भूपेश चट्ठा, पटियाला
अक्टूबर में पराली को जलाने से धुआं छाया तो नवंबर में दिवाली केपटाखों से हुए प्रदूषण ने पूरे प्रदेश को गैस चैंबर ही बना डाला, गैसें तो आसमान में चली गई आसमान में छाई गर्द को जहां तीन महीने बाद आई बारिश ने धो दिया है, वहीं फसलों को भी खासी राहत प्रदान की है। मौसम में मौजूद सस्पेंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल को धोने और फसलों को टॉनिक देने के लिए इन दिनों हर किसी को बारिश का इंतजार रहता है। हालांकि इसे फतेहगढ़ साहिब में होने वाले शहीदी जोड़ मेले से भी जोड़ कर देखा जाता है।
दिलचस्प है कि इसी महीने के दूसरे सप्ताह में दैनिक जागरण ने बारिश के इंतजार में कुछ कृषि विशेषज्ञों के विचार प्रकाशित किए थे तब फाइव एलीमेंट हेल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के अध्यक्ष डा. जोगिंदर टाइगर ने बारिश में हुई देरी से इत्तेफाक नहीं किया था, वे कहते रहे कि गेहूं को बारिश की जरूरत 20 दिसंबर के बाद होती है और तब तक यह हो भी जाएगी। सर्दी की आवश्यकता इसके बाद ही होती है। वीरवार को संपर्क किए जाने पर डा. टाइगर ने कहा कि आजकल की बारिश से गेहूं की उन किस्मों को भी लाभ होगा जिनकी देर से बिजाई की गई है, मानसून के लंबा खिंचने और धान की कटाई में हुई देरी के बावजूद फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं है। अन्यथा कोहरे से ये पछेती किस्में मर जाती हैं।
टाइगर अंग्रेजी महीनों की तारीखों के हिसाब से बिजाई के आगे परंपरागत ज्ञान को अधिक महत्व दे कहते हैं कि पंजाब में लोहड़ी तक देसी गेहूं की बिजाई चलती थी और बैसाखी को शगुन के तौर पर दाती लगा फसल की कटाई होती थी जबकि अब इस दिन तक पूरा सीजन खत्म कर दिया जाता है। वहीं, बारिश के बाद कुछ दिन कोहरे का न होना और तापमान का कम रहना गेहूं के लिए बेहतर बताया जाता है। इतना ही नहीं लगातार हुई बारिश के बाद कोहरे का स्थान ओस ले लेती है।
कृषि विशेषज्ञ डा. बीएस सोहल कहते हैं कि बारिश इन दिनों में सोने पर सुहागा का काम करती है। हर फसल को इससे लाभ है। गेहूं का पौधा कम पारे में लंबाई कम लेगा और इसकी शाखाएं ज्यादा फूटेंगी। इससे उपज बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है, चूंकि कोहरा नहीं होगा तो सूरज की किरणों से पत्तों पर होने वाली प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया लगातार जारी रहने से पौधे का विकास जारी रहेगा। पत्तों के धुलने से होने वाला लाभ अलग है।
उधर, सोशल साइंसिस एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला कहते हैं कि सूखी सर्दी से निजात दिलाने वाली इस बारिश से जैसे इंसान को फेफड़ों और छाती रोगों से राहत मिलेगी वैसे ही फसलों, पेड़ पौधों को भी लाभ होगा।
No comments:
Post a Comment