उम्मीद : उत्पादन एक से दो फीसदी बढ़ने की संभावना, पर बारिश हुई तो नुकसान
भूपेश चट्ठा, पटियाला सर्दियों में कभी लंबे समय तक कोहरा तो कभी पाला। यदि दोनों न हों तो तेला और चढे़ पारे की मार। इस बार रबी के सीजन में ऐसा कुछ नहीं हुआ। गेहूं की फसल हर बीमारी से बची रही, पर अब पकने को तैयार है तो बादलों में उलझ कर रह गई है।
किसान को आशंका है कि कहीं समाप्त होते सीजन में जाते जाते मौसम की मार न पड़ जाए। हालांकि बकौल कृषि माहिर, सब कुछ ठीक रहा तो उपज पिछले साल की तुलना में बढ़नी तय है। डकाला ब्लाक के धर्मेहड़ी गांव के प्रोग्रेसिव किसान गुरप्रीत सिंह बताते हैं कि इस बार पीली कुंगी जैसी बीमारी की मार नहीं पड़ी है और सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन आसमान को देखते ही हौसले पस्त हो रहे हैं। ऐसे हालात में अगर बारिश आई तो नुकसान तय है। बारिश के बाद चलने वाली हवा से पौधे का गिरना तय है। इससे न केवल दाने बल्लियों से बाहर बिखरेंगे, बल्कि कंबाइन से कटाई भी मुश्किल हो जाएगी।
इसी प्रकार घनौर ब्लाक के सील गांव के हरदीप सिंह बताते हैं कि इन दिनों बिलकुल साफ मौसम और तेज धूप की जरूरत गेहूं को है, जिससे दाने भली प्रकार पक जाएं और पौधे से बीमारी छंट जाए। पर आखिरी पानी के समय से आसमान पर बादल छाए हैं जिससे दाने में नमी के आसार बढ़े हुए हैं।
वहीं मुख्य कृषि अधिकारी डा. राजिंदर सिंह सोही बताते हैं कि इस बार बारिश की मार न पड़े तो झाड़ एक से दो फीसदी बढ़ना तय है, लेकिन बादलों के ऐन उपज लेने के समय आ जाने ने डर बढ़ा दिया है। सीजन के दौरान उपजे हालात पर डा. सोही कहते हैं कि तेले की कहीं-कहीं हल्की मार पड़ी है और येलो रस्ट अथवा पीली कुंगी भी कुछ जगह देखी गई है, लेकिन इससे भी ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं है। तेले पर समय रहते दवाओं का छिड़काव करवा दिया गया तो येलो रस्ट की मार सीमित रही है। हवा में से पैदा होने वाली यह कुंगी तापमान के 23 डिग्री पर आते ही स्वत: झड़ जाती है। ऐसे में इससे भी नुकसान की संभावना कम है।