Monday, 20 December 2010

वरदान साबित हुई घग्गर की बाढ़, कुदरत ने कर्ज उतरा

भूजल
घग्गर की बाढ़ से जलस्तर साढ़े तीन मीटर तक ऊपर उठा
दस सालों की औसत मानसून में बारिश 377 मिमी. तो इस साल तीन महीनों में बरसा 718 मिमी. पानी
भूपेश चट्ठा, पटियाला

मानसून से पहले ही पटियाला को हिला देने वाली बाढ़ भूजल स्तर के लिए वरदान साबित हो गई है। घग्गर की बाढ़ ने इसके आसपास के क्षेत्रों में धरती के अंदर का जलस्तर साढ़े तीन मीटर तक ऊपर उठा दिया है।

घग्गर की सहायक नदियों मारकंडा, टांगरी, मीरांपुर चौ, पटियाला की राव का पानी जिन क्षेत्रों में किनारे तोड़कर फैला, वहां भूमिगत जलस्तर औसतन दो मीटर तक ऊपर आ गया। कृषि विभाग के मानसून पूर्व व मानसून के बाद अक्टूबर में किए सर्वेक्षण में सामने आया कि पातड़ां ब्लाक में साढ़े तीन मीटर, भूनरहेड़ी ब्लाक में तीन मीटर जलस्तर ऊपर आ गया है। इन्हीं दो ब्लाकों में बाढ़ की भीषण मार पड़ी थी, जबकि बाढ़ प्रभावित अन्य ब्लाकों घन्नौर में डेढ़ मीटर, सन्नौर में 1.30 मीटर, समाना में आधा मीटर तक भूजल स्तर में सुधार देखा गया है। बाढ़ से सर्वाधिक अप्रभावित रहे पटियाला के ही शेष ब्लाक में जलस्तर गिरा है। बाढ़ से दूर रहे ब्लाक में राजपुरा में डेढ़ मीटर, पटियाला (शहरी) में 0.7 मीटर एवं नाभा में आधा मीटर नीचे खिसक गया है।

हालांकि, पटियाला के सहायक हाइड्रोलॉजिस्ट डा. अरुण कुमार कहते हैं कि बाढ़ को ध्यान में रखकर कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया है। विभाग की ओर से हर साल उक्त दोनों महीनों में सर्वेक्षण किया जाता है। इस साल पिछले दस सालों की औसत मानसून में बारिश से करीब दोगुनी बारिश तीन मानसूनी महीनों जुलाई, अगस्त व सितंबर में हुई। दस साल का औसत 377 मिमी. तो इस साल तीन महीनों में 718 मिमी. पानी बरस गया।

सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि पटियाला में कोई भी ऐसा ब्लाक नहीं है जो अतिशोषित की श्रेणी में न हो। यह चौथी श्रेणी में खतरनाक सीमा के पार है। 15 से 32 मीटर के बीच चल रहे भूजल स्तर में पातड़ां की ही स्थिति सबसे खराब है। यहां 30 मीटर से नीचे ही है, जबकि कुल 16 तय स्थानों में से घन्नौर ब्लाक में घग्गर के किनारे एक स्थान ऐसा भी है जहां मात्र दो मीटर पर पानी आ गया है। डा. अरुण कुमार कहते हैं कि इसके कारणों की जांच की जानी है।

No comments:

Post a Comment