Sunday, 20 November 2011

एक मंच से अलग सुरों में बोली, परनीत व हरसिमरत, farmer, confrence, politics,


...किसान सम्मेलन

भूपेश चट्ठा, पटियाला
कंसोर्टियम आफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित किए गए सम्मेलन में एक ही मंच से और एक ही मुद्दे पर विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर और सांसद हरसिमरत कौर बादल अलग अलग सुरों में बोली हैं। हालांकि दोनों ने ही अपनी अपनी सरकारों का बचाव करने और दूसरों को लपेटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
कंसोरटियम के आठवें सम्मेलन में कांग्रेस से सांसद परनीत कौर ने जहां खुद को किसान की बेटी बता इस मंच से राजनीतिक लाभ ना लेने की बात कह पंजाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में किसान हित में लिए गए निर्णय कि आठ घंटे मुफ्त व निर्विघन बिजली देने के अलावा किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज को 14.5 फीसदी से कम करवा 11 फीसदी पर लाने के लिए पीठ ठोकी और मीडिया को भी 'निर्देशितÓ कर दिया कि यहां से जाने वाला संदेश 'राजनीतिकÓ नहीं होना चाहिए। परनीत कौर ने जहां खुद को एक पार्टी की सदस्य व सरकार में होने के साथ अप्रत्यक्ष रूप से अपना एजेंडा रखा और मंच से कहा कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर इस कमेटी के लोगों को मिलने का समय एक सप्ताह में दिलवाएंगी। अर्थशास्त्री व राज्य सभा सदस्य एमएस स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करने प्रति विचार विमर्श करवाया जाएगा।
वहीं शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने जहां खुद को कृषि से जुड़ा होने हवाला दे किसानों के मंच से कांग्रेस व केंद्र को जमकर खरी-खरी सुनाई। संसद में अपनी ओर से उठाए गए किसानों के मुद्दों के साथ ही आंकड़ों के परिपेक्ष्य में हरसिमरत बादल ने कहा कि केंद्र जिन योजनाओं को अपनी बताता है वो पंजाब के पैसे से ही चल रही हैं। जितना टेक्स पंजाब से जाता है उसका 1.3 फीसदी ही पंजाब को अपने राज्य में विकास करने के लिए केंद्र लौटाता है। अगर दस फीसदी भी आ जाए तो पंजाब के हालातों में जमीन आसमान का अंतर होगा।
हरसिमरत ने सीधा हमला कर कहा कि देश का 1.98 फीसदी रकबे वाला पंजाब 60 फीसदी लोगों का पेट भी रहा है और केंद्र में ऐसे संस्थान है जो अतिरिक्त बफर स्टाक को संजोने में 27 हजार कारोड़ रूपये सालाना की दर से खर्च कर रहे हैं। जबकि 22 करोड़ लोग भूखे सोते हैं और सात हजार की हर रोज मौत हो रही है।
 इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि परनीत कौर ने बाहर निकलते ही प्रधानमंत्री से मिलवाने के सवाल पर कह दिया कि 'इसकी कोई समय सीमा नहीं है...कोशिश करते हैं...चार दिन तो नोटिस के ही हैंÓ। जबकि हरसिमरत ने कहा कि 'इनकी सरकार है ये लोग टिकट मांगने तो एक मिनट में मिल लेते हैं किसानों के मामले में आज तक समय नहीं मिला और आगे भी ऐसा ही चलेगाÓ।
दूसरी ओर केंद्रीय लाइब्रेरी में आयोजित किए गए सम्मेलन में प्रधान सतनाम सिंह बहरू ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में किसान चार से पांच दिन की विशेष चर्चा स्वामीनाथन की रिपोर्ट व किसानों के अन्य मुद्दो पर करवाने की मांग कर रहे हैं। चाहते हैं कि सत्ताधारी और विपक्ष दोनों के सांसद किसानों के मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
महा सचिव पी चैंगल रेड्डी ने बताया कि आंध्र प्रदेश में एक लाख किसान खेती करना छोड़ गए हैं, क्योंकि गेहूं में ही दस हजार रूपये प्रति एकड़ का सालाना नुकसान हो रहा है।
 राजस्थान के किसान नेता कृष्ण कुमार ने कहा कि सरकार आज किसान केच्बच्चे को कम पौष्टिक आहार मिलने का तर्क दे मिड डे मील के नाम पर हाथ में कटोरा पकडऩे की आदत डाल रही है। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के योगेश दाहिया ने किसानों को मुआवजा देने के तरीके पर सवाल उठाया और कहा कि गैस पाइप लाइन बिछानी हो या बिजली के खंबे लगाने हो कंपनियां पेड़ कटने से नुकसान की भरपाई मात्र भी नहीं करती पेड़ लगाने की कीमत देना अभी दूर की कौड़ी है। कार्यक्रम में तामिलनाडू व महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों ने कपास व चीनी सहित हर तरह की उपज के निर्यात खोलने की मांग रखी है।
हालांकि सम्मेलन में सांसद शरद पवार व नवजोत सिद्धू, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू सहित बड़ी संख्या में किसान हितैषी नेताओं के पहुंचने की संभावनाएं भी जताई जा रही थी।

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