भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला शहर के शराब के ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे और एक शराब ठेकेदार का ड्रा पहले निकलने और फिर रद कर, दोबारा ड्रा निकालने के मामले में अब गेंद एक बार फिर आबकारी एवं कराधान आयुक्त के पास आ गई है। पीड़ित पक्ष के न्यायालय की शरण में जाने के बाद आए निर्णय में कहा गया है कि आयुक्त पूरे मामले की सुनवाई दस दिनों के भीतर कर अपना फैसला देंगे।
न्यायालय ने वीरवार को दायर हुई याचिका पर शुक्रवार को याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या मामले की वीडियो रिकार्डिग हुई है? यह स्पष्ट हो जाने पर न्यायालय ने आबकारी विभाग को आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच दस दिनों के भीतर करें। साथ ही अंतिम निर्णय पर भी अधिकृत कर दिया है।
याद रहे कि विभाग पहले ही पटियाला में तैनात इंस्पेक्टर प्रवीण जोशी और क्लर्क सतपाल सिंह को छह माह के लिए निलंबित कर दोनों के तबादले भी कर चुका है। इसके अलावा आबकारी आयुक्त ए. वेणू प्रसाद ने पूरे मामले की जांच अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त को सौंप रखी है। हालांकि एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तवर्ष में दस दिन से भी कम समय शेष रहते बिठाई गई जांच के परिणाम की तिथि तय नहीं की गई थी, इसे अब न्यायालय ने समय सीमा में बांध दिया है।
उल्लेखनीय है कि 'दैनिक जागरण' ने शराब ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे पर प्रमुखता से विशेष रिपोर्ट प्रकाशित कर खुलासा किया कि किस तरह से ड्रा निकाले जाने के दौरान पूरी पारदर्शिता के बावजूद भरी पब्लिक में गड़बड़ और गोलमाल दोनों हो गए। जिला प्रशासन व आबकारी अधिकारियों की नाक के सामने शराब ठेकेदारों ने कानून का आपरेशन कर दिया। सरकार को राजस्व में तो कोई फर्क नहीं आया पर विभाग की किरकिरी जम कर हो गई थी।
दूसरी ओर, नगर निगम क्षेत्र में एक ग्रुप का ठेका रद होने के चलते अपना हक खोने का आरोप लगाने वाले समूह ने आज दोपहर बाद न्यायालय क ा निर्णय आने के बाद संवाददाता सम्मेलन कर डाला। अपने पूर्व में लगाए गए आरोप दोहराने के अलावा कई और सवाल भी उठाए गए। कहा गया कि शाम तक प्रार्थना पत्रों की संख्या कम थी और अचानक अगले दिन 50 प्रार्थना पत्र और आ गए। ये सब अधिकारियों की मिलीभगत से विभाग में कार्य समय समाप्त होने के बाद किया गया। इतना ही नहीं एक कांग्रेसी को साथ लेकर दूसरे ग्रुप के सत्ता पक्ष से जुड़े होने का आरोप लगा राजनीतिक रंग देने का प्रयास भी किया गया है।
पटियाला शहर के शराब के ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे और एक शराब ठेकेदार का ड्रा पहले निकलने और फिर रद कर, दोबारा ड्रा निकालने के मामले में अब गेंद एक बार फिर आबकारी एवं कराधान आयुक्त के पास आ गई है। पीड़ित पक्ष के न्यायालय की शरण में जाने के बाद आए निर्णय में कहा गया है कि आयुक्त पूरे मामले की सुनवाई दस दिनों के भीतर कर अपना फैसला देंगे।
न्यायालय ने वीरवार को दायर हुई याचिका पर शुक्रवार को याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या मामले की वीडियो रिकार्डिग हुई है? यह स्पष्ट हो जाने पर न्यायालय ने आबकारी विभाग को आदेश दिया है कि पूरे मामले की जांच दस दिनों के भीतर करें। साथ ही अंतिम निर्णय पर भी अधिकृत कर दिया है।
याद रहे कि विभाग पहले ही पटियाला में तैनात इंस्पेक्टर प्रवीण जोशी और क्लर्क सतपाल सिंह को छह माह के लिए निलंबित कर दोनों के तबादले भी कर चुका है। इसके अलावा आबकारी आयुक्त ए. वेणू प्रसाद ने पूरे मामले की जांच अतिरिक्त आबकारी एवं कराधान आयुक्त को सौंप रखी है। हालांकि एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तवर्ष में दस दिन से भी कम समय शेष रहते बिठाई गई जांच के परिणाम की तिथि तय नहीं की गई थी, इसे अब न्यायालय ने समय सीमा में बांध दिया है।
उल्लेखनीय है कि 'दैनिक जागरण' ने शराब ठेकों के ड्रा के दौरान हुए हंगामे पर प्रमुखता से विशेष रिपोर्ट प्रकाशित कर खुलासा किया कि किस तरह से ड्रा निकाले जाने के दौरान पूरी पारदर्शिता के बावजूद भरी पब्लिक में गड़बड़ और गोलमाल दोनों हो गए। जिला प्रशासन व आबकारी अधिकारियों की नाक के सामने शराब ठेकेदारों ने कानून का आपरेशन कर दिया। सरकार को राजस्व में तो कोई फर्क नहीं आया पर विभाग की किरकिरी जम कर हो गई थी।
दूसरी ओर, नगर निगम क्षेत्र में एक ग्रुप का ठेका रद होने के चलते अपना हक खोने का आरोप लगाने वाले समूह ने आज दोपहर बाद न्यायालय क ा निर्णय आने के बाद संवाददाता सम्मेलन कर डाला। अपने पूर्व में लगाए गए आरोप दोहराने के अलावा कई और सवाल भी उठाए गए। कहा गया कि शाम तक प्रार्थना पत्रों की संख्या कम थी और अचानक अगले दिन 50 प्रार्थना पत्र और आ गए। ये सब अधिकारियों की मिलीभगत से विभाग में कार्य समय समाप्त होने के बाद किया गया। इतना ही नहीं एक कांग्रेसी को साथ लेकर दूसरे ग्रुप के सत्ता पक्ष से जुड़े होने का आरोप लगा राजनीतिक रंग देने का प्रयास भी किया गया है।
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