- समाना में 'रूपैÓ कार्ड की हुई शुरुआत
- राजपुरा में 14 अक्टूबर तक तो शेष में 11, 12 अक्टूबर तक की फसलों का भी पूरा भुगतान नहीं हुआ
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हर साल किसान का पसीना सूखने से पहले उपज की कीमत का दावा करने वाली सरकार के इस बार भी 72 घंटे में भुगतान करने के दावे हवा हो रहे हैं। हालांकि इस बार कारण तकनीकी ज्यादा हैं और लापरवाही कम है। मंडियों में किसानों की छह-सात दिन पुरानी पेमेंट भी अटकी पड़ी है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि 'रूपैÓ कार्ड के लांच के बाद से ऑनलाइन हो रहे सिस्टम से अभ्यस्त न हो पाना मुख्य समस्या बन पड़ी है। याद रहे कि पिछले साल तत्कालीन खाद्य एंव आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों ने पटियाला की नई अनाज मंडी से 'रूपैÓ कार्ड की शुरुआत की थी। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरु करने के बाद इस साल राजपुरा से फसल के आन लाइन भुगतान की शुरुआत की गई।
सूत्रों का कहना है कि राजपुरा में 14 अक्टूबर तक की फसल का लगभग सारा भुगतान हो चुका है। जबकि शेष लगभग सभी मंडियों में 11-12 अक्टूबर तक के बाद की फसलों का पूरा भुगतान नहीं हुआ है। पटियाला, सनौर आदि मंडियों में जहां धान की आवक पहले शुरु हुई वहां पर हालत कुछ ज्यादा बेहतर है। जबकि शेष में हालात ठीक नहीं कहे जा सकते। यहां पर किसानों को खासा इंतजार करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर जिला खाद्य एंव आपूर्ति अधिकारी डा.अंजुमन भास्कर कहती हैं कि भुगतान तेजी से किया जा रहा है। आज भी वे राजपुरा में हैं और करीब डेढ़ करोड़ रूपये की पेमेंट कर चुकी हैं। वे आढ़तियों से भी लगातार कह रही हैं कि उनके पास बिल जितनी जल्दी हो सके भिजवाएं। जिससे किसानों को उनकी फसल का शीघ्र भुगतान किया जा सके। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय से भी यही अपील जारी करवाई गई है।
डीएफएसओ का कहना है कि फिर भी अगर किसी मंडी में भुगतान में देरी हो रही है तो उनसे संपर्क कर सकता है। भुगतान तेजी से हो और ऑन लाइन हो इसके लिए समाना में भी 'रूपैÓ कार्ड की शुरुआत आज से करवा दी गई है।
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