Sunday, 19 December 2010

2010सफरनामा बाढ़ ने राहत पर पानी फेरा

कृषि के लिए कई समस्याएं रही साल भर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में किसी भी तरह के रोजगार को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाली कृषि के लिए यह साल बहुतायत की समस्या लेकर आया। बीते साल जहां बारिश की कमी ने सताया था तो इस साल मानसून बाढ़ की सौगात लेकर आया। ऐसे में जहां वर्ष 2009 में खेती की लागत बढ़ी तो 2010 में उपज में कमी आ गई। हालांकि दोनों ही सालों के अनुभव ने किसान को काफी हद तक यह जरूर समझा दिया कि प्राकृति से छेड़छाड़ का खामियाजा भुगतने का समय आ गया है, ऐसे में वर्ष 2011 में पहुंच रही राज्य की लाइफ लाइन और इसके झंडाबरदार किसान थोड़ा ज्यादा संभल कर चलेंगे ऐसी उम्मीद करना बेमानी नहीं है।
10 का गम
जुलाई मध्य तक यही मानसूनी बारिश ने बरसाती नदियों में उफान ला दिया और बाढ़ का कहर जिले भर में ढ़ाह दिया और 74 हजार एकड़ धान की फसल डूब गई। संभावित रूप से ज्यादातर हिस्से में नुकसान ही हुआ। कम पानी और कम समय में पक कर अधिक उपज देने वाली धान की सबसे लोकप्रिय हुई पीएयू-201 किस्म को प्रतिबंधित करना किसानों को दोहरी मार दे गया। धान की लाभदायक किस्म हाथसे निकल गई। अब 2011 में उम्मीद है कि किसान का आर्थिक नुकसान कम करने इस किस्म की जगह कोई अन्य किस्म शोध करने वाले लेकर आएं।
बिहार में नीतिश राज के दौरान चली विकास योजनाओं के चलते प्रदेश में 2009 के दौरान आई मजदूरों की कमी का असर इसउ साल कुछ कम हुआ हालांकि मजदूरों करी कमी बनी रही पर मैनेज कर ली गई। थोड़ा दिहाड़ी बढ़ा कर और थोड़ा सीजन लंबा खींच कर। प्रदेश में पराली का जलना बीते साल की तुलना में ज्यादा कम नहीं हुआ, हालांकि इस साल पराली जलाने वालों पर दर्ज होने वाले मामलों की संख्या में खासी गिरावट दर्ज हुई। संभवत मानसून के लंबा खिंचने और बाढ़ के चलते धान की कटाई में हुई देरी के चलते प्रशासनिक सख्ती में कमी रही हो।
10 का दम
मानसून के सही समय पर प्रवेश के अलावा प्री मानसूनी बौछारों ने कृषि के अलावा पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को भी राहत दी ऐसे में जून मध्य से लेकर पांच सात दिन के अंतराल उपर आई अच्छी बारिश ने पनीरी से लेकर बिजाई में कोई दिक्कत नहीं आने दी।

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