गेहूं की जरूरत : तेला धुला पर पीली कुंगी की मार बढ़ने का अंदेशा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
जब गेहूं को ठंड की जरूरत थी तो फरवरी के शुरू में ही तापमान बढ़ गया और अब फसल पकने को है तो पारा लुढ़क कर नीचे आ गया है। रुक-रुक कर लेकिन लगातार हो रही बारिश से मौसम में आई नमी गेहूं की उपज को विपरीत रूप से प्रभावित करने को है। महंगे कीटनाशकों से जूझ रहा किसान अब आसमान से गुहार लगा रहा है,मत बरसो मेघा, मानसून का इंतजार कर लो। धर्मेड़ी गांव के किसान गुरप्रीत सिंह कहते है कि कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती, यहां कोई बीमा भी नहीं करवाता, सब कुदरत पर छोड़ा जाता है, और अब कुदरत का बिगाड़ है यही ठीक करेगी। पिछली बार धान के सीजन में भी किसान बाढ़ का शिकार हो गया था और अब भी यही हालात बने हुए हैं। आज गर्म मौसम की जरूरत है, बल्लियां निकलने को हैं और दाना तभी बेहतर ढंग से बनेगा अगर मौसम में नमी नहीं होगी और ज्यादा से ज्यादा शुष्क रहेगा। ऐसे ही संसारपुर में प्रोग्रेसिव फार्मिग करवा रहे हरजिंदर सिंह बदेशां कहते हैं कि तेले की मार से उभरे ही नहीं थे कि अब पीली कुंगी आ गई, ऐसे में मार तो पड़नी तय है। अब कितनी पड़ेगी, यह आने वाले दिनों में खिलने वाली धूप पर निर्भर करता है। हालांकि क्षेत्र में जिन किसानों ने अपनी मनमर्जी से किस्मों की बिजाई की है, वे ज्यादा चपेट में आई है। उधर मुख्य कृषि अधिकारी सुभाष चंद्र खुराना कहते है कि ऐसा मौसम गेहूं को तो यह खराब ही करेगा, बारिश के बाद हवा चली तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता है। कृषि अधिकारी बताते हैं कि इन दिनों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना ज्यादा रहती है। जिन किसानों ने फसल को पानी लगा रखा है और उपर से बारिश के साथ हवा चली है वहां पौधे के गिरने की संभावना बन पड़ती है। कृषि विभाग की ओर से 50 फीसदी सब्सिडी पर प्रोपेगोणजोल अथवा टिल्ट स्प्रे करने को कहा गया है। इसकी कम से कम एक और जरूरत पड़ने पर दो स्प्रे 15 दिन के अंतराल पर किए जा सकते हैं। साथ ही वे यह भी कहते है कि किसान अब इस प्रति काफी जागरूक है लेकिन विभाग भी बराबर प्रचार कर रहा है।
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