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Monday, 27 February 2012

ठेकेदारों को होगा भुगतान या कर्मियों को मिलेगा वेतन!,municipal corporation, economy,


...बदहाली
- शहर के विकास कार्यों के लिए आए फंड से दो बार बिजली बिल चुकाया निगम ने
- भुगतान नहीं तो काम नहीं, वेतन नहीं तो धरना भी लगेगा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नगर निगम वर्तमान सरकार के अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुंच चुका है। कम से कम निगम के आर्थिक हालात तो कुछ ऐसे ही बन पड़े हैं कि निगम या तो ठेकेदारों को उनके किए कार्यों का भुगतान करे या फिर अपने कर्मियों को वेतन दे।
निगम प्रबंधन इसी महीने जनवरी का वेतन ना दे पाने के चलते धरना प्रदर्शन झेल चुका है और अब फरवरी महीने का सवा दो करोड़ रूपये का वेतन चुकाने व प्रबंध करने के लिए मात्र तीन कार्य दिवस का समय बचा है। वहीं विधानसभा चुनावों के चलते अंधाधुंध तरीके से काम कर चुके ठेकेदारों के भी सवा करोड़ से ज्यादा के बिल भुगतान के इंतजार में हैं। दिलचस्प है कि इन बिलों को निगम पास तो कर चुका है, लेकिन पेमेंट नहीं की गई है। इतना ही नहीं पेमेंट ना होने के चलते 35 से 40 लाख रूपये की धरोहर राशि भी निगम के खाते में ही है।
निगम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि चंद महीने पहले मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से पटियाला में किए जाने वाले कार्यों के लिए पौने आठ करोड़ रूपये जारी किए। इसमें से दो करोड़ रूपये शहर में सीवरेज का प्रबंध कर रहे सीवरेज बोर्ड के पास चले गए।
शेष बची राशि में से गली में इंटर लाकिंग टाइल, सड़क  निर्माण, पानी की पाइप लाइन, स्ट्रीट लाइट, धर्मशाला निमार्ण इत्यादि लगाने से लेकर मरम्मततक के काम निपटने थे। इसमें से ज्यादातर के वर्क आर्डर भी जारी हो रखे हैं और कई काम भी निपट चुके हैं।
  दिलचस्प है कि शहर के विकास कार्यों के लिए आए उक्त फंड में से दो बार निगम प्रबंधन ने अपना बिजली बिल चुका दिया। धन की कमी के चलते दो बार 35-35 लाख रूपये के बिजली बिलों के भुगतान किए जा चुके हैं। पौने आठ करोड़ रूपये में से ही पटियाला वन की धर्मशालाओं के लिए आए दो करोड़ रूपये भी इसी तरह के कार्यो में  खप गए बताए जा रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि ठेकेदारों का पक्ष रख रही निगम की राजनीतिक सत्ता ने निगम के कोष के कस्टोडियन प्रबंधकों के पास पहले भी ठेकेदारों का भुगतान करने का मामला उठाया जब बिजली बिलों का भुगतान किया गया।
इतना ही नहीं फरवरी महीने का अंत ज्यों ज्यों नजदीक आ रहा है। प्रबंधन कर्मियों के धरने प्रदर्शन से सहमा वेतन का प्रबंध करने में लगा है तो सितंबर महीने में समाप्त हो रहे निगम के कार्यकाल और अगले चुनावों की तैयारियों में लगे नेताओं को मानसून सीजन से पहले 'अपने बंदोंÓ के काम निपटाने की जल्दी है।
ठेकेदारों को भुगतान नहीं हुआ तो विकास के काम नहीं होना तय है पर यहां धरने प्रदर्शन की गुंजाइश कम है वहीं कर्मियों को वेतन नहीं तो रूटीन काम तो रुकेगा ही धरना भी लगेगा यह भी तय है।
निगम कमिश्नर तो इस मामले पर टिप्पणी नहीं करते, वहीं संयुक्त कमिश्नर भी बैठक में व्यस्त रहने की बात करते हैं, जबकि मेयर अजीतपाल सिंह कोहली स्वीकार करते हैं कि निगम आर्थिक रूप से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। साथ ही उम्मीद जताते हैं कि प्रबंध हो जाएगा।

नक्शा बनवाने-पास करवाने वालों की लगी लाइनें, municipal corporation, economy,


-हर रोज चार से पांच अवैध निर्माण के हो रहे हैं खुलासे: संयुक्त कमिश्नर
-अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बाद राजस्व में 76 लाख की हुई बढ़ोतरी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नगर निगम पटियाला में इन दिनों हाल ही में किए गए निर्माणों के नक्शे बनवाने और शुल्क जमा करवा निगम प्रशासन से पास करवाने वालों की लाइनें लग गई हैं। हाल ही में निगम की कार्रवाई के बाद से करीब दस दिनों में 76 लाख रूपये की आय हुई है।
याद रहे कि निगम ने अपने कर्मियों का वेतन चुकाने आबकारी विभाग से प्राप्त 70 लाख रूपये का प्रयोग इसी महीने किया है। निगम तीन महीने से कर्मियों का पीएफ व पैंशन फंड नहीं जमा करवा पाया था और एक महीने का वेतन बकाया रह गया।
वहीं निगम के कामकाज में दिलचस्पी रखने वाले  प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि इन दिनों निगम परिसर में में नक्शा नवीसों के पास समय ही नहीं है। हर तरफ लाइन लगी है। एरिया टाउन प्लानर निर्मलप्रीत सिंह बताते हैं कि अवैध निर्माणों के बाद से बढ़ी गतिविधियों में नक्शानवीसों को पूरी तरह से व्यस्त कर दिया है। उनके पास अगले तीन दिनों के लिए समय नहीं है। इसी तरह से एडवांस बुकिंग चल रही है। वे बताते हैं कि एक फरवरी के बाद से पहले पखवाड़े में 36 लाख रूपये की आय सिर्फ इसी शुल्क से हुई है।
इसी क्रम में संयुक्त कमिश्नर नाजर सिंह बताते हैं कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बाद राजस्व में जहां बढ़ोतरी हुई है वहीं यह क्रम आगे भी जारी रहना तय है। निगम की ओर से फील्ड में जूनियर इंजीनियरों और एसडीओ की तैनाती के बाद से लगातार रिपोर्ट आ रही हैं। हर रोज चार से पांच अवैध निर्माण अथवा बिना नक्शा पास करवाए भवन निर्माण हो रहा है। इन सभी पर आने वाले दिनों में कार्रवाई होनी तय है। हालांकि मौके पर पहुंच कर एक बार आगाह जरूर किया जा रहा है।
वहीं हाउस टेक्स के बकाया मामले निपटाने पर हुई आय में संयुक्त कमिश्नर कहते हैं कि आठ फरवरी को हाउस टेक्स कमेटी की बैठक में 15 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है तो 15 फरवरी को रखी गई बैठक में निपटाए गए तीन मामलों में 25 लाख रूपये का लंबित राजस्व की प्राप्ति हुई है।

Wednesday, 15 February 2012

वेतन नहीं मिला, प्रदर्शन, चैक जारी, municipal corporation, economy


-सरकार की ओर से आए आबकारी टेक्स के हिस्से से जारी किए 70 लाख के चैक
-एक महीने की बकाया थी सेलरी, तीन महीने से पीएफ व इतने ही समय से नहीं जमा हुआ पैंशन फंड
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राच्य की सत्ता खाली पड़ी हो और चुनाव आयोग के आदेशों के चलते मतदान के बाद भी आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो ऐसे में कोई भी व्यक्ति कर्मचारी आंदोलन के बारे में नहीं सोच सकता, लेकिन सोमवार को नगर निगम के कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। कारण सिर्फ और सिर्फ कर्मियों को वेतन नहीं मिलने का था।
 आधिकारिक तिथि के गुजर जाने के दो सप्ताह बाद भी जब वेतन मिलने के आसार बनते नहीं दिखे तो कर्मियों ने सहायक कमिश्नर नाजर सिंह के कार्यालय के बाहर धरना दे डाला और एक तरह से उनका घेराव कर बंधक ही बना डाला। हालांकि बाद में राज्य सरकार के आबकारी विभाग की ओर से किसी भी स्थानीय निकाय विभाग को आबकारी कर में से दिए जाने वाले हिस्से के तहत 70 लाख रूपये आए तो जनवरी महीने के वेतन के लिए लगभग इतनी ही राशि के वेतन के चैक काट दिए गए हैं। पटियाला नगर निगम में करीब 250 कर्मी कार्यरत हैं।
वहीं कर्मचारियों के आज के आंदोलन का नेतृत्व करने वाली म्यूनिसिपल वर्कर यूनियन प्रधान नरेश कुमार बॉबी और कार्यकारी प्रधान गुरप्रीत सिंह चावला कहते हैं कि सरकार की ओर से आए आबकारी टेक्स के हिस्से से फिलहाल तो वेतन जारी कर दिया है। कर्मियों की एक महीने की सेलरी बकाया थी। वे कहते हैं कि वेतन तो जैसे तैसे दे दिया गया है पर तीन महीने से कर्मियों का ना तो पीएफ जमा करवाया गया है और इतने ही समय पैंशन फंड भी जमा नहीं करवाया गया है।

बाक्स
क्या कहते हैं सहायक कमिश्नर

कर्मियों के घेराव और गुस्से का शिकार हुए सहायक कमिश्नर नाजर सिंह कहते हैं प्रदेश भर में हालात ऐसे ही हैं। वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद एरियर व वेतन भत्तों में हुई बढ़ोतरी के चलते ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। वेतन जैसे तैसे चुकाने पर पीएफ इत्यादि के जमा ना होने के सवाल पर वे कहते हैं कि राज्य सरकार से आने वाला पैसा रुका हुआ है जैसे जैसे आता जाएगा कर्मियों के खातों में जमा करवाते जाएंगे। ऐसे में चिंता की कोई बात नहीं होनी चाहिए।