी बिजली अलग से जुड़कर आएगी। यह अब 14 पैसे प्रति यूनिट हो गया है। ऐसे में आने वाले दो बिल करीब करीब दो गुने आ सकते हैं।

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घरेलू उपभेक्ता:- 10 पैसे बढ़ी हुई दरें
पहले 300 यूनिट-5.59 रूपये प्रति यूनिट
300 से ज्यादा-5.91 रूपये प्रति यूनिट

छोटी इंडस्ट्री-5.20 रूपये प्रति यूनिट
साधारण इंडस्ट्री-5.71 रूपये प्रति यूनिट
(मीटर से बिजली न लेने वाले उपभोक्ताओं पर सरचार्ज की बढ़ोतरी 12 रूपये प्रति हार्स पावर के हिसाब से की गई है)

बारिश बनने लगी प्रकोप, चावल के बदरंग होने के आसार


- प्रकृति के साथ चले किसान रहे फायदे में, देरी से रोपाई करने वालों को हो रहा फायदा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
खरीफ की फसल को सबसे अधिक पानी की जरूरत बुआई के समय पड़ती है और यही दिन भीषण गर्मी के भी होते हैं, लेकिन इस साल जून महीना पूरी तरह से सूखा निकला जुलाई में चार-पांच बारिशें जरूर हुई। आंकडों के लिहाज से 62 फीसद तक मानसून पिछड़ा रहा। अगस्त से लगातार हो रही बारिश ने मानसूनी आंकड़ों में सुधार कर दिया, लेकिन सितंबर के इन दिनों में हो रही बारिश ने धान से बनने वाले चावल के बदरंग होने के आसार बढ़ा दिए है।
कृषि के जानकार बताते हैं कि बारिश से होने वाला नुकसान किसान के साथ शैलर मालिकों तक भी पहुंचेगा और ज्यादा बारिश होने की स्थिति में निर्यात के साथ विदेशी मुद्रा लाने वाला मंहगा चावल भी कम सफेद रहा तो असर दूर तक होगा। इसी प्रकार शीट ब्लाइट व होपर जैसी बीमारियों से जूझ रही धान की फसल पर बारिश के साथ तेज हवा भी चल गई तो नुकसान उपज की शक्ल में भी होगा। धान का पौधा अब इतना बड़ा हो चुका है कि हल्की हवा से भी झूलने लगा है। बल्लियां पूरी तरह से खिल चुकी हैं और दानों से भारी भी हो गई हैं। इस स्थिति में हवा व बौछारों से पौधे के गिरने की सूरत में झाड़ कम रहना तय है।
दिलचस्प है प्रकृति के साथ चले किसान इस सीजन में फायदे में रहे हैं। नाभा रोड स्थित रौणी गांव के अमरीक सिंह बताते हैं कि देरी से रोपाई करने वालों को इन बारिशों से फायदा हो रहा है। इन लोगों ने पहले भी रोपाई के समय मंहगा डीजल नहीं जलाया और मौसम के साथ ही देरी से रोपाई की, जिससे ऐसे किसानों को दोहरा फायदा हो रहा है। जुलाई में जिन लोगों ने रोपाई की अब उनकी फसल पर बारिश टॉनिक का काम कर रही है।

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मौसम साफ होने से पहले दवा का स्प्रे ना करें: कृषि विभाग
वहीं मौसम की मार पर सिर्फ और सिर्फ 'अरदासÓ करने की सलाह देने वाले कृषि विभाग के मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि किसी भी तरह की दवा का स्प्रे करने से पहले किसान पूरी तरह से सुनिश्चित कर लें कि मौसम साफ है। हालांकि भादों के इन दिनों में यह जांचना खासा मुश्किल है, ऐसी स्थिति में किसान को चाहिए कि कम से कम एक दिन पूरी तरह से धूप लगने के बाद ही फसल पर बीमारी अथवा कीड़े मार दवा का छिड़काव किया जाए।

धान की सरकारी खरीद का बायकाट किया कर्मियों ने

-राज्य सरकार की पांच खरीद एजेंसियों के कर्मियों की तालमेल कमेटी ने की घोषणा
-धान की संयुक्त कस्टडी की चली आ रही नीति का कर रहे हैं विरोध
-तीन को चंडीगढ़ में रैली कर करेंगे घोषणा और कैसे जता सकते हैं विरोध
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उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
एक अक्टूबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राज्य भर में शुरु होने वाली धान की  सरकारी खरीद का बायकाट करने की फील्ड कर्मियों ने घोषणा कर दी है। राज्य सरकार की पांच खरीद एजेंसियों मार्कफैड, पनग्रेन, पंजाब एग्रो, पनसप व वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के कर्मियों के संगठनों की तालमेल कमेटी ने शुक्रवार को यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उक्त घोषणा कर दी है।
कमेटी के प्रधान भुपिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक रोज पहले घोषित की गई धान नीति के विरोध में सरकारी खरीद करवाने वाले फील्ड इंस्पेक्टरों ने असहमति जताई है। ये कर्मी धान की शैलर मालिकों के साथ संयुक्त कस्टडी की चली आ रही नीति का विरोध करते आ रहे हैं। प्रधान भुपिंदर सिंह का कहना है कि जब कर्मियों के पास निजी शैलर में बंद पड़े धान की चौकीदारी अथवा सीधी निगरानी का कोई साधन ही नहीं है तो संयुक्त कस्टडी का कोई मतलब नहीं रह जाता। दूसरा पक्ष करोड़ों के चावल हजम कर जाता है और इलजाम कर्मियों पर बराबर का आता है। जबकि ऐसे धान पर कर्मी का सीधा नियंत्रण नहीं होता।
कमेटी का कहना है कि उन्हें एक अगस्त से 17 अगस्त तक ढुलाई का बायकाट करने के बाद लगातार आश्वस्त किया गया कि पिछली धान खरीद नीति बदली जाएगी और सिंगल कस्टडी दी जाएगी, लेकिन अंतिम दिन शैलर मालिकों के दवाब में नीति बदल दी गई। यह वही नीति है जिसके चलते कई हाल ही में भर्ती हुए इंस्पेक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं और कोई भी अपनी सेवा मुक्ति के लाभ के साथ रिटायर नहीं हो पा रहा। लगातार मामले दर्ज हो रहे हैं, जबकि उनका कोई कसूर नहीं है। विजीलेंस व पुलिस के हाथों कर्मी जलालत झेलते हैं, कई निलंबित चल रहे हैं। ऐसे में धान की खरीद कर मुसीबत मोल लेने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
कमेटी के उप प्रधान विधुशेखर भारद्वाज, हरप्रीत सिंह चहल, महासचिव सर्वणजीत सिंह और वित्तय सचिव बलजीत सिंह गिल की मौजूदगी में यह भी कहा गया है कि तीन अक्टूबर को चंडीगढ़ में रैली कर अगली घोषणा भी की जाएगी कि और कैसे विरोध जता सकते हैं। इसमें गेहूं की ढुलाई का बायकाट और खाद आदि का प्रबंध करना शामिल है।


बायकाट के बीच धान की खरीद आज से
-13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद
- मौसम अनुकूल है पिछला रिकार्ड सुधरने की उम्मीद
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में धान की 90 फीसद से ज्यादा सरकारी खरीद करने का जिम्मा रखने वाली प्रदेश सरकार की पांच खरीद एजेंसियों के फील्ड इंस्पेक्टरों की ओर से खरीद करने के बायकाट के बीच सरकारी खरीद सोमवार एक अक्टूबर से शुरु होने जा रही है। हालांकि शुरु में मंडियों में धान की आवक सुस्त रहने का अनुमान है। इसके एक सप्ताह बाद ही जोर पकडऩे का अनुमान जताया जा रहा है।
पहले सूखा और बाद में लगातार बारिश ने चाहे किसान की खेती लागत बढ़ा दी हो, पर कटाई के दिनों में खिली धूप ने किसान की यह उम्मीद भी जगा दी है कि उपज कम नहीं रहने वाली। मंडी बोर्ड की जिला ईकाई का अनुमान है कि इस बार जिले की 106 मंडियों में 13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद है।
जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि मौसम अनुकूल है। ऐसे में पिछला रिकार्ड सुधरने की पूरी उम्मीद बनी हुई है। जिले में धान की स्टोरेज के सवाल पर वे बताते हैं कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है। जिले में 520 शैलर काम कर रहे हैं और इनमें धान स्टोर करने का पर्याप्त स्थान है। चूंकि धान की कस्टडी शैलर मालिकों के पास होती है और गेहूं-चावल की सरकार के गोदामों में ऐसे में धान के मामले में भण्डारण संबंधी कोई समस्या नहीं है।
पटियाला राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान और प्रदेश के महासचिव गुरदीप सिंह चीमा भी किए गए प्रबंधों से संतोष प्रकट करते हैं और कहते हैं कि स्टोरेज की कोई दिक्कत नहीं आने वाली। हालांकि  घोषित हुई धान नीति पर वे कहते हैं कि उनके पास अभी तक कापी नहीं आई है लेकिन बताया जा रहा है कि  पिछले साल अलाट किए गए धान में से 70 फीसद से कम धान की मिलिंग करने वाले शैलरों को इस साल धान अलाट ना किया जाए। इसके अलावा बैंक गारंटी संबधी भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पिछले सालों की तुलना में बैंक गारंटी बढ़ाई गई है।
वहीं जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी डा. अंजुमन भास्कर बताती हैं कि धान का सीजन एक अक्टूबर से शुरु हो रहा है और सभी तैयारियां पूरी है। धान की एजेंसियों में बंटवारे क सवाल पर वे बताती हैं कि पंजाब एग्रो का हिस्सा 25 फीसद, पनग्रेन का 23, मार्कफैड का 22, पनसप को 11 फरीसद, वेयर हाउंसिंग कारपोरेशन को नौ फीसद और एफसीआई को दस फीसद की अलाटमेंट की गई है।
दूसरी ओर पांचों खरीद एजेंसियों के कर्मियों की तालमेल कमेटी के विधु शेखर भारद्वाज का कहना है कि सरकार की ओर से कर्मियों को कटघरे में खड़ा करने वाली धान की खरीद नीति का वे डट कर विरोध कर रहे हैं और अभी धान की खरीद का बायकाट किया है। इससे आगे की रणनीति का खुलासा तीन अक्टूबर को किया जाएगा।

एक झटका अभी दूसरा दिसंबर में तीसरा अप्रेल में


-मंहगाई का साइड इफैक्ट, दस पैसे प्रति यूनिट मंहगी हुई बिजली
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई, घरेलू गैस पर सब्सिडी कम की गई तो विपक्ष ने सरकार का इस्तीफा तक मांग डाला लेकिन कोयला और फर्नेस आयल के दाम कब बढ़े इसकी खबर संभव है कि इस व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों के अलावा प्रदेश में किसी को नहीं हुई। राज्य में बिजली सप्लाई करने वाले थर्मल प्लांटों को इससे झटका लग गया और अब पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने बिजली बिल में मामूली बढ़ोतरी के साथ इसे अपने उपभोक्ताओं पर पास ऑन भी कर दिया है।
बिजली बिल में 10 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का एक झटका एक सितंबर से लग गया है। ईंधन पर सरचार्ज के नाम से लगने वाला यह झटका हर तीन महीने पर लग सकता है यह अधिकार भी पावरकाम ने प्राप्त कर लिया है। उपभोक्ता, बिजली उपलब्ध करवाने वाली कंपनी और राज्य सरकार के बीच कड़ी के रूप में काम करने वाले पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास दायर की गई याचिका के बाद पावरकाम को सरचार्ज बढ़ाने की अनुमित मिल गई है। पावरकाम के अधिकारी बताते हैं कि ईंधन पर लग रहे चार पैसे प्रति यूनिट के सरचार्ज में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पावरकाम की तीन सितंबर को चंडीगढ़ में हुई फुल बोर्ड की बैठक में लिया गया है।
 मंगाई बढ़ी तो सरचार्ज के रूप में दूसरा झटका दिसंबर में लग सकता है। जबकि हर वित्तिय वर्ष की शुरुआत पर वार्षिक शुल्क संशोधन के रूप में बिजली बिल पर तीसरा झटका एक अप्रेल से लगता आ रहा है।
पावरकाम अपने अगले वित्तिय वर्ष के लिए खर्च व आय के अनुमान लगा कर 30 नवंबर तक वार्षिक राजस्व रिपोर्ट पीएसईआरसी के पास पेश करता है। इसके बाद अगले 120 दिनों तक इस पर सभी पक्षों के एतराज आदि लिए जाते हैं और एक अप्रेल से अगले साल के संशोधित बिजली बिल लागू हो जाते हैं।
दिलचस्प है कि चालू वर्ष में बिजली बिलों में बढ़ोतरी भी पहली बार नहीं हुई है। एक अप्रेल से बढऩे वाले बिल इस साल अगस्त में घोषित किए गए। इतना ही नहीं 12.08 फीसद की बढ़ोतरी को लागू एक अप्रेल से ही किया गया है। ऐसे में अब आ रहे बिजली बिलों में अप्रेल, मई, जून, जुलाई के चार महीने का एरियर वैसे ही जुड़ कर आ रहा है और ये अगस्त, सितंबर, अक्टूबर व नवंबर के महीनों में एडजस्ट किया जाएगा। पावरकाम प्रवक्ता का कहना है कि गणित के चलते बढ़ोतरी 25 फीसद की लग रही है लेकिन जनवरी में आने वाले बिलों में रिकवरी खत्म होने पर कुछ राहत दिख सकती है। वे कहते हैं कि पावरकाम को वर्तमान बढ़ी दरों से करीब एक सौ करोड़ रूपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

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घरेलू उपभेक्ता:- 10 पैसे बढ़ी हुई दरें

पहले 300 यूनिट-5.59 रूपये प्रति यूनिट
300 से ज्यादा-5.91 रूपये प्रति यूनिट

छोटी इंडस्ट्री-5.20 रूपये प्रति यूनिट
साधारण इंडस्ट्री-5.71 रूपये प्रति यूनिट
(मीटर से बिजली ना लेने वाले उपभोक्ताओं पर 12 रूपये प्रति हार्स पावर के हिसाब से बढ़ोतरी की जाएगी)

बारिश से राहत पर और तेज हुई तो आफत


- पत्ता लपेट सुंडी से धान के पौधों को मिलेगी निजात
- अगेती किस्मों पर और बारिश का हो सकता है नुकसान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
लगातार हुई रिमझिम बारिश से सूखे की मार झेल रहे और महंगा डीजल फूंक रहे किसानों को आखिरकार राहत मिल गई है, लेकिन धान के सीजन के जिन दिनों में ये बारिश हो रही है उसके और तेज होने अथवा हवा चलने से यही राहत, आफत में बदल सकती है।
प्रोग्रेसिव खेती से जुड़े जसविंदर सिंह बताते हैं कि बारिश का फसल को लाभ ही है। इस बार कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां धान की फसल डूब रही हो ऐसे में धान को सभी जगह पर फायदा हो रहा है। चारा व बासमती के नाम इसमें शामिल किए जा सकते हैं। इसी प्रकार कोरजीवाला के परविंदर सिंह कहते हैं कि वे देख रहे हैं कि कुछ दिनों से पत्ता लपेट सुंडी धान की बीमारी के रूप में पौधों को लग रही है। इन बारिशों से बिना स्प्रे ही दूर होनी चाहिए। वे कहते हैं कि जो जान ईश्वर के दिए पानी में है वो टयूबवेल के पानी में नहीं। वहीं बराबर पानी का छिड़काव होता है, यहां कुछ पौधे डूब रहे होते है तो कुछ पानी आने का इन्तजार कर रहे होते हैं।
इसी क्रम में आनन फानन ज्यादा डीजल फूंक कर शुरु में धान की बिजाई करने वाला किसान थोड़ा चिंतित होने लगा है। इन पौधों में बल्लियां निकलने को हैं वहां पर बारिश तेज होने से दाने में बनने वाले दूध की कमी रह जाती है अथवा दाना बनता ही नहीं है। हालांकि बारिश के साथ हवा ना चलने के कारण फसल के जमीन में बिछने की खबर नहीं है।
वहीं मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि बारिश का इसी रफ्तार से होना धान के लिए अच्छा है। इसके बाद खिलने वाली धूप पौधे की ग्रोथ और बढ़ाएगी। बारिश से पिछले दिनों में कुछ क्षेत्रों में थोड़ी बहुत पौधों को लगी पत्ता लपेट सुंडी भी हट जाएगी, लेकिन बारिश ज्यादा हुई तो धान की अगेती किस्मों विशेष रूप से पीआर 113, 114 आदि को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि धान की ही पछैती किस्मों के लिए ये अभी भी फायदेमंद है।

नल से सबमर्सिबल पंप पर आई पटियाला की मंडियां पर...


भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर व आसपास के क्षेत्र में बनी मार्केट कमेटी पटियाला की 12 मंडियों में पीने के पानी के लिए लगे एक मात्र नल की सुविधा अब एक कदम आगे बढ़ कर इस सीजन में सबमर्सिबल पंप पर आ गई है। पानी की टंकी भी लग गई है और पीने के पानी की 24 घंटे सुविधा है, वो भी तीन नल के साथ। शहर की नई अनाज मंडी में वाटर कूलर भी लगे हैं, पर पटियाला जिले की सभी 106 मंडियां में ऐसे आदर्श वादी हालात नहीं है।
मंडी बोर्ड के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि तीन दर्जन मंडियां अभी भी बिना किसी शैड के ही खुले आसमान में चल रही हैं। 11 ऐसी मंडियां भी हैं जिन्हें पक्के फड़ का इन्तजार है। याद रहे कि कच्ची जमीन पर एक बार स्टोर की गई उपज में गर्मी के साथ नमी के बढऩे की संभावना ज्यादा रहती है। इससे उपजी उमस आगे चल कर दीमक अथवा अन्य कीट लगने का कारण बनती है।
एक अक्टूबर से शुरु होने वाली धान की सरकारी खरीद पर मंडी बोर्ड हर संभव प्रबंध करने के प्रयास कर रहा है। संभव है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीद से ठीक पहले पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल भी दौरा कर सकते हैं। इसी क्रम में आज भी प्रदेश के कई अधिकारियों ने जिले की टीम के साथ कुछ मंडियों में दौरा कर प्रबंधों का जायजा लिया है।


एक लाख टन धान की आवक का है प्रबंध: मंडी अधिकारी

जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि साधारण हालात में आने वाले धान को मंडियों में संभालने व झाड़ा लगाने आदि के बाद तुलाई व पैकिंग के बाद ढोह ढुलाई की कोई दिक्कत नहीं है। कुछ दिन ऐसे भी होते हैं, जब 50 से 60 हजार टन तक धान की आवक भी आती है। यह भी कुछ दिन मैनेज की जा सकती है, हालांकि स्टोर करने की क्षमता तो एक लाख टन के भी पार है लेकिन ज्यादा दिनों तक इस गति से लगातार आवक होने पर ढेर लग जाते हैं। ट्रक इत्यादि से ढुलाई के सीमित साधन हैं। फिर भी इससे किसान को कोई समस्या नहीं आती उसकी उपज बिक चुकी होती है।

हालात बदल दिए हैं: चेयरमैन मार्केट कमेटी
वहीं मार्केट कमेटी पटियाला के चेयरमैन हरविंदर सिंह हरपालपुर कहते हैं कि हालात अब बदल दिए गए हैं। पूरी तरह से साफ सफाई के अलावा त्रिपालों की किसी भी आढ़ती के पास कमी नहीं है। बारदाने पर तो मार्केट कमेटी का नियंत्रण नहीं है पर आप कहीं भी अंधेरा नहीं देखेंगे। पूरी रोशनी है, पहले पीने वाले पानी की बात होती थी अब वाटर कूलर लगे हैं। 24 घंटे सप्लाई हो रही है।


13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद
-मौसम अनुकूल है पिछला रिकार्ड सुधरने की उम्मीद
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहले सूखा और बाद में लगातार बारिश ने चाहे किसान की खेती लागत बढ़ा दी हो पर कटाई के दिनों में खिली धूप ने किसान की यह उम्मीद भी जगा दी है कि उपज कम नहीं रहने वाली। मंडी बोर्ड की जिला ईकाई का अनुमान है कि इस बार जिले की 106 मंडियों में 13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद है।
जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि मौसम अनुकूल है ऐसे में पिछला रिकार्ड सुधरने की पूरी उम्मीद बनी हुई है। जिले में धान की स्टोरेज के सवाल पर वे बताते हैं कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है। जिले में 520 शैलर काम कर रहे हैं और इनमें धान स्टोर करने का पर्याप्त स्थान है। चूंकि धान की कस्टडी शैलर मालिकों के पास होती है और गेहूं-चावल की सरकार के गोदामों में ऐसे में धान के मामले में भण्डारण संबंधी कोई समस्या नहीं है।
पटियाला राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान और प्रदेश के महासचिव गुरदीप सिंह चीमा भी किए गए प्रबंधों से संतोष प्रकट करते हैं और कहते हैं कि स्टोरेज की कोई दिक्कत नहीं आने वाली। हालांकि चंडीगढ़ में वीरवार को घोषित हुई धान नीति पर वे कहते हैं कि उनके पास अभी तक कापी नहीं आई है लेकिन बताया जा रहा है कि  पिछले साल अलाट किए गए धान में से 70 फीसद से कम धान की मिलिंग करने वाले शैलरों को इस साल धान अलाट ना किया जाए। इसके अलावा बैंक गारंटी संबधी भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पिछले सालों की तुलना में बैंक गारंटी बढ़ाई गई है।
दूसरी ओर खाद्य एंव आपूर्ति विभाग की ओर से धान की खरीद संबंधी विभिन्न एजेंसियों को की जाने वाली अलाटमेंट पर अधिकारी बताते हैं कि इस बार केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड को दस फीसद से कम अलाटमेंट हो सकती है। शेष का बंटवारा राज्य सरकार की खरीद एजेंसियों पंजाब एग्रो, पनसप, वेयर हाउसिंग कारपोरेशन, मार्कफैड व पनग्रेन में किया जाएगा।

भगत सिंह का जन्मदिन '23 मार्च' को, पार्टी बनाई 'गदर'!


जागरण सर्वे: 11 वीं व 12 वीं के बच्चों शहीद प्रति आधी अधूरी जानकारी
-खटकड़कलां जद्दी पिंड पर हुसैनीवाला से संबंध की खबर नहीं
भूपेश चट्ठा, पटियाला
भगत सिंह का जन्मदिन कब है? तपाक से क्लास में आवाजें आई... '23 मार्चÓ को, जब बताया गया कि इस दिन तो देश भक्त को 23 साल की उम्र में शहीद कर दिया गया था, तो पूरी क्लास खामौश हो गई। यह आलम एक दो नहीं अपितु 11 वीं और 12वीं की चार क्लासों का था। कुछ ऐसा ही आलम शहीद भगत सिंह की ओर से बनाई गई पार्टी के नाम को लेकर रहा ज्यादातर ने 'गदरÓ को पार्टी बताया तो एक नाम नौजवान सभा का भी लिया गया। शेष किसी ने भी सही या गलत जवाब देने का 'रिस्कÓ नहीं लिया।
'जागरणÓ की ओर से शहीद भगत सिंह को लेकर किए गए सर्वे में सामने आया कि 12 से 15 साल स्कूलों में बिताने के बाद हम अपने बच्चों को छुट्टी दिलाए अथवा घोषित किए बिना किसी के जन्म अथवा शहीदी दिवस को याद करवाने में नाकामयाब रहे हैं।
मात्र आठ छोटे सवालों वाले इस सर्वे में यह भी सामने आया कि सामाजिक विषय ना पढऩे वाले विज्ञान व कामर्स के बच्चों शहीद प्रति आधी अधूरी ही है। खटकड़कलां का नाम लेने पर बहुसंख्यक भगत सिंह का जद्दी पिंड बताते हैं पर हुसैनीवाला से क्या संबंध है? की किसी को खबर नहीं है। हालांकि मौत कब और कहां हुई के सवाल पर बच्चों को एक बार फिर ज्ञान प्राप्त होता है और 23 मार्च की तिथि याद आ जाती है। जबकि देश के लिए क्या किया? जैसे सवाल पर फांसी पर झूले...आजादी दिलाई...फ्रीडम फाइटर थे...बलिदान दिया, जैसे ठीक ठाक जवाब भी दिए गए पर किसी ने उन्हें क्रांतिकारी नहीं बताया।
भगत सिंह के साथी कौन थे? पर सुखदेव व राजगुरु का नाम करीब करीब आधे बच्चे ले लेते हैं पर इक्का दुक्का बोलने वाले शहीद उधम सिंह को भी साथ ही जोड़ देते हैं। दिलचस्प है कि भगत सिंह ने कौनसी पार्टी बनाई थी? पर चर्चा शुरु होते ही क्लास में मौजूद शिक्षकों की आंखें भी प्रश्न सूचक की स्थिति में आ जाती है और प्रयास होता कि सवाल करने वाला ये नाम बता दे तो कौन बनेगा करोड़पति का आखिरी सवाल वो भी हल कर लेते!

96 लाशें खोजी, खर्च 72 हजार, वो भी 'पुलिस की उधारी'


लोगो: दास्तान-ए-गोताखोर
- नहर से लाश निकालने का मेहनताना मछली पकडऩे से कम
- हम वो गली सड़ी लाशें निकालते हैं, जिनके रिश्तेदार हाथ लगाना तो दूर, देख मुंह पर कपड़ा रख लेते हैं: आशू
- 2006 में विस्फोटक निकाले तो तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, मनिंदरजीत बिट्टा से मिले प्रशंसा पत्र पर नौकरी नहीं
भूपेश चट्ठा, पटियाला
रेहड़ी पर एक पाव मछली खानी हो तो कीमत 150-200 रूपये अदा करनी पड़ती है, संभव है कि पांच सात किलो की मछली की कीमत चार अंकों में होनी तय है, पर नहरों से इंसान की डेड बॉडी निकालनी हो तो मेहनताना छोटी मछली पकडने से भी कम रह जाता है। बात यहां पर पंजाब पुलिस की आ जाए तो यह काम भी 'उधारीÓ में ही चल जाता है।
पंजाब के रोपड़ से डाउन स्ट्रीम निकलने वाली नहरों पर पंजाब पुलिस के लिए हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली तक में लाशें तलाशने का काम करने वाले एकमात्र डाइवर आशू मलिक की दास्तान खासी चौंका देने वाली है। क्षेत्र में डूबने की कोई बड़ी घटना होती है तो चारों तरफ वायरलेस गूंज उठते हैं और जिप्सियां उसे लेने दौड़ पड़ती हैं। पुलिस डूबे लोगों की खोज करने उसे ठेका दे देती है। हाल ही के महीनों में बस्सी पठाना में एक साथ छह लोगों को नहर में फेंक देने अथवा डूब जाने की घटना के बाद हुई 'आउट सोर्सिंगÓ में आशू मलिक ने 96 लाशें तलाश ली। इन सभी की वीडियो रिकार्डिंग की, फोटो खींचे तो 16 लापता लोगों का खुलासा हो गया। यानी पुलिस के 16 केस एक ही झटके में हल हो गए, शेष पर पुलिस ने 174 सीआरपीसी की कार्रवाई कर ली। आशु मलिक ईमानदारी से स्वीकार करते हैं कि अक्सर पुलिस इस सारे झमेले से बचने लाश का पता चलने के बावजूद लाश को रोकती या निकालती नहीं है, बस आगे जाने देती है। यह क्रम नंगल से शुरु हो हरियाणा सीमा पर खनौरी तक चलता है, लेकिन एक बार राजस्थान फीडर में जाने के बाद वे कभी नहीं लौटते।
हालांकि इस बार आशु मलिक की निकाली लाशों का पंजाब में खनौरी, हरियाणा में हांसी, हिसार, कुरूक्षेत्र और राजस्थान तक में मिली इन अज्ञात लाशों का पीजीआई रोहतक व दिल्ली के बाबू जगजीवन राम अस्पताल तक में पोस्टमार्टम हुआ और संस्कार भी। कम मेहनताना होने की दुहाई के साथ ही आशु मलिक कहते हैं कि इसी मामले में 72 हजार तो फतेहगढ़ साहिब पुलिस का ही बकाया है। इसके अलावा 40 हजार की एक अलग राशि है। फ्री में काम के सवाल पर वे बताते हैं कि जिन लोगो का बंदा मिल जाता है उनसे मदद जरूर मिल जाती है पर यह नियमित नहीं है। हालांकि लाशों की सूचना संभालने किसी एसएसपी ने लैपटाप दिया तो किसी ने रिकार्ड करवाने कैमरा पर वेतन कहीं से नहीं मिला।
आशु कहते हैं कि 'हम वो गली सड़ी लाशें निकालते हैं... रिश्तेदार हाथ लगाना तो दूर... देख मुंह पर कपड़ा रख...हाथ लगाते ही हड्डीयों का ढ़ांचा हाथ में...Ó। सरकार के लिए काम में 2006 में सरहिंद के फलोटिंग रेस्टोरेंट के पास से विस्फोटक व हथियारों का जखीरा निकाला तो तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, मनिंदरजीत बिट्टा से प्रशंसा पत्र मिले सभी ने कहा काम देंगे पर नौकरी इस बार भी नहीं मिली। 2007 में दिल्ली के पास इंडियन आयल के टैंकर के साथ डूबे 27 मजदूरों को निकाला, इसी प्रकार 2006 में छह स्कूली बच्चों को निकाला पर खाली प्रशंसा मिली।
आशु सवाल करते हैं कि पानी में तैरने वालों को सरकार डीएसपी बना रही है...दो दो करोड़ रूपये सरकारें दे रही हैं, पर यहां किराए के मकान में बख्शीश में पिछले 22 सालों से गुजारा कर रहे हैं।

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अगर योग्यता है तो सरकारी नीति अनुसार मदद होगी: डीआईजी


पंजाब पुलिस के डीआईजी एलके यादव ने कहा है कि ऐसे लोगों की पुलिस में जरूरत है। अगर व्यक्ति में योग्यता है और सरकार की नीति अनुसार अनुमति देती है तो पुलिस में अवश्य जगह मिलेगी। मामला अब तक उनके नोटिस में नहीं है। उम्र आदि की वजह से अगर नौकरी ना भी दे पाए तो किसी अन्य तरीके से पुलिस के साथ जोड़ा जाएगा।

बांधों का भराव सीजन 'समाप्त' पर...


-पहाड़ों पर बर्फ गिरते ही आधी रह गई आवक
-पानी छोडऩा कम कर कवर करने का हो रहा प्रयास
-35 सालों में अपनी क्षमता 1690 फीट तक कभी नहीं गया जल स्तर
लोगो: दैनिक जागरण स्पेशल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
20 सितंबर आते ही उत्तर भारत के राज्यों में बने बांधों का भराव सीजन आधिकारिक रूप से 'समाप्तÓ घोषित कर दिया जाता है। बांधों से सिंचाई व पन बिजली उत्पादन से जुड़े विभाग इस दिन को मानसून की वापसी के रूप में देखते हैं।
हालांकि इस साल दो रोज पहले तक मानसून की गतिविधि को देख लग रहा था कि बांधों के जल स्तर का बढऩा एक सप्ताह और जारी रह सकता है, लेकिन पारा गिरने के साथ बारिश पहाड़ों पर बर्फ में बदल गई और बांधों में पानी की आवक आधी रह गई है। हालांकि बांधों से पानी छोडऩा कम कर खाली रह गए हिस्से को 'कवरÓ करने का अब प्रयास किया जा रहा है।
भाखड़ा बांध का जल स्तर 1655 फीट पर आ गया है, एक दिन पहले यह 1654 व दो दिन पहले 1653 फीट था। पिछले साल आज ही के दिन हालांकि 1681 फीट के बिलकुल करीब था। दिलचस्प है कि बांध में पानी की आवक 58197 क्यूसिक से घट कर एक ही दिन में 33070 पर आ गई है। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के बाद अब इसके 20 हजार क्यूसिक के नीचे आने की पूरी संभावना बन गई है। बांध से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा 14230 क्यूसिक से और भी कम 12731 कर दी गई है। जिसके चलते जल स्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
पौंग बांध में पानी की आवक एक ही दिन में कम होकर एक लाख 58 हजार क्यूसिक से 59244 क्यूसिक पर आ गई है। पानी पिछले साल 1390 फीट की तुलना में 1384 फीट पर आ गया है। मात्र 3315 क्यूसिक पानी छोड़ जाने से पिछले 24 घंटों में जल स्तर दो फीट चढ़ गया है।
इसी प्रकार रणजीत सागर बांध में पानी करीब एक मीटर चढ़ कर 519 के पार आया है, हालांकि पिछले साल यहां जल स्तर 524 मीटर था। 25375 क्यूसिक आवक की तुलना में पांच हजार क्यूसिक पानी ही छोड़ा गया है। इससे एक दिन पहले 1177 क्यूसिक पानी ही छोड़ा गया है। जबकि डेहर बांध में जल स्तर पिछले साल के 2922 फीट से तीन फीट ज्यादा है। यहां भी आवक की तुलना में एक तिहाई पानी ही छोड़ा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 144 वर्ग मील में फैले उत्तर भारत के सबसे बड़े और 1700 फीट ऊंचे भाखड़ा बांध की गोविंद सागर झील में यों तो 1690 फीट तक पानी भरा जा सकता है, पिछले 35 सालों में एक बार भी इस स्तर को छुआ नहीं गया है। हालांकि व्यवहारिक रूप से इसे 1687 फीट तक भरा जा सकता है। पौंग बांध का डिजाइन 1422 फीट तक पानी भरने का है। इसी प्रकार रावी पर बने रणजीत सागर बांध की क्षमता 527.91 मीटर है।

टेबल
साल उच्चतम स्तर
2011  1680.94
2010 1681.53
2008 1680.69
2005 1681.40
1998 1682.67
1995 1683.49
1994 1682.55
1988 1687.55
1983 1686.01
1978 1685.96
1975 1687.36
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क्या हैं बैंच मार्क?
बांधों को नियंत्रित करने वाले भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के बैंच मार्क अनुसार भाखड़ा बांध में एक अगस्त को 1650 फीट और 15 अगस्त को 1670 फीट और 31 अगस्त को 1680 फीट पानी हो सकता है, यह 20 सितंबर को भाखड़ा का जलस्तर 1685 फ  ट और 26 सितंबर को 1687 फ  ट तक किया जा सकता है। जबकि पौंग बांध से कम बिजली उत्पादन कर इसे पूरा भरने दिए जाने की सलाह भी दी गई है।

वीसी, रजिस्ट्रार व डायरेक्टरों को ओएसडी नहीं पर...


-डायरेक्टर यूथ वेलफेयर, डायरेक्टर स्पोर्टस, इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक जैसा हर बड़ा नाम ओएसडी के बिना
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के सर्वोच्च पद पर विराजमान वाइस चांसलर के पास कोई आफिसर ऑन स्पेशल डयूटी नहीं है। इसी प्रकार यूनिवर्सिटी को प्रशासक के रूप में कानूनी रूप से चलाने वाले रजिस्ट्रार के पास भी कोई ओएसडी नहीं है। कुछ ऐसी ही स्थिति अन्य डायरेक्टरों की है जिनके पास ओएसडी नहीं पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जन संपर्क विभाग से जुड़े डायरेक्टर के साथ ओएसडी की तैनाती कर दी है।
यूनिवर्सिटी के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि पंजाबी यूनिवर्सिटी में भाषा व सांस्कृतिक विकास की गतिविधियां चलाने वाले डायरेक्टर यूथ वेलफेयर भी बिना ओएसडी के हैं और खेल क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्राफी लाते रहने वाले डायरेक्टर स्पोर्टस और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कालेज चलाने वाले निदेशक जैसा हर बड़ा नाम ओएसडी के बिना ही है। जबकि एक कलर्क, एक चपरासी, एक फोटोग्राफर, एक वीडियोग्राफर के साथ एक एपीआरओ पर ओएसडी की तैनाती की जा रही है।
नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर यूनिवर्सिटी के ही एक अन्य शिक्षक बताते हैं कि चुनावी चर्चा में चल रही पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में लोकतंत्र के आगमन के साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की शुरुआत हो रही है। इसी के तहत यह मामला बाहर आया है। यूनिवर्सिटी चाहे स्वायतशाही संस्था है पर शिक्षक संघ के चुनाव ना होने की वजह से एक पूरी लाबी खामौश थी पर अब हालात बदलेंगे।
 

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नई नियुक्ति नहीं... नाम से क्या फर्क पड़ता है: रजिस्ट्रार
वहीं युनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डा. एएस चावला कहते हैं कि कोई नई नियुक्ति नहीं की जा रही है। वही वेतन है... वही भत्ते हैं... अगर किसी को उंचा नाम मिलने से तसल्ली होती है तो क्या फर्क पड़ता है। यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार व अन्य डायरेक्टरों के पास ओएसडी ने होने के सवाल पर वे उदाहरण देते हैं कि यदि वे अपने पीए रजिंदर कुमार को ओएसडी कहने लग जाएं तो क्या होगा? डयूटी तो वही रहेगी।

वोट 14 को चर्चा देश विदेश में फेसबुक पर


लोगो: पूटा चुनाव
-परिसर से बाहर निकले नेता, प्रचार बठिंडा जिले तक
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन पूटा के 14 सितंबर को होने जा रहे मतदान के लिए चुनाव प्रचार चाहे कुछ सौ लोगों के बीच ही चल रहा हो लेकिन अब इन चुनावों की चर्चा देश विदेश में फेसबुक पर जरूर हो रही है।
दिलचस्प है कि चुनावों की दस्तक होने से पहले ही फेस बुक पर यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने अध्यापक संघ बनाने 'रिवाईव पंजाबी यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशनÓ के नाम से एक ग्रुप आस्तित्व में आ गया था। साइट पर जाते ही सामने आता है कि केन्या में बैठे एक पूर्व हिंदी के शिक्षक अपनी लगातार उपस्थिति बनाए हुए हैं तो यूनिवर्सिटी की राजनीति में करीब जुड़े रहे कनाडा में रह रहे एक पत्रकार भी इसमें शामिल है। बिना किसी गलती के पंजाबी में टाइप कर जहां विचार रखे जा रहे हैं वहीं रोमन पंजाबी से अंग्रेजी का प्रयोग भी बखूबी हो रहा है।
प्रधानगी का चुनाव लड़ रहे डा. राजेश शर्मा से जब चुनावी घोषणा पत्र जारी करने संबंधी बात की जाती है तो बताया जाता है कि एक सप्ताह पहले ही फेसबुक पर डाल दिया गया है। उन्होंने अपना अलग ग्रुप बनाया हुआ है। ऐसे ही एक संगठन टीचर्स युनाइटेड फ्रंट के  चुनावी घोषणा पत्र की जिक्र आते ही पहली पंक्ति में लिखा है कि हम यह जानकारी व्यक्तिगत रूप से मिलने के अलावा इलेक्ट्रानिक माध्यम से दे चुके हैं।
हालांकि हर अध्यापक को ईमेल से अपना चुनावी घोषणा पत्र भेजने के अलावा साइटों पर जारी करने के बावजूद चुनाव लड़ रहे चार संगठनों के नेता युनिवर्सिटी परिसर से बाहर निकले हैं और तीन से चार दर्जन वोट निर्णायक हो सकते हैं। इसका ध्यान रखते हुए प्रचार बठिंडा जिले तक पहुंच गया है।

पंजाब का एकमात्र एयर क्राफ्ट इंजीनियरिंग कालेज बंद


- डीजीसीए ने विमान के नियम बदले तो योग्य नहीं रहा कालेज
- पंजाब सरकार कालेज के लिए प्रेशराइजड विमान को नहीं ला सकी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हवाई जहाजों के रखरखाव व इनकी मरम्मत के लिए इंजीनियर तैयार करने वाले राच्य के एकमात्र पंजाब एयर क्राफ्ट इंजीनियरिंग कालेज को लगभग बंद कर दिया गया है। इस साल अंतिम बैच के निकलने के बाद नया प्रवेश नहीं दिया गया है। कालेज में कार्यरत चार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। विद्यार्थियों की अनुपस्थिति में बचे शिक्षकों सहित पांच अन्य कर्मियों को अपनी सेवा मुक्ति का इंतजार भर है।
पिछली दो सरकारों से राच्य में सिविल एविएशन यूनिवर्सिटी पटियाला के एविएशन कांप्लेक्स में खोलने की घोषणा करती आ रही शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने इस महत्वपूर्ण संस्थान को बचा नहीं पाई और खुद अपनी मौत मरने के लिए छोड़ दिया है।
कालेज के एक पूर्व कर्मी बताते हैं कि हर साल 30 एयर क्राफ्ट इंजीनियर देने वाले इस कालेज की पहचान देश में कम और उत्तरी अमेरिका व यूरोप में च्यादा है। विमान रखने वाले लगभग हर जाने माने देश में यहां का एलूमनाई मौजूद है पर अब हालात बदल गए हैं। केंद्र सरकार के डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एविएशन डीजीसीए ने तीन साल पहले कालेज में प्रयोग करने वाले विमान के बारे में नियम बदले तो यह कालेज योग्य नहीं रहा कि नया प्रवेश दे सके।
तीन सालों में पंजाब सरकार कालेज के पास मौजूद पिस्टन इंजन-लाइट फ्रेम विमान से जैट इंजन-हैवी एयर फ्रेम पर अपग्रेड ना कर सकी जिसके चलते ये हालत बन गए है। सिविल एविएशन क्षेत्र के ही विशेषज्ञ व कालेज के पूर्व विद्यार्थी इंजी.पौन नारायणन बताते हैं कि तीसरे साल के अंतिम छह महीनों में प्रेशराइजड विमान की जरूरत होती है। जिसका इंजन जैट हो और जो 30 से 40 हजार फिट की उंचाई पर जा सके और आक्सीजन की कमी ना होने दे, जिसका एयर कंडीशनर चलता रहे। कालेज के  पास मौजूद विमान 14 से 15 हजार फिट की उंचाई पर उड़ सकने में ही सक्ष्म है।
राच्य सरकार करोड़ों रूपये प्राइवेट व सार्वजनिक क्षेत्र की एविएशन कंपनियों को किराए के रूप में चुका रही है, जबकि सरकार चाहे तो अपने लिए विमान अथवा हैलीकाप्टर खरीदे और उसे कालेज के साथ जोड़ दे जैसा कि वीआईपी हैंगर के साथ किया गया है। यह भी कालेज की वर्कशाप के साथ जुड़ा हुआ है। पहले ढ़ाई साल छोटे विमान पर ट्रेनिंग देने के बाद बड़े विमान की मरम्मत के समय प्रशिक्षुओं को साथ अटैच किया जा सकता है।
दूसरी ओर सिविल एविएशन विभाग के प्रशासक कैप्टन अभय बताते हैं कि सरकार के स्तर पर बात चल रही है, संभव है कि अगले सप्ताह तक इस दिशा में सकारात्मक खबर आए। प्रयास किए जा रहे हैं कि अनुमति मिल जाए।

पावरकाम के बिलिंग साफ्टवेयर ने लगाया चूना?


-पावरकाम को करोड़ों का आर्थिक नुकसान, सात शहरों के उपभोक्ता हुए परेशान
-30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में बिलिंग सिस्टम को जोडऩे लगना है जर्मनी का सैप साफ्टवेयर
- क्रियांविंत करने वाली एक कंपनी ने हाथ खड़े किए
-इंजीनियर्स एसोसिएशन ने गिनाई खामियां, कहा विशेषज्ञों की टीम करे दुरुस्त
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम की ओर से बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिजली बिलों को एक सिस्टम से जोडऩे वाले बिलिंग साफ्टवेयर ने पावरकाम को करोड़ों का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। इतना ही नहीं राज्य के कम से कम सात शहरों के उपभोक्ताओं को इससे भारी परेशानी भी झेलनी पड़ी है।
राज्य में तत्कालीन पंजाब राज्य बिजली बोर्ड ने 30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में बिलिंग सिस्टम को जोडऩे के लिए जर्मनी का एक सैप नाम साफ्टवेयर लगाया जा रहा है। एंटरप्रेनर रिसोर्स प्लानिंग नाम से इसकी शुरुआत जुलाई 2010 में पटियाला से की गई। डेढ़ साल में ही इसे लागू कर दिया गया। इसके साथ ही मोहाली सहित छह अन्य शहरों में भी यही प्रोजेक्ट शुरु कर दिया गया।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस प्रोजेक्ट की खामियां सामने आने के बाद और राज्य के इन शहरों में उपभोक्ताओं की लगातार गलत बिलिंग को लेकर बढ़ रही परेशानियों के बाद इस प्रोजेक्ट को अन्य शहरों में लागू ना करने की मांग की है।
एसोसिएशन के महासचिव इंजी. संजीव सूद का कहना है कि मुंबई की एक कंपनी को 350 करोड़ में जून 2010 को ठेका सौंपा गया। उस समय मैसर्स सपैनिको का एक अन्य कंपनी मैसर्स एक्सेंचर के साथ करार था। बिजली वितरण के मामले में क्रियांविंत करने वाली एक्सेंचर ने अच्छा अनुभव होने के बावजूद हाथ पीछे खींच लिए।
इंजीनियर्स एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि 'गो लाइवÓ नाम से अब एक नया साफ्टवेयर लगाया जा रहा है जिसे पूरी तरह से टेस्ट भी नहीं किया गया है। खामियां गिनाने के साथ ही एसोसिएशन ने मांग की है कि वितरण क्षेत्र के इंजीनियरों, और आईटी विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाए। जो यह समस्या दूर करे। दिलचस्प है कि बिल ज्यादा आने की सूरत में उपभोक्ता परेशान होता है और किसी ना किसी तरह से कम करवाने के जुगाड़ में लग जाता है, वहीं बिल कम आने की सूरत में पावरकाम को चूना लग जाता है।

यूनिवर्सिटी ने तीन को नौकरी से निकाला, एक निलंबित


-परीक्षा में छूटे सवाल खाली पन्ने पर विद्यार्थियों से करवाते थे
-युनिवर्सिटी ने किया स्टिंग आपरेशन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में परीक्षा नियंत्रकविभाग में से चेकिंग से पहले ही उत्तर पुस्तिका बाहर निकाल कर कथित रूप से नकल करवाने के आरोप में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तीन कर्मियों को नौकरी से बाहर कर दिया है जबकि एक को निलंबित कर दिया है।
यूनिवर्सिटी के परीक्षा के नियंत्रक पवन सिंगला ने उक्त जानकारी की पुष्टि करते हुए बताया है कि तीन अस्थाई कर्मियों को निकाल दिया है जबकि एक स्थायी कर्मी को निलंबित कर दिया गया है, हालांकि इस मामले में अभी जांच की जा रही है।
वहीं यूनिवर्सिटी के सूत्र बताते हैं कि उक्त मामले में प्रशासन ने दो दैनिक वेतन भोगी व एक एडहॉक कर्मी पर दवाब बना कर और सीआईए स्टाफ में केस भेजने का हवाला देकर सभी लोगों से पूछताछ में जाना कि किस तरह से 'गड़बड़ीÓ की जाती है। यूनिवर्सिटी में उक्त कर्मियों ने उत्तर पुस्तिका निकालने से लेकर बाहर लेजाने तक की 'प्रक्रिया समझीÓ। इसी दौरान उक्त कर्मियों की वीडियोग्राफी कर ली गई। इसके बाद तुरंत ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि इन लोगों को ऐसे भी आश्वस्त किया गया कि अगर तुम लोग 'गलती मान लोगेÓ तो कुछ नहीं बिगड़ेगा।
हालांकि यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक पवन सिंगला इस मामले में किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज करवाने की बात से इन्कार करते हैं। कहते हैं कि तीन निकाले गए हैं, जबकि शेष एक स्थायी कर्मी पर जांच चल रही है।
उल्लेखनीय है कि 15 सितंबर को शनिवार के अवकाश वाले दिन परीक्षा नियंत्रक यूनिवर्सिटी के सुरक्षा अधिकारी सहित कार्यालय में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कार्यालय का मुख्य गेट चार घंटे तक बंद रखा और भीतर जांच की। इसी दौरान परीक्षा नियंत्रक विभाग के एक डेलीवेजेस कर्मचारी द्वारा एक कक्षा की उत्तर पुस्तिका का बंडल खोलकर बाहर निकालकर उस विद्यार्थी तक पहुंचाया गया, जिसकी वो उत्तर पुस्तिका है ताकि वो अपने अंक बढ़ाने के लिए उत्तर पुस्तिका में उन सवालों के जवाब दे सके, जो परीक्षा के समय उससे छूट गए हैं। उत्तर पुस्तिका बाहर निकालने के लिए बदले मोटी राशी वसूली जाने के आरोप भी लगे बताए जा रहे है।
उक्त सूचना के आधार पर विभाग के उच्चाधिकारी सहित सुरक्षा कर्मी कार्यालय में पहुंचे और मुख्य द्वार को बंद करवा  सीक्रेसी विभाग में पहुंचकर सभी मुलाजिमों से पूछताछ की, अन्य संबंधित कर्मियों के मोबाइल की कॉल्स का रिकार्ड भी चेक किया गया। यूनिवर्सिटी में इस तरह की शिकायतें पहले भी कई बार आई हैं। कुछ कर्मी पकड़े गए, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। कुछ साल पहले सीक्रेसी विभाग में जाने से पहले सबकी चेकिंग होती थी, लेकिन हाल ही में सीक्रेसी विभाग में कोई भी आ जा सकता है। सेमेस्टर एवं वार्षिक परीक्षाओं के समय काम बढऩे के कारण कुछ डेलीवेजस कर्मी रखे जाते हैं, जिनको परीक्षाएं संपन्न होने के बाद हटा दिया जाता है। इसी तरह के करीब 85 कर्मी काम कर रहे हैं।

कैसे निकलती थी उत्तर पुस्तिका
परीक्षाएं संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाएं पंजाबी यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक विभाग के सीक्रेसी विंग के पास आती हैं। उसके बाद उनके अंतिम पेज पर कर्मी पेपर खत्म होने के स्थान पर 'एंडÓ की स्टैंप लगाते हैं, स्टेपलर करते हैं, उन पर एक डुप्लीकेट रोल नंबर लगाया जाता है, ताकि उत्तर पुस्तिका चेक करने वाले शिक्षक को भी पता न चले कि वो उत्तर पुस्तिका किस विद्यार्थी की है। उसके बाद वो चेक होकर वापिस विभाग के पास आती हैं। चेकिंग से पहले उत्तर पुस्तिकाएं कुछ दिन सीक्रेसी विंग के पास रहती हैं तो उस समय दौरान उन्हें बाहर निकाला जा सकता है और उस पर कुछ भी लिखकर वापिस बंडल में रखा जा सकता है। यह सारी प्रक्रिया उक्त डेलीवेजेस कर्मियों के हाथों से गुजरती है।

लड्डू खाया तो हो जाओगे नपुंसक!


-पहले एलर्जी फिर सांस व पेट की बीमारी, इसके बाद गुर्दे व जिगर पर असर
-तेल-खोया सिंथेटिक, जो मिठाई इन दोनों से दूर वहां रसायनिक रंग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
त्यौहारों का सीजन शुरु होने को है और इसके साथ ही जेहन में रंग बिरंगी मिठाईयां घूमने लगती है, रंगों के प्राकृतिक स्रोत लुप्त होने के कागार पर हैं। रंगीन चट्टाने गायब हो चुकी हैं और अब रंग के दूसरे सबसे बड़े प्राकृतिक स्रोत फूलों से रंग बनाने होने वाली खेती नाममात्र रह गई है। ऐसे में मिठाईयों में डाले जाने वाले कृत्रिम रंग रसायनों से भरे हैं। इन रसायनों ने सबसे लोकप्रिय व शुभ समझी जाने वाली मिठाई 'लड्डूÓ को भी इतना खतरनाक बना रहे हैं कि इससे इंसान की प्रजनन शक्ति प्रभावित हो सकती है।
कम्यूनिटी मेडिसन के विशेषज्ञ डा. अमर सिंह आजाद बताते हैं कि खाने में रसायनिक रंगों से सबसे पहले एलर्जी होती है फिर सांस व पेट की बीमारी, इसके बाद गुर्दे व जिगर पर असर होता है। सिलसिला लगातार और ज्यादा चले तो और भी खतरनाक होता है, आजकल जिन रसायनिक रंगों का प्रयोग हो रहा है, उनसे इंसान की प्रजनन शक्ति प्रभावित हो रही है। ऐसा नहीं है कि इंसान 'इंपोटेंटÓ हो रहा है लेकिन इतना जरूर है कि महिलाओं में बच्चे पैदा करने की क्षमता और पुरुषों में सेक्स करने की इच्छा में कमी आ रही है, लेकिन इसके लिए रसायनिक रंगों के साथ फसल में रसायनिक खाद व स्प्रे और पशुओं को दिया जाने वाला फीड भी बराबर का जिम्मेदार है।
 वहीं फार्मास्यूटिक्ल स्ट्रीम में क्लीनिकल सर्जरी के विशेषज्ञ व सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला बताते हैं कि इन दिनों में रेस्पीरेटरी बीमारियों का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है। जिन मिठाईयों को तला नहीं जाता वहां खोया है, और जो इन दोनों से दूर हैं वहां रंग का प्रयोग होता है। एडीबल ऑयल और खोये में सिंथेटिक तत्व ज्यादा हैं जबकि प्राकृतिक रंगों के स्थान पर केमिकल रह गए है। शेष बचे पेठे की उम्र बढ़ाने के लिए भी केमिकल मिलने लग गए हैं। चीनी मंहगी है ऐसे में कैंसर का सबसे ज्यादा रिस्क रखने वाली स्क्रीन मिला दी जाती है।


केवल बुश के ही अनुमति प्राप्त रंगों का हो प्रयोग

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. दलजीत सिंह बताते हैं कि सस्ते के चक्कर में घटिया रंगों का प्रयोग खतरनाक साबित हो सकता है। केवल बुश कंपनी के ही अनुमति प्राप्त रंगों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। अन्य किसी प्रकार के रंग का प्रयोग करने पर कार्रवाई तय है।

क्या है सजा का प्रावधान

फूड सेफ्टी स्टेंडर्ड एक्ट 2006 के अधीन कार्रवाई की जाती है। दिलचस्प है कि रसायनिक रंग पकड़े जाने पर प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर एक रूपये से पांच लाख रूपये का जुर्माना किया जा सकता है। तीन चरणों में होने वाली कार्रवाई में सेहत विभाग के अलावा कुछ केस एडीशनल डिप्टी कमिश्नर के पास भेजे जाते हैं और मामला ज्यादा गंभीर होने पर न्यायालय से सजा का प्रावधान भी है।


खपत एक अरब के पार

 खान-पानी के तौर तरीकों व ज्यादा वजन होने की वजह से शूगर व हार्ट के मरीजों की संख्या भी देश में सबसे अधिक है, ऐसे में बेसन से बने लड्डू को खाने के लिए शूगर व हार्ट के मरीज इसे अन्य मिठाईयों की तुलना में कम नुकसान दायक बताते हैं। वहीं पंजाब में बहने वाले छठे दरिया को पीने वालों का औसत राष्ट्रीय औसत दो बोतल से चार गुना ज्यादा है। यानी साल में राज्य में ढ़ाई करोड़ लोगों के लिए 20 करोड़ बोतल। अगर तीज त्यौहार, विवाह, भोग, उद्घाटन के किसी कार्यक्रम में महीने में दो बार भी लड्डू खाया जाए, तो इसकी खपत के एक मोटे अनुमान अनुसार एक अरब के पार है।

पौराणिक महत्व

लड्डू भगवान श्री गणेश जी को खासा प्रिय था, आज भी किसी नए काम की शुरुआत होती है तो श्री गणेश को ही सबसे पहले याद किया जाता है और उन्हें लड्डू का ही भोग लगाया जाता है। वे पौराणिक कथाओं में भी इसे पसंद करते थे। इतिहास में लड्डू पहली बार कब बना और कब खाया गया इसका स्टीक ज्ञान गूगल के युग में संभावित रूप से कहीं नहीं है लेकिन इतना तय है कि इसकी उम्र श्री गणेश जी से ज्यादा ही रही है।

Friday, 5 October 2012

नहीं कोई गम... आज भी है दम, freedom fighter, ajad hind foj


फोटो: 1, 7, 8, 9
भूपेश चट्ठा, पटियाला
कोई आजाद हिंद सेना का सिपाही रहा है, तो किसी ने बापू के आंदोलन में भाग लिया...किसी ने गुलामी के दौर में किसी ने थानेदार को पीटा तो कोई लाहौर जेल में छह महीने लगा आया। हर किसी की अपनी कहानी है। किस आजादी के लिए लड़े थे और क्या मिला? इस पर लगभग एक राय है पर फ्रिडम फाइटर का नाम लेते ही सारे शिकवे दूर हो जाते हैं। आंखों में चमक आ जाती है। फिर लगता है कि इन्हें नहीं है कोई गम और आज भी है दम। दोबारा लड़ाई लडऩी पड़े तो स्वतंत्रता संग्राम के इन सिपाहियों का शरीर चाहे साथ ना दे पर जच्बे में कोई कमी नहीं है।
उम्र के अंतिम पड़ाव से गुजर रहे इन सैनानियों से जब 'दैनिक जागरणÓ ने इनके कार्यक्रम में आने का सबब पूछा तो बताया गया कि जिला प्रशासन की ओर से फोन कर बुलाया गया है। इनमें से ही भादसों के निकट राजपुरा गांव के परजण सिंह खुद तो कोई बात नहीं कर पाते लेकिन उनके साथ आए उनके लड़के बताते हैं कि बापू जी खेतों में ही रहते हैं, रास्ता कच्चा है। जिसे दुरुस्त करवाना चाहते हैं। साथ ही बताया जाता है कि दवा लेने अक्सर लुधियाना जाना होता है रास्ते में दो बार टोल टैक्स देना पड़ता है। जो नहीं होना चाहिए।
इसी प्रकार आजाद हिंद फौज के एक अन्य सिपाही की विधवा गुरदयाल कौर के पुत्र बताते हैं कि बलबेड़ा के निकट 40 साल तक खेती करने के बाद 2006 में उनसे जमीन खाली करवा ली गई। उन्हें वापिस दी जाए। जबकि विर्क कालोनी में रह रहे शमशेर सिंह अपनी टूटी टांग से परेशान हैं। कहते हैं कि पिछली बार ढि़ंडसा साहब ने वायदा किया था पर बात नहीं बनी अब देखो क्या होता है? ऐसे ही गोदम सिंह की कहानी लाहौर जेल से शुरु होती है और यहीं पर ठहर जाती है।
दिलचस्प है कि समस्या सम्मेलन में पहुंचा लगभग हर सेनानी अपनी परेशानी से परेशान नहीं है बल्कि अपने बच्चों को उम्मीद के मुताबिक ना सम्मान ना मिलने से परेशान जरूर दिखा। स्वतंत्रता संग्राम का नाम लेते ही आंखों में चमक आती है और जवानी के पूरी जोश के साथ आधी अधूरी कहानी जोड़ी जाती है, शेष इशारों में समझने के लिए छोड़ दी जाती है, पर बात सरकार से कुछ लेने की आती है तो हाथ जरूर हिलते हैं पर मुंह से कुछ नहीं निकलता।


इंतजार में बैठे रहे स्वतंत्रता सैनानी 
फोटो: 4, 5, 6
आजादी का 66 वां साल देख रहे किसी भी स्वतंत्रता सैनानी की उम्र 80 से कम नहीं है, चाहे पति के देहांत के बाद पेंशन ले रही उसकी पत्नि को स्वतंत्रता सैनानी का लाभ मिल रहा हो। ऐसे में एक ही कुर्सी पर कई घंटे बैठे रहना खासा मुश्किल काम कहा जा सकता है। भादसों से इस समस्या सम्मेलन में भाग लेने आए एक सैनानी के पुत्र अवतार सिंह बताते हैं साढ़े दस बजे उनके आने के बाद से पौने 12 तक कोई नहीं आया है। एसी चल नहीं रहा है, अफसर एसी में आराम से बैठे हैं जबकि देश को आजाद करवाने वाले परेशान हैं। क्या समस्या लेकर आए है? इस सवाल पर वे कहते हैं कि उन्हें तो फोन कर बुलाया गया है, उनके बापू की तो मानसिक रूप से समझ कम हो गई है। साथ सवाल दागते हैं कि बुलाया है तो पहले बात होनी चाहिए।
 ऐसे ही मेघा सिंह बताते हैं कि यहां पर निसंदेह चाय व पानी आया है पर इस उम्र में लंबी देर तक गर्मी में बैठे रहना बीमार करने वाला काम है। जबकि कृपाल सिंह आरोप लगाते हैं कि जो चंद लोग आगे होकर लीडर बने हैं, वे तो अपने काम करवाने अफसरों के साथ जा बैठे हैं बाकी यहां छोड़ दिए गए हैं।

धान पर आफत बनने लगी बारिश, paddy, bad weather, harvesting,


-पत्ता लपेट सुंडी की मार के बाद सीलन से उपजी बीमारियों की आशंका
-बौछारों से सुंडी झडऩे की उम्मीद
फोटो: 19
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
जून जुलाई में बारिश को तरसे धान के लिए अगस्त तो ठीक ठाक रहा पर अब सितंबर के पहले सप्ताह में तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश फसल पर आफत बन कर बरसने लगी है।
धान की फसल पर बीते दिनों में पत्ता लपेट सुंडी की मार पड़ी थी और अब रुक रुक कर हुई बारिश में पैदा हुई सीलन से बीमारियों के पैदा होने की आशंका बन पड़ी है। हालांकि डकाला रोड स्थित खेड़ी जट्टां के किसान जोगिंदर सिंह कहते हैं कि बारिश की बौछारों से पौधे पर लगी पत्ता लपेट सुंडी के झडऩे की पूरी उम्मीद है।
वहीं मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल कहते हैं कि तेज बारिश से तो पत्ता लपेट सुंडी गिर जाएगी लेकिन तेज हवाओं के साथ आई बारिश से पौधों के गिरने की संभावना ज्यादा रहती है। हालांकि विभाग के पास अभी ऐसी कोई सूचना नहीं है। फसल को सीलन संबंधी बीमारी लगने के सवाल पर वे कहते हैं कि अभी किसी तरह का प्रयोग करने से बचना चाहिए। केवल उन किस्मों के लिए ये बारिश नुकसान दायक साबित हो सकती है जो अगेती है, अंकुरित हो रहे पौधों में दाने को नुकसान हो सकता है।

'प्रतिबंधित' किस्म का धान आने लगा मंडियों में, paddy, govinda, banned, varieties,


फोटो:
- सरकारी खरीद नहीं, अब शुरु होगी मानिटरिंग : जिला मंडी अधिकारी
- गोविंदा अथवा सट्ठी की रोपाई दस जून से पहले करने पर प्रतिबंध और सरकार नहीं खरीदेगी : मुख्य कृषि अधिकारी
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
कृषि क्षेत्र में सब सोयल एक्ट लागू होने के साथ ही भूमिगत जल स्तर को संजोए रखने के शुरु हुए प्रयास में प्रदेश में मात्र 60 दिनों में ही पककर फसल देने वाली धान की सट्ठी अथवा गोविंदा किस्म पर सरकारी तौर पर प्रतिबंध लग गया, लेकिन इस किस्म का धान अब इस सीजन में मंडियों में आने लगा है। वो भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद एजेंसियों की ओर से खरीद शुरु करने से करीब करीब एक महीना पहले।
पटियाला जिले की राजपुरा मंडी से इस धान की शुरुआत हुई है। मंडी कर्मी अश्विनी कुमार ने बताया कि अभी 53 क्विंटल धान की आवक हुई है और नमी अधिक होने के चलते यह 1205 रूपये व 1220 रूपये प्रति क्विंटल के दामों पर बिका है, हालांकि एमएसपी 1280 रूपये रख गया है। वे बताते हैं कि पटियाला तहसील के असरपुर गांव से आई है और गोविंदा किस्म है।
इसी संबंध में जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताते हैं कि यह काफी जल्दी है। अभी सीजन शुरु होने में दो से तीन सप्ताह शेष हैं। वे कहते हैं कि मंडी बोर्ड की धान पर मानीटरिंग अभी शुरु नहीं की है और न ही धान की सरकारी खरीद शुरु हुई है।
दूसरी ओर धान की गोविंदा अथवा सट्ठी किस्म पर मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि सरकार ने इन किस्मों की खरीद करने से इन्कार किया था और दस जून से पहले इनकी रोपाई पर रोक लगाई है। किसान चाहे तो अपने रिस्क पर उगा सकता है पर एमएसपी पर सरकारी एजेंसी नहीं खरीदेगी। वे स्वीकार करते हैं कि इन किस्मों को मात्र 40 दिन ही पानी की जरूरत रहती है जबकि अन्य प्रचलित किस्में 120 से 135 दिनों की होती हैं और 70 दिन पानी की जरूरत रहती है।
डा. सोहल ने बताया कि कम अवधि वाली इन किस्मों को किसान उगा तो लेगा, लेकिन इसे तैयार कर बनने वाला चावल जिसने बेचना है उसने भी गुणवत्ता का ध्यान रखना होता है। ऐसा धान उस अंतिम व्यक्ति की भी जरूरत पूरी करता हो।

एक गांव जो सबसे न्यारा, तस्करों को प्यारा, vat, smuggling, village , excise,Haryana-Punjab boarder



 अजीमगढ़ की अजीब दास्तां
-पंजाब के आबकारी विभाग के लिए है किरकिरी
-पैट्रोल-डीजल, शराब के बाद चीनी तस्करों की भी चांदी हुई
-हरियाणा सरकार ने गांव की भौगोलिक स्थिति उठाने हांसी-बुटाना नहर बनाई  
भूपेश चट्ठा, पटियाला

पंजाब के समाना शहर में कुछ सौ मीटर की सड़क और चंद दर्जन दुकानों और घरों का पता राजस्व रिकार्ड में हरियाणा राच्य के कैथल जिले के अजीमगढ़ गांव के नाम से आता है। पंजाब हरियाणा सीमा पर स्थित ये ऐसा गांव है जो अपनी भौगोलिक स्थिति के चलते सबसे न्यारा हो गया है और यही विशेषता इसे कमोडिटी तस्करों के लिए सबसे प्यारा बना देती है।
बात वाहन चलाने के लिए पैट्रोल-डीजल की हो या वाहन चलाते समय बिलकुल प्रयोग ना किए जाने वाली शराब की हो। राच्य सरकार के आबकारी, सेल्स टैक्स व चुंगी के रूप में सबसे च्यादा योगदान देने वाली इन चीजों की खपत यहां की आबादी से कई सौ गुना होती है। हाल ही में इसमें चीनी का नाम भी शामिल हुआ पर वैट हटने के साथ ही हट भी गया।
पंजाब से सात रूपये सस्ता पैट्रोल बेचने वाले दो पंप खूब चांदी बटोर रहे हैं, एक साल पहले तक पंजाब में डीजल हरियाणा की तुलना में सस्ता था, लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से डीजल पर भी वैट कम किए जाने के बाद, एक पंप पर डीजल भी खूब बिकने लगा है। दिलचस्प है कि इन पंप की 'सेवाएंÓ लेने में पंजाब के वे अधिकारी कर्मी भी शामिल हैं जिन्होंने राजस्व जुटाना होता है।
शराब के मामले में दोनों जगहों के ठेकेदारों में 'सिंडीकेटÓ बनती बिगड़ती रहती है। पंजाब के अन्य ठेकेदारों के दवाब के चलते आबकारी विभाग ने यहां से शराब थोक में लाने पर सख्ती जरूर कर रखी है पर पटियाला से आधे से भी कम दामों पर मिल रही शराब का 'पर्सनल कंजपंशनÓ के लिए वर्जित नहीं है।
वहीं हरियाणा सरकार भी इस गांव की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाने में पीछे नहीं रही है। मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुड्डा ने पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की हिसार बैल्ट से पानी निकाल अपने बंदों के निर्वाचन क्षेत्रों में भाखड़ा नहर का पानी लेजाने तीन सौ करोड़ से च्यादा झोंक दिए। भाखड़ा नहर को इसी गांव से पंक्चर करने वाली हांसी-बुटाना नहर बना दी गई। बात सिरे नहीं चढ़ी पर नहर जरूर बन गई है।
शहर के बाशिंदे शशीपाल बताते हैं कि तीन-चार साल पहले पंजाब में चीनी लाने पर एंट्री टैक्स लगाया गया था। उन दिनों में लगा एंट्री टैक्स चीनी पर लगाए गए हाल ही में लगाए गए साढ़े पांच फीसद के वैट से डेढ़ फीसद कम था लेकिन इसी गंाव में हरियाणा के लिए लाई गई कई ट्रक चीनी हर रोज उतार ली जाती और फिर इसे 'धीरे-धीरेÓ पंजाब की फर्म के बिल लगा कर पटियाला, संगरूर, नाभा, सुनाम, मलेरकोटला, लुधियाना की ओर 'खिसकाÓ दिया जाता। एक बार माल निकल जाता तो बिल का 'उपयोगÓ अगली सप्लाई के लिए हो जाता।    
सर्वे किया, दोनों ओर नाके लगे हैं: एईटीसी
एडीशनल एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर लाजपाल सिंह जाखड़ बताते हैं कि कानूनी व तकनीकि रूप से आप वाहन में पेट्रोल-डीजल भरवा सकते हैं। एक सीमा तक उन अहातों में भी बैठ सकते हैं। जबकि चीनी के मामले में अपने क्षेत्र में स्टाक के संदर्भ में सर्वे किया गया था। एहतियात के तौर पर पंजाब सीमा शुरु होते ही दोनों ओर विभाग के कर्मी नाके  पर मौजूद रहते हैं।

सरकारी स्कूल के 11वीं के छात्र भिड़े, एक की मौत ,news, spot, murder,


- छोटे भाई को बचाने पहुंचे दलजीत की किरच लगने से मौत
- पांच सहपाठियों के साथ हुई मारपीट खतरनाक अंजाम तक पहुंची
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
सरकारी स्कूल देवीगढ़ में पढ़ रहे छात्रों के बीच चल रहा मनमुटाव शुक्रवार दोपहर बाद इस कदर गहराया कि 11वीं क्लास के छात्रों में हुए झगड़े में किरच लगने से एक भाई की मौत हो गई, जबकि छोटा भाई घायल हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूल में पढ़ रहे जुल्कां गांव के गुरजंट सिंह का किसी बात को लेकर अपनी ही क्लास के अन्य छात्रों के साथ झगड़ा चल रहा था। मामला इतना गरमाया कि शुक्रवार को छुट्टी के समय उसे आभास हुआ कि उसके सहपाठी ही उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। इसी आशंका से सहमे 17 वर्षीय गुरजंट सिंह ने फोन कर अपने 19 वर्षीय भाई दलजीत सिंह को बुलवा लिया। बताया जा रहा है कि मोटर साइकिलों पर कुछ किरच जैसे धारदार हथियार से लैस उसकी क्लास के ही हाजीपुर के पास रहने वाले पांच लड़कों ने छन्ना मोड़ के पास उसे घेर लिया। इसी दौरान गुरजंट का बड़ा भाई दलजीत आ पहुंचा। आरोपियों ने गुरजंट पर हमला किया ही था कि भाई को बचाने आगे आए दलजीत सिंह के किरच लग गई और उसकी राजिंदरा अस्पताल में लाए जाने से पहले ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उसे पहले दूधनसाधां के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में ले जाया गया था, जहां से उसे और उसके भाई को पटियाला राजिंद्रा अस्पताल में रेफर किया गया।
अस्पताल में उपचाराधीन गुरजंट सिंह का कहना है कि उसे उसकी ही क्लास के पांच लड़कों ने मिलकर मारा है और उसके भाई के भी चोटें लगी हैं। ज्ञात हो कि उपचार के दौरान खासे सहमे हुए गुरजंट सिंह को ये खबर नहीं थी कि उसके भाई की उसे बचाने के चक्कर में मौत हो चुकी है।
जबकि घायल का इलाज कर रहे राजिंदरा अस्पताल की इमरजेंसी के डा.संजय बंसल ने बताया कि गुरजंट सिंह पर किसी तीखे हथियार से हमला किया गया है, लेकिन वो खतरे से बाहर है, हालांकि एहतियातन एक्सरे करवाया जा रहा है।
दूसरी ओर जुल्कां थाने के एसएचओ शमिंदर सिंह ने बताया कि हाजीपुर के निकट छन्ना मोड़ पर हुई इस झगड़े में घायल गुरजंट सिंह के बयानों के आधार पर तीन लोगों को आईपीसी की धारा 302 सहित कुछ अन्य धाराओं के तहत नामजद कर लिया है। इनमें लभप्रीत सिंह, गुरविंदर सिंह व गिल के नाम शामिल हैं और मामले की आगे जांच की जा रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। वहीं पीडि़तों के परिवार के सदस्यों अनुसार मारपीट करने वाले पांच लड़के हैं जिनमें एक हाजीपुर का बदमाश है और चार अन्य उसके साथी हैं।

'ग्रिड ठप होने का कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं' , failed, load dispatched center, northern grid


...मामला उत्तरी ग्रिड के फेल होने का
-पंजाब का पक्ष साबित हुआ
-ओवर ड्रा व लोड डिस्पैच सेंटरों का ग्रिड कोड की अनदेखी से पहले ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा, घटिया ट्रांसमिशन नेटवर्क को जिम्मेदार बताया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
केंद्र सरकार के संस्थान सेंट्रल इलेक्ट्रीसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के चेयरमैन एएस बक्शी की अध्यक्षता में गठित की गई चार सदस्यों की कमेटी ने 30 व 31 जुलाई को उत्तरी ग्रिड के फेल होने के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं पाया है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आधिकारिक सूत्रों अनुसार कमेटी की रिपोर्ट में ग्रिड ठप होने के कारणों में राज्यों की ओर से बिजली ओवर ड्रा करना व क्षेत्रिय  लोड डिस्पैच सेंटरों का 'ग्रिड कोडÓ की अनदेखी से पहले दिए गए कारणों में ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा, घटिया ट्रांसमिशन नेटवर्क को ग्रिड ठप होने के प्रमुख कारण बताया है।
 रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रिपिंग 400 केवीए की बीना-ग्वालियर-आगरा ट्रांसमिशन लाइनों से शुरु हुई। हालांकि पावरग्रिड ने इसी लाइन के एक सर्किट को 765 केवीए के स्तर पर अपग्रेड करने के लिए परमिट ले रखा था। उन दोनों दिनों में 400 केवीए की कई अन्य लाइनें भी बंद थी। इनमें उक्त सर्किट के अलावा 400 केवीए की जेरदा-कांकरोली और भीनमाल-कांकरोली इंसूलेटर की समस्या के चलते उपलब्ध नहीं थी। जिससे उत्तर-पश्चिम का सिस्टम कमजोर कर दिया। यह भी पाया गया कि बीना-ग्वालियर लाइन थमर्ल के लिहाज से ओवर लोड नहीं थी और दोनों ही दिन द्वितीय चरण की सुरक्षा, मैन-दो में जोन-तीन पर ट्रिप हुई जबकि पहले चरण की सुरक्षा मैन-एक ने काम ही नहीं किया। जिसके चलते ग्रिड ठप हो गया।
 इससे पहले सीईआरसी व ऊर्जा मंत्रालय की ओर से राज्यों को ग्रिड से अपने हिस्से से ज्यादा बिजली ओवर ड्रा करने पर कड़ी फटकार लगाई और इसे ही प्रमुख कारण बताया गया। इसके बाद 'ग्रिड कोडÓ की पालना ना करने वालों पर जुर्माना लगाया गया। सीईआरसी ने उत्तर भारत के उन सभी राज्यों के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों के प्रभारियों को निर्देशों की पालना न करने के चलते ग्रिड ठप होना बताया था। नार्दन रीजन लोड डिसपेच सेंटर की याचिका पर सीईआरसी ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के अलावा राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों के अधिकारियों को जहां निर्देशों का उल्लंघन करने का जिम्मेदार पाया गया है वहीं ग्रिड कोड की पूरी तरह से पालना करने प्रति भी जिम्मेवार ठहराया।
वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने कहा है कि पंजाब पहले से ही ग्रिड की सुरक्षा को ध्यान में रख कर बिजली लेता रहा है और इस संबंध में जुलाई आरंभ से ही कड़े निर्देश जारी हैं। जबकि पावरकाम के अधिकारी बताते हैं कि बिजली के मामले में पंजाब अंतिम छोर पर है ऐसे में हमारे यहां ट्रांसमिशन लाइन की गड़बड़ी का असर ग्रिड पर सीमित है।

Monday, 1 October 2012

पावरकाम को नुकसान, उपभोक्ता परेशान, consumers suffering and Powercom loosing money


बिजली बिलों में देरी, बिलिंग साफ्टवेयर ने लगाया चूना!
- मुख्यालय वाले शहर सहित सात शहरों में चार-चार महीने के बिल आए
-जल्द दुरुस्त होगा सिस्टम, समय पर आएंगे बिल: पावरकाम
फोटो: 10 स्कैन की हुई खबर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बिजली का बिल वैसे ही कम नहीं...अब तो कई महीने हो...गर्मी में वैसे ही डबल होता...इस बार तो सुना है बिजली और मंहगी हो...Ó यह केवल समानिया गेट के रहने वाले कमलेश चंद्र शर्मा ही नहीं शहर की बड़ी आबादी बिजली बिलों के पहुंचने में हो रही देरी से जूझ रही है।
 बात यहीं समाप्त नहीं होती महीने का हिसाब किताब लेकर चलने वाले आम आदमी को देरी से भी ज्यादा परेशानी इस बात से भी है कि दो महीनों की बजाए अगर तीन या चार महीनों का बिल एक साथ आता है तो भुगतान उपर की स्लैब की यूनिटों का ज्यादा करना पड़ेगा। साफ है कि पहली सौ यूनिट की सस्ती दरों का लाभ हर दूसरे महीने मिलने की अपेक्षा चौथे महीने मिलेगा और 300 यूनिट के उपर की मंहगी दरों वाली बिजली का भुगतान ज्यादा किया जाएगा।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिजली बिलों को एक सिस्टम से जोडऩे वाले बिलिंग साफ्टवेयर ने पावरकाम को भी करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। वहीं राज्य के कम से कम सात शहरों के हजारों उपभोक्ताओं को इससे भारी परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
'दैनिक जागरणÓ ने इस संबंध में पहले ही चेता दिया था पर अब यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। पावरकाम मुख्यालय वाले शहर पटियाला में भी चार चार महीने के बिजली बिल एक साथ आ रहे हैं। दिलचस्प है कि गर्मियों के पीक सीजन का सारा बिजली बिल एक साथ आने की सूरत में एकबारगी आम आदमी को पूरा वेतन बिजली बिल चुकाने में ही देना पड़ रहा है। हालांकि पावरकाम के प्रवक्ता इस बात को स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि जल्द ही सारा सिस्टम दुरुस्त कर लिया जाएगा और नियमित समय पर बिल आने लगेंगे।
 उल्लेखनीय है कि राज्य में तत्कालीन पंजाब राज्य बिजली बोर्ड ने 30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में बिलिंग सिस्टम को जोडऩे के लिए जर्मनी का सैप नाम साफ्टवेयर लगाया जा रहा है। एंटरप्रेनर रिसोर्स प्लानिंग नाम से इसकी शुरुआत जुलाई 2010 में पटियाला से की गई। डेढ़ साल में ही इसे लागू कर दिया गया। इसके साथ ही मोहाली सहित छह अन्य शहरों में भी यही प्रोजेक्ट शुरु कर दिया गया।
दूसरी ओर पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस प्रोजेक्ट की खामियां सामने आने के बाद और राज्य के इन शहरों में उपभोक्ताओं की लगातार गलत बिलिंग को लेकर बढ़ रही परेशानियों के बाद इस प्रोजेक्ट को अन्य शहरों में लागू न करने की मांग की है।
एसोसिएशन के महासचिव इंजी.संजीव सूद का कहना है कि मुंबई की एक कंपनी को 350 करोड़ में जून 2010 को ठेका सौंपा गया। उस समय मैसर्स सपैनिको का एक अन्य कंपनी मेसर्स एक्सेंचर के साथ करार था। बिजली वितरण के मामले में क्रियांवित करने वाली एक्सेंचर ने अच्छा अनुभव होने के बावजूद हाथ पीछे खींच लिए।
इंजीनियर्स एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि 'गो लाइवÓ नाम से अब एक नया साफ्टवेयर लगाया जा रहा है, जिसे पूरी तरह से टेस्ट भी नहीं किया गया है। खामियां गिनाने के साथ ही एसोसिएशन ने मांग की है कि वितरण क्षेत्र के इंजीनियरों और आईटी विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाए, जो यह समस्या दूर करे। दिलचस्प है कि बिल ज्यादा आने की सूरत में उपभोक्ता परेशान होता है और किसी न किसी तरह से कम करवाने के जुगाड़ में लग जाता है। वहीं बिल कम आने की सूरत में पावरकाम को चूना लग जाता है।