Wednesday, 21 March 2012

लगेगा बिजली का झटका, वो भी जोर से, electricity will be costlier in Punjab


-पावरकाम ने मांगी 55 फीसदी की शुल्क बढ़ोतरी, आधा बढऩा लगभग तय
-बीते साल 18.37 की तुलना में उपभोक्ता का बिल 9.19 फीसदी बढ़ा था -2009-10 में भाजपा ने रुकवाई थी 8.4 फीसदी की बढ़ोतरी
-घाटा 2651.51 करोड़ रूपये से बढ़ कर 8983 करोड़ रूपये के पार गया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सत्ता में आई शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने पहले बजट में एक अप्रैल से जनता को धन्यवाद स्वरूप पेट्रोल से वेट कम कर राहत देती हैं या नहीं लेकिन इसी तारीख से राज्य में वोटरों (अब उपभोक्तओं) को बिजली का झटका लगना तय है। यह झटका भी जोर से लगेगा इसमें भी संदेह नहीं होना चाहिए।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास अगले वित्तिय वर्ष की आमदन व खर्च की भेजी गई एन्वल रैवेन्यू रिपोर्ट, एआरआर में बिजली शुल्क में 55 फीसदी की बढ़ोतरी मांगी गई है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि पीएसईआरसी एक सप्ताह के भीतर ही बिजली दरों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है और ये मांगी गई बढ़ोतरी से  आधा शुल्क बढ़ा सकता है। शेष राशि के लिए पावरकाम को खर्च कम करने के लिए निर्देशित कर सकता है।
पारवकाम ने एआरआर में वर्ष 2012-13 के लिए अनुमानित खर्च का आंकड़ा 20415.52 करोड़ बताने के साथ ही घाटा 8983 करोड़ रूपये आंका गया है। पावरकाम के मुख्य खर्च में 7207.38 करोड़ बिजली की खरीद व 4171.13 करोड़ कोयले व अन्य ईंधन की खरीद शामिल है।
उल्लेखनीय है कि पावरकाम का घाटा एक साल पहले तक 2651.51 करोड़ रूपये था। इसमें भी 241 करोड़ 2009-10 के और 291 करोड़ रूपये 2010-11 के हैं। बीते साल पावरकाम ने 18.37 फीसदी की बढ़ोतरी मांगी थी जबकि पीएसईआरसी ने बिलों में औसत वृद्धि 9.19 फीसदी करते हुए पावरकाम को 1325.76 करोड़ की राहत दे दी। यह वृद्धि घरेलू, इंडस्ट्री, कृषि व कामर्शियल सभी पर लागू की गई। साथ ही पावरकाम को सालाना खर्च 18950 करोड़ से कम करते हुए 15504 करोड़ पर लाने को  कह दिया।
दिलचस्प है कि वर्ष 2009-10 में हुई बढ़ोतरी भाजपा ने रुकवाई थी। तब 8.4 फीसदी की घरेलू उपभोक्तओं पर बढ़ोतरी को किसानों की सबसिडी के साथ ही रख दिया गया। वर्तमान में इंडस्ट्री से 4.47 रूपये प्रति यूनिट से 4.95 रूपये की दर से बिजली शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा आठ पैसे ईंधन पर सरचार्ज के, 13 पैसे टैक्स के और 10 पैसे चुंगी के हैं। घरेलू की दरें इससे कम और कामर्शियल की इससे ज्यादा हैं। लेकिन संगठित सेक्टर होने व खपत इसी क्षेत्र में ज्यादा है और मंहगाई भी यहीं से बढ़ती है।

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