Tuesday, 29 November 2011

16 नवंबर को सजा, 25 को बरी और हर्जाना भी, electricity, open access, pserc, pspcl,

-नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी
-18.45 रूपये जुर्माने की वापसी छह दिसंबर तक और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश
-'ओपन एक्सेसÓ के तहत बाहर से बिजली लेने और पावरकाम बनने के बाद पहला मामला
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बड़े नामों को अक्सर देर से सजा क्यों मिलती है...Ó भ्रष्टाचार व मानव अधिकारों को लेकर बने और न्यायपालिका से लेकर पूरे सिस्टम पर बने और  टेलीविजन पर चल रहे इस विज्ञापन में संभव एक कमी भी है कि 'नाम बड़ा हो तो सजा देना भी आसान नहीं होताÓ और अगर तंत्र में निजी व्यवस्था शामिल हो जाए और नियम कानून लागू करने में एक भी कमी रह जाए तो सारा दांव उलटा पड़ जाता है और वो भी चंद दिनों में।
मनमर्जी से बिजली बिल भेजने और बकाया ना भरने और यहां तक कि किसी बिजली कर्मी के बनते 'मान-सम्मानÓ में थोड़ी भी कसर रहने पर सख्त परिणाम भुगताने के लिए कुख्यात रहे पूर्व पंजाब राच्य बिजली बोर्ड के पुराने दिन भी उसके साथ ही लद चुके हैं। बिजली अधिनियम 2003 के लागू होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड बनने के बाद 'ओपन एक्सेसÓ के तहत अन्य राच्यों अथवा पंजाब के बाहर से इंडस्ट्री को सीधे बिजली लेने देने के निर्णय के बाद पहला मामला सामने आया है जब एक मामले में16 नवंबर को जालंधर की एक फैक्ट्री जेएमपी इंडस्ट्री को पीक लोड आवर में बिजली ड्रा करने पर 'सजाÓ के रूप में बिजली कनेक्शन से हाथ धोना पड़ा।
उक्त इंडस्ट्री पर 18.45 लाख रूपये का जुर्माना ठोकते हुए तीन किश्तों में जमा करवाने के आदेश भी जारी हो गए। इस पर कंपनी ने 6.15 लाख रूपये की एक किश्त जमा करवाने के साथ ही पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास अपील करते हुए अपना केस दायर कर दिया।
दिलचस्प है कि पीएसईआरसी ने सारी सुनवाई के बाद 25 नवंबर को कंपनी को बरी करने के साथ ही ग्राहक को नाहक परेशान करने व अवैध तरीके से नियमों के विपरीत कार्रवाई करने पर हर्जाना देने के आदेश भी जारी कर दिए।
पीएसईआरसी ने पीएसटीसीएल के चीफ इंजीनियर आरके शर्मा और ओपन एक्सेस के सुपरीटेंडिंग इंजीनियर एके मठारू पर नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने पर कार्रवाई करने को भी कहा है। इसके अलावा 18.45 रूपये जुर्माने की राशि में से दी गई पहली किश्त की वापसी छह दिसंबर तक सुनिश्चित करने और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश भी दिए हैं।
वहीं पावरकाम प्रवक्ता का कहना है कि पीएसईआरसी के आदेशों अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई उक्त दोनों अधिकारियों के खिलाफ की जाएगी। साथ ही अधिकारी ये भी बताते हैं कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के नियम पीक लोड के दौरान फ्रिक्वेंसी गिरने की स्थिति में भी बिजली लेने पर खामोश हैं, जबकि प्रदेश में 'ओपन एक्सेसÓ के तहत किसी भी इंडस्ट्री को तय सीमा से अधिक बिजली लेने की अनुमति नहीं है।
याद रहे कि उक्त इंडस्ट्री ने अपनी अपील में कहा कि ओपन एक्सेस में किए गए समझौते में यह कहीं नहीं कहा गया कि पीक लोड समय तक ही बिजली ली जाएगी। ऐसे में उसने बिजली ले कर गलत नहीं किया है। हालांकि बिजली इंजीनियर यह भी कहते हैं कि अगर फ्रिक्वेंसी च्यादा गिरे और उपभोक्ता लगातार बिजली लेते रहें तो ग्रिड के फेल होने का खतरा बन पड़ता है। संभव है कार्रवाई इसी स्थिति में की गई।

Monday, 28 November 2011

डॉलर की चढ़ाई से एक्सपोर्टरों की चांदी, doller-rupee, export

 -मार्च, 2009 के बाद पहली बार 52 रूपये के पार हुआ डालर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
एक ओर जहां डॉलर के 21 नवंबर को 52 रूपये का स्तर तोडऩे के बाद रिजर्व बैंक आफ इंडिया के हाथ पांव फूल रहे हैं उस पर देश का शेयर बाजार ना केवल गिरते डालर के साथ नीचे आ रहा है अपितु बाजार को भी नीचे की ओर खींच रहा है। वहीं एक्सपोर्टर के चेहरे डॉलर की चढ़ाई के साथ खिलने लगे हैं।
फारेक्स ट्रेडिंग के बाजार से जुड़े जानकार बताते हैं  कि डॉलर के दाम का 45 रूपये से 50 रूपये के बीच में रहने से किसी को एतराज नहीं था और इसे ट्रेडिंग के अलावा आयात निर्यात के लिहाज से भी ठीक ही समझा जा रहा था। यही वो रेंज थी जिसे भारतीय बाजार ने पिछले दो सालों से होल्ड कर रखा था पर बीते दो महीनों अथवा भारत में सर्दी व त्यौहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही डॉलर की तुलना में रूपये में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ जो इस सप्ताह भी जा रही है।
ट्रेड जंक्शन पर फारेक्स में डील करते रवि एस आहलुवालिया बताते हैं कि तीन मार्च को डालर ने 52 रूपये का स्तर तोड़ा था और अब इसी सप्ताह 21 नवंबर को में 52.37 तक जाने के बाद 52.18 रूपये पर बंद हुआ और 22 नवंबर को 52.69 का रिकार्ड बनाया है। तीन महीने में सात फीसदी की बढ़ोतरी के बाद दो दिनों में तीन फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। जिस तरह के हालात हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगले छह महीनों में 54 रूपये के स्तर भी दिखाए जा रहे हैं। एक बार ये उपर निकला तो फि र उपर के स्तर का कुछ नहीं कहा जा सकता।
वहीं ब्रोकर आशीष गोयल कहते हैं कि पंजाब में बात लुधियाना की हो या अमृतसर की या फिर चंडीगढ़ के किसी ट्रेडर या कंपनी की च्यादातर ने 50 रूपये तक  डॉलर के जलाने की उम्मीद के साथ ही 'हैजिंगÓ कर रखी थी लेकिन 21 नवंबर को एक ही दिन मेंं दो फीसदी अथवा एक रूपये की गिरावट ने हर किसी का हिला कर रख दिया है, इसके अगले ही दिन 22 को फिर एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई, लेकिन निर्यातकों को इसका लाभ तय है। तीन फीसदी की लाभ में अतिरिक्त बढ़ोतरी वो भी सीजन के दौरान कम नहीं आंकी जा सकती।
याद रहे कि पूरे ढ़ाई साल में डालर ने दस फीसदी का उतार और चढ़ाव देखा है ऐसे में दो फीसदी को आप बोनान्जा ही कहेंगे।

Thursday, 24 November 2011

सुनिए सरकार ! ये पत्थर कुछ कहता है, bye pass, southern, road,




शिलान्यास का सच दक्षिणी बाई पास
अधूरे काम : पिछली सरकार का सपना, इस सरकार में भी नहीं हुआ पूरा
एक दशक से ज्यादा मंत्रालयों की लड़ाई में लटका, अब छह साल से निर्माण में
 14 दिसंबर 2006 को 18 महीने में चालू करने की घोषणा से हुआ था शिलान्यास
भूपेश चट्ठा, पटियाला शाही शहर को भारी व सैनिक ट्रैफिक से मुक्त करने, चंडीगढ़ व अंबाला की ओर से आने वाले तथा समाना व संगरूर की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतरी यातायात में उलझने से बचाने के लिए बनाए जाने वाले दक्षिणी बाई पास का सपना सूबे की पिछली सरकार ने दिखाया था, लेकिन एक और सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी यह पूरा नहीं हो सका है। राजपुरा रोड को संगरूर रोड से मिलाने के लिए 18.8 किलोमीटर लंबे बाई पास को जमीन से करीब 13 फीट ऊपर उठाकर बनाए जाने वाले इस कोरीडोर का मामला एक दशक से ज्यादा केंद्रीय वन व रक्षा मंत्रालय समेत राज्य के लोक निर्माण विभाग की लड़ाई में लटका रहा। इसके बाद सेना के बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन को निर्माण की जिम्मेदारी दे दी गई। 2007 के राज्य विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 14 दिसंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाई पास का शिलान्यास कर दिया। नींव पत्थर रखने के तुरंत बाद बताया गया कि 80 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से यह बाई पास करीब 18 महीने में चालू हो जाएगा। यदि मौसम, खासकर मानसून के सीजन में बाढ़ की मार पड़ी तो चार-छह महीने और लग सकते हैं। हकीकत ये है कि बाई पास के नीचे से निकलने वाली सड़कों के लिए बनने वाले ओवर ब्रिज आज भी निर्माणाधीन हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने को है। बाई पास के लिए क्रासिंग पर सर्विस रोड, लूप रोड और कोरीडोर बनाने, सड़क के दोनों ओर तारबंदी अथवा किसी तरह के एंगल लगा रेलिंग लगाए जाने जैसे काम अभी शेष हैं। इसके अलावा सड़क चूंकि पूरी तरह से अत्याधुनिक व भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी है और बड़े सैनिक वाहन इसका प्रयोग करेंगे, ऐसे में एक्सप्रेस हाईवे का रूप भी अभी दिया जाना है।

ना आम किसान को कमाई, ना लोगों को निवाला,vegitables, season, farmer, inflation


-मंहगी को अगेती लगा, दवा के दम पर वसूलते हैं मोटा मुनाफा
-50 के पार बिकी गोभी अब 'टोकेÓ से सस्ती

भूपेश चट्ठा, पटियाला
गोभी कभी पचास के पार होती है तो कभी पशुओं के चारे के बराबर आ जाती है। मटर की कीमत कभी तिहाई में पहुंचती है तो चंद सप्ताह बाद वही हरे रंग का मटर दहाई में भी नहीं आ पाता। दिलचस्प है कि सब्जी के दाम कब गिरेंगे? कब चढ़ेंगे? इसका अंदाजा हर किसान को होता है पर स्टीक अनुमान लगा जुआ खेलने वाले ही मोटी कमाई कर पाते हैं। ऐसे में आम किसान को कमाई नहीं होती और आम आदमी को सस्ती सब्जी तभी मिलती है जब जानवरों के चारे के बराबर आ जाती है।
सब्जियों के दामों में होने वाले उतार चढ़ाव पर 'दैनिक जागरणÓ ने पाया कि मंहगी बिकने वाली सब्जी को अगेती लगाया जाता है और दवाओं के दम पर उगा जिंदा रखा जाता है और फिर सीजन शुय होने से पहले ही मोटा मुनाफा भी वसूला जाता है। जबकि जल्द खराब होने वाली सब्जी पर रिस्क कम लेते हुए सीजन अनुसार ही काम करते है। सब्जी के दामों में होने वाले उतार चढ़ाव पर पूर्वानुमान लगाने में एक दो बार असफल रहने वाला आम किसान इस पंगे से दूर चला जाता है। जबकि आधुनिक पेस्टीसाइड व केमिकल डालने व टीके लगाने के अलावा पुराने देसी तरीके अपनाने वालों की भी कमी नहीं है। यहां तक कि देसी तरीके से तूड़ी के कुप में प्याज भर कर स्टोर किया जाता है और दाम बढऩे के बाद ही बाहर निकाला जाता है।
सब्जी कारोबारी बाबू लाल बताते हैं कि गोभी नवरात्र से दीपावली तक 50 के पार बिकने वाली गोभी अब पशुओं को डालने वाले 'टोकेÓ से सस्ती हो गई है। टोका सवा दो रूपये किलो बिक रहा है तो गोभी दस रूपये की ढ़ाई किलो पर आ गई है। मूली का भी यही हाल है। 120 रूपये किलो का मटर 60 पर आया आगे छह रूपये भी होगा जबकि मटर का प्रिजरवड दाना 60 रूपये किलो है।
हालांकि पीढिय़ों से फल सब्जी व फूलों के बीजों की खेती करते आ रहे प्लांट्स मैन एंड सीड्स के अब्दुल वाहिद कहते हैं कि दुनिया भर में मंहगाई बढ़ी है, डीजल, खाद, दवाएं, कृषि उपकरण सहित अन्य खर्चे बढ़े हैं लेकिन किसान को थोड़ा भी लाभ मिलता है तो शोर शुरू हो जाता है। जबकि होना तो यह चाहिए कि सरकार मार्केटिंग का पुख्ता प्रबंध करे।
वहीं फाइव एलीमेंट्स हैल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाइगर कहते हैं कि जब, जो सस्ती हो तो समझो उसी का खाने का सीजन है और बिना जहरीले केमिकल के उपजी है। ऐसी सब्जी ही लाभकारी होती है जो प्राकृति के साये में उगे ना की प्राकृति के विपरीत जा कर।

Sunday, 20 November 2011

पंजाब में किसान यूनियन राजनीति गरमाई, farmer, confrence, politics,


-एक ने कहा सरकारी बंदे हैं, तो दूसरे ने कहा बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनी हैं सपांसर
-देश भर के किसानों की महापंचायत 25 को अमृतसर में: लक्खोवाल
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
प्रदेश में पहली बार आयोजित की गई कंसोरटियम आफ इंडियन फारमर्स एसोसिएशन सीआईएफए की कांफ्रेंस ने किसान यूनियनों की राजनीति में गर्मी ला दी है। अब तक किसानों के मुद्दे पर एक दूसरे के साथ वैचारिक मतभेद रखने के बावजूद 'साड्डा ही बंदाÓ होने का दम भरने वाली यूनियनों ने एक दूसरे की कलई खोल दी है।
एक ओर जहां एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान के पद पर पहुंचे सतनाम सिंह बहरू के आज के शो से ठीक पहले भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान व पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल ने मार्केट कमेटी के  कार्यालय में आ कर घोषणा कर दी की उनका संगठन देश भर के किसानों की महापंचायत का आयोजन 25 नवंबर को अमृतसर में करने जा रहा है। इसमें उत्तर भारत के 10 से 12 राच्यों के किसान नेता पहुंच रहे हैं।
इसी दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सतनाम बहरू के कार्यक्रम में शामिल होने बारे पूछे जाने पर लक्खोवाल कहते हैं कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि ये चंद सरकारी बंदों का झुंड है। जो सरकार के लिए ही काम करता है। यहां तक कि केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय में इन किसान नेताओं को आफिस तक दिया गया है। हालांकि पंजाब सरकार की ओर से स्वयं ली गई सुविधाओं पर वे कहते हैं कि यह मंडी बोर्ड के चेयरमैन के रूप में हैं ना किसान यूनियन को दी गई हैं।
दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला प्रधान डा. दर्शन पाल ने इसे प्रैस के माध्यम से कांग्रेस सांसद की ओर से चलाया जाने वाला प्रचार अभियान बताया है। डा. दर्शन पाल कहते हैं कि एक जागीरदार की बेटी और एक पूर्व राजा की पत्नि किसानों के मुद्दे कैसे समझ सकती है। जिन्हें सुलझाने का दावा कर रही है। साथ ही कहा है कि पूरा कार्यक्रम किसानों का खून चूसने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से प्रायोजित है। दिलचस्प है कि मंच पर लगे बैनर का हवाला भी स्पष्ट रूप से दर्शाने को दिया गया। जिस पर कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रायोजक के रूप में दिखाया गया है।
डा. दर्शन पाल का कहना है कि दूसरी ओर हरसिमरत कौर जैसी राजनीतिक रूप से शक्तिशाली महिला को बुलाना और किसानों का मंच उपलब्ध करवाना खुदकुशी करने वाले परिवारों की भावनाओं से खिलवाड़ करने बराबर है।

एक मंच से अलग सुरों में बोली, परनीत व हरसिमरत, farmer, confrence, politics,


...किसान सम्मेलन

भूपेश चट्ठा, पटियाला
कंसोर्टियम आफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित किए गए सम्मेलन में एक ही मंच से और एक ही मुद्दे पर विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर और सांसद हरसिमरत कौर बादल अलग अलग सुरों में बोली हैं। हालांकि दोनों ने ही अपनी अपनी सरकारों का बचाव करने और दूसरों को लपेटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
कंसोरटियम के आठवें सम्मेलन में कांग्रेस से सांसद परनीत कौर ने जहां खुद को किसान की बेटी बता इस मंच से राजनीतिक लाभ ना लेने की बात कह पंजाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में किसान हित में लिए गए निर्णय कि आठ घंटे मुफ्त व निर्विघन बिजली देने के अलावा किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज को 14.5 फीसदी से कम करवा 11 फीसदी पर लाने के लिए पीठ ठोकी और मीडिया को भी 'निर्देशितÓ कर दिया कि यहां से जाने वाला संदेश 'राजनीतिकÓ नहीं होना चाहिए। परनीत कौर ने जहां खुद को एक पार्टी की सदस्य व सरकार में होने के साथ अप्रत्यक्ष रूप से अपना एजेंडा रखा और मंच से कहा कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर इस कमेटी के लोगों को मिलने का समय एक सप्ताह में दिलवाएंगी। अर्थशास्त्री व राज्य सभा सदस्य एमएस स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करने प्रति विचार विमर्श करवाया जाएगा।
वहीं शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने जहां खुद को कृषि से जुड़ा होने हवाला दे किसानों के मंच से कांग्रेस व केंद्र को जमकर खरी-खरी सुनाई। संसद में अपनी ओर से उठाए गए किसानों के मुद्दों के साथ ही आंकड़ों के परिपेक्ष्य में हरसिमरत बादल ने कहा कि केंद्र जिन योजनाओं को अपनी बताता है वो पंजाब के पैसे से ही चल रही हैं। जितना टेक्स पंजाब से जाता है उसका 1.3 फीसदी ही पंजाब को अपने राज्य में विकास करने के लिए केंद्र लौटाता है। अगर दस फीसदी भी आ जाए तो पंजाब के हालातों में जमीन आसमान का अंतर होगा।
हरसिमरत ने सीधा हमला कर कहा कि देश का 1.98 फीसदी रकबे वाला पंजाब 60 फीसदी लोगों का पेट भी रहा है और केंद्र में ऐसे संस्थान है जो अतिरिक्त बफर स्टाक को संजोने में 27 हजार कारोड़ रूपये सालाना की दर से खर्च कर रहे हैं। जबकि 22 करोड़ लोग भूखे सोते हैं और सात हजार की हर रोज मौत हो रही है।
 इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि परनीत कौर ने बाहर निकलते ही प्रधानमंत्री से मिलवाने के सवाल पर कह दिया कि 'इसकी कोई समय सीमा नहीं है...कोशिश करते हैं...चार दिन तो नोटिस के ही हैंÓ। जबकि हरसिमरत ने कहा कि 'इनकी सरकार है ये लोग टिकट मांगने तो एक मिनट में मिल लेते हैं किसानों के मामले में आज तक समय नहीं मिला और आगे भी ऐसा ही चलेगाÓ।
दूसरी ओर केंद्रीय लाइब्रेरी में आयोजित किए गए सम्मेलन में प्रधान सतनाम सिंह बहरू ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में किसान चार से पांच दिन की विशेष चर्चा स्वामीनाथन की रिपोर्ट व किसानों के अन्य मुद्दो पर करवाने की मांग कर रहे हैं। चाहते हैं कि सत्ताधारी और विपक्ष दोनों के सांसद किसानों के मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
महा सचिव पी चैंगल रेड्डी ने बताया कि आंध्र प्रदेश में एक लाख किसान खेती करना छोड़ गए हैं, क्योंकि गेहूं में ही दस हजार रूपये प्रति एकड़ का सालाना नुकसान हो रहा है।
 राजस्थान के किसान नेता कृष्ण कुमार ने कहा कि सरकार आज किसान केच्बच्चे को कम पौष्टिक आहार मिलने का तर्क दे मिड डे मील के नाम पर हाथ में कटोरा पकडऩे की आदत डाल रही है। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के योगेश दाहिया ने किसानों को मुआवजा देने के तरीके पर सवाल उठाया और कहा कि गैस पाइप लाइन बिछानी हो या बिजली के खंबे लगाने हो कंपनियां पेड़ कटने से नुकसान की भरपाई मात्र भी नहीं करती पेड़ लगाने की कीमत देना अभी दूर की कौड़ी है। कार्यक्रम में तामिलनाडू व महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों ने कपास व चीनी सहित हर तरह की उपज के निर्यात खोलने की मांग रखी है।
हालांकि सम्मेलन में सांसद शरद पवार व नवजोत सिद्धू, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू सहित बड़ी संख्या में किसान हितैषी नेताओं के पहुंचने की संभावनाएं भी जताई जा रही थी।

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-दिसंबर में सर्दी तेज होने के साथ ही कट

-अभी आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन और अन्य इंडस्ट्री पर एक दिन का साप्ताहिक कट चालू

भूपेश चट्ठा पटियाला

बिजली पानी पर सरकारें बदलने वाले पंजाब में विधान सभा के चुनाव होने में चंद महीने शेष हैं जबकि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने में चंद दिन शेष रहते पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन को अपने बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन समझे जाने वाले थर्मल प्लांटों को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के चलते एक के बाद एक सभी को बंद करना पड़ेगा। पावरकाम की ओर से मरम्मत शुरू करते ही बिजली ने झटके देने शुरू कर दिए हैं।

पावरकाम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि 900 लाख यूनिट की मांग पर 825 की आपूर्ति है। दोनों में 75 लाख यूनिट का अंतर चल रहा है। हालांकि इसकी वजह पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया जा रहा है, जिसके आदेश के बाद बठिंडा के श्री गुरू नानक देव थर्मल प्लांट के एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। यूनिट के आयु पूरी करने के बाद से यह सीमा से अधिक प्रदूषण फैला रहा था।

कट फ्री धान का सीजन देने वाले पावरकाम को सर्दी की चिंता कुछ च्यादा बताई जा रही है। जिसके चलते इस साल तुलनात्मक रूप से प्लांटों की वार्षिक मरम्मत का कार्य जल्दी आरंभ भी कर दिया है। दिलचस्प है कि गेहूं की बिजाई के बाद दिसंबर अंत से शुरू होने वाला ये सिलसिला अक्सर मई अंत तक लटकता रहता है, लेकिन इस साल अब तक रोपड़ का एक यूनिट बंद कर मरम्मत की जा रही है। यह नवंबर अंत तक पुन: चालू हो जाएगा।

इसके अलावा पिछले डेढ़ साल से बंद चल रहा बठिंडा का पूर्ण जीर्णोद्धार पर गया एक अन्य यूनिट भी दिसंबर अंत तक अपनी बढ़ी क्षमता के साथ उत्पादन चालू कर देगा। सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से काम को दु्रत गति से निपटाने की हिदायत जारी हुए बताए जा रहे हैं। आम तौर पर 21 दिन चलने वाली मरम्मत को 18-19 दिनों में कर दिया जाए।

पंजाब में सर्दी के दिनों में बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन कहे जाने वाले थर्मल प्लांटों के मरम्मत पर जाने के साथ ही पंजाब सर्दियों में अन्य पहाड़ी राच्यों को बैंकिंग की बिजली भी जमा करवाता है। अभी यह आंकड़ा 125 लाख यूनिट है। दोनों तरफ से पड़े वजन के बाद आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन का और साधारण इंडस्ट्री पर एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश लगा दिया गया है।

पावरकाम प्रवक्ता कहते हैं कि आम उपभोक्ता व कामर्शियल पर कोई कट नहीं है। कृषि क्षेत्र को पहले एक दिन के अंतर पर आठ घंटे बिजली दी जा रही थी अब गेहूं के सीजन में हर रोज चार घंटे कर दी गई है। इंडस्ट्री की ओर से अब तक 'ओपनÓ के माध्यम से खरीदी जा रही सीधी बिजली अब पावरकाम के माध्यम से ली जा रही है। वे स्वीकार करते हैं कि सर्दी तेज होने के बाद मांग और बढ़ सकती है।

वहीं पावरकाम के डायरेक्टर उत्पादन जीएस छाबड़ा कहते हैं कि इस साल अच्छे मानसून के बाद सर्दी में देरी हुई है। जिसके चलते मांग में धान के सीजन के बाद तेज बढ़ोतरी नहीं हुई। यही वजह है कि किसी तरह का मांग आपूर्ति का अंतर च्यादा नहीं है। साथ ही वे प्रबंधन को चुनावों से च्यादा तरजीह देते हैं।

पटियाला में पंजाब की दूसरी घुड़दौड़, horse riding, race, breading


- हार्स स्पोर्टस एंड ब्रीडर्स सोसायटी पंजाब का आयोजन

- विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर करेंगी उदघाटन, विजेता को एक लाख रूपये

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला

पंजाब के आधुनिक खेल इतिहास में घुड़दौड़ का अध्याय जुडऩे के बाद हार्स स्पोर्टस एंड ब्रीडर्स सोसायटी पटियाला जिले के कल्लर भैणी गांव में घोड़ों की दूसरी रेस का आयोजन करने जा रही है।

शनिवार को होने वाली रेस पर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के बिजनेस मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर व एचएसबीएसपी के सदस्य सुमरिंदर सिंह सरां ने बताया कि राज्य में घोड़ों से संबधित खेलों को बढ़ावा देने व युवा प्रतिभाओं को आगे लाने और राष्ट्रीय पटल पर मुख्य धारा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। घोड़ों की सेहत दुरुस्त रखने और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले दो अन्य उद्देश्य स्वत: ही पूरे होंगे।

डकाला के पास स्थित गांव में सुबह नौ बजे शुरू होने वाली ये रेस 40 किलोमीटर की होगी और ये 20-20 किलोमीटर के दो चरणों करवाई जाएगी। रेस शुरू होने से पहले और 20 किलोमीटर का चरण समाप्त होने और रेस की समाप्ति पर घोड़ों का वेटरनरी चैकअप अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यदि किसी स्थिति में घोड़े की तबीयत या सेहत में गड़बड़ी है तो आगे दौड़ में अनुमति नहीं दी जाएगी।

विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर इस रेस का उदघाटन करेंगी। घुड़दौड़ क्षेत्र के अंतराष्ट्रीय स्तर के जज व सोसायटी के उपप्रधान कनर्ल सरप्रताप सिंह बताते हैं कि इससे घोड़ों की भारतीय नस्लों का संरक्षण करने में सहायता मिलेगी। हार्स ब्रीडिंग के स्तर उंचा उठाने और क्षेत्र में जागरुकता लाने का काम तेज हो जाएगा। वे कहते है कि पंजाब के अलावा राजस्थान व हरियाणा से 50-60 घोड़ों के इसमें भाग लेने की संभावना है। तीन इनामों में पहला एक लाख रूपये का, 51 हजार का दूसरा और 21 हजार का तीसरा इनाम रखा गया है। निशुल्क वेटरनरी और घोड़ों व राइडर के लिए खाने पीने की व्यवस्था के अलावा अन्य सहायता भी उपलब्ध करवाई जा रही है। वर्ष में दो बार ऐसे आयोजन किए जाएगें।

बासमती बढ़ी कीमत घटी, डाइवरसीर्फिकेशन को झटका, diversification, basmati, rice,

-केंद्र की नीति है अब बासमती नहीं आम धान आसानी से बिक रहा है: मंडी अधिकारी
-पिछले साल का बासमती अब भी व्यापारी के पास पड़ा है: राइस मिलर्स

भूपेश चट्ठा, पटियाला

चावल के मामले में पेट भरने व जीभ को स्वाद देने के साथ आपको सुगंधित खुशबू का अहसास देने वाला बासमती की आवक धान मंडियों में इस साल बढ़ी है लेकिन कीमत एक तिहाई तक गिर गई है। यानि खाने वालों की 'जरूरत के साथ इच्छाÓ पूरी करने वाला बासमती आने वाले सीजन 'किसान की जरूरतÓ और 'सरकार की डाइवरसीफिकेशन की इच्छाÓ पूरी नहीं कर पाएगा।

याद रहे कि धान की आम किस्मों करी तुलना में बासमती की बिजाई व रोपाई देरी से की जाती है और दस जून की बजाए जुलाई शुरू में आने वाली मानसून की बौछारों का इंतजार इसकी रोपाई कर लेती है। जिससे भूमिगत जल स्तर का नुकसान खासा कम रह जाता है।

पटियाला जिले की मंिडयों में जहां पिछले साल के पूरे सीजन में बासमती की आवक 60 हजार टन रही थी वहीं अब तक 61 हजार टन बासमती आ चुका है, जबकि धान की कुल औसत आवक का आंकड़ा पाने में एक लाख टन की अभी कमी है और सीजन के इन अंतिम दिनों में ज्यादातर धान बासमती अथवा इसके जैसी सुपरफाइन किस्मों की ही आवक होती है।

मंडी बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि सीजन में बासमती की कीमत 1575 से 1600 रूपये प्रति क्विंटल के बीच रही। इक्का दुक्का मामले में 1620 रूपये की बोली लगी है जबकि 2100 से 2200 रूपये की औसत बोली के बीच बिका बासमती बीते साल 2800 रूपये तक भी गया था।

दिलचस्प है कि पंजाब सरकार के मंत्रियों ने बासमती जैसी पीएयू-1121 किस्म के खिलाफ किसानों को खास 'जागरुकÓ भी किया था और ना लगाने की सलाह दी थी। याद रहे कि बासमती के अलावा दुनिया का ये सबसे लंबा चावल है और अरब देशों में खासा पसंद किया गया है।

इस साल हालत ऐसे हैं कि बासमती और 1121 लगभग एक जैसे दामों पर आ गए हैं जबकि सुपरफाइन किस्मों व 1121 का अंतर आठ सौ रूपये तक रहता रहा है।

जबकि मंडी बोर्ड के अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि केंद्र की नीति है, इसमें पंजाब कुछ नहीं कर सकता। पिछले साल बासमती व इसके जैसी किस्में बिक रही थी अब आम धान बिक रहा है। निजी खरीद काफी है। एफसीआई जैसे बड़े संस्थान को खरीद का मौका ही नहीं मिल पाया।

फैडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सैणी कहते हैं कि पिछले साल व्यापारी वर्ग ने बासमती की खरीद खुल कर की लेकिन इसे बेचने में खासी परेशानी आई। पिछले साल की बासमती भी कई व्यापारियों के पास अब भी पड़ी है। वहीं आम धान के धड़ाधड़ बिकने का कारण इसके निर्यात का खोला जाना है।

पनीर-साग के देश में मशरूम हुई मशहूर, diversification, mushroom, vegitables,


- कम जगह में अधिक उपज, अधिक कमाई

-वेजीटेरियन लोगों की पहली पसंद बना है सनैक्स

-एमएसपी नहीं पर विवाह सीजन में सौ रूपये किलो के पार रहती है

भूपेश चट्ठा, पटियाला

पंजाबी खाने का नाम आते ही सरसों का साग मक्की की रोटी के साथ दिखाई देने लगता है। इसके साथ ही दूध से बने खाने सामने आते है, कार्यक्रम महत्वपूर्ण हो तो पनीर जरूरी है। बात नॉन वेजीटेरियन की हो तो चिकन सामने आ जाता है, लेकिन इन दिनों पनीर-साग के देश में मशरूम मशहूर हो रही है।

किसान के लिए कम जगह में अधिक उपज और अधिक कमाई देने वाली मशरूम वेजीटेरियन लोगों की पहली पसंद बन गई है। एक मैरिज पैलेस के मालिक सतपाल पूनिया बताते हैं कि कुछ साल पहले तक सब्जी में एक इंग्रेडिएंट के रूप में प्रयोग होती रही मशरूम अब हर विवाह कार्यक्रम में विभिन्न सनैक्स के रूप में अनिवार्य रूप से रखी जा रही है।

दिलचस्प है कि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं है पर विवाह सीजन में सौ रूपये किलो के पार रहती है। व्यवसाय से जुड़े व विशेषज्ञ के रूप में पहचान बना चुके अश्विनी बातिश बताते हैं कि सर्दी के साथ ही मशरूम की बिजाई का सीजन शुरू होता है और बड़े फार्म तैयार बीज को रोपाई के लिए आगे देते हें। याद रहे कि गेहूं के दाने को ट्रांसप्लांट कर इसकी बिजाई की जाती है। मार्केटिंग की तय व्यवस्था तो नहीं है पर हर मशरूम उत्पादक का पहला लक्ष्य चंडीगढ़ के 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद दो सौ से च्यादा मैरिज पैलेस रहते हैं। जहां से नगद कमाई की जाती है।

मशरूम की खेती में लगे नरिंदर शर्मा बताते हैं कि 16 बाई 16 फीट के कमरे में सवा सवा फीट की दूरी पर दस रैक लगाने में की गई बिजाई से हर रोज 80 किलो से एक क्विंटल तक मशरूम पैदा की जा सकती है। हालांकि कटाई के मामले में यहां खासी दक्षता की जरूरत पड़ती है। आप अपनी मर्जी से एक रात पहले नहीं काट सकते। ऐसा करने की स्थिति में इसका रंग बिगड़ जाता है और नई उगने वाली लटक जाती है। ऐसे में इसकी कटाई सुबह करीब तीन बजे शुरू होती है और परिवार के सदस्य ही इसमें जुटते हैं और सुबह पांच बजे तक मंडी में भेज दी जाती है।

याद रहे कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मशरूम फार्म से 'तेगÓ ब्रांड बाजार में उतारा और टिन पैक में डिब्बा बंद की जिसे एक साल बाद तक भी प्रयोग किया जा सकता था।

दूसरी ओर डाइवरसीफिकेशन पर जोर देने वाले कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. बीएस सोहल कहते हैं कि इसकी बिजाई आप खेत में मोटर के कोठे से लेकर, ट्रैक्टर अथवा जीन्स रखने वाले हाल में कर सकते हैं। ऐसे स्थानों में किसान जमीन से आठ फीट उपर तक ही जगह का प्रयोग करता है, इसके उपर के स्थान पर मशरूम की खेती हो सकती है।

आए दिन एक्सीडेंट पर कोई मामला दर्ज नहीं, parali, accidents, cases

पराली को जलाए जाने से रोकने कानून बीते एक दशक से लगातार बताया जा रहा है, पर दिलचस्प है कि अभी तक धारा 144 लगाए जाने और पराली जलाने पर लगाए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद पराली जलाने वाले किसानों पर इस साल एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि पिछले साल जिले में इनकी संख्या 11 थी। मसला इस बार वोटों का बताया जा रहा है।
हाल ही में तीन बच्चे जिंदा जल गए आए दिन एक्सीडेंट होते हैं। सड़क किनारे जली पराली से उठा धुआं किसी को भी अंधा करने में सक्षम है।
जलती पराली पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डीएस गुरू कहते है कि किसान पर मामले दर्ज करना तो अंतिम विकल्प होना चाहिए बेहतर तो यह कि उसे प्रेरित किया जाए कि वो ऐसा ना करे। हालांकि पराली को लेकर बने कानून को और कड़ा करने अथवा किसी तरह का बदलाव करने पर टिप्पणी नहीं करते, कहते है कि जो है वो लागू रहेगा। धान की बिजाई रोपाई को नियंत्रित करने वाले सब सॉयल एक्ट के समान कड़ा कानून की संभावना पर चुनावी साल में कोई बोलने को तैयार नहीं है।


-पराली में आर्गेनिक तत्व कम और जहर ज्यादा

भूपेश चट्ठा, पटियाला

धान की फसल जल्द पक जाए तो अक्टूबर का शुरू नहीं तो मध्य तक बच्चों, बुजुर्गों और दमे-एलर्जी के मरीजों को खुली हवा में गैस चैंबर का सा अहसास होता है, लेकिन इस साल ये सिलसिला नवंबर में भी जारी है। इससे बचते तंदरुस्त कहे जाने वाले भी नहीं है आंखों में जलन, गले में खराश, जुकाम-खुजली तो आम हो जाता है। इन सब के पीछे कारण क्या है? यह भी सब को पता है कि खेतों में पराली जलाई जा रही है। इस पराली के साथ जल रहे केमिकल फर्टीलाइजर और पेस्टिसाइड ने इसके धुएं को इस कदर जहरीला बना दिया है कि बारूद का धुआं भी हलका लगने लगा है।

सोशल सांइसेज एंउड हेल्थ फोरम के डा. खोसला कहते है कि थोड़ी बहुत यह पहले भी जलती थी पर इतना बुरा हाल नहीं था कि आपको सांस लेने के लिए भी जगह की तलाश करनी पड़ती है। दोपहिया वाहन पर है तो सड़क युद्ध का मैदान नजर आती है और किसी काम को हाथ में लेते है तो आंख के साथ नाक भी टपकने लगती है। वे कहते है कि महत्वपूर्ण यह है कि जब गरीब बेघर तेज सर्दी से बचने के लिए घास फूस एकत्र कर अलाव तप रहा होता है तो आग में से एक भीनी सी खुशबू आ रही होती है। कुछ ऐसा ही अहसास गांव में चुल्हे पर पक रहे भोजन की बात हो या घर को धुंध कोहरे के दिनों में घर के आस पास पेड़ पौधों का कचरा जलाने की हो हमें धुआं परेशान करता। गोबर के उपले जलने को तो मेडिकेटिड धुएं तक का नाम दे उपचार तक करने के दावे होने लगते है।

वहीं लेखक केएस धालीवल कहते है कि आज पराली का नाम आते ही अस्थमे का तंदरुस्त हुआ मरीज भी दहल जाता है। एलर्जी की दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए तो दिवाली का सीजन ही पंजाब हरियाणा में जलने वाली पराली से निकलता है और साल भर की कमाई इन्हीं दो महीनों में हो जाती है। एंटी एलर्जी दवाओं से कुछ नहीं होने वाला बेहतर है कि किसान या तो पेस्टिसाइड व केमिकल फर्टीलाइजर का प्रयोग छोड़ दें या फिर पराली जलाना छोड़ दें। वे कहते है कि इसमें पौधे वाली बात ही नहीं रही। आर्गेनिक तत्व कम ओर जहर ज्यादा हो गया है।

दिलचस्प है कि पराली के स्मोग से परेशान लोगों ने भी एक नायाब तरीका तलाश लिया है वे डाक्टरों के पिछले सालों में लिखी पर्ची को किसी मंत्र की तरह अपने पर्स में रखते है और सांस के उखडऩे के पहले अहसास में ही दवा शुरू कर देते है। जुकाम और आंखों में जलन बर्दाश्त करने की बड़ों को आदत हो गई है कि इन दिनों म त्योहारों की तरह ये भी होना है। जबकि बच्चों के लिए कोई हल नहीं निकला है।

मुख्यमंत्री-मंत्रियों का शहर में आखिरी जमावड़ा, akali, politics, SAD,


-श्री आनंदपुर साहिब में सिख हैरिटेज व चपड़ चिड़ी स्मारक, कबड्डी फाइनल लुधियाना, मोहाली में एयरपोर्ट, शहीदी जोड़ मेला फतेहगढ़ साहिब व संगरूर में होंगे कार्यक्रम

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला

प्रदेश में विधान सभा चुनावों से पहले एतिहासिक शहर पटियाला में मौजूदा शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार का आखिरी शो शनिवार को होने जा रहा है। सरकार के इस जमावड़े में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दिन भर शहर में ही रहेंगे और उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा अकाली-भाजपाई मंत्रियों, विभिन्न बोर्डों, निगमों के चेयरमैन, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान व पूर्व प्रधान एक साथ दिखाई देने जा रहे हैं। संभव है कि शहर में ये वर्तमान सरकार का आखिरी जमावड़ा हो।

याद रहे कि अगले साल मार्च में नई विधान सभा का गठन होना है और संभव है कि फरवरी में चुनाव हों। इसके लिए दिसंबर में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जानी है। वर्तमान सरकार के पास बचे डेढ़ महीने में राच्य व राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों की लंबी फेहरिस्त है इसमें श्री आनंदपुर साहिब में सिख हैरिटेज व फतेहगढ़ साहिब के निकट चपड़ चिड़ी स्मारक, विश्व कबड्डी कप का फाइनल लुधियाना में, मोहाली में एयरपोर्ट का उदघाटन, शहीदी जोड़ मेला फतेहगढ़ साहिब व संगरूर में घल्लूघारा स्मारक के कार्यक्रम शामिल हैं।

ऐसे में स्व. करतार सिंह धालीवाल की बरसी पर पांच से सात अकाली-भाजपा के मंत्री, एसजीपीसी के प्रधान व धार्मिक नेताओं की उपस्थिति होगी दर्ज होना शहर का अंतिम बड़ा कार्यक्रम होगा। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढ़ींडसा, कृषि मंत्री सुचा सिंह लंगाह, सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों, पूर्व मंत्री व पार्टी महासचिव बलविंदर सिंह भूंदड़, एसजीपीसी की पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर, प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर, विक्रमजीत सिंह मजीठिया, भाजपा की ओर से अविनाश राय खन्ना, सतपाल गोसांई, मास्टर मोहन लाल जैसे नाम शामिल है। इसके साथ ही मुलाजिम भलाई विभाग, पनसीड, पनग्रेन इत्यादि सहित कई चेयरमैन शामिल होंगे।

वहीं जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन और पार्टी के एनआरआई विंग के प्रधान सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि उन्होंने सभी लोगों को आमंत्रित जरूर किया है पर पुष्टि सिर्फ मुख्यमंत्री की ही कर सकते हैं। हालांकि शेष गणमान्य व्यक्ति पूर्व में उनके मेहमान बनते रहे हैं। रखड़ा बताते हैं कि मुख्यमंत्री सुबह उनके यहां आएंगे और दोपहर के कार्यक्रम के बाद यहीं आराम करेंगे और शाम को पांच बजे हरपाल टिवाणा कला केंद्र का उदघाटन करेंगे।

सोने के रखवालों का शरीर हुआ मिट्टी, food, storage, grain, employee, fci, wheat,

-एफसीआई के गोदामों में काम करने वाले मजदूरों-कर्मियों का स्नायू तंत्र प्रभावित
-धरती पर, गेहूं की बोरी में, बोरियों के उपर, हवा में एयर चार्जिंग के लिए छिड़के रसायनों का असर

-मैलाथीन महीने में दो बार, डीडीवीपी 21 दिनों पर, डेल्टा मैथलीन तीन महीने पर और सल्फास सदा के लिए

भूपेश चट्ठा, पटियाला

अनाज के गोदामों में रखे गए सोने को संजोए रखने होने वाले रसायनों के छिड़काव ने इसके रखवालों का शरीर मिट्टी का बना दिया है। फूड कारपोरेशन आफ इंडिया सहित हर खरीद एजेंसी के गोदामों में रखी गई गेहूं से होने वाले प्रभाव से अंजान कोई नहीं है पर ईलाज के नाम पर भी च्यादा कुछ नहीं है।

गोदामों में रखी गई बोरियों में दवा डालने के अलावा इसकी जमीन व हवा को भी 'सुरक्षितÓ रखने के चक्कर में पूरा वातावरण जहरीला किया जाता है। एफसीआई के वीके बत्ता बताते हैं कि बोरी रखते ही इस पर डेल्टा मैथलीन का स्प्रे कर दिया जाता है। हर तीन महीने पर यह प्रक्रिया दोहराई जाती है। इसके तुरंत बाद खाली जगह में डीडीवीपी का छिड़काव होता है, एयर चार्जिंग के नाम पर किसी पतंगे को भी ना फटकने देने वाला यह स्प्रे 21 दिनों के अंतराल पर रिपीट होता है। हवा में उड़ती 'भुंडीÓ, 'भमक्कड़Ó इस वायु के संपर्क में आते ही जमीन पर ऐसे गिरते हैं मानों किसी ने एंटी एयरक्राफ्ट गन से गिराया हो।

इन सबके बावजूद यदि कीड़ा लगने की संभावना होने पर एल्मोनियम फास्फेट का प्रयोग होता है। ये वो गेहूं की बदनाम गोली है जिसे सल्फास कहते हैं और पंजाब में खुदकुशी करने वालों में प्रचलित रही है। वीके बत्ता बताते हैं कि इससे बीमारी की बात ना करें ये तो जान लेती है, गोली पानी के संपर्क में आते ही जहरीली गैसें छोड़ती है।

बात यहीं समाप्त नहीं धरती के नीचे से कार्रवाई करने वाले दीमक अथवा दाने में पैदा होने वाली 'सुसरीÓ के लिए मैलाथीन का स्प्रे महीने में दो बार जरूरी है, तभी गेहूं को बचाया जा सकता है कीट पतंगों और कीड़े मकौड़ों की जान लेने वाले ये रसायन इंसानों के लिए भी कम घातक नहीं हैं।

इसी क्रम में जतिंदरवीर सिंह कहते हैं कि कर्मियों को नियमित खांसी आम है, दमा और हाईपर टेंशन से शायद ही कोई बचा हो, लंबा समय रहने पर अस्थमा व सांस के रोग घेर लेते हैं। सरकार के पास दस्ताने व मास्क देने से च्यादा कुछ नहीं है। जबकि जालंधर जैसे मुख्य शहरों को छोड़ दें तो अन्य जगहों पर ऐसे अस्पतालों से ही कोई समझौते नहीं किए गए हैं जिसके तहत कर्मी जा कर चिक्तिसा जांच करवा सकें।

वहीं कम्यूनिटी मेडिसीन में एमडी और एपिडमोलोजिस्ट डा. अमर सिंह आजाद कहते हैं कि इन रसायनों से इंसान की बीमारी से लडऩे की क्षमता ही खत्म हो जाती है। जुकाम से लेकर कैंसर तक की हर बीमारी की पकड़ में ऐसा व्यक्ति जल्दी आता है। प्राकृति से हमें तोहफे में मिले इम्यून सिस्टम में कमजोरी आती जाती है। जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है।

पंजाब के कन्या भ्रूणों की हरियाणा में हत्या, female feticide, punjab-haryana,

पंजाब ने लिखा हरियाणा को, विभाग करेगा स्टिंग आपरेशन

भूपेश चट्ठा, पटियाला

पंजाब हरियाणा सीमा पर दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में 'अस्थाई नर्सिंग होमÓ के 'आपरेशन थियेटरोंÓ में हो रही भ्रूण हत्याओं पर पंजाब की ओर से हरियाणा को आगाह किया गया है और पंजाब ऐसे ही क्षेत्रों में स्टिंग आपरेशनों की तैयारी भी कर रहा है।

चीफ मेडिकल अफसर वरिंदर सिंह मोही कहते हैं कि उन्होंने हरियाणा राच्य की सीमा के भीतर हो रही भ्रूण हत्याओं पर अपने विभाग के अधिकारियों के माध्यम से हरियाणा सरकार को लिख भेजा है कि अंबाला व कैथल जिलों में पंजाब से गर्भवती महिलाएं जा कर अजन्मी कन्याओं की हत्याएं करवा रही हैं।

2006-07 में पंजाब-हरियाणा सीमा के निकट पातड़ां कस्बे में एक सौ से अधिक कन्या भ्रूणों को एक नर्सिंग होम के निकट कुएं में से बरामद किया गया था। उक्त कार्य को अंजाम देने वाले डा. मोही ने 'दैनिक जागरणÓ के सवाल पर कहा कि जानकारी देने वाले को प्रशस्ति पत्र के अलावा चार हजार रूपये नगद और स्टिंग आपरेशन में साथ देने वाली तीन से चार महीने की गर्भवती महिला के लिए 20 हजार रूपये का ईनाम तय किया गया है।

याद रहे कि पीएनडीटी एक्ट लागू करवाने में पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नि डा. नवजोत कौर ने भी डम्मी के रूप में कई स्टिंग आपरेशनों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है।

-हरियाणा सीमा पर गुप्त व अस्थाई ठिकानों पर हो रहा है लिंग परीक्षण टेस्ट

-पांच हजार से दस हजार के बीच पहुंचा परीक्षण टेस्ट, दलालों की चांदी

विनय शौरी, पटियाला

भ्रूण हत्या पर कानून की सख्ती और स्वास्थ्य विभाग की चौकसी से बेशक सरकार सहित आला
अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अब पंजाब के कन्या भ्रूण की हत्या हरियाणा के गुप्त ठिकानों पर बने अस्थाई अल्ट्रा साउंड सैंटरों पर होने लगी है। दिलचस्प है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को भी है, लेकिन सही सबूत या गवाह न होने की वजह से विभागीय अधिकारी खुद को असमर्थ मान रहे हैैं।

राज्य भर में लिंग परीक्षण करवाने को लेकर बढ़ी सख्ती के बाद से लिंग परीक्षण करवाने के इच्छुक व्यक्ति दलालों के माध्यम से हरियाणा सीमा से सटे गुप्त ठिकानों पर बने अस्थाई अल्ट्रासाउंड सेंटरों की सेवाएं अच्छे खासे दामों में ले रहे हैैं। सुरक्षा के लिहाज से हरियाणा के शहरों की बजाए ग्रामीण इलाकों में ठिकाने बनाकर लिंग परीक्षण करते हुए कन्या भ्रूण की हत्या करने का काम कर रहे हैैं। इकट्ठा की गई जानकारी के मुताबिक पंजाब के कई डाक्टर हरियाणा के डाक्टरों के साथ मिलकर इस गौरख धंधे को अंजाम दे रहे हैैं। गर्भवती महिला को अस्थाई अल्ट्रासाउंड सेंटर तक ले जाने और लाने के बीच लिंग परीक्षण का परिणाम देते हुए कन्या भ्रूण की हत्या तक को इतना गुप्त रखा जाता है कि मरीज और उसके पति के अतिरिक्त किसी अन्य को जानकारी देने से पूरा तरह से मना किया जाता है।

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक लिंग परीक्षण करने वाले कई डाक्टर तो इस सुविधा को घर बैठे-बिठाए ही देने में सक्षम हैैं। जैसी सुविधा वैसे दाम के फार्मूले पर काम करते हुए ऐसे डाक्टर 10 से 15 हजार रुपये की फीस संबंधित ग्राहक से बटोर रहे हैैं। ग्राहकों की संख्या को बढ़ाने के लिए डाक्टरों ने कई एजेंट व बिचोलिए भी काम पर लगाए हुए हैैं। इनमें सरकारी अस्पतालों के दर्जा चार कर्मचारियों से लेकर लैब अटेंडेंट तक के कर्मचारी शामिल हैैं।

डीएसपी डिटेक्टिव मंजीत सिंह बराड़ के मुताबिक उक्त मामले की जानकारी उनके पास है, लेकिन बिना सबूत और शिकायत के पुलिस दूसरे राज्य में कार्रवाई कैसे कर सकती है। डीएसपी बराड़ के मुताबिक ऐसे किसी बड़े मामले को बेनकाब करने के लिए ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली दाईयों से संपर्क कर उनसे मुखबिरी करवाई जा रही है।

 प्रो. एचपीएस वालिया

अजन्मी बच्चीयों के भोग डाल कर किया जागरुक, लगाया पंघूड़ा

2007 से अब तक आठ अनचाहे बच्चों जिनमें सात लड़कियां और एक अपाहिज लड़के को मां बाप और अच्छा घर कानूनी रूप से दिलवा चुके पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पत्रकारिता एंव जन संचार विभाग के पूर्व मुखी डा. हरजिंदर पाल सिंह वालिया भ्रूण हत्या के पीछे आर्थिक कारण ज्यादा मानते हैं कहते हैं कि ऐसे में इसकी रोकथाम का तरीका भी यही है कि भ्रूण हत्या करने वाले की आर्थिक परेशानी हल कर दो। उनकी संस्था ग्लोबल पंजाब फाउंडेशन ने हर तरह से यही प्रचार किया है कि कन्या भ्रूण की हत्या करने की बजाए उनके पंघूड़े में डाल दो, वे कानूनी रूप से उचित व्यक्ति की गोद तक पहुंचा देंगे।

याद रहे कि प्रो. वालिया ने ही कुछ साल पहले पातड़ां के एक निजी क्लीनिक के निकट सौ से अधिक भ्रूण के अवशेष एक कुंए में से मिलने के बाद अजन्मी बच्चीयों के नाम श्री अखंड पाठ साहिब के भोग समारोहों की शुरुआत पातड़ां से की थी, संत कंबली वाले गुरूद्वारा साहिब और टिकाना भाई राम किशन इत्यादि से होता हुआ ये जागरुकता अभियान कई चरण पर कर चुका है और सर्दियों में विदेशों से आने वाले एनआरआई इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने लगे हैं। फांउडेशन का पंगुड़ा आजकल केके इंटरनेशनल स्कूल में लगा है।
 डा. हरशिंदर कौर

326 लड़कियों की हर माह फीस जमा

भ्रूण हत्या को नस्ल मिटाने बराबर बता, भ्रूण हत्या पर सख्ती में डाक्टर के साथ मां-बाप को कड़ी सजा देने वाले इंटनेशनल कानून की वकालत कर रही डा. हरशिंदर कौर कहती है कि पीएनडीटी एक्ट पूरी तरह से असफल रहा है। ये बीमारी पंजाब में ही नहीं एनआरआई पंजाबियों में भी फैल चुकी है और पूरे एशिया में चलन ढ़ीले कानून के चलते बढ़ा है।

यूएनओ में भारत की ओर से मुद्दा उठाने के बाद सुर्खियों में आई डा. हरशिंदर कौर ने भ्रूण हत्या, बच्चों व महिलाओं की समस्याओं पर 22 किताबें भी लिखी हैं। उन्होंने 20 लड़कियों की स्कूल कालेज की फीस जमा करवाने से शुरुआत की थी, फिर एनआरआई लोगों के समर्थन से बना ट्रस्ट आज 326 लड़कियों की हर महीने चैक से उनके स्कूल अथवा कालेज के अकाउंट में फीस के पैसे जमा करवाता है।



 बाबा चमकौर सिंह

सो क्यूं मंदा आखिए जित जम्में राजान



सेवा पंथी संप्रदाय के टिकाना भाई राम किशन के मुख्य सेवादार बाबा चमकौर सिंह ने पांच साल पहले प्रदेश में पंघूड़ा प्रथा आरंभ की थी किन्हीं कारणों के चलते ये एक बार बंद हो गई पर अब इसी साल के अंत तक एक बार फिर शुरू करने जा रहे हैं। कहते हैं कि हमारे सामाजिक ढ़ांचे की वजह से भ्रूण हत्याएं हो रही है। हम भ्रूण तो संभाल नहीं सकते लेकिन नवजात शिशु को संभाल सकते हैं। इसलिए पंघूडे को भ्रूण व शिशु संभाल केंद्र का नाम रखा गया कि जो अपनी बेटी को नहीं रख सकते वे इस पंघूड़े में छोड़ जाएं, हम सारी व्यवस्था करवा देंगे। बाबा चमकौर सिंह कहते हैं कि जब गुरू साहिबान ने पांच सौ साल पहले ही महिलाओं के बारे में कह दिया था कि 'सो क्यूं मंदा आखिए जित जम्में राजानÓ।



Wednesday, 2 November 2011

अगले सीजन के लिए पावरकॉम ने कमर कसी, powercom, save electricity,


  66 लाख यूनिट बिजली अन्य राज्यों व ट्रेडर्स के पास जमा करवाई
  रोपड़ का एक यूनिट अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के लिए बंद किया
भूपेश चट्ठा, पटियाला अच्छे मानसून के बाद मौसम के एक बार फिर पक्ष में आते ही पंजाब ने अगली गर्मियों व धान के अगले साल के सीजन के लिए बिजली खरीद प्रबंध शुरू कर दिए हैं। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि पावरकॉम बिना कोई कट लगाए अगले साल के बिजली प्रबंध कर रहा है।
 इसी कड़ी में बैंकिंग के माध्यम से 66 लाख यूनिट बिजली अन्य राज्यों व ट्रेडर्स के पास जमा करवाई गई है। इसमें से पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल को सीधे 36 लाख यूनिट बिजली दी गई है। दिलचस्प है कि एक ही दिन में बिजली देने का यह आंकड़ा 31 अक्टूबर को दी 20 लाख यूनिट से बढ़ा है।
 इसी प्रकार ट्रेडर्स के माध्यम से की गई बैंकिंग में करीब 32 लाख यूनिट बिजली के निर्यात किए गए हैं। यहां भी एक रोज पहले तक मात्र आठ लाख यूनिट ही बिजली दी जा रही थी। हालांकि रणजीत सागर बांध और अन्य पनबिजली उत्पादन केंद्रों से दी जाने वाली रायल्टी के तहत ढ़ाई लाख यूनिट बिजली देनी शुरू कर दी है। प्रदेश में बिजली की मांग में हर रोज किंतु हल्की गिरावट दर्ज की जा रही है। एक दिन पहले 958 लाख यूनिट की खपत अब कम हो कर 947 लाख यूनिट पर आ गई है। 
पंजाब लंबे समय के खरीद समझौतों अधीन 293 लाख यूनिट की खरीद भी जारी रखे हुए है। दूसरी ओर, जनवरी तक प्रदेश के थर्मल प्लांटों की लटकती रहने वाली अनिवार्य वार्षिक मरम्मत भी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले रोपड़ के श्री गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट के दो नंबर यूनिट को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के लिए बंद किया गया है।

Diwali is less polluted this year


Patiala(29th Oct, 2011): The ambient air quality data of Punjab Pollution Control Board has  established that Diwali is less polluted this year. This significant improvement in air quality is due to pro-active measures taken by the Board and more and more people taking a green pledge this year.
            Disclosing this to press Dr. Babu Ram Member Secretary of Punjab Pollution Control Board said that as usual the Ludhiana is  more polluted followed by Jalandhar, Amritsar, Mandi Gobindgarh & Patiala w.r.t Respirable particulate matter, Suplhur dioxide & Oxide of Nitrogen. Elaborating the results, he said that RSPM level in the Residential areas   were analyzed to be 365,245,349,287& 244 µgm/m3 for Ludhiana, Jalandhar, Amritsar, Mandi Gobindgarh & Patiala respectively where as it was 367,253,462,298 and 260 µgm/m3r respectively during last year Diwali. The trend in commercial areas indicate that Ludhiana is more  polluted with RSPM level was upto 489 µgm/m3whereas Patiala is least polluted where RSPM level was 234 µgm/m3 as against the figure of 511 µgm/m3   and 268 µgm/m3     of the two cities last year. Similarly Sox for Ludhianawas 28 µgm/m3     as compared to 38 µgm/m3     of last year where as NOx has been found to be 46 as against 53 µgm/m3    last year. Same trend was found in other cities also. Most interesting feature is related to Golden Temple Complex where the RSPM level has been reduced to 401 as compared to last year figure of 462 µgm/m3 .
            Similarly the maximum noise level in the residential area was  85.3 dB(A)  at Patialawhere as it was 69.1 dB(A) at Amritsar. In sensitive area Ludhianawas most noisy having noise level 77.8 dB(A)  whereas it was 54 dB(A) at Jalandhar. Patiala again was most noisy in commercial areas where noise level was 85.7 dB(A) and Jalandhar was least noisy where the noise level was 61.5 dB(A). This shows that less fire crackers but the same were of higher noise level were cracked in Patiala.  
            Dr. Babu Ram said that the green pledge taken by the student and the pro-active media campaign launched by the Board played a vital role in reducing the ambient air pollution considerably as compared to the previous years. Air pollution load from crackers was lesser this year as per the sale statistics which show a drastic fall in the sale figures.
            Sh K.S. Pannu Chairman of the Board thank the SGPC for showing the exemplary way of Environmental Protection by the reducing the time of Aatashbazi at Golden Temple Complex. Mr. Pannu also thank the children of the state for saying not to crackers.
            Sh Vishwajeet Khann Secretary Environment Govt. of Punjab also thank the people of Punjabfor realizing there responsibility towards Environment and encouraging their children not fire the crackers. He hoped that the trend shall further pick up the pace in the state in the year to come.