Monday, 27 February 2012

कहीं नारियल दबा, तो किसी ने कोयला बहाया, after punjab election,


'चुनावी उपचार'
- हवन-प्रार्थना-अरदास-आर्शीवाद आम हुआ अब टोटके भारी पड़े, गाली सुनने भी गए नेता
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य विधान सभा चुनाव के परिणाम आने की तिथि नजदीक आने के साथ ही जहां नेताओं की धड़कने उनके ब्लड प्रेशर व शूगर के साथ ही बढ़ रही हैं वहीं उम्मीदवारों के समर्थकों-करीबी रिश्तेदारों की ओर से अपने बंदे की जीत के लिए हर तरह का टोटका आजमाया जा रहा है। इसमें सर्वाधिक प्रचलित 'नारियल दबानेÓ से लेकर सबसे च्यादा गोपनीय तरीके से किया जाने वाला 'गाली सुननेÓ का टोटका भी शामिल है। हालांकि बहते पानी में पानी वाले नारियल के साथ कोयला, साबुत मांह अथवा सात प्रकार के अनाज का मिश्रण बहाना आम है।

नारियल दबाए जाने के टोटके पर ऐसे ही एक 'माहिरÓ बताते हैं कि वर्तमान में पंजाब पीपल्स पार्टी के एक नेता अकाली होने से पहले जब कांग्रेस का टिकट लेने दिल्ली गए थे तो वहां पर नारियल दबाते दिल्ली पुलिस की ओर से पकड़ भी लिए गए पर अब पंजाब से लेकर उत्तरकाशी तक कोई समस्या नहीं है। चुनाव लडऩे से पहले और विरोधी उम्मीदवार का नाम साफ होते ही एक नेता जी ने बिल पत्र पर विरोधी का नाम लिख कर शहद की शीशी में बंद कर लिया। बताया जा रहा है कि इससे उक्त विरोधी की 'क्षमताएं सीलÓ की गई हैं।
इसी क्रम में साफ सुथरी पूजा करवाने वाले पंडित नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बताते हैं कि विधि विधान से हवन-यज्ञ करना, अपनी कामयाबी के लिए प्रार्थना-अरदास करना कोई बुरी बात नहीं है। संतों फकीरों का आर्शीवाद लेना भी कोई बुरी बात नहीं है पर एक शराब चढऩे वाले डेरे पर किसी का बताया टोटका सिद्ध करने, गाली सुनने जालंधर के पास चले जाना ठीक कैसे कहा जा सकता है। कम से कमच्च्योतिष अनुसार सही नहीं है।
एक महीने में किसने? कितने टोटके किए? इसकी स्टीक जानकारी तो संभव है किसी के पास ना हो लेकिन चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों व उनकी ओर से की ओर से लगाई जा रही इस 'जुगतÓ में लगभग हर राजनीतिक दल के लोग शामिल हैं। दिलचस्प है कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में इस तरह के 'प्रयोगोंÓ के मुखर विरोधी हैं उन्होने ने भी अपने करीबी को मूक सहमति दे रखी है। ऐसे ही एक सलाहकार कहते हैं कि जिस तरह की विरोधाभास वाली अटकलों का दौर चल रहा है उसमें कुछ भी संभव है। ऐसे में यदि एक दो 'उपायÓ कर भी लिए जाएं तो बुराई क्या है?

36 बजट गुजरे पर नहीं बिछी 86 किमी लाइन,patiala-samana-patran-jakhal railway line


सुनिए मंत्री जी
-आंखे बिछाए पीढ़ी हुई जवां पर नहीं बिछी रेलवे लाइन

भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला से जाखल तक रेलवे लिंक बना कर समाना और पातड़ां को जोड़ मूणक होते हुए रेलवे लाइन को देखने में आंखें बिछाए एक पूरी पीढ़ी जवां होने के बाद अधेड़ अवस्था में पहुंच रही है पर इस दौरान निकले 36 रेलवे बजट इस 86 किलोमीटर की दूरी रेल पटरी पर पूरी नहीं करवा पाए।
पटियाला से पातड़ा (55 किलोमीटर) पातड़ा से मूणक (25 किमी) पंजाब में शेष छह किमी हरियाणा में रेलवे लाइन का मुद्दा हालांकि अब पूरी तरह से चुनावी हो कर रह गया है, फिर भी क्षेत्र के लोग रेलवे बजट से पहले नजरें बिछा लेते हैं कि इस बार कौनसे सर्वे की घोषणा होगी। हालांकि रेलवे लाइन का लारा लगाने के दौर में समाना का 'स्टेशनÓ भी उखड़ गया। करीब दो साल पहले एक ही रात में हुई कार्रवाई के बाद से रेलवे लाइन की बात करने वालों को तो राहत मिल गई पर आम आदमी की समस्या और बढ़ गई है।
 आतंकवाद की शुरुआत अथवा 70 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह के कार्यकाल में जब स्व. संत राम सिंगला समाना से चुनाव लड़े तो पटियाला-समाना-पातड़ा-जाखल रेलवे लाइन का विचार आया जम कर वोटें भी पड़ी। पिछड़े कहे जाने वाले क्षेत्र के लोगों को लगने लगा कि उनका गांव-खेत मैन रेल लाइन पर होगा, जमीन की कीमत बढ़ेगी और व्यापार का विकास होगा, लेकिन परिणाम आज सभी के सामने है, विधान सभा चुनावों में उठने वाला रेलवे लिंक का मुद्दा अब लोक सभा चुनावों तक पहुंच गया है, पर मामला हर बार स्र्वे शुरु होने के साथ ही सिमट जाता है।
शिरोमणि अकाली दल से विधायक रहे, जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि उन्होंने केंद्र को इस बाबत लिखा है। क्षेत्र की जरूरतों व रेलवे लिंक बनने से खुलने वाली संभावनाओं पर विस्तार पूर्वक बताया है, पर बात आगे नहीं बढ़ सकी है। कहते हैं कि ये केंद्र का प्रोजेक्ट है और हम इसका स्वागत करते हैं। ऐसा होता है तो समाना के लोगों के लिए अच्छी बात है। इससे विकास को बढ़ावा मिलेगा।

बाक्स
 रेलवे लाइन बिछाने चले थे 'स्टेशनÓ भी उखड़ गया

 2005-06 के बाद से रेलवे में कंप्यूटरीकरण होने के बाद से आउट एजेंसी के नाम पर टिकट की बुकिंग बंद हो गई। अब सिर्फ उन्हीं स्थानों के टिकट दिए जाते हैं जहां रेलवे लाइन जा रही है और जो स्टेशन कंप्यूटर में फीड हैं। हालांकि इससे पहले तक समाना के लिए देश के किसी भी कोने से रेलवे टिकट लिया जा सकता था और सुबह शाम समाना तक आने जाने का प्रबंध रेलवे पीआरटीसी के माध्यम से करवाता था, इसी बस में पार्सल के साथ सवारियों के बैठने का प्रबंध होता था। पर अब ऐसा नहीं है। अंतिम किराया 13 रूपये बताया जा रहा है।  रेलवे की ओर से पासर्ल व अन्य प्रकार की बुकिंग  के लिए समाना में 'स्टेशनÓ खोला गया था और ये स्टेशन रियासती काल की मौनो रेल के समय से यहां के लोगों को सेवाएं देता आ रहा था। जिस किराए की जगह पर उक्त स्टेशन दशकों से चलता रहा उक्त भूमि पर मालिकाना हक की लड़ाई में एक ही रात में सामान सड़क पर आ गया आजकल उसी जमीन पर बनी बिल्डिंग पर बैंक चल रहे हैं।  

शुरु होने की उम्मीद: परनीत कौर

केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने पिछले लोक सभा सत्र में भी समाना से होकर रेलवे लाइन बिछाने का मुद्दा उठाया था और तत्कालीन रेलवे मंत्री ममता बनर्जी के दो साल पहले के रेलवे बजट में एकबार फिर से उल्लेख होने का हवाला भी दिया था। रेलवे लाइन पर बात सिर्फ सर्वे तक पर ही रहने पर वे जनता प्रति जवाबदेही से इन्कार नहीं करती हैं पर ये भी कहती हंै कि 'अब जल्द शुरु होना चाहिए'

ठेकेदारों को होगा भुगतान या कर्मियों को मिलेगा वेतन!,municipal corporation, economy,


...बदहाली
- शहर के विकास कार्यों के लिए आए फंड से दो बार बिजली बिल चुकाया निगम ने
- भुगतान नहीं तो काम नहीं, वेतन नहीं तो धरना भी लगेगा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नगर निगम वर्तमान सरकार के अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुंच चुका है। कम से कम निगम के आर्थिक हालात तो कुछ ऐसे ही बन पड़े हैं कि निगम या तो ठेकेदारों को उनके किए कार्यों का भुगतान करे या फिर अपने कर्मियों को वेतन दे।
निगम प्रबंधन इसी महीने जनवरी का वेतन ना दे पाने के चलते धरना प्रदर्शन झेल चुका है और अब फरवरी महीने का सवा दो करोड़ रूपये का वेतन चुकाने व प्रबंध करने के लिए मात्र तीन कार्य दिवस का समय बचा है। वहीं विधानसभा चुनावों के चलते अंधाधुंध तरीके से काम कर चुके ठेकेदारों के भी सवा करोड़ से ज्यादा के बिल भुगतान के इंतजार में हैं। दिलचस्प है कि इन बिलों को निगम पास तो कर चुका है, लेकिन पेमेंट नहीं की गई है। इतना ही नहीं पेमेंट ना होने के चलते 35 से 40 लाख रूपये की धरोहर राशि भी निगम के खाते में ही है।
निगम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि चंद महीने पहले मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से पटियाला में किए जाने वाले कार्यों के लिए पौने आठ करोड़ रूपये जारी किए। इसमें से दो करोड़ रूपये शहर में सीवरेज का प्रबंध कर रहे सीवरेज बोर्ड के पास चले गए।
शेष बची राशि में से गली में इंटर लाकिंग टाइल, सड़क  निर्माण, पानी की पाइप लाइन, स्ट्रीट लाइट, धर्मशाला निमार्ण इत्यादि लगाने से लेकर मरम्मततक के काम निपटने थे। इसमें से ज्यादातर के वर्क आर्डर भी जारी हो रखे हैं और कई काम भी निपट चुके हैं।
  दिलचस्प है कि शहर के विकास कार्यों के लिए आए उक्त फंड में से दो बार निगम प्रबंधन ने अपना बिजली बिल चुका दिया। धन की कमी के चलते दो बार 35-35 लाख रूपये के बिजली बिलों के भुगतान किए जा चुके हैं। पौने आठ करोड़ रूपये में से ही पटियाला वन की धर्मशालाओं के लिए आए दो करोड़ रूपये भी इसी तरह के कार्यो में  खप गए बताए जा रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि ठेकेदारों का पक्ष रख रही निगम की राजनीतिक सत्ता ने निगम के कोष के कस्टोडियन प्रबंधकों के पास पहले भी ठेकेदारों का भुगतान करने का मामला उठाया जब बिजली बिलों का भुगतान किया गया।
इतना ही नहीं फरवरी महीने का अंत ज्यों ज्यों नजदीक आ रहा है। प्रबंधन कर्मियों के धरने प्रदर्शन से सहमा वेतन का प्रबंध करने में लगा है तो सितंबर महीने में समाप्त हो रहे निगम के कार्यकाल और अगले चुनावों की तैयारियों में लगे नेताओं को मानसून सीजन से पहले 'अपने बंदोंÓ के काम निपटाने की जल्दी है।
ठेकेदारों को भुगतान नहीं हुआ तो विकास के काम नहीं होना तय है पर यहां धरने प्रदर्शन की गुंजाइश कम है वहीं कर्मियों को वेतन नहीं तो रूटीन काम तो रुकेगा ही धरना भी लगेगा यह भी तय है।
निगम कमिश्नर तो इस मामले पर टिप्पणी नहीं करते, वहीं संयुक्त कमिश्नर भी बैठक में व्यस्त रहने की बात करते हैं, जबकि मेयर अजीतपाल सिंह कोहली स्वीकार करते हैं कि निगम आर्थिक रूप से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। साथ ही उम्मीद जताते हैं कि प्रबंध हो जाएगा।

शहर की सारी कारें पोलो मैदान पर!, traffic, pologround, dog show


फोटो
- लोअर माल पर चल रहे निर्माण व अवैध पार्किंग ने भी जाम में दिया योगदान
- कुत्तों के अलावा रौनक देखने वालों का भी लगा जमावड़ा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
ऐतिहासिक शहर पटियाला में हर साल सर्दियों के इन दिनों में आयोजित होने वाले डॉग शो की लोकप्रियता का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार के दिन जहां शहर की अन्य सड़कें सूनी पड़ी थी, वहीं शहर की सारी कारें पोलो मैदान पर जा पहुंची हुई थी। उम्मीद से कहीं ज्यादा उमड़ी भीड़ ने ट्रैफिक पुलिस के सारे प्लान धराशाई कर दिए। हालांकि दोपहर बाद पोलो मैदान व सेना कार्यालय के बीच से गुजरने वाली सड़क से वन-वे प्लान लागू कर थोड़ा बहुत नियंत्रित करने का प्रयास जरूर हुआ है।
दिलचस्प है कि मेले के पिछले आयोजनों में अक्सर पोलो मैदान के सभी गेट खोल देते हैं और प्रतियोगिता में भाग लेने वालों, उनके समर्थकों से लेकर आम आदमी की कारें भी अंदर तक चली आती थी। लेकिन इस बार सारे गेट बंद रखे गए। संभव है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया हो, लेकिन इससे आम राहगीर की परेशानी खासी बढ़ी डेयरी व्यवसायी भगवान दास गुप्ता कहते हैं कि आज उन्हें गाड़ी वापिस मोड़कर शेरांवाला गेट के रास्ते से ही ब्रहमकुमारी आश्रम की ओर जाना पड़ा।
इसी क्रम में लोअर माल पर वर्कशाप के मालिक जस्सी कहते हैं कि लोअर माल पर चल रहे सड़क निमार्ण व अवैध पार्किंग ने भी आज के जाम में योगदान दिया है अन्यथा ये सड़क अवकाश के दिनों में खाली ही रहती है।
दिलचस्प है कि डॉग शो में कुत्तों के अलावा रौनक देखने वालों के लगे जमावड़ा ने भी ट्रैफिक जाम में बढ़ोतरी की है। मेला देखने आए कंवर प्रताप सिंह कहते हैं कि बच्चों की छुट्टी थी सो वे घुमाने ले आए हैं, यहां आइसक्रीम से लेकर कबाब तक का प्रबंध है, लेकिन अब ये मजबूरी बन गया है। कोई व्यक्ति उनकी कार के आगे अपना वाहन खड़ा कर गया है। ऐसे में निकल नहीं पा रहे हैं।


आयोजकों ने नहीं दी पूर्व सूचना : ट्रैफिक पुलिस
पोलो मैदान के आसपास लगे जाम पर ट्रैफिक पुलिस के इंचार्ज अछरू राम ने ट्रैफिक के प्रबंधों के कम रहने के सवाल पर बताया कि बताया कि कार्यक्रम के आयोजकों ने उन्हें पूर्व सूचना ही नहीं दी। ऐसे में ट्रैफिक प्रबंधों के कम या ज्यादा होने की बात ही नहीं उठती। कारों का जमावड़ा लगने के बाद ही उपाय किए गए हैं। दोपहर बाद इंडोर स्टेडियम के पास से ट्रैफिक को मोड़ा गया है।

नक्शा बनवाने-पास करवाने वालों की लगी लाइनें, municipal corporation, economy,


-हर रोज चार से पांच अवैध निर्माण के हो रहे हैं खुलासे: संयुक्त कमिश्नर
-अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बाद राजस्व में 76 लाख की हुई बढ़ोतरी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नगर निगम पटियाला में इन दिनों हाल ही में किए गए निर्माणों के नक्शे बनवाने और शुल्क जमा करवा निगम प्रशासन से पास करवाने वालों की लाइनें लग गई हैं। हाल ही में निगम की कार्रवाई के बाद से करीब दस दिनों में 76 लाख रूपये की आय हुई है।
याद रहे कि निगम ने अपने कर्मियों का वेतन चुकाने आबकारी विभाग से प्राप्त 70 लाख रूपये का प्रयोग इसी महीने किया है। निगम तीन महीने से कर्मियों का पीएफ व पैंशन फंड नहीं जमा करवा पाया था और एक महीने का वेतन बकाया रह गया।
वहीं निगम के कामकाज में दिलचस्पी रखने वाले  प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि इन दिनों निगम परिसर में में नक्शा नवीसों के पास समय ही नहीं है। हर तरफ लाइन लगी है। एरिया टाउन प्लानर निर्मलप्रीत सिंह बताते हैं कि अवैध निर्माणों के बाद से बढ़ी गतिविधियों में नक्शानवीसों को पूरी तरह से व्यस्त कर दिया है। उनके पास अगले तीन दिनों के लिए समय नहीं है। इसी तरह से एडवांस बुकिंग चल रही है। वे बताते हैं कि एक फरवरी के बाद से पहले पखवाड़े में 36 लाख रूपये की आय सिर्फ इसी शुल्क से हुई है।
इसी क्रम में संयुक्त कमिश्नर नाजर सिंह बताते हैं कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बाद राजस्व में जहां बढ़ोतरी हुई है वहीं यह क्रम आगे भी जारी रहना तय है। निगम की ओर से फील्ड में जूनियर इंजीनियरों और एसडीओ की तैनाती के बाद से लगातार रिपोर्ट आ रही हैं। हर रोज चार से पांच अवैध निर्माण अथवा बिना नक्शा पास करवाए भवन निर्माण हो रहा है। इन सभी पर आने वाले दिनों में कार्रवाई होनी तय है। हालांकि मौके पर पहुंच कर एक बार आगाह जरूर किया जा रहा है।
वहीं हाउस टेक्स के बकाया मामले निपटाने पर हुई आय में संयुक्त कमिश्नर कहते हैं कि आठ फरवरी को हाउस टेक्स कमेटी की बैठक में 15 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है तो 15 फरवरी को रखी गई बैठक में निपटाए गए तीन मामलों में 25 लाख रूपये का लंबित राजस्व की प्राप्ति हुई है।

Wednesday, 15 February 2012

काश बिन चुनाव जारी रहे 'आदर्श आचार संहिताÓ after punjab election, code conduct, wine,


-तीन दिन में सड़क पर शराब पीने के डेढ़ दर्जन ममाले दर्ज, स्कूली वाहनों के चार दर्जन चालान
-मामला सभ्य समाज में समझ के बावजूद सिर्फ कानून ना पालन करने का
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शाही शहर पटियाला दुनिया भर में चाहे अपने एतिहासिक पैग के लिए मशहूर हुआ है पर यहां कि सड़कें पिछले कुछ सालों से सड़क किनारे रेहडिय़ों, ढ़ाबों, खोखों पर 'खड़कने वाली गिलासीÓ के चलते बदनाम हो चली थी लेकिन विधान सभा चुनाव के चलते मतदान के बाद भी जारी आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते पुलिस ने लंबे अर्से बाद शराबियों को तहजीब सिखाने और अवैध रूप से चल रहे 'ओपन एयर बॉरÓ बंद करवाने का प्रयास किया है। दिलचस्प है कि ऐसे कुख्यात अड्डों के पास से गुजरने वाला हर इंसान अब कहने लगा है कि काश बिन चुनाव के भी ऐसी 'आदर्श आचार संहिताÓ शहर में जारी रहनी चाहिए।
पिछले तीन दिन में सड़क किनारे किसी अस्थायी इंतजाम में शराब पीने पिलाने के दर्ज किए गए डेढ़ दर्जन ममाले बताते हैं कि पुलिस ने इस बार कार्रवाई की है। दिलचस्प है कि इनकी संख्या जहां पहले दिन दहाई अंक में थी तो दूसरे दिन यह सात पर आ गई जबकि बीती रात सिर्फ एक मामला ही दर्ज किया गया है। पुलिस के ही एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि एसएसपी के आदेशों पर कार्रवाई तो जारी रही पर धरा केवल एक ही गया है। वो भी वीवीआईपी क्षेत्र कहे जाने वाले अर्बन एस्टेट में मीट की रेहड़ी लगाने वाले और इस पर शराब पीने के आरोप में दो लोगों क खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। तफजल पुरा के कलपत सिंह व राम दयाल इस बार गिरफ्त में आए हैं।
ठीक ऐसे ही शहर की सड़कों पर मनमाने ढ़ंग से स्कूली वाहन चलाने और नन्हें बच्चों से लेकर स्कूली विद्यार्थियों का जीवन दांव पर लगाने वालों पर ट्रैफिक पुलिस की मात्र एक दिन की कार्रवाई में चार दर्जन चालान काट दिए गए। इसमें बस से लेकर आटो रिक्शा, मिनी बस, तूफान, और वैन जैसे हर तरह के वाहन हैं जिन्होंने यातायात नियमों को ना मानने की आदत ही डाल ली है। यहां पर सुधार तो कम हुआ पर बसों के रास्ते जरूर बदल गए हैं। हालांकि पुलिस की सारी गतिविधियां पटियाला शहर तक ही सीमित रही हैं जबकि  हालात जिले के अन्य शहरों में भी कुछ अलग नहीं हैं।
वहीं जिला प्रशासन के एक सेवा मुक्त अधिकारी कहते कि सारा मामला सभ्य समाज में समझ के बावजूद सिर्फ कानून ना पालन करने का है, इसके अलावा कुछ नहीं। ऐसे में नियम कानून की पालना करनी चाहिए और करवानी भी चाहिए वे कहते हैं कि पुलिस व आबकारी विभाग को अगले चरण में चाहिए कि जहां वैध रूप से बैठने के अहाते बनाए गए हैं वे भी दुकान के अंदर ही रहने चाहिए और बैठने की संख्या के हिसाब से राजस्व वसूला जाना चाहिए नाकि सड़क व बरामदों में मेज कुर्सियां लगाने की छूट देकर।

वेतन नहीं मिला, प्रदर्शन, चैक जारी, municipal corporation, economy


-सरकार की ओर से आए आबकारी टेक्स के हिस्से से जारी किए 70 लाख के चैक
-एक महीने की बकाया थी सेलरी, तीन महीने से पीएफ व इतने ही समय से नहीं जमा हुआ पैंशन फंड
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राच्य की सत्ता खाली पड़ी हो और चुनाव आयोग के आदेशों के चलते मतदान के बाद भी आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो ऐसे में कोई भी व्यक्ति कर्मचारी आंदोलन के बारे में नहीं सोच सकता, लेकिन सोमवार को नगर निगम के कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। कारण सिर्फ और सिर्फ कर्मियों को वेतन नहीं मिलने का था।
 आधिकारिक तिथि के गुजर जाने के दो सप्ताह बाद भी जब वेतन मिलने के आसार बनते नहीं दिखे तो कर्मियों ने सहायक कमिश्नर नाजर सिंह के कार्यालय के बाहर धरना दे डाला और एक तरह से उनका घेराव कर बंधक ही बना डाला। हालांकि बाद में राज्य सरकार के आबकारी विभाग की ओर से किसी भी स्थानीय निकाय विभाग को आबकारी कर में से दिए जाने वाले हिस्से के तहत 70 लाख रूपये आए तो जनवरी महीने के वेतन के लिए लगभग इतनी ही राशि के वेतन के चैक काट दिए गए हैं। पटियाला नगर निगम में करीब 250 कर्मी कार्यरत हैं।
वहीं कर्मचारियों के आज के आंदोलन का नेतृत्व करने वाली म्यूनिसिपल वर्कर यूनियन प्रधान नरेश कुमार बॉबी और कार्यकारी प्रधान गुरप्रीत सिंह चावला कहते हैं कि सरकार की ओर से आए आबकारी टेक्स के हिस्से से फिलहाल तो वेतन जारी कर दिया है। कर्मियों की एक महीने की सेलरी बकाया थी। वे कहते हैं कि वेतन तो जैसे तैसे दे दिया गया है पर तीन महीने से कर्मियों का ना तो पीएफ जमा करवाया गया है और इतने ही समय पैंशन फंड भी जमा नहीं करवाया गया है।

बाक्स
क्या कहते हैं सहायक कमिश्नर

कर्मियों के घेराव और गुस्से का शिकार हुए सहायक कमिश्नर नाजर सिंह कहते हैं प्रदेश भर में हालात ऐसे ही हैं। वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद एरियर व वेतन भत्तों में हुई बढ़ोतरी के चलते ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। वेतन जैसे तैसे चुकाने पर पीएफ इत्यादि के जमा ना होने के सवाल पर वे कहते हैं कि राज्य सरकार से आने वाला पैसा रुका हुआ है जैसे जैसे आता जाएगा कर्मियों के खातों में जमा करवाते जाएंगे। ऐसे में चिंता की कोई बात नहीं होनी चाहिए।

सफेद हाथी बन गया मिड टाउन प्लाजा, improvement trust, midtown plaza


-नगर परिषद की हैरीटेज बिल्डिंग को तोड़ बनाए कामर्शियल कांपलेक्स में लोगों को दिलचस्पी नहीं
-सात सालों बाद भी नहीं बसी 29 में से 23 दुकानें
 फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर के बीचों बीच स्थित बड़े ही चाव से शहर को एक ओर शापिंग माल देने के उद्वेश्य से बनाया गया मिड टाउन प्लाजा आज मात्र सफेद हाथी बन कर रह गया है। बिल्डिंग में बनी दुकानों की तीन बार नीलामी के प्रयास के बावजूद मात्र बीस फीसदी दुकानें ही बेची जा सकी हैं।
एतिहासिक शहर पटियाला के जिस धर्मपुरा बाजार में मिड टाउन प्लाजा का निर्माण वर्ष 2005 में करवाया गया वहां चहल पहल अथवा ग्राहकी के मामले में कोई कमी नहीं है, इसी मार्केट के सामने और आस पास बने कई शो रूम अपनी दिनचर्या भली प्रकार चला रहे हैं। पर इस बाजार की ये दुकानें संभावित रूप से किसी 'ग्रहणÓ से प्रभावित होकर गई हैं।
मिड टाउन प्लाजा की दुकानों के संदर्भ में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्र मोहन सिंह बजाज कहते हैं कि तीन बार कोशिश की गई पर रिसपांस नहीं आया, कई बार किस्मत की बात भी होती है कि प्रयासों के बावजूद भी कुछ चीजें नहीं बिक पाती। वे स्वीकार करते हैं कि धरती के भी अपने भाग होते हैं।
दिलचस्प है कि रियासती काल के स्थानीय प्रशासन व आजादी के बाद के पंजाब की नगर पालिका की हैरीटेज बिल्डिंग को तोड़ बनाए कामर्शियल कांपलेक्स में लोगों को दिलचस्पी क्यों नहीं है इस पर तो कोई कुछ नहीं बता पाता, लेकिन इतना अवश्य है कि बिल्डिंग के निमार्ण से पहले किए गए सर्वे में कमी जरूर रह गई। संभव है कि होम वर्क सही ढ़ंग से ना होने की वजह से प्रोजेक्ट कामयाब नहीं रहा।
सात साल पहले बनी मिड टाउन प्लाजा में करीब छह करोड़ की लागत से 29 दुकानें बनाई गई, इनमें से 23 दुकानें आज भी खाली हैं। रौनक के नाम पर लगभग जीरो का आंकड़ा ही सामने आता है। अब तक की तीन बोलियों में बिकी छह दुकानों से आमदन 50 से 60 रूपये के बीच ही रही।
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन बजाज बताते हैं कि शहर के बीच शापिंग माल की तर्ज पर बने इस प्लाजा में पार्किंग के अलावा बेसमेंट में पार्किंग, डबल लिफ्ट जैसी हर बड़ी सुविधा है और आज के समय में बीस लाख रूपये में एक बड़ी दुकान बाजार में मिलती कहां है। हालांकि इंद्र मोहन बजाज कांग्रेस कार्यकाल में बने प्लाजा की दुकानें ना बिकने पर हताश अब भी नहीं हैं। वे कहते हैं कि राच्य की सत्ता पर एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी की सरकार आएगी और वे फिर प्रयास करेंगे।


यहां चलती है मर्जी, नहीं हुआ वन वे, municipal corporation, one way


-ना लोगों ने दिया सहयोग, ना प्रशासन ने ली सुध
-अभी भी लगे हैं वनवे के बोर्ड पर मानता नहीं कोई
 भूपेश चट्ठा, पटियाला
शाही शहर के चंद लोगों के अंदाज निराले हैं जो अपने ही तरीके से अपनी और अपने जीवन की गाड़ी चलाते हैं। ना चाहते हुए भी अब हर कोई अपनी मर्जी चलाने लगा तो परकोटे वाले शहर की सड़कों पर ट्रैफिक जाम की  समस्या से निजात दिलाने नगर निगम की ओर से बनाया गया ट्रैफिक प्लान शहर में सिरे नहीं चढ़ सका है। शहर की सड़कों को वन वे प्लान अब कागज के नक्शों में सीमित हो कर रह गया है।
शहर में ट्रैफिक को तरतीब से नियंत्रित करने को शेरांवाला गेट से अंदर प्रवेश करने पर तव्वकली मोड़ से धर्मपुरा बाजार, अनारदाना चौंक और फिर अदालत बाजार होते हुए किला चौंक तक का रास्ता एक तरफा कर दिया गया। इसी प्रकार लाहौरी गेट से आर्या समाज चौंक की ओर का रास्ता वन वे करते हुए सिर्फ प्रवेश के लिए रखा गया। अन्य सड़कों से बाहर की ओर निकलने के रास्ते सुझाए गए।
एक बारगी प्लान घोषित होने के बाद ना लोगों ने इसके क्रियांवन मेंं सहयोग दिया और ना ही प्रशासन ने ही इसकी सुध ली है। शहर में अभी भी वनवे के बोर्ड लगे हैं पर इस दिशा संकेतों को मानने वाला कोई नहीं है।
वहीं मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि निगम की ओर से इस दिशा में हर संभव उपाय किया गया। लेकिन 'लोगों की इच्छाÓ के आगे नहीं चल सका। इसके अलावा इसे लागू करने का जिम्मा ट्रैफिक पुलिस के पास था इसमें निगम की कोई भूमिका नहीं थी। ऐसे में आप नगर निगम को दोषी नहीं ठहरा कसते।
 लगातार बढ़ रही ट्रैफिक समस्या इस समय जिला पुलिस के लिए भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है, लेकिन पुलिस विभाग इस समस्या को हल करने के लिए कोई सफलता हासिल नहीं कर सका है। ट्रैफिक से जुड़े पुलिस अधिकारियों का अपना तर्क है कि वह ट्रैफिक के समाधान के लिए कई प्रकार की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर अपने आला अधिकारियों को भेजते रहे हैैं, लेकिन किसी भी योजना को सरकार ने गम्भीरता से नहीं लिया। यही नहीं शहर के मुख्य 19 ट्रैफिक प्वाइंट  पुलिस कर्मी कभी कभार ही दिखते हैं।
आतंकवाद के दिनों को याद करने वाले लोग बताते हैं कि यही पुलिस थी और ऐसी ही नगर परिषद थी, किसी की क्या मजाल कि एक साइकिल भी निकल जाए। अब केवल योजनाएं बन रही हैं।
दिलचस्प है कि शहर के दुकानदार दबी जुबां से यह तो स्वीकार करते हैं कि ग्राहक पहले की तरह शहर में नहीं आते। बड़ी गाडिय़ां और लगने वाले जाम इसके लिए जिम्मेवार हैं, पर इस कार्य में उनका योगदान भी है, इस पर बोलने को तैयार नहीं हैं और पड़ौसी की ओर इशारा कर देते हैं कि देखो वो मुझसे च्यादा बड़ा गुनाहगार है।

नई आयोग ने नहीं लगने दी, पुरानी रिपेयर नहीं हुई, municipal corporation, street light


...स्ट्रीट लाइट
 'भेज देते हैंÓ, 'करवा देते हैंÓ से ज्यादा सुनने को कुछ नहीं मिलता
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
सर्दियों के कोहरे की चादर छंट चुकी है, धुंध का आलम गायब है पर शहर विशेष रूप से फैक्ट्री एरिया क्षेत्र की सड़कों पर रात में अंधेरे का साम्राज्य छाया रहता है। करीब करीब सवा महीने से चल रहे चुनाव आयोग के आदर्श चुनाव आचार संहिता के डंडे के चलते जहां क्षेत्र में नई स्ट्रीट लाइटें नहीं लग पाई जबकि पुरानी खराब हो चुकी स्ट्रीट लाइटों की मरंमत ही नहीं की गई।
ऐसा भी नहीं है कि पूरे क्षेत्र में ही अंधेरे का आलम हो। लेकिन जहां तहां स्ट्रीट लाइट मात्र खंबे के रूप में खड़ी है। डीटीएच के व्यवसाय से जुड़े हरविंदर सिंह कहते हैं कि उन्हें किसी के यहां लगी मरकरी से एतराज नहीं है, लेकिन वे यह भी चाहते हैं कि उनकी गली के मोड़ पर लगी टयूबलाइट भी चलती रहे। पिछले एक महीने से एक के बाद एक टयूबलाइटें बंद हो रही हैं। शिकायत केंद्र पर कई बार फोन भी किए पर 'भेज देते हैंÓ, 'करवा देते हैंÓ से ज्यादा सुनने को कुछ नहीं मिलता।
जबकि रेलवे से रिटायर्ड गार्ड बीएस कंग कहते हैं कि अब तो स्ट्रीट लाइट की ओर ध्यान देना बंद कर दिया है। अब कभी किसी दुकान के बाहर लगे बल्ब की रोशनी कीद ओर ध्यान जाता है तो कभी मंदिर, गुरुद्वारा साहिब के बाहर लगी लाइट के सहारे ही काम चलाया जाता है और अनुमान लगाया जाता है कि मोड़ कहां है? और खड्डा कहां हैं?
इसी संबंध में मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते हैं कि वे लोगों को पेश आ रही इस समस्या से परिचित हैं। नया काम तो कोई नहीं कर पा रहे हैं पर अब उन्होंने मरंमत का काम शुरु करवा दिया है। जल्द ही इस क्षेत्र में भी स्ट्रीट लाइट दुरुस्त हो जाएगी।

आखिर फिर शुरु हुआ सड़क का निर्माण, municipal corporation, road,


-डिवाइडर पर काम चालू, संभावित रूप से 15 फरवरी के बाद बनेगी सड़क

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
विधानसभा चुनावों के लिए लगी आदर्श चुनावअचार संहिता के चलते रोके गए काम अब धीरे-धीेरे गति पकडऩे लगे हैं। एक ओर जहां नेताओं का चुनावी हैंगओवर उतार चुका हैं, वहीं बाबू से लेकर वोटर तक आम आदमी की जिंदगी पुराने ढर्रे पर लौटने लगी है। शहर की लोअर माल को फोर लेन करने किए जाने वाले निमार्ण कार्य शुरु हो गए हैं।
कोलतार डालने का कार्य संभव है कि तकनीकि कारणों से 15 फरवरी से पहले नहीं किया जा सकता लेकिन डिवाइडर निमार्ण पर मजदूर व मिस्त्री आ गए हैं।
 इस सड़क पर फव्वारा चौंक के ठीक पास निर्माण शुरु होने के साथ ही लगा बोर्ड 'कार्य प्रगति पर है कृपया धीरे चलेंÓ लोगों को खासे समय से मुंह चिड़ा रहा है। लोअर माल के मामले में यह बोर्ड कुछ इस तरह से पढ़ा जाने लगा था कि 'प्रगति धीरे है पर कार्य चल रहा हैÓ।
15 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली शहर की इस सड़क के पूरी तरह से दुरुस्त होने के सवाल पर बताया जाता है कि बस दो महीने और लगेंगे। इसी बीच लागू हुई अचार संहिता ने इसमें एक महीना और जोड़ दिया है। लोअर माल पर लगे पेड़ों की कटाई की अनुमति केंद्रीय वन मंत्रालय से ली गई तो सीवरेज विभाग, पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने अपनी लाइनें तबदील की हैं।
वहीं नगर निगम के मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते हैं कि नया कोई कार्य वे नहीं करवा सकते पर पुराने चल रहे कार्यों को जल्द सिरे चढ़ाया जाएगा। शहर में मरम्मत इत्यादि का काम ही करवा पा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इसी सड़क पर कभी पानी का टयूबवेल बंद करने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है तो कभी मोदी कालेज व बुड्ढा दल के बीच सीवरेज के फैले पानी से त्रस्त लोगों को विरोध प्रदर्शन कर अपना गुस्सा जाहिर करना पड़ता है। आम राहगीर ने हालांकि अपने रास्ते बदल कर इस समस्या से निजात पा ली है।

 

गढ्डों में से गुजरती है यह सड़क! , municipal corporation, road,


उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
लोक निर्माण विभाग की ओर से कालोनी बनाए जाने की शुरुआत करने के बाद से महीनों गुजर गए, लेकिन महिंद्रा कालेज को जाने वाली सड़क आज भी उखड़ी पड़ी है। ढिल्लों कालोनी और संजय कालोनी से होकर निकलने वाली इस सड़क पर इतने गड्ढे हैं और इतनी अधिक धूल उड़ती है कि लोगों को नाक पर रूमाल रखकर निकलना पड़ता है। यहां पर सड़क कम और धूल का गुबार ज्यादा देखने को मिलता है।
कभी दो वार्डो तो कभी दो विभागों के बीच उलझी ढिल्लों कालोनी और संजय कालोनी से गुजरने वाली सड़क पर क्षेत्रीय निवासियों में ढिल्लों कालोनी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान हरिंदर पाल सिंह काला, सचिव जगमोहन सिंह, डा.आरके गर्ग व सुरिंदर सिंह का कहना है कि तीन साल से माई जी की सराय से मछली तालाब तक सड़क टूटी हुई है और संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। सड़क का मामला निगम में उठाए जाने को लेकर क्षेत्र के ही दो वार्डो में भी खींचतान चलती रही है।
--------------
सड़क निगम की पर बनाएगा पीडब्ल्यूडी
नगर निगम के मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि निसंदेह सड़क नगर निगम के अधीन है, पर चूंकि पीडब्ल्यूडी ने साथ लगती कालोनी बनाई है और उक्त निमार्ण के दौरान ही सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। ऐसे में पीडब्ल्यूडी ही सड़क का निर्माण करेगा। निर्माण में हो रही देरी के सवाल पर मेयर कहते हैं कि अभी तकनीकी कारणों के चलते निर्माण नहीं किया जा सकता। संभव है कि कुछ दिनों में मौसम खुलने के बाद निर्माण किया जाए।


शहर में आठ अवैध निर्माणों पर गिरी गाज
-निगम का हथौड़ा-जेसीबी-कर्मी सब चले
फोटो:  
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
विधानसभा चुनावों के प्रचार व मतदान के दौरान शहर में हुए अवैध निर्माणों पर आखिरकार नगर निगम का हथौड़ा चल गया है। शुक्रवार को निगम के बिल्डिंग विभाग की ओर से चलाए गए संयुक्त अभियान के तहत शहर में हाल ही में हुए आठ अवैध निर्माण गिरा दिए  गए है।
दिन भर चले आपरेशन में निगम टीम का हिस्सा रहे बिल्डिंग विभाग के इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने बताया कि इनमें से एनआईएस से आगे नदी की ओर जाते हुए एक दुकान का लेंटर तोड़ा गया। इसी प्रकार अलीपुर के पास दो दुकानों का लेंटर गिराया गया। इसी क्रम में टोबे के पास स्थित एक दुकान को हटाया गया है। इस तरह के कुल आठ निर्माण हैं जिन्हें उचित कागज ना होने के चलते आज गिराया गया है।
दिलचस्प है कि निगम की इस कार्रवाई का कहीं भी विरोध नहीं हुआ, हालांकि पांच पुलिस कर्मियों की टीम निगम के बिल्डिंग विभाग के अधिकारियों कर्मियों के साथ दिन भर मौजूद रही। इनमें दोनों एरिया टाउन प्लानर नरेश कुमार व निर्मल सिंह और सभी संबंधित क्षेत्रों के इंस्पेक्टर व ड्राफ्ट्स मैन भी मौजूद रहे।
निगम प्रशासन व अन्य सरकारी विभागों के कर्मियों को चुनावी कार्यों में व्यस्त देख शहर के बाहरी क्षेत्रों में हुए कई अवैध निर्माणों पर नगर निगम कमिश्नर गुरलवलीन सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को निगम के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की क्लास लगाई है।
हालांकि इन मामलों पर गाज गिरनी तो पहले से तय हो गई थी इससे पहले भी इन लोगों को तीन दिन का अल्टीमेटम जारी कर बिना अनुमति के अवैध निर्माण गिराने के लिए कह दिया गया है। 
वहीं शुक्रवार को ली गई बैठक के बाद निगम कमिश्नर गुरलवलीन सिंह ने बताया कि बिल्डिंग विभाग की कारगुजारी को और अधिक दुरुस्त करने के लिहाज से अब सुपरडेंट व इंस्पेक्टरों को फील्ड से हटाकर जूनियर इंजीनियरों को दिया चार्ज दिया गया है। अब वे सहायक टाउन प्लानर निमलप्रीत सिंह व नरेश कुमार के नेतृत्व में कार्य करेंगे।
वहीं हाल ही में हुए अवैध निर्माण के मामले में निगम के तीन कर्मियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। इसके साथ अवैध निर्माण पर कर्मियों को सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं।
कमिश्नर का कहना है कि जिन लोगों ने हाल ही में बिना अनुमति  के निर्माण कार्य किए हैं। वे तीन दिन के भीतर अपने नक्शे निगम के पास जमा करवाएं। ऐसा ना करवाने की स्थिति में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी।
इसी प्रकार जिन लोगों ने सीवरेज व पानी के कनेक्शन भी इन दिनों में बिना अनुमति के लिए हैं। वे भी एक सप्ताह के भीतर फीस जमा करवा कर इन्हें नियमित करवाएं अन्यथा इन कनेक्शनों को काटने की कार्रवाई शुरु की जाएगी।
वहीं निगम की ओर से लोगों को बकाया हाउस टेक्स जमा करवाने की शहर वासियों से अपील की गई है।     
उल्लेखनीय है कि राजनीतिक दलों विशेष रूप से सत्ताधारी राजनीतिक दल की ओर से वोटरों को नाराज ना करने की नीति का 'लाभ उठाकरÓ कुछ लोगों ने बीते दिनों में अवैध निर्माण  कर दिए है। निगम ने इस दौरान हुए निर्माण कार्यो की सूची तैयार की है। नगर निगम के सहायक कमिश्नर की टीम की ओर से किए गए दौरे में कई स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यो में संबंधित व्यक्ति उचित दस्तावेज नहीं दिखा पाए हैं।
भादसों रोड, झिल रोड, मनजीत नगर, त्रिपड़ी, लोअर माल इत्यादि क्षेत्रों में नगर निगम की इस टीम ने बिना नक्शा पास करवाए किए गए निर्माण किए गए हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर किए जा रहे निर्माण के संबंध में निगम पहले भी नोटिस जारी कर चुका है। निगम प्रशासन ने इन निर्माणों का काम रुकवा कर पुलिस भी तैनात कर दी है। जिससे आगे निर्माण ना किया जा सके।

फैक्ट्री एरिया में खिसकने लगी सड़क?, municipal corporation


-छोटी नदी कहलवाने वाले बरसाती नाले में कूड़ा डाल भरा जा रहा है
- दूसरी ओर जगह नहीं बची, नाला करीब करीब बंद होने को है

 भूपेश चट्ठा, पटियाला
सड़क व रास्तों के बारे में कहा जाता रहा है कि ये किधर जाता है पर होता ये है कि इस पर से गुजरने वाले लोग ही इधर से उधर जाते हैं, लेकिन शहर के फैक्ट्री एरिया क्षेत्र में अब एक सड़क ही खिसकने लगी है? यह अपनी जगह छोड़ कर नदी की ओर हो ली है। यह दिलचस्प कारनामा किसका है यह तो समझ से परे है लेकिन ऐसा हो जरूर रहा है।
 रियासती काल में शहर को पानी की बाढ़ से बचाने के लिए छोटी नदी पर बनाए बांध पर बनी सड़क अब छोटी नदी की ओर जाने लगी है। याद रहे कि 1993 में आई बाढ़ के पानी को इसी बांध ने रोका तो अगले ही साल इस कच्चे बांध पर लोक निमार्ण विभाग ने सड़क बनाकर मजबूती दे दी। सड़क पर जगह नहीं बची तो अनाज की ढोह ढुहाई करने वाले ट्रक अब नदी पर डाले कूड़े को ही सड़क के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि इसी चौक पर ट्रक के नीचे आने से आए साल मौतें होती रही है।
घरों में पांच से छह फीट पानी तीन से चार दिनों तक देख चुके इस क्षेत्र के लोगों में मानसून के दिनों में बाढ़ हमेशा ही चर्चा का विषय रहती है। पुराने बाशिंदे जसविंदर वालिया बताते हैं कि छोटी नदी ही पानी को ढोह कर ले जाती है और पिछले सीजन को छोड़ कर हर बरसाती सीजन से पहले नदी की सफाई की जाती थी पर अब तो कूड़ा डाल कर भरा जाने लगा है।
वहीं करतार पार्क कालोनी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान जगदीप जग्गा कहते हैं कि छोटी नदी अगर बंधे के इस स्थान पर बंद होती है तो मानसून के दिनों में सरहिंद रोड तक के क्षेत्र का पानी यहां आकर बैक मारेगा और प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मार करतार पार्क कालोनी और अबचल नगर को पड़ेगी। इसमें नई बन रही सिल्वर सिटी को भी अब अलग नहीं किया जा सकेगा। वे कहते हैं कि प्रशासन को एसोसिएशन कई बार कह चुकी है लेकिन सुनवाई नहीं हुई है। कूड़ा यहां से वहां होता हुआ अब नाले में ही डंप किया जा रहा है।  इस संबंध में क्षेत्र के पार्षद सुखमिदंर पाल सिंह मिंटा से तो संपर्क नहीं हो सका पर मेयर अजीत पाल सिंह कोहली का कहना है कि वे इस मामले की जांच करवाएंगे और शहर की किसी भी वॉटर बाडी को प्रदूषित नहीं होने दिया जाएगा।

मेयर व ट्रस्ट के चेयरमैन को फिर मिली लाल बत्ती
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राज्य में हुए विधान सभा चुनावों को लेकर लागू की गई आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के साथ शहर की राजनीतिक सत्ता से लिए गए सरकारी वाहनों को बुधवार को जिला निर्वाचन अधिकारी ने लौटा दिया है। इसके तहत नगर निगम के मेयर व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन को एक बार फिर से लाल बत्ती वाली सरकारी कार मिल गई है।
जिला निर्वाचन अधिकारी विकास गर्ग ने इसकी पुष्टि कर बताया है कि चुनाव आयोग के कार्यों के लिए ली गई कारें व अन्य वाहन वापिस लौटाए गए हैं, इनमें मेयर व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन की कारें भी शामिल है।
वहीं मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि वाहन तो ठीक है पर अन्य तरह के कामकाज करने की पूरी छूट भी दी जानी चाहिए। इसी क्रम में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज कहते हैं कि आज उन्हें कार मिल गई है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल केवल आफिस आने जाने तक ही प्रयोग करते हैं। ऐसे में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि वे भी आदर्श आचार संहिता के संदर्भ में अपनी ही पार्टी के मेयर से पूरी तरह सहमत हैं कि कम से कम चुनाव समाप्त होने के बाद तो स्थानीय निकाय को निठल्ला नहीं बैठाना चाहिए।

फिर चला निगम का डंडा, त्रिपड़ी में गिराई चार दुकानें
अवैध निर्माण
-आगे भी जारी रहेगा अभियान: एटीपी
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राज्य में विधान सभा चुनावों के दौरान शहर में हुए अवैध निर्माण पर चल रहा नगर निगम का डंडा आज भी जारी रहा। निगम के बिल्डिंग विभाग की ओर से त्रिपड़ी क्षेत्र में चार दुकानें ढहाई गई हैं। इनमें तीन दुकानें त्रिपड़ी की दो नंबर गली में और एक थाना रोड पर बैंक के सामने वाली गली में बनाई गई दुकान शामिल है।
नगर निगम के बिल्डिंग विभाग के एरिया टाउन प्लानर निर्मलप्रीत सिंह ने बताया कि निगम की ओर से बार बार अपील किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर बिना अनुमति के निर्माण किए गए हैं और अल्टीमेटम के बावजूद लोगों ने निगम के पास शुल्क जमा नहीं करवाया गया। एटीपी का कहना है वे लोगों के खिलाफ नहीं हैं लेकिन अवैध रूप से किए गए निर्माण को भी अनुमति नहीं दे सकते। बिना नक्शा पास करवाए निर्माण करना और चुनाव के दिनों में इसके बढ़ जाने के सवाल पर निर्मलप्रीत सिंह कहते हैं कि लोग गुमराह होकर ऐसा करते हैं। ऐसा करने वालों को अपने हितों के लिए उकसाने वालों में  निगम के कर्मियों से लेकर राजनीतिक लोग तक सभी शामिल होते हैं। निगम की ओर से लिए जाने वाले शुल्क को बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है आर कहा जाता है कि 'तुम मेरी सेवा कर दो और काम जारी रखोÓ इसी फार्मूले में आम आदमी फंस जाता है। जबकि शुल्क जमा करवाने के अपने कई अतिरिक्त लाभ हैं।
अब तक तोड़े गए निर्माणों और कुल किए गए अवैध निर्माणों के सवाल पर निर्मलप्रीत सिंह कहते हैं कि अभी आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा अभियान। हालांकि कुल नोटिस जारी होने वाले निर्माणों की संख्या पांच दर्जन के पास बताई जा रही है।

निगम ने निपटाए दो मामले, जुटाए 25 लाख रूपये

हाउस टेक्स
-औमेक्स माल के थियेटर व रेस्टोरेंट और शिवालिक स्कूल के बकाया हाउस टेक्स का मामला निपटा
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
रोजमर्रा के खर्चे चलाने के लिए आर्थिक स्रोत जुटाने के लिए जूझ रहे नगर निगम ने बुधवार को हाउस के दो मामले निपटाने के साथ ही करीब 25 लाख रूपये का राजस्व जुटाया है। दोपहर बाद हुई निगम कीद हाउस कमेटी की बैठक में सुनवाई के बाद उक्त निर्णय लिया है।
बैठक में हुई कार्रवाई पर संयुक्त कमिश्नर नाजर सिंह ने बताया कि आज की सुनवाई के दौरान बकाया पड़े हाउस टेक्स के दो मामलों पर सुनवाई हुई है। हाउस टेक्स के लंबित मामलों में औमेक्स माल परिसर में स्थित एक थियेटर व रेस्टोरेंट के हाउस टेक्स को लेकर विवाद था। इसी प्रकार शिवालिक स्कूल के हाउस टेक्स के बकाया मामले को निपटाने बुधवार को हाउस टेक्स कमेटी की बैठक में मामले पर सभी पक्षों पर सुनवाई के बाद कुल 25 लाख रूपये के राजस्व की प्राप्ति निगम को होगी। यह टेक्स इन दो परिसरों में से तीन बकायादारों का है।
संयुक्त कमिश्नर नाजर सिंह के नेतृत्व में हुई इस बैठक में कमेटी के सदस्यों पार्षद जसवंत सिंह टिवाणा, पार्षद प्रितपाल कौर ने भी भाग लिया है।

Sunday, 5 February 2012

पंजाब के किसानों को इथियोपिया से खेती का न्यौता, etiopia, agricultre,


अवसर 
पंजाब के डा. जोगिंदर टाइगर एक लाख एकड़ जमीन पर करेंगे खेती 
 कई लुभावने वादों के साथ पंजाब पहुंचे इथियोपिया के राजदूत 
 8 डालर में एक हेक्टेयर जमीन 60 वर्ष की लीज पर मिलेगी
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब के किसानों को दक्षिणी अफ्रीका के देश इथियोपिया से कई लुभावने वादों के सात खेती करने का न्यौता मिला है। इस संबंध में यहां डकाला रोड स्थित फन विले में पहुंचे इथियोपिया के राजदूत डिप्टी हेड आफ मिशन दीरजे असवा ने रविवार को किसानों से मुलाकात की।
राजदूत ने मीडिया को बताया कि उनके देश ने पंजाब के डा. जोगिंदर टाईगर के साथ पिछले साल अगस्त में एक एमओयू पर साइन किए थे। इसके तहत डा. टाइगर की ओर से एक लाख एकड़ जमीन को विकसित कर खेती करने के संबंध में सौंपी रिपोर्ट को उनकी सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यह साधारण खेती न होकर एग्रोटेक खेती होगी। इसमें अनाज की फसल उगाने से लेकर दाल, फल, सब्जिया, पोल्ट्री, पिगरी व डेयरी प्रमुख रूप से शामिल होंगी।
इसी संबंध में डकाला रोड स्थित फन विले में डा. टाईगर के यहां आए दीरजे असवा ने बताया कि इथियोपिया में 33 लाख हेक्टेयर भूमि खेती का इंतजार कर रही है। पंजाबियों की खेती में की जाने वाली मेहनत के वे मुरीद हैं और चाहेंगे कि वे बड़ी संख्या में पंजाबी उनके दूतावास से संपर्क करें।
असवा के अनुसार, इथियोपिया में 18 फीट पर पानी, साल भर बारिश और 20 से 32 डिग्री के बीच तापमान खेती के लिए अच्छा वातावरण मुहैया करवाता है। इसके लिए इथियोपिया सरकार की ओर से आठ डालर में एक हेक्टेयर जमीन 60 साल की लीज पर दी जा रही है। इसमें से भी प्रोजेक्ट की कुल कीमत का 30 फीसदी ही देना होगा, जबकि शेष 70 फीसदी फाइनास हो जाता है।
------------
क्या क्या मिलेंगी सुविधाएं
सुविधाओं की बात करते हुए राजदूत दीरजे असवा ने बताया कि हमारे यहां एक डालर से कम पर सस्ती लेबर उपलब्ध है। यही नहीं, पहले दस साल आय पर कोई टैक्स नहीं है, कृषि उपकरण एक्साइज से मुक्त हैं और कोई भी व्यक्ति अपनी कमाई ले जाने को स्वतंत्र है। उनके अनुसार इथियोपिया में भारत से करीब 500 कंपनियां काम कर रही हैं। इसके अलावा 22 यूनिवर्सिटियों में 600 से ज्यादा भारतीय प्रोफेसर पढ़ा रहे हैं।
-----------
40 हजार को मिलेगा रोजगार : डा. टाईगर
इस मौके पर डा. टाईगर ने बताया कि नील नदी की प्रमुख सहायक नदी के पास की जमीन वे देख आए हैं। वहां की सरकार जमीन तक जाने को सड़क बना कर भी देने को तैयार है। बस एक पुल की दरकार है। वहां करीब 40 हजार लोगों को रोजगार मिलना तय है। पहले चरण में एक लाख और दूसरे चरण में सवा लाख एकड़ में खेती की जाएगी

कुंडियां दे सिंग फस गए केहड़ी नितरू...pre poll, punjab election,


- नहीं हुआ डोर-टू-डोर प्रचार, हुआ जोड़ तोड़
- गुप्त बैठकें कर भितरघात करवाने की चली राजनीति
भूपेश चट्ठा, पटियाला
विधानसभा चुनावों में आयोग के आदर्श चुनाव आचार संहिता के डंडे के चलते इस बार के चुनाव में अंदाजा लगाना खासा मुश्किल कर दिया कि ऊंट किस करवट बैठेगा। हर सीट पर आलम ये है कि कुंडियां दे सिंग फस गए केहड़ी नितरू बड़ेमें खाणी...
चुनाव प्रचार का निर्धारित समय समाप्त होने अथवा लाउड स्पीकर का शोर थमने व रैलियों चुनावी सभाओं के दौर के बाद और मतदान से ठीक एक दिन पहले आम तौर पर डोर टू डोर प्रचार में प्रत्याशी जुटते हैं। इस बार का चुनाव इस मामले में भी पिछले चुनावों से अलग रहा। प्रत्याशियों की बदली रणनीति में जहां बड़ी सभाएं नदारद रही तो पूरे अभियान के दौरान चली पैदल यात्राओं और बिना लाउडस्पीकर के हुई छोटी चुनावी सभाओं में ही उम्मीदवार व्यस्त रहे।
दिलचस्प है कि ऐसे हालात में जिस किसी उम्मीदवार से बात हुई वो ड्राइंग रूम पालिटिक्स में ही अंतिम दिन जुटा रहा। डोर-टू-डोर जाने की बजाए जोड़ तोड़ में ज्यादा मेहनत की गई है। एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रणनीतिकार ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उम्मीदवार की पत्नि सुबह से ही कहीं गई हुई हैं, जबकि प्रचार की कमान संभालने वाले घर के सदस्य दिन भर घर में ही रहने वाले हैं और उम्मीदवार का देर शाम तक कोई कार्यक्रम नहीं है।
वहीं क्षेत्रीय दल से चुनाव लड़ रहे एक अन्य उम्मीदवार की निगाह विपक्षियों की गतिविधियों पर जमी रही कि कहीं कोई पैसे अथवा शराब तो नहीं बांट रहा। जहां कहीं से खबर आती उसी तरफ गाडिय़ां दौड़ा दी जाती। इसके साथ ही जिला प्रशासन से चुनाव आयोग तक के  फोन घनघना दिए जाते।
इतना ही नहीं राजनीतिक दलों में एक दूसरे का बंदा तोड़ दल बदलवाने वाले काम की संभवत अब जरूरत नहीं महसूस की जा रही आज के दिन असंतुष्टों के साथ गुप्त बैठकें कर भीतरी घात करवाने की राजनीति का दौर खासा सरगर्म रहा।


टेली मार्केटिंग का लिया सहारा
आम तौर पर इंश्योरेंस अथवा मोबाइल कनेक्शन बेचने आने वाली टेली मार्केटिंग के आने वाले फोन काल इस बार प्रचार के अंतिम दिन कई स्थानों पर सुनाई दिए गए। जिसमें उम्मीदवार के कार्यालय से बोलने का हवाला देकर वोट डालने की अपील के साथ ही एक रटी रटाई आवाज में चुनाव निशान भी बताया जा रहा हैं। नंबर कहां से लिया? और डू नॉट डिस्टर्ब की सेवा लिए जाने की बात पर सॉरी सर...चुनाव है, का हवाला दे दिया जाता है।

प्रत्याशी का एक्जिट पोल और समर्थकों की इंवेस्टिगेशन शुरू, exit poll, after punjab election,


- माइक्रो स्तर पर होने लगा आंकलन, दावा करने वालों की सच्चाई कसी जा रही आंकड़ों की कसौटी पर
- फोन की कॉल रिकार्ड से लेकर तलाशी जा रही हैं फोटो व वीडियो क्लिप
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनाव आयोग ने चाहे प्री पोल व एक्जिट पोल सर्वे करने व इनके प्रकाशन व प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन विधानसभा के लिए दो दिन पहले हुए मतदान के बाद आफ्टर पोल सर्वे के रूप में उम्मीदवारों ने अपने स्तर पर गहन आंकलन शुरु कर दिया है। हालांकि आम तौर पर राजनीतिक दल ही ऐसे अनुमान लगाया करते थे।
एक दिन बाद प्राप्त हुई वोटिंग की बूथ स्तर की गणनाओं को सामने रख कर पता किया जा रहा है कि किस स्ट्रांग क्षेत्र में ज्यादा फीसदी वोट पडऩे से कितना लाभ मिल सकता है और कमजोर क्षेत्र में हुए कम मतदान से वे कितनी लीड में आ गए हैं।
इसी क्षेत्र के पुराने जानकार जीडी सिंह बताते हैं कि कंप्यूटर में पुराने रूझानों का फीड किया गया डाटा, मैप और साफ्टवेयर की मदद से किए जाने वाले इस कार्य में पूर्व में दर्ज किए गए आंकड़ों को भी साथ रखा जाता है। अगर आपकी ओर से दर्ज जानकारी सही है तो दो फीसदी प्लस-माइनस की एरर के साथ आप अभी चुनाव परिणाम देख सकते हैं।
वहीं एक उम्मीदवार के एक चुनाव सलाहकार ने बताया कि किस बूथ पर कितनी वोटें पड़ी? कौन था इंचार्ज? आदि बातों को सामने रखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि किसकी कैसी रही परफार्मेंस? किस प्रमुख वर्कर ने मेहनत की है और कौन सुस्त रहा। इनके साथ ही आंकलन में यह भी समझने का प्रयास किया जा रहा है कि किसने भितरघात किया है।
माइक्रो स्तर पर हो रहे इन आंकलनों के साथ अमुक संख्या में वोटें डलवाने का दावा करने वालों की सच्चाई भी इन्हीं आंकड़ों की कसौटी पर कसी जा रही है। इतना ही नहीं पार्षद के दो चुनाव लड़ चुके हरविंदर सिंह बताते हैं कि समर्थकों के फोन की काल रिकार्ड से लेकर ऐसे फोटो व वीडियो क्लिप की तलाश भी की जा रही है। जिनमें आपकी पार्टी के कार्यकर्ता विरोधी पक्ष के किसी खास बंदे के संपर्क में कितना रहे। कुछ प्रभाव रखने वाले चुनिंदा लोगों का तो लोकेशन ट्रेस करने वाले डिवाइस की सहायता से पता किया जा रहा है कि देर रात पार्टी का कौन से पदाधिकारी ने दूसरे के यहां चक्कर लगाए और अपने क्षेत्र में बूथ ही नहीं लगाया।
माना जा रहा है कि चुनाव से पहले बागियों पर हुई कार्रवाई जहां खुलकर लड़ी गई गतिविधियों का नतीजा थी तो अब होने वाली कार्रवाई हार और जीत दोनों में लड्डू खाने वाले अथवा हर स्थिति में चुनावी मलाई चट करने वालों पर कुछ इसी तरह के सबूतों के आधार पर होगी।