Friday, 25 March 2011

'अर्थ अवर' : पंजाब में प्रयास हो तो सौ लाख यूनिट की बचत save electricity, earth hour




 भूपेश चट्ठा, पटियाला
विश्व भर में शनिवार रात साढ़े आठ से साढ़े नौ बजे तक मनाए जाने वाले एक घंटे के 'अर्थ अवर' पर यदि पूरी तन देही से पंजाब में प्रयास हो तो इस घंटे में बचने वाली बिजली का आंकड़ा एक सौ लाख यूनिट पर पहुंच सकता है।
याद रहे कि 'अर्थ अवर' के दौरान दुनिया भर में बिजली बचत का संदेश देने लोग स्वैच्छा से अपने बिजली उपकरण बंद रखते है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि इस घंटे में सभी अंधेरे में बैठ जाएं पर इतना भी जरूर है कि संयम से बिजली का प्रयोग हो जिससे बिजली खपत को सीमित करने की दिशा में चलने वाला जारूकता अभियान गति पकड़े और जनमानस तक संदेश पहुंचाया जा सके।
 राज्य में बिजली आपूर्ति व प्रबंध करने का जिम्मा रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने हालांकि 'अर्थ अवर' को लेकर किसी तरह की औपचारिक घोषणा नहीं की है लेकिन अधिकारी बताते है कि राज्य में इन दिनों गेहूं की फसल पकने को है जिसके चलते कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग कम है और गर्मी के भी पूरी तरह से तेज ना होने की वजह से घरेलू क्षेत्र में भी मांग ज्यादा नहीं है। फिर भी राज्य में बिजली की कुल मांग एक दिन में एक हजार लाख यूनिट के पास है। चूंकि शाम साढ़े आठ से साढ़े नौ बजे के बीच का समय पावरकाम के शब्दों में पीक लोड आवर की श्रेणी में आता है। इस दौरान बिजली की खपत दिन भर में अधिकतम सीमा पर होती है ऐसे में अनुमान है कि बचने वाली बिजली एक सौ लाख यूनिट तक आ सकती है।
अधिकारी तर्क देते है कि बिजली का सबसे ज्यादा उपयोग दिन की इस अवधि में दिवाली के दिन होता है तब भी पावरकाम करीब इतनी ही अतिरिक्त बिजली का प्रबंध करता है।

आबकारी आयुक्त दस दिनों में लेंगे निर्णय excise, draw,


भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला शहर के शराब के ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे और एक शराब ठेकेदार का ड्रा पहले निकलने और फिर रद कर, दोबारा ड्रा निकालने के मामले में अब गेंद एक बार फिर आबकारी एवं कराधान आयुक्त के पास आ गई है। पीड़ित पक्ष के न्यायालय की शरण में जाने के बाद आए निर्णय में कहा गया है कि आयुक्त पूरे मामले की सुनवाई दस दिनों के भीतर कर अपना फैसला देंगे।
न्यायालय ने वीरवार को दायर हुई याचिका पर शुक्रवार को याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या मामले की वीडियो रिकार्डिग हुई है? यह स्पष्ट हो जाने पर न्यायालय ने आबकारी विभाग को आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच दस दिनों के भीतर करें। साथ ही अंतिम निर्णय पर भी अधिकृत कर दिया है।
याद रहे कि विभाग पहले ही पटियाला में तैनात इंस्पेक्टर प्रवीण जोशी और क्लर्क सतपाल सिंह को छह माह के लिए निलंबित कर दोनों के तबादले भी कर चुका है। इसके अलावा आबकारी आयुक्त ए. वेणू प्रसाद ने पूरे मामले की जांच अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त को सौंप रखी है। हालांकि एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तवर्ष में दस दिन से भी कम समय शेष रहते बिठाई गई जांच के परिणाम की तिथि तय नहीं की गई थी, इसे अब न्यायालय ने समय सीमा में बांध दिया है।
उल्लेखनीय है कि 'दैनिक जागरण' ने शराब ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे पर प्रमुखता से विशेष रिपोर्ट प्रकाशित कर खुलासा किया कि किस तरह से ड्रा निकाले जाने के दौरान पूरी पारदर्शिता के बावजूद भरी पब्लिक में गड़बड़ और गोलमाल दोनों हो गए। जिला प्रशासन व आबकारी अधिकारियों की नाक के सामने शराब ठेकेदारों ने कानून का आपरेशन कर दिया। सरकार को राजस्व में तो कोई फर्क नहीं आया पर विभाग की किरकिरी जम कर हो गई थी।
दूसरी ओर, नगर निगम क्षेत्र में एक ग्रुप का ठेका रद होने के चलते अपना हक खोने का आरोप लगाने वाले समूह ने आज दोपहर बाद न्यायालय क ा निर्णय आने के बाद संवाददाता सम्मेलन कर डाला। अपने पूर्व में लगाए गए आरोप दोहराने के अलावा कई और सवाल भी उठाए गए। कहा गया कि शाम तक प्रार्थना पत्रों की संख्या कम थी और अचानक अगले दिन 50 प्रार्थना पत्र और आ गए। ये सब अधिकारियों की मिलीभगत से विभाग में कार्य समय समाप्त होने के बाद किया गया। इतना ही नहीं एक कांग्रेसी को साथ लेकर दूसरे ग्रुप के सत्ता पक्ष से जुड़े होने का आरोप लगा राजनीतिक रंग देने का प्रयास भी किया गया है।

Thursday, 24 March 2011

सीएम-डिप्टी सीएम को तेजिंदर संधू ने दिखाए बागी तेवर politics, SAD, akali



-पिता पांच तो मां तीन बार रही है विधायक
-कहा सोए पंजाब को जगाने उतरेंगे चुनाव मैदान में
-सीएम व पार्टी प्रधान ने नहीं दिया कोई आश्वासन
भूपेश चट्ठा, कौली, पटियाला
पिता स्व. जसदेव सिंह संधू की 11 वीं बरसी पर रखे गए श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एसएस बोर्ड के पूर्व चेयरमैन तेजिंदर पाल सिंह संधू ने खुल कर बागी तेवर दिखाते हुए ना केवल शिरोमणि अकाली दल से घनौर विधान सभा क्षेत्र से पार्टी टिकट की मांग रखी है अपितु यह भी कह दिया है कि यदि इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे भी वे चुनाव जरूर लड़ेंगे और यह फतवा क्षेत्र के लोगों ने उन्हें दे दिया है।
ज्ञात हो कि तेजिंदर पाल सिंह संधू के पिता अकाली दल से पांच बार तो उनकी मां तीन बार विधायक रही है। प्रकाश सिंह बादल खुद स्वीकार करते है कि ज्ञानी करतार सिंह की शार्मिंदगी में उन्होंने जसदेव संधू के साथ राजनीतिक जीवन शुरू किया था। दिलचस्प है कि बादल चार बार मुख्यमंत्री बने और कभी चुनाव ना हारने वाले संधू कभी मंत्री भी नहीं बने।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की मौजूदगी में मंच से तेजिंदर पाल सिंह संधू ने जहां टिकट की मांग करते हुए लोगों की सेवा करने का मौका दिए जाने को कहा। इसके तुरंत बाद हुए मुख्यमंत्री के संवाददाता सम्मेलन में प्रकाश सिंह बादल ने साफ तौर पर पल्ला झाड़ते हुए कहा कि टिकट मांगने वालों की कमी नहीं है पर सभी को नहीं दी जा सकती, अगर कुछ लोग पार्टी में सिर्फ टिकट के लिए है तो सही नहीं है। साथ ही उन्होंने इसे अभी बहुत जल्दबाजी बता यह भी कह डाला कि वे पार्टी प्रधान नहीं है।
उधर मंच से ही इसके बाद पार्टी छोडऩे और चुनाव लडऩे के सभी विकल्प खुले रखने की बात कह अपने धन्यवाद प्रस्ताव में तेजिंदर संधू की पत्नि अनूपिंद्र कौर  ने कहा कि सोए पंजाब को जगाने वे इस बार निश्चित रूप से चुनाव मैदान में उतरेंगे। दशकों तक पंथ और पार्टी की सेवा के बावजूद आज सरकार के पास 11 मिनट भी नहीं है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों की भावनाओं  का ख्याल रख वे चुनाव जरूर लड़ेंगे।  
इस पर भी डिप्टी सीएम व अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने नहीं कोई आश्वासन
ना देते हुए कहा कि पार्टी उम्मीदवारों का चुनाव मैरिट के आधार पर करेगी। समाना की रैली में सुरजीत सिंह रखड़ा को वजीर तक बनाने की याद दिलाने की बात पर वे कहते है कि अभी तक किसी के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। लोगों के विचार लिए जा रहे है जीतने की क्षमता रखने वाले को ही पार्टी टिकट देगी।

चुनाव समय पर ही होंगे : बादल 
-अमरिंदर माने केंद्र में हो रहे है घोटाले :सुखबीर
भूपेश चट्ठा ,कौली (पटियाला)
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने आज समय से पहले विधान सभा चुनाव करवाने की कांग्रेसी अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वे भला जल्दी चुनाव क्यों करवाएंगे। विधान सभा चुनाव समय पर ही होंगे।

स्व. जसदेव सिंह संधू की 11वीं बरसी पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा है कि पार्टी के लिए शानदार सेवा निभाने वाले नेताओं और वर्करों को आने वाले विधानसभा चुनाव के समय टिकटों की बांट समय आंखों से अदृश्य नहीं किया जायेगा। केंद्र में संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सरकार पर भ्रष्टाचार के लग रहे दोषों पर बादल ने कहा कि यूपीए सरकार के मंत्रियों की तरफ से किये बहुकरोड़ी घपलों कारण इस सरकार का असली चेहरा लोगों सामने नंगा हो गया है।

वहीं इसी समागम में श्रद्धांजलि भेंट करने पहुंचे उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनके समेत जो भी शिरोमणि अकाली दल का हिस्सा है, उसको पार्टी की सोच मुताबिक ही चलना पड़ेगा और जो पार्टी के सिद्धांत का उल्लंघन करेगा उसके लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है। मनप्रीत बादल को पार्टी में लाने के सवाल पर वे कहते है कि जो अकाली दल के सिद्धांतों पर जो विश्वास करता है उसका स्वागत है।

पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिन्दर सिंह पर वे कहते है कि उन्हें किसी से सर्टीफीकेट की जरूरत नहीं है। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में भ्रष्टाचार को भी पंजाब कांग्रेस अलग नहीं कर सकती। विकास कामों का सेहरा तो केंद्र सरकार पर बांधती है परन्तु केंंद्र में कांग्रेस का नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की तरफ से किए 1.76 लाख करोड़ वाले टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले, आठ हजार करोड़ रुपए के कामनवेल्थ घोटाले और बहु करोड़ी आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटालों कारण देश को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ, जिसका राज्यों पर भी असर हुआ है। यह जिम्मेदारी लेने से पंजाब कांग्रेस  भाग रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस को इस सच्चाई से भागना नहीं चाहिए। बादल ने कहा कि पंजाब विधान सभा के मौजूदा बजट सत्र दौरान कांग्रेस पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा न होने  कारण वह बहस करने से ही भाग गई है जो कि पंजाब के इतिहास में पहली बार हुआ है।  

  इस मौके शिरोमणी अकाली दल के जनरल सचिव प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा, पिछड़ीं श्रेणियों कमीशन पंजाब के  चेयरमैन प्रो. किरपाल सिंह बडूंगर, मुख्य सांसदीय सचिव श्री राज खुराना, पूर्व मंत्री स. सुरजीत सिंह कोहली, नगर सुधार ट्रस्ट पटियाला के चेयरमैन स. इन्दरमोहन सिंह बजाज, शिरोमणी अकाली दल के सीनियर मित्र प्रधान स. हरिन्दरपाल सिंह हैरीमान, मार्केट समिति पटियाला के चेयरमैन स. हरिन्दरपाल सिंह हरपालपुर मौजूद रहे।

दो सस्पेंड, जांच बिठाई, पर समयबद्ध नहीं excise, draw,


-छह महीने के निलंबन के अलावा आबकारी इंस्पेक्टर व कलर्क के तबादले
-आबकारी अयुक्त ने ड्रा रद्द होने वाले को बुला शिकवा पूछा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला शहर के शराब के ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे और एक शराब ठेकेदार का ड्रा पहले निकलने और फिर रद्द कर, दुबारा ड्रा निकालने के मामले में आज आबकारी एंव कराधान विभाग ने अपने दो कर्मियों को बली का बकरा बना उच्च अधिकारी की खाल बचा ली है।
विभाग के आधिकारिक सूत्रों अनुसार पटियाला में तैनात इंस्पेक्टर  प्रवीण जोशी और क्लर्क सतपाल सिंह को छह माह के लिए निलंबित कर दोनों के तबादले भी कर दिए है। इसके अलावा आबकारी आयुक्त ए वैणू प्रसाद ने पूरे मामले की जांच अतिरिक्त आबकारी एंव कराधान आयुक्त को सौंप दी है। हालांकि एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तिय वर्ष में दस दिन से भी कम समय शेष रहते बिठाई गई जांच के परिणाम को समयबद्ध नहीं किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 'दैनिक जागरणÓ ने आज के संस्करण में शराब ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे पर प्रमुखता से विशेष रिपोर्ट प्रकाशित कर खुलासा किया कि किस तरह से ड्रा निकाले जाने के दौरान पूरी पारदर्शिता के बावजूद भरी पब्लिक में गड़बड़ और गोलमाल दोनों हो गए। जिला प्रशासन व आबकारी अधिकारियों की नाक के सामने कानून का आपरेशन शराब ठेकेदारों ने कर दिया। सरकार को राजस्व में तो कोई फर्क नहीं आया पर विभाग की किरकिरी जम कर दो गई। संभव है कि पर्ची पर स्याही लगाने का सिलसिला पहले से चल रहा था ओर पहली बार पकड़ा गया है, इस पर अधिकारी अपनी पीठ ठोकें या फिर पारदर्शी ईमानदारी को ढाल बना कर किसी के जुगाड़ को ना पकड़ पाने पर हाथ मले। यह अभी तक समझ नहीं आ रहा है।
दूसरी और नगर निगम क्षेत्र में एक ग्रुप का ठेका रद्द होने के चलते अपना हक खोने का आरोप लगा रहे ललित सिंगला बताते है कि उन्हें आबकारी आयुक्त ने आज बुला कर जल्द ही जांच करने का आश्वासन दिया है। साथ ही किस्मत पर पूरा यकीन करने वाले ललित सिंगला कहते है कि पिछले तीन साल से वे शहर में शराब ठेके के ड्रा में केवल एक ही प्रार्थना पत्र डालते आए है और हर बार कामयाबी मिली है। जबकि शहर में मोनोपली बनाने की इच्छा रखने वाले उन्हें साथ मिलाना चाहते थे। कामयाब ना होने के चलते इस बार साजिश रच कर बाहर किया गया। उनकी पर्ची पर किसी ने स्याही लगवाई और अंजान व्यक्ति से निकली पर्ची पर दूर बैठे दूसरे ग्रुप को पहली नजर में दिख भी गई यह भी आश्चर्य की बात है। जो स्याही बाक्स में पर्ची डाले जाने तक किसी अधिकारी को नहीं दिखी। हालांकि नाभा व भूनरहेड़ी में तीन से चार प्रार्थना पत्र लगाने पर कामयाबी मिली जबकि कुछ लोग 50 से 70 प्रार्थना पत्र लगाते है। अब हाई कोर्ट की शरण में जा आबकारी नियमों के तहत पूरे ड्रा को रद्द करवाने की याचिका दायर करने जा रहे है।

Tuesday, 22 March 2011

गेहूं परंपरागत समय पर, बंपर फसल होगी wheat, , trends, vesakhi, MSP


-वैसाखी मनेगी गेहूं कटाई से एमएसपी से नहीं
-लंबी चली सर्दी ने दी राहत, पौधे पर ज्यादा शाखाएं फूटी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हरित क्रांति के बाद से किसान रबी के मौसम वैसाखी  की का कम और एमएसपी का ज्यादा याद कराता आया है, लेकिन इस साल पंजाब का किसान वास्तव में खेत में गेहूं की फसल की कटाई वैसाखी  मनाने जा रहा है। जी हां कुदरत ने सालों बाद पंजाब को पंजाब का मौसम बक्शा है जब लगातार और लंबी चली सर्दी के चलते गेहूं का पौधा अपनी उपज मार्च अंत में ना देकर अप्रैल के दूसरे सप्ताह में देने जा रहा है और हालात साफ तौर पर कह रहे है कि गेहूं बंपर होगी और इसकी उपज पिछले सारे रिकार्ड तोडऩे जा रही है। कृषि  विभाग ने इन दिनों लगने वाले उपज के अनुमान को ही  आगे बढ़ा दिया है।

पिछले साल मानसून के लंबा चलने और फिर नवंबर में पारे के चढ़े रहने के चलते गेहूँ की बिजाई में आधुनिक कृषि अनुसार देरी हुई लेकिन परंपरागत अनुभव व ज्ञान में यकीन करने वाले फाईव एलीमेंट हैल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाईगर कहते है कि पंजाब में देसी किस्मों की बिजाई लोहड़ी तक चलती थी और वैसाखी  पर शगुन के तौर पर 'टक' लगाया जाता था पर अब एमएसपी एक अप्रैल से आता है तो किसान गीली उपज ही  मंडियों में फैंक आता है। जो हर किसी के लिए सरदर्द बनती है। आजकल उठे बादलों पर वे कहते है कि ये बारिश भी  नुकसान नहीं करने वाली बशर्ते ओले ना पड़े। दिसंबर अंत तक चली बिजाई और फिर बराबर अंतराल पर आई बारिश कोहरे को ओस में बदलती रही, पारा कम रहा जिससे शाखाएं ज्यादा फूटी, लंबी चली सर्दी ने गेहूं की बल्लीयों को भी  बड़ा होने का मौका मिला तो दाने ज्यादा आने तय है।
 
वहीं कृषि विशेषज्ञ डा.  बीएस सोहल कहते है कि इस साल गेहूं पर पीली कुंगी की मार पड़ी और तेला या अन्य कोई बीमारी नहीं लगी है। पीली कुंगी का असर  सभी  जगहों पर नहीं हुआ। यह पहाड़ी क्षेत्रों विशेष रूप से जम्मू  कश्मीर से होती हुई पंजाब में आती है। रोपड़ और गुरूदासपुर इसके एंट्री पवांइट है। पीली कुंगी की मार ऐसे ही कुछ क्षेत्रों में पड़ी है। जहां पर गेहूं की उपज पर प्रभाव पडऩा तय है। शेष क्षेत्रों में फसल पिछले साल की तुलना में बढऩे की संभावना ज्यादा है। सरकार ने भी  सबसीडी पर एक लाख  लीटर दवा बंटी है जिससे बीमारी नियंत्रित रही। अक्सर फरवरी के तीसरे सप्ताह में तापमान बढ़ता है लेकिन इस बार मार्च के दूसरे सप्ताह तक मौसम ठंडा रहा। वे कहते है कि सब कुछ ठीक रहा तो पिछले साल से उपज काफी अधिक रहेगी।

वहीं मुख्य  कृषि अधिकारी एससी खुराना कहते है कि कृषि  विभाग ने अभी  अनुमान नहीं लगाएं है। लेकिन पिछले साल की तुलना गेहूं अच्छी रहनी चाहिए। अगले सप्ताह तक यदि कोई बड़ी मार नहीं पड़ती है तो सब कुछ ठीक ही रहेगा। 

शराब ठेकों के ड्रा में हंगामा excise, draw, wine, auction


-अलाट करने के बाद रद्द किया ड्रा, फिर निकाला
-वीडियो फिल्म देख तय हो, पटियाला निगम अधीन ठेके की प्रक्रिया फिर हो: ललित सिंगला
-आबकारी आयुक्त व कमेटी के निर्णय पर दुबारा निकाला गया ड्रा: एईटीसी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
जिले के शराब ठेकों के ड्रा में अपनाई गई हर तरह की पारदर्शिता के बावजूद हंगामा हो गया। नारेबाजी के बीच शहर के नगर निगम क्षेत्र के ठेकों के ड्रा पहली बार निकाल घोषित करने के बावजूद रद्द कर दिए गए और फिर निकाले गए।

 सरहिंद रोड पर स्थित एक बैंकुएट हाल में रखे गए ठेकों के  ड्रा में आबकारी विभाग की ओर से पारदर्शिता दिखाने के लगभग हर तरह के उपाय किए गए जिनमें ऑन लाईन कंपयूटर बड़ी स्क्रीन पर, लाईव टेलीविजन और मंच की वीडियोग्राफी शामिल है। इसके अलावा ड्रा निकालने के लिए आम जनता में से कोई भी व्यक्ति आ सकता है। इतना ही नहीं ड्रा वाले बक्से को भी पारदर्शी कांच से बनाया गया। सभी पर्चियों को एक ही तरह के लिफाफे में बंद किया गया।

दोपहर तक सब कुछ ठीक ठाक चला लेकिन पटियाला निगम क्षेत्र के ड्रा की बारी आई तो पब्लिक में से ही उठ कर गए एक व्यक्ति ने ड्रा निकाल ललित सिंगला का नाम घोषित किया तो कुछ लोगों ने स्याही लगी होने के आरोप लगा ड्रा रद्द करने की मांग उठाई, जिसे आबकारी एंव कराधान विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार भी कर लिया और दुबारा निकाला गया। इस सारी कार्यवाई के दौरान हंगामा जारी रहा।

वहीं ललित सिंगला ने 'दैनिक जागरण' को बताया कि बक्से में 56 लिफाफे थे और पब्लिक में से उठ कर गया व्यक्ति उन्हें नहीं जानता। ऐसे में चंद सेकेंड में पर्ची की पहचान कर निशानी वाली कैसे निकाल सकता है। पर्ची भी या तो ईटीओ के पास थी या फिर एईटीसी के पास ऐसे में वो कैसे निशानी लगा सकता है। ललित सिंगला का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभुगत से उनके साथ धक्का किया गया। उनका नाम रद्द करने के बाद दूसरे पक्ष के नाम सभी ठेके आनन फानन में कर दिए गए। सारी वीडियोग्राफी को फिर से देखा जाए और फिर तय किया जाए। विभाग यदि सारी प्रक्रिया दोबारा नहीं करता तो वे न्यायालय की शरण में जाएंगे।

उधर एईटीसी एचपीएस गिहोत्रा कहते है कि उक्त पर्ची पर स्याही तो लगी हुई थी, ऐसे में कमेटी व आबकारी आयुक्त की अनुमति पर ही दुबारा ड्रा निकाला गया है। आयुक्त का कहना है कि यदि पहले लाटरी निकली है तो दुबारा भी निकल जाएगी। वे यह भी स्वीकार करते है कि ललित के दो प्रार्थना पत्र थे तो दूसरी पार्टी के 56 में से 50।
पर्ची सिर्फ अधिकारियों के कब्जे में होने पर स्याही कैसे लग गई? इस पर वे स्पष्ट नहीं कर पाते कहते है कि पहले से भी लगी हो सकती है। दिलचस्प है कि पूरी तरह से पारदर्शिता के उपाय करने और लोगों में अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते एईटीसी गिहोत्रा की मायूसी और मजबूरी आज इस घटना के बाद साफ झलकी।


उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
जिले के शराब ठेकों से अगले वित्तिय वर्ष में राज्य सरकार को 155 करोड़ 14 लाख रूपये की आय होने जा रही है। यह आय पिछले साल की तुलना में 36 करोड़ 75 लाख ज्यादा है। आबकारी राजस्व में 31 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।
विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि डिप्टी कमीश्नर दीपेंद्र सिंह की निगरानी में हुए ड्रा में पटियाला शहर के तीन सर्किलों के ठेके 63.05 करोड़ में दिए गए जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 50.68 रहा था। राजपुरा सर्किल में 40.49 करोड़,समाना सर्किल में 23.25 करोड़, नाभा सर्किल में 28.35 करोड़ रूपये में शराब के ठेके आवंटित किए गए है।

Saturday, 19 March 2011

लोकां ने पीती तुपका तुपका मैं तां...हुण उतरुं किंवे festival, holi, trends, whisky,


भूपेश चट्ठा, पटियाला
लोकां ने पीती तुपका तुपका मैं तां पीती बाटे नाल... मै क्हया चड़ गई ओए छराटे नाल...विवाह शादी की पार्टी हो या किसी खास के साथ शाम का समां तो बब्बू मान की ये पंक्तियां खासी लुभावनी हो थिरकने को कहती है। बात होली की हो तो सुबह-शाम का बंधन नहीं रहता, हर आम खास हो जाता है। ऐसे में पीने पिलाने के नाप तौल दर किनार हो जाते है या फिर कर दिए जाते है पर इसके बाद का वक्त होली के मतवालों और घरवालों दोनों के लिए मुसीबत लाया होता है।
होली पर शराब से भाग और अफीम से गंजा तक का सेवन होता है और  दिलचस्प तथ्य है कि इनमें से कुछ तो एक दूसरे के लिए दवा का काम भी  करते है पर यह भी  सही है कि जो खुद को शिव भक्त बताते है वो मां काली के पुजारी नहीं हो पाते। फाईव ऐलीमेंट हैल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाईगर बताते है कि भाग या अफीम ज्यादा हो जाए तो एक या दो पैग पिलाने से उनका नशा उतर जाता है ऐसे ही शराब ज्यादा हो जाए तो अफीम कारगर होती है लेकिन किसी तरह की दवा लेने से बचना चाहिए। आम तौर पर नशा ज्यादा होने पर  नीबूं पिलाने लग जाते है जो गलत है। भाग के नशे को तो यह कई गुणा बढ़ा देता है। शराब और नींबू दोनों में ही एसिड है ऐसे में ये उछल पड़ती है और कई बार ब्लड प्रैशर बहुत कम कर देता है। इसकी बजाए ज्यादा पानी पिला बाहर निकालनी ज्यादा ठीक है।
शराबी हालात होने पर ताजा कच्चे दूध के दो गिलास हों यदि ना मिले तो फ्रिज का ठंडा दूध कारगर है पर बिना चीनी के। अक्सीजन मॉस्क के चार बड़े सांस भी  शराब उतार देते है। एंटासीड के दो-दो च मच एक एक घंटे के अंतराल पर दिए जा सकते है।
अगर व्यक्ति मदहोशी की हालत में आ जाए तो दोनों नाक के दोनों नथुनों के बीच के स्थान को दबाने से होश आ जाता है और उपर के दोनों बीच के दांतों के बीच से शुरू होने वाली नस यहीं से गुजरती है।
दूसरी ओर शराबी को पंजाब में प्यास लगने आधा रिड़का हुआ दही और टोपी तोड़ दांत में दबाए हुए दो लौंग तेजाबीपन कम करने और हिचकी रोकने में कारगर माने जाते है। उल्टी आने पर काले नमक की चुटकी या फिर सिर्फ सोडे में नींबू नमक बर्फ के साथ पिलाने का नुस्खा  चलन में है। जबकि भाग चढऩे पर साधारण चने सर्वश्रेष्ठ उपाय है। गला तेजी से सूखता है पर कुछ ही मिनट में व्यक्ति कैलाश पर्वत से उतर आता है।
वहीं फार्माकालोजी क्षेत्र के जाने माने नाम डा. पीपी खोसला कहते है किसी तरह का टोटका नहीं आजमाना चाहिए। यह बहुत ही रिस्की होता है। ये लोग कई तरह के जुगाड़ करते है हर आदमी नुक्ते समझा रहा होता है। लेकिन बेहतर तो अस्पताल में भर्ती करवाना और मेडीकल केयर उपलब्ध करवाना ही है। हालांकि ले ाक केएस धलीवाल इससे इत्तेफाक नहीं करते वे कहते है कि ड्रिंक्स के साथ डाइट जरूरी है। नशा ठीक ठाक भी हो तो हैंग ओवर उतारने बर्फ बराबर ठंडे पानी के साथ रेस्ट इज बेस्ट।
लेकिन बेहतर तो ये है की पीने से पहले मखन या नारियल खा ले


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Friday, 18 March 2011

नानकशाही कलेंडर का विरोध करने पर सरना पर र्कारवाई हो, sikh, religion, politics, sgpc, sad


-एसजीपीसी व अकाली दल ने श्री अकाल तख्त साहिब से लगाई सामुहिक गुहार 
 भूपेश चट्ठा, बहादुरगढ़ पटियाला
शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिरोमणि अकाली दल ने आज दिल्ली सिख गुरूद्वारा मेनेजमैंट कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह सरना पर र्कारवाई कर उन्हें उचित सजा देने की प्रार्थना श्री अकाली तख्त साहिब से की है। एसजीपीसी के प्रधान जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ और अकाली दल महासचिव प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने सिख धर्म के सर्वोच्च पवित्र संस्था के लिए ब्राहमणवाद शब्द का प्रयोग करने पर परमजीत सरना के लिए सजा की मांग के अलावा आज यहां संयुक्त रूप से सिख समुदाय से सरना का बॉयकाट करने को भी कहा है।
गुरूद्वारा श्री तेग बहादुर साहिब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एसजीपीसी और अकाली दल ने सामुहिक रूप से श्री अकाल तख्त साहिब से प्रार्थना की है कि डीएसजीएमसी के प्रधान परमजीत सिंह सरना को तल्ब कर उन्हें पंथ से निष्कासित किया जाए। उनका कहना है कि संशोधित किए गए नानकशाही कलेंडर के क्रियांवन पर आपत्ति जताने पर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से र्कारवाई होनी ही चाहिए। वे कहते है कि वर्ष 2003 में भी नानकशाही कलेंडर श्री आल तख्त साहिब से ही जारी हुआ था और अब इसका संशोधित वर्शन भी वहीं से जारी हो रहा हे ऐसे में सजा भी वहीं से घोषित होनी चाहिए।
वहीं अकाली दल के प्रो. चंदूमाजरा कहते है कि डीएसजीएमसी के प्रधान को पहले भी कई बार तौहीन करने पर श्री अकाल तख्त साहिब से माफ किया गया है लेकिन अब तो सारी हदें पर हो रही है। और सरना ने कुछ नहीं सीखा। समाज को ब्राहमण और गैर ब्राहमणों में बांटने पर उन्हें जरूर सजा मिलनी चाहिए। हालांकि पार्टी इसके पीछे साजिश और मुख्य तथ्यों की जांच कर रही है जिसका भी जल्द खुलासा किया जाएगा।

Thursday, 17 March 2011

निजी जमीन की बोली करवाई इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने! improvement trust, auction, property dispute


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-एसएसटी नगर में बोली दौरान मालिक ने मंच से रजिस्ट्री दिखा किया दावा
-इंजीनियरिंग विभाग की रिपोर्ट के बाद ही निलामी करवाई है: चेयरमैन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'इंप्रूवमेंट ट्रस्ट' अथवा 'नगर सुधार न्यास' कुछ ऐसे शब्द हैं जिनमें विश्वास और सुधार को काफी प्रमुखता दी जाती है, लेकिन आज एसएसटी नगर में विकास योजना सुदंर नगर के लिए हुई बोली में विश्वास कम और शक ज्यादा पैदा कर दिया। आरोप है कि ट्रस्ट ने निजी अधिकार वाली जमीन के 400 गज के एक टुकड़े को भी अपनी बोली में शामिल कर निलाम कर दिया, जिसकी बाकायदा रजिस्ट्री हो चुकी है।
बोली शुरू होने से ठीक पहले उक्त प्लाट का मालिक नीलामी स्थल पर आ पहुंचा और ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज को सारे मामले की जानकारी दी। इस पर बजाज ने उन्हें एक अधिकारी विशेष से बात करने की सलाह दी। एक ओर अधिकारियों ने निलामी प्रक्रिया जारी रखी तो दूसरी ओर उन्हें ट्रस्ट कार्यालय में आने को कह दिया।
इसके तुरंत बाद मौके पर ही प्लाट के मालिक होने का दावा करने वालों ने मंच से ही रजिस्ट्री हाथ में लहराते हुए घोषणा कर दी की वे ही जमीन के उक्त टुकड़े के मालिक है और अगर कोई प्लाट खरीदता है तो हर्जाने प्रति वो खुद जिम्मेदार होगा। ट्रस्ट के बोली नहीं रोकने की स्थिति में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। प्लाट की पावर ऑफ अटार्नी रखने वाले संजीव वालिया दस्तावेज दिखा दावा करते है कि 1968 में पुराने प्लाट न. 94 का मुख्तयार नामा ओमप्रकाश पुत्र सुंदरलाल के नाम था जिससे उन्होंने प्लाट खरीदा और 1971 में रजिस्ट्री भी करवाई। एसएसटी नगर की 33 फुटी रोड पर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के नए नंबरों 27, 27ए, 27बी और 28 में उनकी जमीन का हिस्सा आ रहा है। बीती रात ही नीलामी की हो रही घोषणा के दौरान उन्हें अहसास हुआ तो भागदौड़ शुरू हो गई।
संजीव वालिया बताते है कि उनके पास खसरा न. 5385/2486/2435/1072 में 400वर्ग गज का टुकड़ा खेवट न. 603 खतोली न. 1334 श्रीमति गीता के नाम है आर इसकी पावर ऑफ अटार्नी उनके पास है। वालिया का आरोप है कि सरकार का काम लोगों के जानमाल और जमीन जायदाद की सुरक्षा करना है ना की जमीन छीन कर निलाम कर देना। वे न्यायालय की शरण में जा रहे है।
वहीं ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज से इस संबंध मे कहते हैं कि ट्रस्ट ऐसे ही किसी की जमीन नीलाम नहीं कर देता। इंजीनियरिंग विभाग से रिपोर्ट आती है। इसके बाद ही पूरी जांच के बाद जमीन की नीलामी की जाती है। अगर किसी को शिकायत है तो उनके पास आ सकता है।  
 
ठंडा रहा बोली का रिसपांस
निज संवाददाता, पटियाला
नगर सुधार ट्रस्ट की और से रिहायशी व व्यापारिक प्लाटों की बोली में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये कमाए। बोली के दौरान लोगों में अधिक उत्साह देखने को नही मिला क्योंकि करीब साढ़े तीन दर्जन जगहों में से करीब एक दर्जन ही बोली में बिक पाए।
नगर सुधार ट्रस्ट की और से शहर के महाराजा यादविंद्रा एन्क्लेव, शहीद सेवा सिंह ठीकरी वाला नगर, शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला नगर (सुंदर नगर) विकास स्कीम ट्रांसपोर्ट नगर, विकास नगर सेंटर व्यापारिक जगह के करीब साढ़े तीन दर्जन जायदादों को बोली से नीलाम करने था। नगर सुधार ट्रस्ट में चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज, कार्यकारी अधिकारी गुरिंदर सिंह सोढ़ी, भाजपा नेता अरुण गुप्ता के अलावा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बोली करवाई गई। बोली के दौरान महाराजा यादविंदरा एन्क्लेव की व्यापारिक जगह 121 वर्ग गज में बनी जगह को 75 लाख में खरीदा गया जबकि रिर्जव कीमत 45 लाख 59 हजार रुपये रखी गई थी।  

भाजपा विधायक ईसाइयों की पैरवी में? batala, bjp, politics, riots


-पत्र लिख हिंदू वेलफेयर बोर्ड से कहा मामला वापिस लें
-आरटीआई से हुआ खुलासा किसी भी मामले में अब तक कोई ग्रिफतारी नहीं हुई
भूपेश चट्ठा, पटियाला
आज से करीब एक साल एक महीना पहले अमेरिका में ईसा मसीह के चित्र का अपमान करने पर पंजाब के बटाला शहर में दो समुदायों के बीच भड़के दंगों में सार्वजनिक व निजी संपति को हुए लाखों के नुकसान और पांच मामलों में नामजद एफआईआर होने के बावजूद आज तक किसी की ग्रिफतारी नहीं हुई है और भारतीय जनता पार्टी के बटाला से विधायक दंगाईयों के पक्ष में आ गए है।

'दैनिक जागरण' के पास मौजूद पत्र में भाजपा के विधायक जगदीश राज साहनी की ओर से बटाला को बेहद संवेदनशील शहर बता कर कहा गया है कि शहर के भीतरी हिस्सा हिंदु बहुल है तो बाहरी ईसाई बहुल है। उक्त घटना के बाद दोनों समुदाय शांति से रह रहे है। बटाला का जनप्रतिनिधि होने के नाते हिंदु वेलफेयर बोर्ड से प्रार्थना की गई है कि वो भविष्य के सोहार्द को ध्यान में रखते हुए मामले को वापिस ले लें। यह भी लिखा है कि दंगाइयों की ओर सार्वजनिक प्रापर्टी को नुकसान पहुंचाए जानी की जांच चल रही है जब तक निपट ना जाए तब तक कानूनी कारवाई ना की जाए।

उधर हिंदुओं के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे बोर्ड के पंजाब के चेयरमैन महंत रविकांत की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। बटाला सिटी थाने में बीते साल 20 फरवरी को दर्ज मामले में कोई गवाही नहीं, कोई ग्रिफतार नही। ऐसे ही डेरा बाबा नानक थाने में सही दोष नामजद ना होने के चलते चालान ही तैयार नहीं हुआ। घणीए के बांगर थाने में दर्ज 14 नंबर एफआईआर के भी हालात ऐसे ही है। जबकि यहां 15 नंबर एफआईआर में दोषियों की तलाश जारी है।महंत रविकांत का कहना है कि सरकार ने एक ओर चर्च को हुए मामूली नुकसान पर लाखों खर्च कर पूर्ण जिर्णोद्वार करवा दिया, ईसाइयों को मुआवजे बांटे गए जबकि निजी प्रापर्टी का नुकसान झेलने वाले एक भी हिंदु को मुआवजा नहीं मिला है।

वहीं जगदीश राज साहनी का कहना है कि सारा आंदोलन उनके प्रयास से समाप्त हुआ था और अब उनका फर्ज बनता है कि आगे भी सदभाव बना रहे। रही बात पुलिस की ओर से मामले दर्ज किए जाने की तो पुलिस ने निर्दोष लोगों को ही फंसाया है। प्रापर्टी नुकसान पर वे कहते है कि उनके पादरी ने माफी तक तो मांग ली है। साथ ही विधायक कहते है कि वे भाजपा से जरूर है पर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते है और भाजपा के दरवाजे हिंदुओं के अलावा अन्य धर्मों के लोगों के लिए भी खुले है।

Tuesday, 15 March 2011

अपणे पंजाब दे 42 पिंड सोफी होए


-72 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-अगले साल भी नीलामी में नहीं होंगे शामिल ये गांव बशर्ते...
भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, मूली नाल गंडा होवे बाण वाला मंजा होवे...गुरूदास मान का यह लोकप्रिय हिट संभावित रूप से प्रदेश के 42 गांव सोफी हो गए है और इनमें इसे कुछ इस तरह से गाया जाएगा 'अपणा पंजाब होवे ऐथे ना शराब होवे नानक दी बाणी होवे मर्दाने दा रबाब होवेÓ।
प्रदेश के आबकारी विभाग ने 72 गांवों की पंचायतों की ओर से उनके गांवों में शराब ठेके बंद किए जाने के प्रस्ताव में से 30 को रद्द भी कर दिया है जबकि शेष पंचायतों का  उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है।
इनमें से सर्वाधिक पंचायतें संगरूर जिले की हैं। हालांकि इस जिले से 44 पंचायतों ने आवेदन किए थे लेकिन इनमें से 24 की ही याचिका को मंजूरी दी गई है। चार साल पहले जन प्रतिनिधि अधिकारों का उपयोग  नशे के खिलाफ शुरू हुआ लेकिन आज भी प्रदेश में मालवा को छोड़ अन्य क्षेत्रों माझा-दोआब के लोगों ने कम ही दिलचस्पी दिखाई है। बीते साल की संख्या 55 से इस साल आवेदन करने वाली पंचायतें बढ़ कर मात्र 72 ही हो पाई है।
दिलचस्प है कि आबकारी नीति आने से पहले विभाग ने इन पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó यह भी जांचा गया कि कहीं उनके गांव में अवैध शराब पकड़े अथवा बिकने के मामले तो नहीं आए है।
याद रहे कि पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ की है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है। बीते साल विभिन्न तर्क दे कर आवेदन रद्द हुए तो इस बार पंचायतें हाई कोर्ट तक दस्तक देने को तैयार रही।
 संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है।
उधर आबकारी विभाग के अधिकारी पुष्टि कर कहते है कि इन 42 गांवों में ठेके इस साल नहीं खुलेंगे और संभावित रूप से अगले साल भी इन्हें शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया में शामिल ना किया जाए बशर्ते इन गावों में शराब का अवैध कारोबार अपने इतिहास के समान ही रहे।

Sunday, 13 March 2011

डबलरोल: नदी-नहर किनारे सड़क, बाढ़-ट्रैफिक दोनों नियंत्रित after flood, river ghagger, road, toll tex, traffic


-मुगलकाल से रियासती काल तक होता रहा है सदुपयोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मेट्रो शहरों के बाद देश में सबसे सघन सड़क यातायात वाले पंजाब की सड़कों पर बढ़ रही वाहनों की संख्या, हर पांच-सात साल में सड़क चौड़ी करने को मजबूर कर रही है। परिणामस्वरूप किसान की जमीन या तो छिनती है या बंट जाती है। पंजाब का खेत लगातार छोटा होता जा रहा है पर ट्रैफिक समस्या से फिर भी बनी हुई, ऐसे में अब नदी-नहरों के सड़के बना दोहरा लाभ लिया जाएगा। एक ओर पक्के किनारे बाढ़ नियंत्रित करेंगे और बिना जमीन अधिग्रहण किए ट्रैफिक नियंत्रित भी हो जाएगा।
दिलचस्प है कि मुगलकाल से रियासती काल और फिर अंग्रेजी शासन में दरिया के किनारों का प्रयोग तो इस तरह से नहीं हुआ अलबत्ता कच्चे-पक्के सूए से नहरों तक सभी की योजना कुछ इसी तरह ही बनती रही है पर आजादी के बाद यह सीमित हो गया। ड्रैनेज विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि पिछली सरकार की ओर राज्य की 107 सड़कों पर टोल टैक्स लगाए जाने के बाद इस ओर सोचना शुरू किया गया। राष्ट्रीय मार्गो पर लगे टोल टैक्स इससे अलग है। जमीन अधिग्रहण आर्थिक व राजनीतिक रूप से  मंहगा साबित होने लगा है।
राज्य में चंडीगढ़ से अंबाला की ओर जाने डेराबस्सी और जीरकपुर के बीच से घग्गर किनारे शंभू के आगे आसानी से मिला जा सकता है। ऐसे ही हाई-वे पर भीड़ कम करने आसान व छोटे रास्तों में भाखड़ा नहर के अलावा, एसवाईएल और सरहिंद फीडर को भी लिया जा सकता है। घन्नौर से अंबाला तक ऐसी ही सड़क चल रही है तो पटियाला से समाना तक का भाखड़ा नहर का चल रहा रास्ता टोल के बाद बंद किया गया। समाना बाई पास पर हुए एक प्रयास ने आए दिन के जाम बंद कर दिए।
रोपड़ के बाईपास को सरहिंद नहर किनारे चमकौर साहिब तक किया गया है, इसे लुधियाना तक बढ़ाया जा सकता है। दोराहा के पास से जिस तरह से नहर का दोहरा प्रयोग हुआ है। राड़ा साहिब से अहमदगढ़ मंडी पुल तक गई नहरी सड़क को बठिंडा तक ले जाया जा सकता है। सतलुज के अलावा रावी दरिया से निकली नहर किनारे सड़क बना, सेना को सौंप,  इसे सीमा क्षेत्र तक खींच सुरक्षा बढ़ाने के अलावा तस्करी रोकने में भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं पर्यावरणविद् डा. जोगिंदर टाईगर कहते है कि अगर इस ओर कार्य किया जाता है तो वर्तमान सड़कों के किनारे किसान की जमीनों का हो रहा अधिग्रहण रुकेगा और नहरों के किनारे टूटने से भी बचत होगी, खाली पड़ी सरकारी जमीन का सदुपयोग होने के अलावा। नियमित रूप से चलता ट्रैफिक और सड़क की होने वाली जांच किनारे पक्के रखेगी और बाढ़ से भी निजात दिलाएगी। नदी के एक ओर के धूसी बांध पक्के हो सकेंगे और कनेक्टीविटी बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा।
वहीं प्रदेश के नहरी विभाग के चीफ इंजीनियर इजी. एएस दुल्लत कहते है कि यह सब कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है, हर स्थान पर नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से दोराहा से बठिंडा तक बठिंडा ब्रांच पर सड़क बनाए जाने के विचार पर काम चल रहा है। इसी क्रम में अबोहर ब्रांच पर भी सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इस योजना पर भी काम चल रहा है।

Wednesday, 9 March 2011

एईटीसी ने कानून पढ़ाया तो भूपेश अग्रवाल ने राजनीति

-व्यापारियों ने कहा भ्रष्ट अफसरों का क्या करें, अधिकारी कहते टेक्स चोरी रोकी जाए

भूपेश चट्ठा  पटियाला

फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रीज ऐसोसिएशन की ओर से आबकारी एंव कराधान विभाग और नगर निगम पटियाला के अधिकारियो के साथ रखे गए रूबरू कार्यक्रम में जहां व्यापारियों ने अपने दुखड़े सुना रियायतों की मांग की वहीं अधिकारियों ने किसी तरह की रियायतें देने में तो खुद को तकनीकि रूप से अस्मर्थ बताया अलबत्ता इतना आश्वासन जरूर दे दिया कि किसी व्यापारी के साथ धक्का होता है तो वह अथवा ऐसोसिएशन सीधा संपर्क कर सकती है।

ऐसोसिएशन के वरिष्ठ नेता सुरिंदर मित्तल की ओर से आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री डिवेलपमेंट बोर्ड के सदस्य एसडी भरत व्यापारियों व उद्योगपतियों की की समस्याएं रखते हुए कहा कि कई बार उन पर टेक्स के साथ पेनल्टी सिर्फ इस लिए थोप दी जाती है क्योंकी अधिकारी ने या तो टारगेट पूरा करना होता है या व्यापारी की फाईल उसके सामने खुल गई होती है। जबकि छोटे परिवार में रह रहा आज का व्यापारी कागजी कार्यवाई करने में अपना अधिक समय नहीं निकाल पाता और आए दिन कानून बदल रहे है।

वहीं बिक्री कर विभाग की ओर से अपनी पूरी टीम के साथ आए सहायक आबकारी एंव कराधान आयुक्त एचपीएस गिहोत्रा ने पूर्ण रूप से कानूनी ज्ञान का पाठ पढ़ाते हुए बताया कि वेट जैसे कानून लागू होने के बाद कई साल सरकार ने व्यापारियों पर पूरा भरोसा कर उनसे पूरा टेक्स भरे जाने की उम्मीद की लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो सख्ती करनी पड़ी। और ये जरूरी भी है कि जिस सरकार से वेतन लिया जा रहा है उस प्रति वफादारी निभाते हुए टेक्स की चोरी को पकड़े। यदि टेक्स चोरी अब भी नहीं रुकती तो और सख्ती होगी और मामले भी दर्ज करवाए जाएंगे। वहीं एईटीसी गिहोत्रा ने आश्वस्त किया कि नाहक ही किसी पर पैनल्टी नहीं लगाई जाएगी और यदि उनका कोई कर्मी अथवा अधिकारी गड़बड़ करता है तो वे उस पर भी कड़ी कार्यवाई करेंगे। सिर्फ उन्हें एक एसएमएस कर दिया जाए, शिकायतकर्ता का नाम भी गुप्त रखा जाएगा।

वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आबकारी एंव कराधान बोर्ड के डायरेक्टर भूपेश अग्रवाल ने पूरी तरह से व्यापारी वर्ग का पक्ष लेते हुए कहा कि व्यापारियों को आए दिन अधिकारियों के हाथों जलील होना पड़ता है। इसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे वे सरकार में है लेकिन अपनी कार में दरी लेकर चलते है, जहां कहीं भी व्यापरी वर्ग के साथ अन्याय देखेंगे वहीं धरना देने को तैयार है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट नाभा के चेयरमैन भूपेश अग्रवाल कहते है कि विभाग उन दो चार फीसदी गलत काम करने वालों की आड़ में पूरे उस समुदाय को बदनाम कर जलील नहीं कर सकता, जिसके दिए कर की वजह से अधिकारी मोटी तनख्वाह पाते है और सारा सिस्टम चल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह से व्यापारियों की शिकायतें अधिकरियों के पास आई होंगी वेसे ही उनके पास भी अधिकारियों के खिलाफ लंबी फैहरिस्त है। हालांकि अंतत: इस बात पर सहमति भी बन गई कि व्यापारियों को बिना मतलब उलझाया नहीं जाएगा और भ्रष्ट अधिकारियों खिलाफ भी कारवाई होगी।

निजी जमीन की ही करवा दी बोली!


भूपेश चट्ठा, पटियाला

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और नगर सुधार ट्रस्ट ऐसे शब्द हैं जिनमें विश्वास और सुधार को काफी प्रमुखता दी जाती है, लेकिन आज एसएसटी नगर में विकास योजना सुंदर नगर के लिए हुई बोली में विश्वास कम और शक ज्यादा पैदा कर दिया। आरोप है कि ट्रस्ट ने निजी अधिकार वाली जमीन के 400 गज के एक टुकड़े को भी अपनी बोली में शामिल कर नीलाम कर दिया, जिसकी बाकायदा रजिस्ट्री हो चुकी है।

बोली शुरू होने से ठीक पहले उक्त प्लाट का मालिक नीलामी स्थल पर आ पहुंचा और ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज को सारे मामले की जानकारी दी। इस पर बजाज ने उन्हें एक अधिकारी विशेष से बात करने की सलाह दी। एक ओर अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया जारी रखी तो दूसरी ओर उन्हें ट्रस्ट कार्यालय में आने को कह दिया।

इसके तुरंत बाद मौके पर ही प्लाट के मालिक होने का दावा करने वालों ने मंच से ही रजिस्ट्री हाथ में लहराते हुए घोषणा कर दी कि वे ही जमीन के उक्त टुकड़े के मालिक हैं और अगर कोई प्लाट खरीदता है तो हर्जाने के लिए वो खुद जिम्मेदार होगा। ट्रस्ट के बोली नहीं रोकने की स्थिति में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। प्लाट की पावर ऑफ अटार्नी रखने वाले संजीव वालिया दस्तावेज दिखा दावा करते हैं कि 1968 में पुराने प्लाट न. 94 का मुख्तयारनामा ओमप्रकाश पुत्र सुंदरलाल के नाम था जिससे उन्होंने प्लाट खरीदा और 1971 में रजिस्ट्री भी करवाई। एसएसटी नगर की 33 फुटी रोड पर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के नए नंबरों 27, 27ए, 27बी और 28 में उनकी जमीन का हिस्सा आ रहा है। बीती रात ही नीलामी की हो रही घोषणा के दौरान उन्हें अहसास हुआ तो भागदौड़ शुरू हो गई।

संजीव वालिया बताते है कि उनके पास खसरा न. 5385/2486/2435/1072 में 400वर्ग गज का टुकड़ा खेवट न. 603 खतोली न. 1334 श्रीमती गीता के नाम है आर इसकी पावर ऑफ अटार्नी उनके पास है। वालिया का आरोप है कि सरकार का काम लोगों के जानमाल और जमीन जायदाद की सुरक्षा करना है ना की जमीन छीन कर निलाम कर देना। वे न्यायालय की शरण में जा रहे है।

ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज कहते हैं कि ट्रस्ट ऐसे ही किसी की जमीन नीलाम नहीं कर देता। इंजीनियरिंग विभाग से रिपोर्ट आती है। इसके बाद ही पूरी जांच के बाद जमीन की नीलामी की जाती है। अगर किसी को शिकायत है तो उनके पास आ सकता है।


ठंडा रहा बोली का रिस्पांस


निज संवाददाता, पटियाला

नगर सुधार ट्रस्ट ने रिहायशी व व्यापारिक प्लाटों की बोली में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये कमाए। बोली के दौरान लोगों में अधिक उत्साह देखने को नहीं मिला क्योंकि करीब साढ़े तीन दर्जन में से करीब एक दर्जन जगहें ही बोली में बिक पाए।

नगर सुधार ट्रस्ट ने शहर के महाराजा यादविंद्रा एनक्लेव, शहीद सेवा सिंह ठीकरी वाला नगर, शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला नगर (सुंदर नगर) विकास स्कीम ट्रांसपोर्ट नगर, विकास नगर सेंटर व्यापारिक जगह में करीब साढ़े तीन दर्जन संपत्तियों को बोली से नीलाम करने था। नगर सुधार ट्रस्ट में चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज, कार्यकारी अधिकारी गुरिंदर सिंह सोढी, भाजपा नेता अरुण गुप्ता के अलावा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बोली करवाई गई। बोली के दौरान महाराजा यादविंदरा एनक्लेव की व्यापारिक जगह 121 वर्ग गज में बनी जगह को 75 लाख में खरीदा गया जबकि रिर्जव कीमत 45 लाख 59 हजार रुपये रखी गई थी।

Friday, 4 March 2011

पोस्टर से मंच तक 'रखड़ा राज'


रखड़ा ने विकास रैली में दिखाई प्रबंधन क्षमता
-समाना से उम्मीदवार, जीते तो सरकार में बड़ी जिम्मेवारी दूंगा कहा सुखबीर बादल ने
-रैली में हैरी मान को नहीं बुलाया, प्रो. चंदूमाजरा भी नदारद, पर शक्ति प्रदर्शन कामयाब
भूपेश चट्ठा, समाना (पटियाला)

अकसर शिरोमणि अकाली दल की रैलियों में साईड लाइन रहने वाले किंतु मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीबियों में समझे जाने वाले सुरजीत सिंह रखड़ा ने आज विकास रैली में अपनी प्रबंधन क्षमता को उपमुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने बेहतरीन ढ़ंग से साबित कर दिखाया। दिलचस्प है कि प्रभावशाली रैली से प्रभावित उपमुख्य मंत्री व पार्टी प्रधान ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ और उन्हें चुनाव लोकतंत्र में समाना विधानसभा क्षेत्र की बागडोर पूरी तरह से सौंप दी है।

समाना व आसपास के क्षेत्र में 38 करोड़ रूपये के प्रोजेक्टों के शिलान्यास के बाद आयोजित रैली में पार्टी प्रधान ने ना केवल मंच से रखड़ा को उम्मीदवार घोषित कर दिया अपितु समाना की जनता से यह भी कह दिया कि आप इन्हें जिता कर आगे भेजो तो अगली सरकार में एक बड़ी जिम्मेवारी इनका इंतजार कर रही है। समाना शहर व क्षेत्र के किसानों के लिए रखी गई अन्य मांगों पर उपमुख्य मंत्री ने कहा कि सुरजीत सिंह रखड़ा उनके पास जो भी प्रोजेक्ट लाएंगे वे तो पास हो ही जाने है। ऐसे ही मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी आने वाले है और वे सुखबीर को तो किसी बात से इंकार कर सकते है पर सुरजीत को नहीं।

दूसरी ओर रैली और विधान सभा क्षेत्र में पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर चल रही खींचतान में सुरजीत रखड़ा ने आज सभी को कुशल प्रबंधन वखुल कर लिए गए निर्णयों के बाद सभी को राजनीतिक पटखनी दे दी है। कांग्रेस छोड़ अकाली दल में आए हरिंदर पाल सिंह हैरी मान के साथ हाल ही में उठे विवाद में पार्टी आलाकमान स्पष्ट रूप से सुरजीत रखड़ा के साथ खड़ा नजर आया। पहले तो जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन सुरजीत रखड़ा को अपने स्तर पर रैली करने की खुली छूट दी, ऐसे में पोस्टर से लेकर मंच तक हर तरफ उन्हीं की राज दिखा। इतना ही नहीं रैली में ना केवल हैरी मान को बुलाया गया अपितु पार्टी महासचिव व पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा भी दिखाई नहीं दिए। रैली में सुरजीत रखड़ा ना केवल शक्ति प्रदर्शन में कामयाब रहे बल्कि कड़े निर्णय भी लिए है। व्हीसपर कैंपेन चलाने वाले अथवा भीतरी घात करने वालों को पहले ही किनारे कर दिया और जो आज सुबह रैली प्रबंध देख उनके घर तक आ गए उन्हें लौटा दिया गया।

हालांकि रैली में मुख्य संसदीय सचिव राज खुराना, पावरकाम के सदस्य गुरबचन सिंह बची, पिछड़ी श्रेणी कमीशन के चेयरमैन प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर, यूथ डवेलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना, भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रधान रविंदर सिंह गिन्नी ढिल्लों, एनआरआई चरणजीत सिंह व रवि आहलुवालिया, राजला गांव के सरपंच कश्मीर सिंह राजला प्रमुख रूप से मौजूद रहे।



लंगर का स्थान पैकड फूड ने, पानी बोतल बंद


उपमुख्य संवाददाता, समाना, पटियाला

अकाली दल की रैली हो तो बरबस ही रैली स्थल के आसपास लगने वाले लंगरों की तस्वीर उभर आती है लेकिन समाना की इस विकास रैली में आम चलन के विपरीत पैकड फूड का प्रबंध किया गया। सुरक्षा जांच के साथ ही हर व्यक्ति के हाथ में खाने का बंद डिब्बा थमा दिया जाता। इतना ही नहीं आम तौर पर वीआईपी समझे जाने वाले बोतल बंद पानी की बोतल भी प्रत्येक व्यक्ति को दी गई। रैली के प्रबंधक तो 35 से 40 हजार का संख्या बल होने का दावा करते है पर सूत्रों का कहना है कि शुरूआत में 200 गुणा 1000 फुट में करीब दस हजार के बैठने की व्यवस्था की गई और 25 हजार खाने के पैकट का आर्डर दिया गया। रैली स्थल पर करीब दस हजार कुर्सियों पर त्रिपाल ढक दी गई, हालांकि रैली के चरम तक पहुंचते -पहुंचते सारी कुर्सियां बाहर लग गई और खाने के लिए खींचतान शुरू हो गई।



केंद्रीय बजट दिशाहीन व गरीब विरोधी: उपमुख्य मंत्री

-मंहगाई की मार झेल रहे आम आदमी को राहत नहीं

-रेल बजट भी देश का नहीं बंगाल का हुआ: सुखबीर

भूपेश चट्ठा, समाना पटियाला

उपमुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल ने आज केंद्रीय बजट को पूरी तरह से दिशाहीन और गरीब विरोधी बताया है। समाना विधान सभा क्षेत्र के शिरोमणि अकाली दल प्रभारी सुरजीत सिंह रखड़ा के नेतृत्व में आयोजित विकास रैली के तुरंत बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत में उपमुख्य मंत्री ने केंद्रीय बजट की आलोचना में कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने मंहगाई की मार झेल रहे देश के लोगों की कोई चिंता नहीं है।

क्षेत्र में 38 करोड़ रूपये के प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के बाद सुखबीर बादल ने कहा कि केंद्र का यह बजट बहु राष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाला है। कांग्रेस और प्रधानमंत्री का सरकार पर अब कोई कंट्रोल नहीं रहा,यह सरकार घोटालों की सरकार बन गई है, जबकि इसके विपरीत पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार कृषि, बिजली, खेलें, शिक्षा, शहरी व ग्रामीण विकास में योजना से विकास कर रही है।

वहीं रेल बजट पर पूछे गए सवाल पर वे कहते है कि यह भी देश का नहीं बल्कि बंगाल का बजट हो कर रह गया है। रैली में सुखबीर कहते है कि प्रदेश में विद्या के मामले में 1000 करोड़ रुपए से आदर्श स्कूल खोले जा रहे है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में हजारों अध्यापक भर्ती कर एक बड़ी कमी को पूरा कर दिया गया है। उन्होंने नवयुवकों को नशों से बचाने एवं खेलों में दिलचस्पी पैदा करने हेतु 100 करोड़ रुपए की लागत से पंजाब भर में स्टेडियम व जिम बनाए जाने का जिक्र किया। आम आदमी की मुश्किलों के हल करने हेतु जमीनों की फर्दां को कम्प्यूटरीकरण एवं पुलिस रिकार्ड को कम्प्यूटरीकरण सहित अनेकों प्रशासनिक सुधार किए गए है।इस अवसर पर बादल ने इलाके में किए जा रहे विकास कार्यां का सेहरा जिला योजना बोर्ड अध्यक्ष सुरजीत ङ्क्षसह रखड़ा के सिर पर बांधा तथा उनको अपना पारिवारिक सदस्य बताते हुए उनके द्वारा इलाके के विकास हेतु की गई शेष मांगों को मुख्यमंत्री प्रकाश ङ्क्षसह बादल के विदेश से वापिस आने पर तुरंत पूरी करने का विश्वास दिलाया। रखड़ा को एक दरवेश राजनीतिज्ञ बताते उन्होंने कहा कि रखड़ा की हमेशा यही कोशिश रही है कि सरकार से अपने इलाके के लिए कोई नया प्रोजैक्ट लेकर आए।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह  पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो अपने शासन के 5 वर्ष तथा पिछले चार वर्षांे से किसी गांव में नहीं गया हो उसे पंजाब में हो रहे विकास बारे क्या जानकारी हो सकती है। केन्द्र की कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लेते उन्होंने यूपीए सरकार में हो रहे अरबों रुपए के घोटों में उसे जिम्मेदार माना है।

सुरजीत रखड़ा ने भी मनमोहन सिंह को बेबस प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार को चोर, डाकू, लुटेरों की सरकार कहा और जनता को कांग्रेस पार्टी से सुचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने बादल द्वारा हलके के विकास कार्यां हेतु दिए योगदान के लिए उनका धन्यवाद किया।

Thursday, 3 March 2011

अब बस भी करो मेघा..


गेहूं की जरूरत : तेला धुला पर पीली कुंगी की मार बढ़ने का अंदेशा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
 जब गेहूं को ठंड की जरूरत थी तो फरवरी के शुरू में ही तापमान बढ़ गया और अब फसल पकने को है तो पारा लुढ़क कर नीचे आ गया है। रुक-रुक कर लेकिन लगातार हो रही बारिश से मौसम में आई नमी गेहूं की उपज को विपरीत रूप से प्रभावित करने को है। महंगे कीटनाशकों से जूझ रहा किसान अब आसमान से गुहार लगा रहा है,मत बरसो मेघा, मानसून का इंतजार कर लो। धर्मेड़ी गांव के किसान गुरप्रीत सिंह कहते है कि कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती, यहां कोई बीमा भी नहीं करवाता, सब कुदरत पर छोड़ा जाता है, और अब कुदरत का बिगाड़ है यही ठीक करेगी। पिछली बार धान के सीजन में भी किसान बाढ़ का शिकार हो गया था और अब भी यही हालात बने हुए हैं। आज गर्म मौसम की जरूरत है, बल्लियां निकलने को हैं और दाना तभी बेहतर ढंग से बनेगा अगर मौसम में नमी नहीं होगी और ज्यादा से ज्यादा शुष्क रहेगा। ऐसे ही संसारपुर में प्रोग्रेसिव फार्मिग करवा रहे हरजिंदर सिंह बदेशां कहते हैं कि तेले की मार से उभरे ही नहीं थे कि अब पीली कुंगी आ गई, ऐसे में मार तो पड़नी तय है। अब कितनी पड़ेगी, यह आने वाले दिनों में खिलने वाली धूप पर निर्भर करता है। हालांकि क्षेत्र में जिन किसानों ने अपनी मनमर्जी से किस्मों की बिजाई की है, वे ज्यादा चपेट में आई है। उधर मुख्य कृषि अधिकारी सुभाष चंद्र खुराना कहते है कि ऐसा मौसम गेहूं को तो यह खराब ही करेगा, बारिश के बाद हवा चली तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता है। कृषि अधिकारी बताते हैं कि इन दिनों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना ज्यादा रहती है। जिन किसानों ने फसल को पानी लगा रखा है और उपर से बारिश के साथ हवा चली है वहां पौधे के गिरने की संभावना बन पड़ती है। कृषि विभाग की ओर से 50 फीसदी सब्सिडी पर प्रोपेगोणजोल अथवा टिल्ट स्प्रे करने को कहा गया है। इसकी कम से कम एक और जरूरत पड़ने पर दो स्प्रे 15 दिन के अंतराल पर किए जा सकते हैं। साथ ही वे यह भी कहते है कि किसान अब इस प्रति काफी जागरूक है लेकिन विभाग भी बराबर प्रचार कर रहा है।

गरीब पंचायतों की जमीन लीज पर, हुई कंगाल


-33 सालों के लिए चहेते निजी हाथों में, खाली करवाने का कोई प्रावधान नहीं
-हाई-वे के निकट और कामर्शियल महत्व की जमीनों पर सबकी निगाहें
भूपेश चट्ठा, पटियाला
किसान कंगाल हो, कर्ज तले डूबा हो तो आत्महत्या की बात सोचता है, कभी कर भी लेता है पर पंजाब की गरीब पंचायतों के पास यह विकल्प भी नहीं है, गांव की सामुहिक जमीनें औने पौने दामों पर लीज पर दे गांव को हमेशा के लिए कंगाली में धकेला जा रहा है। लीज पर लेने वाले या तो 'अपने बंदे' होने का टेग धारण किए है या फिर 'गांधी जी की तस्वीर हाथ में थामे वे व्यापारी' है जिनकी हर सरकार में चलती है। 
 
याद रहे कि पंचायती कानून के तहत ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत गांव की जमीन को 33 सालो के लिए दिया जा सके अलबत्ता  शहरों में म्यूनिसिपल कमेटियां अपने अधिकार क्षेत्र में 99 सालो के लिए जमीन देती रही है पर देश की आजादी के बाद से अब तक ऐसी किसी भी जमीन को नगरीय क्षेत्र में खाली नहीं करवाया जा सका है।
 विभागीय सूत्र बताते है कि राज्य में अब लीज पर दी जा रही पंचायती जमीन को खाली करवाने का उपाय लीज डीड में दर्ज ही नहीं है। हाई वे के निकट की एक करोड़ रूपये प्रति एकड़ मूल्य से अधिक की पंचायती जमीन को दो से पांच लाख रूपये में 33 सालों के लिए चढ़ाया जा रहा है। जबकि ये आसानी से एक से दो लाख रूपये सालाना की आय दे सकती है। सूत्र कहते है कि 33 साल बाद इन जमीनों पर इंफ्रास्ट्रक्चर बना होने के नाम पर कोर्ट से आसानी से स्टे लिया जा सकता है। ऐसा नगरीय कानून की आड़ में चल भी रहा है।

 हाई-वे के निकट और कामर्शियल महत्व की जमीनों पर अब सबकी निगाहें टिकी है। हालांकि खेती के नाम पहले भी ठेके पर गांव के लोग जमीन लेते रहे है पर इसका आधार दो चार साल का ही रहता आया है और शुल्क लगभग बाजार भाव के पास ही रहता है। अब लगभग हमेशा के लिए ही जमीन एक पार्टी की जमीन होकर रहने की गुंजाइश बढ़ गई है। इतना ही नहीं ये जमीन खुली निलामी में भी नहीं दी जा रही। ऐसे ही अपना नाम ना प्रकाशित किए जाने की शर्त पर शहर के साथ लगते गांव के एक सरपंच कहते है कि उन पर स्र्वोच्च प्रशासन का भारी दवाब होता है और ना कहने की स्थिति में प्रशासक लगा वही काम करवा लिया जाता है।  

दूसरी ओर इस संबंध में वित्त कमीश्नर व सचिव ग्रामीण विकास व पंचायत जगपाल सिंह संधू और ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के डायरेक्टर व प्रशासनिक सचिव गुरदेव सिंह सिद्धू से संपर्क नहीं किया जा सका। बताया गया कि वे न्यायालय की कारवाई के चलते व्यस्त है। और कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह ब्रहमपुरा अपने विधान सभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में मसरूफीयत के चलते प्रतिक्रिया नहीं दे सके।

पूर्व मंत्री व विधायक विक्रमजीत सिंह मजीठीया कहते है कि उनके पर्यावरण एंव प्रोद्योगिकी मंत्रालय के कार्यकाल में कुछ बायोमॉस प्रोजेक्टों के लिए पंचायतों की जमीनें लीज पर जरूर दी हैं अन्यथा कोई जमीन लीज पर नहीं दी जा रही। अलबत्ता कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में रिलायंस की फार्म टू फोर्क योजना के तहत पंचायतों की जमीनें हवाले करनी थी जिसका उन्हीं के बंदों ने विरोध किया और अब बादल सरकार ने इसे रद्द कर दिया था।  
उपमुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल से इस संबंध में बात करने पर वे सवाल करते है कि ऐसा कहां हुआ है... किसने किया है...किस काम के लिए जमीन दी गई है...अब तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश है। राज्य में हाई-वे पर स्थित गांवों की शामलाट जमीनों को लीज पर देने के सवाल पर वे कहते है कि अगर ऐसा है ते रिव्यू करेंगे।