- कम जगह में अधिक उपज, अधिक कमाई
-वेजीटेरियन लोगों की पहली पसंद बना है सनैक्स
-एमएसपी नहीं पर विवाह सीजन में सौ रूपये किलो के पार रहती है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाबी खाने का नाम आते ही सरसों का साग मक्की की रोटी के साथ दिखाई देने लगता है। इसके साथ ही दूध से बने खाने सामने आते है, कार्यक्रम महत्वपूर्ण हो तो पनीर जरूरी है। बात नॉन वेजीटेरियन की हो तो चिकन सामने आ जाता है, लेकिन इन दिनों पनीर-साग के देश में मशरूम मशहूर हो रही है।
किसान के लिए कम जगह में अधिक उपज और अधिक कमाई देने वाली मशरूम वेजीटेरियन लोगों की पहली पसंद बन गई है। एक मैरिज पैलेस के मालिक सतपाल पूनिया बताते हैं कि कुछ साल पहले तक सब्जी में एक इंग्रेडिएंट के रूप में प्रयोग होती रही मशरूम अब हर विवाह कार्यक्रम में विभिन्न सनैक्स के रूप में अनिवार्य रूप से रखी जा रही है।
दिलचस्प है कि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं है पर विवाह सीजन में सौ रूपये किलो के पार रहती है। व्यवसाय से जुड़े व विशेषज्ञ के रूप में पहचान बना चुके अश्विनी बातिश बताते हैं कि सर्दी के साथ ही मशरूम की बिजाई का सीजन शुरू होता है और बड़े फार्म तैयार बीज को रोपाई के लिए आगे देते हें। याद रहे कि गेहूं के दाने को ट्रांसप्लांट कर इसकी बिजाई की जाती है। मार्केटिंग की तय व्यवस्था तो नहीं है पर हर मशरूम उत्पादक का पहला लक्ष्य चंडीगढ़ के 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद दो सौ से च्यादा मैरिज पैलेस रहते हैं। जहां से नगद कमाई की जाती है।
मशरूम की खेती में लगे नरिंदर शर्मा बताते हैं कि 16 बाई 16 फीट के कमरे में सवा सवा फीट की दूरी पर दस रैक लगाने में की गई बिजाई से हर रोज 80 किलो से एक क्विंटल तक मशरूम पैदा की जा सकती है। हालांकि कटाई के मामले में यहां खासी दक्षता की जरूरत पड़ती है। आप अपनी मर्जी से एक रात पहले नहीं काट सकते। ऐसा करने की स्थिति में इसका रंग बिगड़ जाता है और नई उगने वाली लटक जाती है। ऐसे में इसकी कटाई सुबह करीब तीन बजे शुरू होती है और परिवार के सदस्य ही इसमें जुटते हैं और सुबह पांच बजे तक मंडी में भेज दी जाती है।
याद रहे कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मशरूम फार्म से 'तेगÓ ब्रांड बाजार में उतारा और टिन पैक में डिब्बा बंद की जिसे एक साल बाद तक भी प्रयोग किया जा सकता था।
दूसरी ओर डाइवरसीफिकेशन पर जोर देने वाले कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. बीएस सोहल कहते हैं कि इसकी बिजाई आप खेत में मोटर के कोठे से लेकर, ट्रैक्टर अथवा जीन्स रखने वाले हाल में कर सकते हैं। ऐसे स्थानों में किसान जमीन से आठ फीट उपर तक ही जगह का प्रयोग करता है, इसके उपर के स्थान पर मशरूम की खेती हो सकती है।
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