Tuesday, 6 March 2012

नापाक हुआ घग्गर किनारे का पानी, river ghagger, water pollution,


जागरण सरोकार : पर्यावरण संरक्षण

...नदी प्रदूषण : एक

फोटो: 1
- सब्जी उगाते हैं, बेचते हैं, पर खाते नहीं हैं
भूपेश चट्ठा, धर्मेहड़ी (पटियाला)
पंजाब के जिस पानी पर अनगिनत लोकगीतों की रचना की गई और जिसे हाथ में लेकर साथ जीने मरने की कसमें खाई जाती थीं, पंजाब के उसी आब को हाथ लगाने की हिम्मत अब नहीं होती। जल प्रदूषण की भेंट घग्गर दरिया इस कदर चढ़ चुका है कि कभी पवित्र निर्मल रहने वाला जल पूरी तरह से नापाक हो चला है।
आलम ये है कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित धर्मेहड़ी गांव के पास से गुजरते घग्गर दरिया के पानी से क्षेत्र के किसान सब्जी उगाते हैं, बेचते भी हैं, पर खाते नहीं हैं। इतना ही नहीं घग्गर के ठीक किनारे पर स्थित खेतों में छोटे-छोटे डेरों पर मोटरें लगी हैं। बिजली भी अपने हिसाब से आती रहती है और ट्यूबवेल चलता भी है, पर यहां के लोग अपने पीने व भोजन के लिए पानी दूसरे की मोटर से लाते हैं।
सीमा पर अंतिम खेत के मालिक हरदीप सिंह बताते हैं कि पहले एक दो बोर से ही गड़बड़ वाला पानी आता था। अब ऐसे कई पंप हैं, जहां से दुर्गंध वाला पानी आता है। जिसके चलते पीने अथवा भोजन के लिए प्रयोग नहीं करते।
 ठीक ऐसे ही गुरप्रीत सिंह कहते हैं कि उन्होंने कुछ मोटरों को ब्लैक लिस्ट जरूर किया है। पीने का पानी उन मोटरों से नहीं लेते, पर सब्जी उगाने और सिर्फ बाजार में बेचे जाने की बात पूरी तरह से सही नहीं है। हालांकि इच्छा के विपरीत फसलों को तो दिया जा रहा है, पर कोशिश होती है कि सब्जी को न लगाया जाए। यहां जुकाम के दौरान भी दुर्गंध का एहसास हो जाता है। खराबी क्या है? ये तो उन्हें नहीं पता, पर पानी स्वाद नहीं है, गेहूं पीली पड़ जाती है। जो लोग खाद की बात करते हैं, वे यहां पर गलत हैं, कई बार पौध अचानक ही मर जाती है।
ऐसा भी नहीं है कि नदी की सफाई नहीं होती, हर साल आने वाला तेज बरसाती पानी सारी गंदगी बहा ले जाता है, पर पानी उतरते ही फिर वही रंग चंद दिनों में लौट आता है। पंजाब हरियाणा को अलग करती घग्गर नदी में बरसाती पानी गुजर जाने के बाद, शहरों का सीवर और फैक्ट्रीयों का प्रदूषित जल आना शुरू होता है। पानी की रफ्तार कम होते ही यह प्रदूषण आसपास के कुओं नलकूपों के पानी को विपरीत रूप से प्रभावित कर रहा है।
वहीं पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डायरेक्टर डा.चरणजीत सिंह कहते हैं कि ऐसा बिलकुल सही नहीं है कि दुर्गंध वाला पानी जमीन के 200 फीट नीचे हो सकता है। वैज्ञानिक ढंग से सोचा जाए तो किसी भी चीज का बायोलॉजिकल पार्ट पानी के साथ धरती के इतना नीचे नहीं जा सकता। ये ऊपर ही रह जाएगा। साथ ही वे यह भी स्वीकार करते हैं कि घग्गर प्रदूषित है और वे किसी तरह से बचाव नहीं कर रहे, लोगों को चाहिए कि नदी में से पानी निकाल कर सिंचाई के लिए प्रयोग न करें। डा.चरणजीत कहते हैं कि संभव है कि किसी एक या दो नलकूप के पास पानी जमा होता होगा और रिसता होगा। इसके आसपास किसी कैप्टी से संबंध नहीं हो सकता। नदी के प्रदूषण पर किसी तरह के सर्वे पर वे कहते हैं कि हाल ही में ऐसा कोई सर्वे नहीं किया गया है।

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