इंजीनियरिंग
-यूथ कांग्रेस से बिट्टू की पैदल यात्रा चल रही थी तो मनप्रीत ने जागो निकाली अब मजीठिया भी कूदे
- सुखबीर की विकास यात्रा ने भी पकड़ी रफ्तार
-कैप्टन अमरिंदर का जिलों में रोड़ शो आएगा
-चमकोर साहिब, जोड़ मेला और माघी के धार्मिक दीवान अगले एक महीने में
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सर्दी के तेज होने अथवा गर्मी में लू के चलने व बारिश में बाढ़ के दिनों में अक्सर राजनीतिज्ञों की गतिविधिया सीमित हो जाती हैं पर इस बार मौसम में पारा गिरने के साथ ही राजनीति में पारा शिखर पर चढ़ने को है। केंद्र में चुनाव हुए दो साल भी नहीं हुए हैं पर हर राजनीतिक दल रैलियां करने की जोर-शोर से तैयारियां कर रहा है। हालांकि अपने कार्यकर्ताओं को संगठित करने उठाए गए मुद्दे राजनीतिक न होकर सामाजिक ही हैं।
मास कम्यूनिकेशन के शोध छात्र पंकज शुक्ला बताते हैं कि शिरोमणि अकाली दल की नशे व भ्रूण हत्या के खिलाफ लगातार, मगर धीमी गति का प्रचार नन्ही छांव जैसे पर्यावरण प्रोजेक्ट के साथ चल रहा था तो यूथ कांग्रेस ने नशे व भ्रूण हत्या में एड्स व दहेज जैसे कुछ और नाम शामिल कर पैदल यात्रा शुरू कर दी। इसी दौरान अकाली दल से अलग होकर मनप्रीत बादल ने पटियाला में पूर्व डिप्टी स्पीकर के घर से अपनी जागो यात्रा की घोषणा कर दी। हालांकि इसमें राजनीति के करीबी किंतु सामाजिक की श्रेणी में ही रखे जाने वाले भ्रष्टाचार, बेरोजगारी व लोन जैसे आर्थिक मुद्दे और जुड़ गए।
अब यूथ अकाली दल के प्रधान व विधायक विक्रमजीत सिंह मजीठिया युवाओं में नेतृत्व क्षमता तलाशने और उन्हें संगठित करने की दिशा में जिला स्तर पर नए साल के शुरू में रैलियां करने जा रहे हैं। फिर संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की जाएगी।
सोशल सांइसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. बलजीत सिंह कहते हैं कि मनप्रीत प्रकरण के बाद से उपमुख्यमंत्री व अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की विकास यात्रा रफ्तार पकड़ चुकी है। राज्य में क्या हो रहा है, यह लोगों के सामने परिणाम के रूप में लाने के पारदर्शी तरीके को अपनाते हुए प्रोजेक्टों के दौरे स्वतंत्र मीडिया से करवाने का क्रम चल निकला है। गिद्दड़बाहा व बठिंडा में ऐसा हो चुका है और अगले महीने तक अन्य थर्मल प्लांटों की बारी है।
सर्दी के और तेज होने पर 22 दिसंबर से कांग्रेस के प्रदेश प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह की जिला स्तर पर रैलियों व रोड शो का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। यहां स्पष्ट रूप से मुद्दे राजनीतिक हो सकते हैं।
दिसंबर मध्य के बाद से जनवरी मध्य तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में तीन बड़े समारोह राजनीतिज्ञों का इंतजार अथवा राजनीतिज्ञों को चमकौर साहिब, जोड़ मेला और माघी के अवसर पर सजने वाले धार्मिक दीवान कहे जाने वाले राजनीतिक मंचों का इंतजार है। अगले एक महीने में भोग व विवाह समारोहों की राजनीति के साथ इन सबसे रूबरू पंजाबी वोटर को होना होगा।
हम भी वोट डालेंगे, मगर अबकी बार जागते हुए।
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