...बदहाली
- शहर के विकास कार्यों के लिए आए फंड से दो बार बिजली बिल चुकाया निगम ने
- भुगतान नहीं तो काम नहीं, वेतन नहीं तो धरना भी लगेगा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नगर निगम वर्तमान सरकार के अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुंच चुका है। कम से कम निगम के आर्थिक हालात तो कुछ ऐसे ही बन पड़े हैं कि निगम या तो ठेकेदारों को उनके किए कार्यों का भुगतान करे या फिर अपने कर्मियों को वेतन दे।
निगम प्रबंधन इसी महीने जनवरी का वेतन ना दे पाने के चलते धरना प्रदर्शन झेल चुका है और अब फरवरी महीने का सवा दो करोड़ रूपये का वेतन चुकाने व प्रबंध करने के लिए मात्र तीन कार्य दिवस का समय बचा है। वहीं विधानसभा चुनावों के चलते अंधाधुंध तरीके से काम कर चुके ठेकेदारों के भी सवा करोड़ से ज्यादा के बिल भुगतान के इंतजार में हैं। दिलचस्प है कि इन बिलों को निगम पास तो कर चुका है, लेकिन पेमेंट नहीं की गई है। इतना ही नहीं पेमेंट ना होने के चलते 35 से 40 लाख रूपये की धरोहर राशि भी निगम के खाते में ही है।
निगम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि चंद महीने पहले मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से पटियाला में किए जाने वाले कार्यों के लिए पौने आठ करोड़ रूपये जारी किए। इसमें से दो करोड़ रूपये शहर में सीवरेज का प्रबंध कर रहे सीवरेज बोर्ड के पास चले गए।
शेष बची राशि में से गली में इंटर लाकिंग टाइल, सड़क निर्माण, पानी की पाइप लाइन, स्ट्रीट लाइट, धर्मशाला निमार्ण इत्यादि लगाने से लेकर मरम्मततक के काम निपटने थे। इसमें से ज्यादातर के वर्क आर्डर भी जारी हो रखे हैं और कई काम भी निपट चुके हैं।
दिलचस्प है कि शहर के विकास कार्यों के लिए आए उक्त फंड में से दो बार निगम प्रबंधन ने अपना बिजली बिल चुका दिया। धन की कमी के चलते दो बार 35-35 लाख रूपये के बिजली बिलों के भुगतान किए जा चुके हैं। पौने आठ करोड़ रूपये में से ही पटियाला वन की धर्मशालाओं के लिए आए दो करोड़ रूपये भी इसी तरह के कार्यो में खप गए बताए जा रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि ठेकेदारों का पक्ष रख रही निगम की राजनीतिक सत्ता ने निगम के कोष के कस्टोडियन प्रबंधकों के पास पहले भी ठेकेदारों का भुगतान करने का मामला उठाया जब बिजली बिलों का भुगतान किया गया।
इतना ही नहीं फरवरी महीने का अंत ज्यों ज्यों नजदीक आ रहा है। प्रबंधन कर्मियों के धरने प्रदर्शन से सहमा वेतन का प्रबंध करने में लगा है तो सितंबर महीने में समाप्त हो रहे निगम के कार्यकाल और अगले चुनावों की तैयारियों में लगे नेताओं को मानसून सीजन से पहले 'अपने बंदोंÓ के काम निपटाने की जल्दी है।
ठेकेदारों को भुगतान नहीं हुआ तो विकास के काम नहीं होना तय है पर यहां धरने प्रदर्शन की गुंजाइश कम है वहीं कर्मियों को वेतन नहीं तो रूटीन काम तो रुकेगा ही धरना भी लगेगा यह भी तय है।
निगम कमिश्नर तो इस मामले पर टिप्पणी नहीं करते, वहीं संयुक्त कमिश्नर भी बैठक में व्यस्त रहने की बात करते हैं, जबकि मेयर अजीतपाल सिंह कोहली स्वीकार करते हैं कि निगम आर्थिक रूप से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। साथ ही उम्मीद जताते हैं कि प्रबंध हो जाएगा।