भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर व आसपास के क्षेत्र में बनी मार्केट कमेटी पटियाला की 12 मंडियों में पीने के पानी के लिए लगे एक मात्र नल की सुविधा अब एक कदम आगे बढ़ कर इस सीजन में सबमर्सिबल पंप पर आ गई है। पानी की टंकी भी लग गई है और पीने के पानी की 24 घंटे सुविधा है, वो भी तीन नल के साथ। शहर की नई अनाज मंडी में वाटर कूलर भी लगे हैं, पर पटियाला जिले की सभी 106 मंडियां में ऐसे आदर्श वादी हालात नहीं है।
मंडी बोर्ड के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि तीन दर्जन मंडियां अभी भी बिना किसी शैड के ही खुले आसमान में चल रही हैं। 11 ऐसी मंडियां भी हैं जिन्हें पक्के फड़ का इन्तजार है। याद रहे कि कच्ची जमीन पर एक बार स्टोर की गई उपज में गर्मी के साथ नमी के बढऩे की संभावना ज्यादा रहती है। इससे उपजी उमस आगे चल कर दीमक अथवा अन्य कीट लगने का कारण बनती है।
एक अक्टूबर से शुरु होने वाली धान की सरकारी खरीद पर मंडी बोर्ड हर संभव प्रबंध करने के प्रयास कर रहा है। संभव है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीद से ठीक पहले पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल भी दौरा कर सकते हैं। इसी क्रम में आज भी प्रदेश के कई अधिकारियों ने जिले की टीम के साथ कुछ मंडियों में दौरा कर प्रबंधों का जायजा लिया है।
एक लाख टन धान की आवक का है प्रबंध: मंडी अधिकारी
जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि साधारण हालात में आने वाले धान को मंडियों में संभालने व झाड़ा लगाने आदि के बाद तुलाई व पैकिंग के बाद ढोह ढुलाई की कोई दिक्कत नहीं है। कुछ दिन ऐसे भी होते हैं, जब 50 से 60 हजार टन तक धान की आवक भी आती है। यह भी कुछ दिन मैनेज की जा सकती है, हालांकि स्टोर करने की क्षमता तो एक लाख टन के भी पार है लेकिन ज्यादा दिनों तक इस गति से लगातार आवक होने पर ढेर लग जाते हैं। ट्रक इत्यादि से ढुलाई के सीमित साधन हैं। फिर भी इससे किसान को कोई समस्या नहीं आती उसकी उपज बिक चुकी होती है।
हालात बदल दिए हैं: चेयरमैन मार्केट कमेटी
वहीं मार्केट कमेटी पटियाला के चेयरमैन हरविंदर सिंह हरपालपुर कहते हैं कि हालात अब बदल दिए गए हैं। पूरी तरह से साफ सफाई के अलावा त्रिपालों की किसी भी आढ़ती के पास कमी नहीं है। बारदाने पर तो मार्केट कमेटी का नियंत्रण नहीं है पर आप कहीं भी अंधेरा नहीं देखेंगे। पूरी रोशनी है, पहले पीने वाले पानी की बात होती थी अब वाटर कूलर लगे हैं। 24 घंटे सप्लाई हो रही है।
13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद
-मौसम अनुकूल है पिछला रिकार्ड सुधरने की उम्मीद
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहले सूखा और बाद में लगातार बारिश ने चाहे किसान की खेती लागत बढ़ा दी हो पर कटाई के दिनों में खिली धूप ने किसान की यह उम्मीद भी जगा दी है कि उपज कम नहीं रहने वाली। मंडी बोर्ड की जिला ईकाई का अनुमान है कि इस बार जिले की 106 मंडियों में 13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद है।
जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि मौसम अनुकूल है ऐसे में पिछला रिकार्ड सुधरने की पूरी उम्मीद बनी हुई है। जिले में धान की स्टोरेज के सवाल पर वे बताते हैं कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है। जिले में 520 शैलर काम कर रहे हैं और इनमें धान स्टोर करने का पर्याप्त स्थान है। चूंकि धान की कस्टडी शैलर मालिकों के पास होती है और गेहूं-चावल की सरकार के गोदामों में ऐसे में धान के मामले में भण्डारण संबंधी कोई समस्या नहीं है।
पटियाला राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान और प्रदेश के महासचिव गुरदीप सिंह चीमा भी किए गए प्रबंधों से संतोष प्रकट करते हैं और कहते हैं कि स्टोरेज की कोई दिक्कत नहीं आने वाली। हालांकि चंडीगढ़ में वीरवार को घोषित हुई धान नीति पर वे कहते हैं कि उनके पास अभी तक कापी नहीं आई है लेकिन बताया जा रहा है कि पिछले साल अलाट किए गए धान में से 70 फीसद से कम धान की मिलिंग करने वाले शैलरों को इस साल धान अलाट ना किया जाए। इसके अलावा बैंक गारंटी संबधी भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पिछले सालों की तुलना में बैंक गारंटी बढ़ाई गई है।
दूसरी ओर खाद्य एंव आपूर्ति विभाग की ओर से धान की खरीद संबंधी विभिन्न एजेंसियों को की जाने वाली अलाटमेंट पर अधिकारी बताते हैं कि इस बार केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड को दस फीसद से कम अलाटमेंट हो सकती है। शेष का बंटवारा राज्य सरकार की खरीद एजेंसियों पंजाब एग्रो, पनसप, वेयर हाउसिंग कारपोरेशन, मार्कफैड व पनग्रेन में किया जाएगा।
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