Thursday, 23 December 2010

सफ़रनामा 2010 उत्तर-पूर्व को फैलने लगा शहर, बूम अभी बाकी है...

रियल एस्टेट
-पूडा स्वीकृत कालोनियों की ओर बढ़ा रूझान
-निगम ने जिस क्षेत्र को घोषित किया कामर्शियल वहीं पर चला सट्टा
-मांग मास्टर प्लान जल्द लागू करे सरकार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
रीयल एस्टेट अथवा प्रापर्टी के दाम एक बार फिर अपनी पुरानी ऊंचाइयां छूने को है, प्रापर्टी डीलरों के यहां अब उनके अलावा भी कुछ और लोग भी आने लगे है, जिसके पास प्लाट बेचने के लिए है उसने दाम बढ़ा दिए है और जो ऊंचे दामों पर फंसा हुआ था और छह महीने पहले तक किसी तरह बेचने को बेताब था अब उसने अपना इरादा बड़े बूम के इंतजार में बदल दिया है। हालांकि इसी दौरान शहर के विकास और लोगों की सोच दोनों में आए परिवर्तन में अब शहर के वास्तु ने उत्तर-पूर्व की ओर तो लोगों ने अवैध कालोनियों की अपेक्षा पूडा स्वीकृत की ओर अपना रूख कर लिया है।

नौ बनाम दस

दो साल पहले के प्रापर्टी बूम का दर्द पिछले साल आम आदमी के साथ बाजार के विशेषज्ञों ने भी सहा जब शहर के बाहरी इलाके में काटी गई किसी कालोनी शानदार शो रूम के बाहर कुर्सियां लगाए डीलर बैठा सिर्फ अपने दोस्तों का इंतजार करता था, ग्राहक के आने के बारे में कम सोचना और टाईमपास के नुक्ते तलाशना ज्यादा महत्वपूर्ण होता था, यह सिलसिला इस साल के पहले छह महीनों तक जारी भी रहा पर अब मानसून व शेयर बाजार के बेहतर रहने की स्थिति में पैसा जमीन जायदाद में आने लगा है। सरहिंद रोड़ पर औमेक्स व ट्राईकोन सिटी ने शहर की परिधि को तेरह किलोमीटर तक खींच कर बढ़ा दिया। भादसों रोड पर ला युनिवर्सिटी ने यही काम किया। इस साल इन दोनों ही क्षेत्रों में इन प्रोजेक्टों के आसपास के क्षेत्रों में वास्तु पुरूष फैल रहा है।

दस का दम

प्रापर्टी यदि आम से खास हो जाए तो दाम बढऩे तय होते हैं, राजपुरा रोड पर हीरा बाग के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ, इसे कामर्शियल बनाने के नाम ने ही दाम सात हजार रूपये प्रति गज से बढ़ाकर 22 हजार के पार कर दिए। हालांकि अभी नोटिफीकेशन होना है, पर सट्टा जारी है। सट्टे में ईजाफा करने के लिए राजनीतिक गतिविधियों का भी जम कर प्रयोग हो रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रदेश कांग्रेस का प्रधान बनने को मुख्यमंत्री बनने तक से जोड़ दिया गया है। मास्टर प्लान जल्द लागू किए जाने की मांग हर कोई कर रहा है। कुछ ऐसी ही स्थिति अर्बन एस्टेट की है जहां सौ फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। स्वीकृत कालोनियां चाहे इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की त्रिपड़ी की हों या कोई और दाम दोगुने हो चुके हैं।

2011 में हम

जमीन का पैसा जमीन में ही लगता है, यह बात अगले साल में शाही शहर में पूरी तरह से लागू होने जा रही है। देश भर में कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर बढ़ रही ब्याज दरों का ग्रहण कुछ हद तक लगना तय है पर मंहगाई दर के अगली फसल आने तक नियंत्रित होने की उम्मीद ने प्रापर्टी में बढ़ता का रास्ता तय कर दिया है। चुनावी वर्ष में फोर लेन के गुजरने और जीटी रोड तक का रास्ता तय करने में शहर दो चार किलोमीटर और तय करेगा। शहर के पाश कहे जाने वाले माडल टाऊन, आफीसर्स कालोनी, बैंक कालोनी के इर्द गिर्द हर कोई खरीदने की इच्छा तो रखेगा पर शायद बेचने वाले ढूंढऩे में मशक्त करनी पढ़ सकती है। शहर में 25 से 30 फीसदी मकान मंहगे होने तय माने जा रहे है पर वैध तरीके से बने।

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