-पांच फीसदी बढ़ी बिजली की मांग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की सरकार आने के बाद आ रहे पहले धान व गर्मियों के सीजन में बिजली की कमी रहनी तय है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से लाए गए अनुमानों अनुसार ये आंकड़ा 27.59 फीसदी तक पहुंच सकता है।
उत्तर भारत में यदि मौसम ठीक ठाक रहता है तो भी बिजली की मांग इस बार पहली बार 11 हजार मेगावाट का आंकड़ा छू जाएगी। पिछले साल बिजली की अधिकतम मांग 10471 मेगावाट तक पहुंची थी। ऐसे में प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग में पांच फीसदी की बढ़ोतरी होनी तय मानी जा रही है। हालांकि राज्य के पास सभी संसाधनों से कुल उपलब्ध बिजली का आंकड़ा 7600 मेगावाट से ज्यादा नहीं हो पा रहा।
पीएसपीसीएल के अधिकारियों अनुसार 3400 मेगावाट की कमी पूरी करने कम से कम तीन घंटे के कट लगने तय हैं। मानसून के आने के बाद और धान को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत वाले दिनों में बिजली की मांग भी सबसे ज्यादा रह सकती है। जुलाई महीने में बिजली की औसत मांग 1959 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है। जबकि कुल औसत उपलब्धता 1762 लाख यूनिट ही रहे पाएगी।
पीएसपीसीएल की ओर से पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास दायर की गई बिजली कट लगाने की अनुमति याचिका में जहां तीन घंटे के बिजली कट घरेलू उपभोक्तओं पर लगाने की बात कही गई है वहीं इंडस्ट्री पर अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश लागू कर करीब दो सौ लाख यूनिट का अंतर पूरा करने की बात कही गई है।
प्रदेश में बिजली की मांग दस जून के बाद से तेजी से बढ़ेगी। इसी दिन से धान की फसल को सिंचाई के लिए बिजली देनी है और इसी दिन से बिजली कटों का सिलसिला तेज होगा हालांकि पावरकाम ने दस जून से ही अन्य राज्यों व केंद्र से बिजली खरीदने के शार्ट टर्म समझौते किए हैं। फिर भी बिजली की औसत मांग राज्य में पूरे सीजन के दौरान 1018 लाख यूनिट से 1959 लाख यूनिट के बीच रहेगी। ऐसे में मांग व आपूर्ति के बीच अंतर 20 लाख यूनिट से 200 लाख यूनिट के बीच रहेगा।