-26-26 लाख रूपये की धरोहर राशि छोड़ कर रहे प्राइम प्रापर्टी को सरेंडर
-एक साल पहले हुए नीलामी के बाद पूडा को पहली किश्त ही जमा नहीं करवाई
-श्री दुख निवारण साहिब से मिनी सचिवालय रोड पर कटे थे 101 गज के 21 प्लाट
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राजनीतिक सत्ता में आपेक्षित बदलाव ना हो तो अर्थव्यवस्था डगमगाने लगती है। पंजाब विधान सभा चुनावों के परिणाम पटियाला के प्रापर्टी डीलरों की अपेक्षाओं, अनुमानों और अटकलों पर खरे नहीं उतरे तो जमीन जायदाद का अर्थशास्त्र गड़बड़ा गया और प्रापर्टी के दाम अर्श से फर्श पर आ गए हैं। चुनाव परिणाम आने के पहले पखवाड़े में ही बाजार से खरीददार गायब हो गए और सौदे सरेंडर होने लगे हैं।
आलम ये है कि एक साल पहले लंबी जदेजहद व नीलामी में पूरे मोल भाव कर जो प्रापर्टी खरीदी गई अब उसे 26-26 लाख रूपये की धरोहर राशि छोड़ कर सरेंडर किया जा रहा है। पंजाब अर्बन डेवलेपमेंट एंड प्लानिंग अथार्टी, पूडा की ओर से एक साल पहले 25 मार्च को गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब से मिनी सचिवालय की ओर जाने वाली रोड पर देवीगढ़ डिवीजन के काटे गए कामर्शियल प्लाट करोड़ों से कोडियों पर आ गए है। पूडा के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि 101 गज के शो रूम के प्राइम प्रापर्टी के 21 प्लाटों की नीलामी की गई। इनमें से दो लोगों ने 15 मार्च को प्रार्थना पत्र दे कर प्रापर्टी औपचारिक रूप से कह दिया कि उन्हें प्रापर्टी नहीं चाहिए। तीन अन्य भी ऐसी ही इच्छा जता चुके हैं जबकि पूछताछ करने वालों की संख्या एक दर्जन के पार बताई जा रही है।
दिलचस्प है जो जमीन एक साल पहले दो से सवा दो करोड़ के बीच नीलामी में बिकी थी वो एक साल में बेकार की क्यों हो गई? पूडा की नीलामी के बाद पहली बार में 25 फीसदी राशि जमा करवानी होती है और इसके बाद ज्यादा से ज्यादा चार किश्तों में शेष राशि जमा करवानी होती है। इन प्लाटों की 15 मार्च को पहली किश्त दी जानी थी। जिसे कुछ लोग पूरा कर पाने की स्थिति में नहीं हो पाए और आगे सौदे हो नहीं सके। ऐसे में पूडा 26 लाख रूपये की कटौती कर बाकी रकम लौटाएगी।
याद रहे कि ऐसी प्रापर्टी पहले तीन साल में ट्रांसफर नहीं हो सकती और सभी किश्तें जमा होने के बाद रजिस्ट्री करवा कर ही अगले खरीददार को बेची जा सकती है। इस पर भी खासा बड़ा शुल्क लगना तय होता है। पूडा के ही एक वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि नीलामी में वास्तविक खरीददार के अलावा सट्टा लगाने वाले ट्रेडर भी आ जाते हैं। जिन्हें रोका नहीं जा सकता। इन लोगों के एक साथ कई जगहों पर सौदे हुए होते हैं, जो मंदी के दौर में टूटने लगते हैं। पटियाला में भी लोगों ने उम्मीदें कुछ ज्यादा लगा रखी थी जो धाराशाई हो गई हैं।
-एक साल पहले हुए नीलामी के बाद पूडा को पहली किश्त ही जमा नहीं करवाई
-श्री दुख निवारण साहिब से मिनी सचिवालय रोड पर कटे थे 101 गज के 21 प्लाट
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राजनीतिक सत्ता में आपेक्षित बदलाव ना हो तो अर्थव्यवस्था डगमगाने लगती है। पंजाब विधान सभा चुनावों के परिणाम पटियाला के प्रापर्टी डीलरों की अपेक्षाओं, अनुमानों और अटकलों पर खरे नहीं उतरे तो जमीन जायदाद का अर्थशास्त्र गड़बड़ा गया और प्रापर्टी के दाम अर्श से फर्श पर आ गए हैं। चुनाव परिणाम आने के पहले पखवाड़े में ही बाजार से खरीददार गायब हो गए और सौदे सरेंडर होने लगे हैं।
आलम ये है कि एक साल पहले लंबी जदेजहद व नीलामी में पूरे मोल भाव कर जो प्रापर्टी खरीदी गई अब उसे 26-26 लाख रूपये की धरोहर राशि छोड़ कर सरेंडर किया जा रहा है। पंजाब अर्बन डेवलेपमेंट एंड प्लानिंग अथार्टी, पूडा की ओर से एक साल पहले 25 मार्च को गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब से मिनी सचिवालय की ओर जाने वाली रोड पर देवीगढ़ डिवीजन के काटे गए कामर्शियल प्लाट करोड़ों से कोडियों पर आ गए है। पूडा के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि 101 गज के शो रूम के प्राइम प्रापर्टी के 21 प्लाटों की नीलामी की गई। इनमें से दो लोगों ने 15 मार्च को प्रार्थना पत्र दे कर प्रापर्टी औपचारिक रूप से कह दिया कि उन्हें प्रापर्टी नहीं चाहिए। तीन अन्य भी ऐसी ही इच्छा जता चुके हैं जबकि पूछताछ करने वालों की संख्या एक दर्जन के पार बताई जा रही है।
दिलचस्प है जो जमीन एक साल पहले दो से सवा दो करोड़ के बीच नीलामी में बिकी थी वो एक साल में बेकार की क्यों हो गई? पूडा की नीलामी के बाद पहली बार में 25 फीसदी राशि जमा करवानी होती है और इसके बाद ज्यादा से ज्यादा चार किश्तों में शेष राशि जमा करवानी होती है। इन प्लाटों की 15 मार्च को पहली किश्त दी जानी थी। जिसे कुछ लोग पूरा कर पाने की स्थिति में नहीं हो पाए और आगे सौदे हो नहीं सके। ऐसे में पूडा 26 लाख रूपये की कटौती कर बाकी रकम लौटाएगी।
याद रहे कि ऐसी प्रापर्टी पहले तीन साल में ट्रांसफर नहीं हो सकती और सभी किश्तें जमा होने के बाद रजिस्ट्री करवा कर ही अगले खरीददार को बेची जा सकती है। इस पर भी खासा बड़ा शुल्क लगना तय होता है। पूडा के ही एक वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि नीलामी में वास्तविक खरीददार के अलावा सट्टा लगाने वाले ट्रेडर भी आ जाते हैं। जिन्हें रोका नहीं जा सकता। इन लोगों के एक साथ कई जगहों पर सौदे हुए होते हैं, जो मंदी के दौर में टूटने लगते हैं। पटियाला में भी लोगों ने उम्मीदें कुछ ज्यादा लगा रखी थी जो धाराशाई हो गई हैं।
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