Friday, 10 December 2010

प्रदूषण की गर्द छंटने का इंतजार

भूपेश चट्ठा, पटियाला
अक्टूबर में पराली को जलाने से धुआं छाया तो नवंबर में दिवाली के पटाखों से हुए प्रदूषण ने पूरे राज्य को गैस चैंबर बना डाला, गैसें तो आसमान में चली गई पर गर्द अभी भी छंटी नहीं है। मौसम में मौजूद सस्पैंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल को धोने और फसलों को टॉनिक देने के लिए हर किसी को बारिश का इंतजार है।
कोहरे का न होना और तापमान का कम रहना गेहूं के लिए बेहतर बता कृषि विशेषज्ञ डा. बीएस सोहल कहते हैं कि यदि बारिश इन दिनों में हो जाए तो सोने पर सुहागा होगा। हर फसल को इससे लाभ है। गेहूं का पौधा कम पारे में लंबाई कम लेगा और इसकी शाखाएं ज्यादा फूटेंगी। इससे उपज बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन यदि कोहरा पड़ने लगे तो सूरज की किरणों से पत्तों पर होने वाली प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया धीमी होने से पौधे का विकास थम जाएगा।
फाईव एलीमेंट हेल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाईगर बारिश में हुई देरी से इत्तेफाक नहीं रखते, वे कहते हैं कि गेहूं को बारिश की जरूरत 20 दिसंबर के बाद होती है और तब तक यह हो भी जाएगी। सर्दी की आवश्यकता इसके बाद। आजकल चल रहे मौसम से गेहूं की उन किस्मों को भी लाभ होगा जिनकी देर से बिजाई की गई है, मानसून के लंबा खिंचने और धान की कटाई में हुई देरी के बावजूद फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं है।
बारिश की कमी पर सिंचाई के लिए अतिरिक्त बिजली की मांग करने वाले भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां कहते हैं कि सिर्फ चार घंटे कृषि को बिजली दी जा रही है जबकि मांग कम से कम आठ घंटे की है। वे बताते हैं कि नरमा पट्टी में अभी पहला पानी ही नहीं लगा है। राज्य भर में दस फीसदी क्षेत्र में बिजाई होनी है। ऐसे में यदि मात्र दस दिनों के लिए ही सही लगातार आठ घंटे बिजली मिल जाए तो किसान बच जाएगा।

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