Monday, 28 May 2012

'अच्छी खबर', नहीं है कोई 'बुरी खबर', 'good news' there is no 'bad news'


भूपेश चट्ठा, पटियाला
'सुख शांति है...सब तरफ शांति है...अमन चैन है...कुछ नहीं है...अभी तक ठंडा है...संडे मना रहे हैं...ना कोई खबर नहीं हैÓ शहर के पुलिस थानों में खबर की तलाश करते पत्रकारों को आज कुछ ऐसे ही जवाब से दो चार होना पड़ा। इसे आप 'अच्छी खबरÓ कहेंगे कि अपराध नहीं हुआ है और कोई 'बुरी खबरÓ नहीं है, लेकिन खबर का ना होना अखबार अथवा पत्रकार के लिए यह स्थिति 'अच्छी खबरÓ वाली नहीं होती। शहर के पांच थानों कोतवाली, सिविल लाइन, त्रिपड़ी, अर्बन एस्टेट व लाहौर गेट में बीते 24 घंटों में कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है।
दिलचस्प है कि पटियाला में कापी राइट एक्ट उल्लंघन के मामलों के बाद दड़ा सट्टा के खिलाफ हाल ही में अभियान चलाए गए हैं। इसी क्रम में शराब तस्करों के विरुध भी कार्रवाई की गई हैं। कारों पर लगी काली फिल्मों को उतारने के अभियान भी चले और प्रचारित हुए हैं पर पुलिस की क्राइम रिपोर्ट बताती है कि आज का दिन वास्तव में संडे का ही और साप्ताहिक अवकाश पुलिस थानों व अपराधियों पर भी लागू रहा है।

Thursday, 24 May 2012

पावरकाम के दरवाजे प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए बंद, Private students are powerless in Powercom


- 60 फीसद से कम अंक वाले भी फार्म भरने के योग्य नहीं
- केवल फुल टाइम व रेग्युलर विद्यार्थी ही कर सकेंगे आवेदन
- ये पूर्ण बोर्ड का सामूहिक निर्णय है : मानव संसाधन निदेशक
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सार्वजनिक क्षेत्र के बोर्ड अथवा सरकारी विभाग व प्राइवेट कंपनी में क्या अंतर होता है, इसका आभास अब पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड व पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के कर्मचारी नेताओं व इसके परिसर से बाहर आम आदमी को पहली बार होने जा रहा है। पावरकाम की ओर से लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के चलते 60 हजार से अधिक कर्मियों-अधिकारियों वाले इस संस्थान के दरवाजे अब प्राइवेट तौर पर पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए बंद कर दिए गए हैं।
पावरकाम में होने वाली भर्तियों के लिए की गई नई व्यवस्था के तहत अब राज्य व केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी अथवा संस्थान से फुलटाइम व रेग्यूलर विद्यार्थी ही इसमें निकलने वाली नौकरियों के लिए होने वाले टेस्ट के लिए आवेदन कर सकेंगे। वोकेशनल, डिस्टेंस एजूकेशन या प्राइवेट ढंग से पढ़ाई करने वाले चाहे जितने भी अंक लाए हों। उनका संस्थान चाहे जिस ग्रेड का हो, कितना भी पुराना और प्रतिष्ठित हो, ऐसे संस्थानों से पास हुए विद्यार्थी आवेदन के ही योग्य नहीं रहे हैं।
संस्थान से रेग्यूलर व फुलटाइम शिक्षा प्राप्त करना ही काफी नहीं है। पावरकाम में असिस्टेंट इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर से लेकर असिस्टेंट मैनेजर, आईटी सिस्टम व सेफ्टी अधिकारी तक के पदों के लिए जारी किए गए एक विज्ञापन में पावरकाम को आदेश आवेदन करने वाले उम्मीदवारों पर लागू होने वाली अनिवार्य शर्त के रूप में लागू भी कर दिया गया है। पीएसपीसीएल की वेबसाइट पर इसे उपलब्ध भी करवा दिया गया है।
इसके अतिरिक्त टेस्ट में बैठने के लिए रखी गई न्यूनतम योग्यता में संस्थान व यूनिवर्सिटी में कम से कम 60 फीसद अंक लाना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इससे कम अंक वाले भी फार्म भरने के योग्य नहीं रखे गए हैं। पावरकाम के उक्त निर्णय के विरोध की सुगबुगाहट सबसे पहले परिसर के अंदर कर्मियों व इंजीनियरों में हो गई है। आलोचना में नियमित विद्यार्थियों की मंहगी फीस और गरीब विद्यार्थी की ओर से काम के साथ की गई प्राइवेट पढ़ाई का हवाला देने के साथ पूछा भी जाता है कि जब संस्थान व यूनिवर्सिटी मान्यता प्राप्त है तो प्राइवेट व रेग्युलर में भेद क्यों? जब टेस्ट रखा गया है तो न्यूनतम अंक क्यों?
वहीं पावरकाम के निदेशक मानव संसाधन एचसी सेठ इस संबंध में कहते हैं कि ये बोर्ड का निर्णय है। पावरकाम की फुल बोर्ड बैठक में लिया गया नीतिगत निर्णय है और अब ये लागू हो गया है।

निगम चुनाव: हाईटेक हुई राजनीति की बिसात, MC. Election; they do everything to know the working style of opponent


-विरोधियों की फोन काल डिटेल्स निकलवा कर रहे घेरा बंदी
-अपना फोन आफिस में रखा, 'अपनोंÓ व 'आकाओंÓ के लिए अलग-अलग नंबर
-शिकायत आई तो कार्रवाई होगी: एसएसपी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
स्थानीय निकाय के चुनावों में चाहे फोटो पहचान पत्र व मतदाता सूची जैसी इस साल की आधुनिकतम तकनीकों का प्रयोग ना किया जा रहा हो लेकिन नगर निगम के लिए हो रहे इन चुनावों में भाग्य अजमा रहे उम्मीदवार (पहले टिकट के दावेदार) पूरी तरह से हाईटेक हो राजनीति की बिसात पर जोर अजमायश कर रहे हैं।
चुनाव लड़ रहे सशक्त व अनुभवी उम्मीवारों के पास जुगाड़ ज्यादा हैं। ऐसे ही एक उम्मीदवार बताते हैं कि उनके विरोधी को काफी दिनों से उनके हर संपर्क सूत्र की खबर हो रही थी तो किसी ने उन्हें भी सलाह दी की पता करो ये खुद किस-किस से बात करता है? थोड़ा प्रयास और थोड़ी रकम खर्च करने पर उन्हें भी अपने विपक्षी की मोबाइल काल डिटेल मिल गई। जब नंबर मिलाने शुरु किए तो लगभग हर उस नंबर पर भी कई कई काल की हुई थी जो उसके 'दोस्तोंÓ के थे, जिनके बारे में वे कसम खा सकते हैं कि वे हमेशा  ही उनके साथ रहेंगे और कुछ तो पार्टी के भी पदाधिकारी हैं और प्रदेश स्तर तक पहुंच रखते हैं। इन्हीं लोगों से जब बात की गई तो सारी कहानी खुल आई कि माजरा क्या है?  
विपक्षी के खेमे में अपने बंदे फिट करवा कर पकड़े जाने का डर अथवा विरोधी के घर या आफिस के आसपास मोर्चाबंदी करने का रिस्क यहां खत्म हो जाता है। मात्र विरोधियों की फोन काल डिटेल्स निकलवा कर घेरा बंदी करने के साथ अब इन उम्मीदवारों ने निजी कंपनियों के फोन के अलावा अब बीएसएनएल के मोबाइल लेने के अलावा चंडीगढ़ अथवा हरियाणा के अपने रिश्तेदारों के नाम से लिया गया फोन चुनावों के लिए प्रयोग करना शुरु किया है। कहते हैं कि रोमिंग का खर्च अब खर्च नहीं है। राजनीतिक भविष्य जरूरी है।
इतना ही नही अपना फोन आफिस में रख कर हर किसी के संपर्क में हैं तो 'अपनोंÓ व 'आकाओंÓ के लिए अलग-अलग नंबरों का प्रयोग किया जाने लगा है। सावधानी इतनी ज्यादा बरती जा रही है कि एक फोन तो रात को नौ बजे से पहले आन ही नहीं किया जाता।
वहीं इसी संबंध में एसएसपी गुरप्रीत सिंह गिल से संपर्क किए जाने पर वे कहते हैं कि प्राइवेट डाटा अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे का निकलवाता है तो ये गलत है। कुछ स्थितियों में सुरक्षा एजेंसियां ऐसा जरूर करती है लेकिन कानून के दायरे में रहते हुए। एसएसपी कहते हैं कि उनके पास अगर कोई शिकायत आती है तो जरूर कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, 22 May 2012

विस चुनाव में हारे वार्डो से पार्षदों का कटेगा पत्ता alliance may not give ticket to its all sitting M.C


जीत ही मापदंड, हारे वार्डों से पार्षदों का कटेगा पत्ता

- भाजपा प्रदेश प्रधान ने अन्य चुनावी क्षेत्रों का दौरा किया, पर पटियाला से किनारा
- जीत की संभावना के साथ परफारमेंस देखी जाएगी : जिला जत्थेदार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नगर निगम चुनावों से भले ही भाजपा के प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा ने दूरी बना ली हो, पर शिअद इस ऐतिहासिक शहर को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। सिर्फ जीत को ही पार्टी टिकट का एकमात्र मापदंड रखते हुए पार्टी ने अपने कुछ पार्षदों के टिकट काटने का मन बना लिया है। इस कतार में सबसे आगे निशाने पर वे पार्षद हैं जिनके वार्ड में हाल ही के विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
पार्टी के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि शहर व ग्रामीण दोनों विधानसभा क्षेत्रों में गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन कुछ वार्ड ऐसे हैं जहां पार्टी को शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी है। पार्टी की हार में पार्षद की भूमिका पर गाज अब गिरनी आला कमान ने ठीक विधायकों के टिकट काटने के समान तय कर दी है। जीत को मूल मंत्र मानने के अलावा हमेशा तैयार रहो, का फार्मूला सामने रखा गया है। राजनीति के कारपोरेट स्टाइल को आगे लाया जा रहा है। हालांकि आलोचक ये भी कहते हैं कि पिछला चुनाव ही अगर मापदंड है तो कोई भी पार्षद नहीं बचने वाला, जिसे एक बार फिर से मैदान में उतारा जाए। हजारों के वोटों के अंतर में लगभग हर वार्ड में पार्टी ने पार्टी ने हार देखी है।
इसी संदर्भ में जिला शहरी जत्थेदार इंद्र मोहन सिंह बजाज कहते हैं कि जीत पैमाना है, पर इन चुनावों को विधानसभा चुनावों से अलग कर देखना चाहिए। पटियाला में विधान सभा चुनावों में हमने हार देखी है। अब सभी हारे वार्डों के पार्षदों के टिकट नहीं कट सकते, लेकिन पार्टी परफार्मेंस जरूर देख रही है। जहां पार्षद ने सही ढंग से काम नहीं किया उनका पत्ता कट सकता है।
वहीं पटियाला नगर निगम में एक बार फिर से सत्ता में आने का दम भर रही भाजपा के प्रदेश प्रधान के पटियाला ना आने के सवाल पर जिला प्रधान अरूण गुप्ता कहते हैं कि कन्नी काटने जैसी कोई बात नहीं है। प्रदेश प्रधान 22 को चंडीगढ़ से उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे यहां की जिम्मेदारी तीन सदस्यों की हाई पावर कमेटी को सौंपी गई है। यही अपनी सिफारिश प्रस्तुत करेगी। इसके लिए अकाली दल के नेताओं और जिले के मंत्री व पूर्व मंत्रियों से भी विचार चर्चा की जाएगी।

पुलिस लाइन में महिला की संदिग्ध हालात में मौत, women died in police lines quarter


-बनूड़ में ट्रैफिक प्रभारी हैं महिला के पति
-महिला के सैना में कर्नल भाई का आरोप नाजायज संबंधों के चलते पहले से सताता रहा है रहा है राजेश कुमार चौहान
-त्रिपड़ी पुलिस ने क्वार्टर का ताला तोड़ तलाशी ली
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
शहरियों की सुरक्षा में तैनात रहने वाली पुलिस और पुलिस के ही रहने के लिए बनाए गए पुलिस लाइन के एक क्वार्टर में एक महिला की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। आरंभिक जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान कर चल रही है, जबकि महिला के भाई व भारतीय सैना में कर्नल के पद पर तैनात आरएस राणा का आरोप है कि उसकी बहन को मारा गया है।
राजिंदरा अस्पताल में महिला की मौत के बाद पुलिस लाइन पहुंचे कर्नल आरएस राणा ने 28 जून 2010 में उक्त महिला व अपनी बहन ललिता चौहान की ओर से लिख गई चिट्ठी पढ़ कर सुनाते हुए बताया कि त्रिपड़ी पुलिस के पास भी मामला पहुंचा था तब उसके बहनोई ने माफी मांग कर समझौता किया था। उक्त पत्र में आरोपी पर एक अन्य महिला कांस्टेबल से अवैध संबंधों से लेकर तस्करी में शामिल होने,  नशा करने, बच्चों व पत्नि के साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं पत्र में उक्त पुलिस कर्मी के खुदकुशी करने अथवा अपनी हत्या करने का अंदेशा मृतक  महिला ने लगाते हुए सुरक्षा की गुहार भी लगाई गई है। मृतक ने लिखा है कि उसके साथ मारपीट के अलावा उसका पति कभी अपनी कनपटी पर और कभी उसकी कनपटी पर बंदूक तानता रहता है।
वहीं कर्नल राणा का कहना है कि वर्तमान में बनूड़ में ट्रैफिक प्रभारी के पद पर तैनात राजेश कुमार चौहान ने पहले भी अपनी लोडेड गन से उन्हें मारने की कोशिश की थी पर तत्कालीन एसएसपी रणबीर सिंह खटड़ा और त्रिपड़ी पुलिस प्रभारी जस्सा सिंह के हस्तक्षेप के बाद जान बच पाई थी। साथ ही वे एक अन्य महिला के साथ नाजायज संबंधों के चलते अपनी बहन को सताने के आरोप भी राजेश कुमार चौहान पर लगाते हैं। कहते हैं कि यहां पर घर खर्च चलाने के पैसे वे भिजवाते थे और राजेश अपनी कमाई उक्त महिला कांस्टेबल को दे आता था।
दूसरी ओर मौके पर पहुंचे त्रिपड़ी पुलिस प्रभारी करणशेर सिंह ने क्वार्टर का ताला तुड़वा कर तलाशी ली है और मामले की जांच की जा रही है।

Friday, 18 May 2012

ओपन एक्सेस की बिजली हुई मंहगी, आम को राहत, Industry has to pay more for open access electricity


-पीएसईआरसी ने सीधी बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं पर ट्रांसमिशन व विलिंग चार्ज लगाया
-आम उपभोक्ताओं पर 17 पैसे का अतिरिक्त वजन पड़ रहा था
-एक साल में 411 करोड़ का चूना लगा
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब में ओपन एक्सेस के रास्ते बाहर से ली जाने वाली बिजली अब मंहगी हो गई है, हालांकि इससे प्रदेश के आम उपभोक्ता को खासी राहत मिली है। संभावित रूप से इस साल बढऩे वाली बिजली की दरें इस बार ना बढ़े या फिर होने वाली बढ़ोतरी में से कम से कम 17 पैसे प्रति यूनिट की कटौती हो जाए।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम की याचिका पर पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन ने सीधी बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं पर ट्रांसमिशन व विलिंग चार्ज लगा दिया है। इससे पहले ये शुल्क आम व अन्य सभी उपभोक्ताओं के बिल में तो लग कर आते हैं लेकिन ओपन एक्सेस के माध्यम से सीधी बिजली लेने वालों को इससे तकनीकि रूप से छूट मिली हुई थी।
पीएसईआरसी ने ओपन एक्सेस रेग्यूलेशन एक्ट में संशोधन करते हुए छोटे व मध्यम उपभोक्ताओं को तो राहत दी है पर एक मेगावाट व इससे अधिक लोड वाले अन्य पर 127 पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। इसमें 11 पैसे ट्रांसमिशन शुल्क और 116 पैसे का विलिंग शुल्क लगाया है।
ओपन एक्सेस वाले उपभोक्तओं से ये शुल्क अलग से लिए जाएंगे। वर्तमान में 132 केवीए से 220 केवीए के ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं से विलिंग चार्जेज नहीं लिया जा रहा था जबकि 33 व 66 केवीए लोड वाले उपभोक्ताओं से 15 फीसद अथवा 17.4 पैसे प्रति यूनिट, 11 केवीए के उपभोक्ताओं से नार्मल विलिंग चार्जेज का 30 फीसद वसूला जाता था। अब प्रदेश का नेटवर्क प्रयोग करने वालों पर समान रूप से शुल्क लगेगा। अभी तक ऐसी बड़ी इंडस्ट्री आम उपभोक्ता से कम शुल्क दे रही थी।
पावरकाम ने पीएसईआरसी के एक याचिका दायर कर बताया था कि एक साल में 411 करोड़ रूपये का नुकसान हो चुका है और आम उपभोक्ता पर 17 पैसे प्रति यूनिट का भार पड़ रहा है। ऐसे में बिजली बिलों में 17 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी सिर्फ इसी वजह से भी करनी पड़ सकती है। दलील यह भी दी गई कि आम उपभोक्ता पर लोड ना डाला जाए। इस पर पीएसईआरसी ने चार मई को उक्त आदेश जारी कर दिए।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 315 उपभोक्ता ओपन एक्सेस के तहत 15 सौ मेगावाट बिजली उस समय भी लेते हैं जब पावरकाम के पास अतिरिक्त बिजली होती है। 15 मिनट के सलाट में पावरकाम से ली जाने वाली सस्ती बिजली बाद में पावरकाम को लौटानी पड़ती है। उपभोक्ताओं के रवैये से पावरकाम को चूना लगता रहा है।

धान की प्रतिबंधित किस्में पंजाब के खेतों में, Non recommended paddy varieties are in Punjab’s fields


-एचकेआर 47, एचकेआर 127  और पूसा 44 की बिजाई बिलकुल ना करें
-किसान मेलों के बाहर और विशेष कार्यशालाएं लगा बेचे जा रहे हैं बीज
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में उगाई जाने वाली और यहां के कृषि वैज्ञानिकों की ओर से सिफारिश की गई धान की किस्मों को घटिया, कम उपज और च्यादा समय व पानी लेने वाली बता प्रतिबंधित किस्मों को यहां के खेतों में धकेलने की तैयारी की जा रही है।
दिल्ली में ड्राइंग रूम में बैठ कर पंजाब के खेतों से पैसा उगाने की तैयारी कर रही कुछ कंपनियों की भनक प्रदेश के कृषि विभाग को भी लग गई है। ऐसे में विभाग के अलावा पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने अपनी ओर से भी धान की बिजाई व रोपाई करने वाली किस्मों की एक विस्तृत सूची जारी कर दी है।
दिलचस्प है कि निजी क्षेत्र की कंपनियां बिना मिट्टी व पानी की जांच कि अपने बीज बाजार में उतार देती है और हर जलवायु में बेचने के लिए हथकंडे अपनाने लगती है। कुछ ऐसे ही सेमिनार व कार्यशालाएं आयोजित कर कुछ विशेष किस्में प्रचारित की जा रही हैं। पहले ये कंपनियां बीज बेचती हैं फिर खाद और दवा की बारी आती है। कंपनियों के अपने सभी  उत्पाद बेचने के बाद जब किसान की फसल बेचने की बारी आती है तो खरीददार नहीं मिलता कई तरह केंद्र व राइस शेलरों की स्पेसीफिकेशन सामने आती है।
इतना ही नहीं प्रतिबंधित की गई किस्में सरकारी स्तर पर लगने वाले किसान मेलों के स्थल के ठीक बाहर बिकने बड़े पैमाने पर आती है। इस बार निजी कंपनियां एक कदम और आगे बढ़ गई है। अब सोची समझी रणनीति के तहत कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं और बताया जा रहा कि यही एक किस्म है जो पानी की बचत करवाती है।
वहीं पीएयू आगाह करता है कि कुछ निजी व्यापारियों की ओर से सुझाई जा रही एचकेआर 47, एचकेआर 127  और पूसा 44 की बिजाई बिलकुल ना करें। इनमें झुलस रोग से लडऩे की क्षमता बिलकुल नहीं है।
वही कृषि विभाग के उप निदेशक बीज रहे और मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि ट्रेडर अपनी तरह से मुनाफा कमाने के तरीके तलाश लेता है। जिस किस्म तले रकबा बढ़ता है अगले सीजन तक उसी में कमियां निकाल दी जाती है, इससे किसान घाटे में रहता है और बिचौलिए कमाई लूट लेते हैं। इस बार भी कई शेलर मालिक व आढ़तिए प्रतिबंधित पीआर 201 किस्म लगवा रहे है और कह रहे हैं कि उपज सीधी ले आना। इससे एक तो वे मार्केट कमेटी के 12.5 फीसद का शुल्क चोरी कर लेते हैं और बाजार में ना बिकने वाली किस्म के चलते सौ रूपये तक सस्ती भी ले लेते हैं।

पीएयू की सिफारिशों अनुसार

पीएयू की ओर से विकसित की गई और प्रमाणित धान की किस्मों में पीआर 118, पीआर 116, पीआर 114, पीआर 111, पीआर 115 और पीआर 113 को रखा गया है। ये किस्में ना केवल अधिक उपज देती हैं अपितु लगने वाली बीमारियों से भी खुद की सुरक्षा करती हैं। इनमें से पीआर 111, 114 व 116 बीजने से पकने तक 138 से 145 दिनों का समय लेती है और औसत झाड़ 27-28 क्विंटल होता है जबकि पीआर 115 पकने में 125 दिन का समय लेती और 25 क्विंटल का झाड़ देती। इसके बाद आलू की फसल भी ली जा सकती है। जबकि  मोटे दानों वाली 113 से 28 क्विंटल और पीआर 111 व 115 को झुलस रोग नहीं लगता। पीआर 118 पकने में 158 दिन लेती है और झाड़ 29 क्विंटल तक होता है।

अकाली दल से नेता पुत्र-पत्नियां अभी से मेयर दौड़ में, Long queue for Mayer, before M.C election


निगम चुनाव: गठबंधन की गतिविधियां
-अकाली दल के हिस्से के 35 वार्ड में 217 दावेदार
भूपेश चट्ठा पटियाला
प्रदेश में शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की सरकार सत्ता पर काबिज है और विधान सभा चुनावों के बाद पंजाब में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों का 'अनुभवÓ ध्यान में रखते हुए इस बार कम से कम अकाली दल का नेताओं के नगर निगम के चुनाव में पार्षद बनने से पहले ही मेयर पद की दौड़ में नेता पुत्र-पत्नियां शामिल हो गई हैं।
पार्टी में चल रही लाबिंग पर सूत्र बताते हैं कि जिस तरह से पिछली बार पूर्व केबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह कोहली विधान सभा चुनाव हारने के बावजूद अपने पुत्र अजीतपाल सिंह कोहली को मेयर बनाने में कामयाब रहे। ठीक उसी फार्मूले को गुरु मंत्र की तरह अपनाते हुए पार्षद बनने से पहले ही मेयर की रेस में दर्जन भर ऐसे ही नाम आगे आए हैं। जिन्होंने पटियाला शहर के कुल 50 वार्डों में से अकाली दल के हिस्से में आने वाले 35 वार्डों से टिकट की उम्मीदवारी जताने के साथ ही मेयर के लिए ताल ठोकनी शुरु कर दी है। दिलचस्प है कि विधान सभा चुनाव में पिता की लगभग पूरी कमान संभाल हार गए अजीतपाल सिंह कोहली भी खुद को इस दौड़ में जैसे तैसे रखे हुए हैं।
पार्टी में उभर कर आगे आ रहे नामों में पिछड़ी श्रेणी आयोग के चेयरमैन व शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान रह चुके प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर के पुत्र शमशेर सिंह बडूंगर, केबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा के पुत्र सुखी रखड़ा, पूर्व मंत्री हरमेल सिंह टोहड़ा के पुत्र व पंथ रत्न स्व. जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा के नाती हरिंदर पाल सिंह टोहड़ा, जिला जत्थेदार व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्र मोहन सिंह बजाज के पुत्र अमरिंदर सिंह बजाज, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य छच्जू राम सोफत की पत्नि और कर्मचारी वेलफेयर बोर्ड के प्रधान सुरिंदर पहलवान की पत्नि और मजीठिया परिवार से सीधे संपर्क रखने वाले हरपाल जुनेजा के नाम आगे हैं। इनमें पार्षद जसपाल प्रधान व उनके पुत्र के अलावा तीन बार के पार्षद सुखमिंदर पाल सिंह मिंटा की पत्नि का नाम शामिल किया जा सकता है।
पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता बताते हैं टिकट के लिए आवेदन करने वाले कुल 217 दावेदारों में और कितने खुद को इस श्रेणी में रखते हैं कुछ नहीं कहा जा सकता। पहली बार अकाली दल में कार्यकर्ता कम और नेताओं की संख्या बढ़ी है। पार्टी के लिए किसने? क्या किया? इसका अनुमान जिले में विधायकों की संख्या से लगाया जा सकता है।  


भाजपा के 15 वार्ड में 120 दावेदार

गठबंधन में से भाजपा के हिस्से में आए 15 वार्डों में कुल 120 दावेदारों ने टिकट के लिए अपनी उम्मीदवारी जताई है। जिला प्रधान अरूण गुप्ता ने बताया कि आवेदन करने वालों में सभी पार्षद शामिल हैं। चुने गए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा 22 मई को प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा चंडीगढ़ में प्रदेश कार्यालय से करेंगे।

Tuesday, 15 May 2012

भरने लगे बांध, दो गुना हुआ पन बिजली उत्पादन, dam reservior, filling season, electricity,


बढ़े पारे का असर
-सतलुज व रावी नदियों में पिघली बर्फ का पानी ज्यादा पर व्यास में कम
भूपेश चट्ठा, पटियाला
साधारण तय प्राकृतिक रूप से पानी जमा करने का एकमात्र तरीका आसमान से बरसे पानी के रूप में ही माना जाता है, बात बांध भरने की हो तो मानसून का ही नाम लिया जाता है लेकिन हिमालय से निकली नदियों पर बने बांधों का भराव सीजन गर्मी तेज होने के साथ ही शुरु हो जाता है। देर से ही सही इस बार पार ने अब असर दिखाना शुरु किया तो उत्तर भारत के सबसे बड़े बांध में पानी का स्तर हर रोज एक फुट की रफ्तार से उपर उठने लगा है और भाखड़ा सहित सभी बांधों के खाली होने का सिलसिला अब बंद होने के बाद भराव सीजन शुरु हो गया है।
पन बिजली के लिए बांधों के पानी पर नजर रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आंकड़े बताते हैं कि भाखड़ा का जल स्तर इस साल 1535 फुट तक गिर गया था और अब ये 1547 फुट पर आ गया है। बीते 24 घंटों में एक फुट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पानी की आवक 16300 क्यूसिक पर आ गई है, एक दिन पहले यह 16000 क्यूसिक थी, हालांकि यहां भी गिरावट छह हजार क्यूसिक तक आ गई थी। सतलुज नदी पर बने भाखड़ा के अलावा रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध में पानी आने की रफ्तार कहीं अधिक है। यहां बीते 24 घंटों में जल स्तर 500 मीटर से उपर उठ कर 501 मीटर पर आ गया है। हालांकि पिछले साल आज ही के दिन यहां पर 510 मीटर पर पानी था। बीते 24 घंटों में पानी की आवक 7430 क्यूसिक से बढ़ कर 8260 क्यूसिक पर आ गई है।
रावी और सतलुज की तुलना में व्यास नदी में पानी आने की रफ्तार अभी भी नहीं बढ़ पाई है। व्यास नदी पर बने पौंग बांध में पानी की आवक 2450 क्यूसिक ही है, जबकि पिछले साल यहां इन्हीं दिनों में 4784 क्यूसिक पानी आ रहा था। जलस्तर मेें भी चंद इंच की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। अब यहां पानी 1322 फुट पर आ गया है।  दूसरी ओर पानी की आवक बढऩे के साथ ही पन बिजली उत्पादन भी दोगुना हो गया है। पावरकाम का अपना पन बिजली उत्पादन 114 लाख यूनिट पर आ गया है। दस दिन पहले तक ये मात्र 68 लाख यूनिट रह गया था। इसी प्रकार भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड से पंजाब को अपने हिस्से की मिल रही 72 लाख यूनिट बिजली भी अब बढ़कर 115 लाख यूनिट पर  आ गई है। दिलचस्प है कि प्रदेश में बिजली की कुल मांग में इस पखवाड़े में करीब 270 लाख यूनिट की वृद्धि दर्ज हुई है। ये अब 1270 लाख यूनिट पर है जबकि 1252 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति भी की गई है।

Friday, 11 May 2012

प्रदेश में धान की पनीरी की बिजाई शुरू, As Paddy season begins, electricity demand rises



- पावरकाम ने दी मांगी गई चार घंटे बिजली
- तीन दिनों में मांग ढाई सौ लाख यूनिट बढ़ी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश में खरीफ की मुख्य फसल धान की पनीरी की बिजाई शुरु हो गई है। हालांकि राज्य के कृषि विभाग ने इस साल सब सोयल एक्ट में छूट देते हुए एक मई से ही बिजाई करने की अनुमति दे दी थी, लेकिन देर से खत्म हुए गेहूं के सीजन के चलते और कानून में मिली राहत को उचित प्रचार न मिलने की वजह से मालवा के किसानों ने धान की पनीरी की बिजाई दस जून के आसपास ही शुरु की है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से कृषि क्षेत्र को दी जा रही बिजली के आंकड़े भी बताते हैं कि बिजली की मांग कृषि क्षेत्र में अब बढऩी शुरु हुई है। पावरकाम के डायरेक्टर प्रबंधन गुरबचन सिंह बची कहते हैं कि किसानों की ओर से इन दिनों में चार घंटे बिजली देने की मांग की गई है और प्रदेश में चार घंटे से कम कहीं भी बिजली नहीं दी जा रही है।
जबकि पारे के 40 डिग्री के पार होने और कृषि क्षेत्र में बढ़ी सिंचाई मांग के बाद पिछले तीन दिनों में बिजली की मांग ढाई सौ लाख यूनिट बढ़ी गई है। पावरकाम के आंकड़े बताते हैं कि एक हजार लाख यूनिट के पास चल रही मांग अब 1250 लाख यूनिट पर आ गई है, जबकि बीते 24 घंटों में राज्य में 1240 लाख यूनिट बिजली की सप्लाई की गई है।
इसमें केंद्रीय पूल से हिस्सा, बैंकिंग व बिजली खरीद का कुल आंकड़ा 472 लाख यूनिट का रहा। हालांकि अचानक मांग बढऩे से 16 लाख यूनिट बिजली 2.89 रूपये प्रति यूनिट की दर से उत्तरी ग्रिड खरीदी भी गई है। राज्य में बिजली की किसी किस्म की कमी पर पावरकाम के प्रवक्ता कहते हैं कि जीरो आवर कट से बिजली दी जा रही है।

इंटरलॉक सड़कों में लॉक हुई पानी ड्रेनेज की लाइनें, Drainage-water pipes got struck under interlocking roads.


वार्ड नंबर 29 का रिपोर्ट कार्ड
फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर के करीब करीब दक्षिणी-पश्चिमी छोर पर आने वाले वार्ड नंबर 29 की प्रमुख समस्या वही है जिसके लिए खुद पटियाला शहर जाना जाता है। यहां एतिहासिक नाला आज भी कहीं कहीं दिखाई देता है। माई जी की सरां के रूप में एक छोर पर विरासती धरोहर दिखाई देती है तो हर बरसात में बाढ़ का डर यहां आसमान में बिजली कड़कने के साथ ही बढ़ जाता है।
कभी महाराजा काल में ज्योतिष शिक्षा के केंद्र रही बगीचियां व डेरे, सीवरेज का नाला बन चुकी नदी किनारे रहे घाटों पर अब भी दिखाई पड़ते हैं। पानी व सीवरेज की सप्लाई लाइन खासी पुरानी है जो आए दिन चोक हुई रहती है। बढ़ी आबादी का बोझ नहीं झेल पर रही। नाले में पानी का स्तर बढऩे पर सीवरेज बैक मारता है।
विकास के नाम पर चंद कालोनियों में बनी सीसी फलोरिंग की सड़कें और तीन प्रमुख सड़कों पर लगी इंटर लाकिंग टाइल्स। ढिल्लों कालोनी के एक पार्क को भी दुरुस्त किया गया है पर दूसरे को चारदिवारी का इंतजार है। दिलचस्प है कि यहां पर एक दो जगह ऐसी भी हैं जहां विकास के नाम पर खुद लोग ही अड़ंगा बने हैं। दो दशकों से कच्ची सड़कों पर चल रही महिंदरा कालोनी की 15 गलियां बनी पर ढिल्लों कालोनी में दो गलियां सिर्फ इस लिए नहीं बन पा रही कि गली के आधे बाशिंदे नहीं चाहते कि उनके मकान नीचे रह जाएं। दो फुटबाल के मैदानों जितनी खाली जगह पर लोग बच्चों का पार्क या खेल का मैदान नहीं फ्लैट चाहते हैं जिससे उनकी जायदाद की कीमत बढ़ जाए और आबादी बढऩे से दुकानदारों की आय बढ़े।
वहीं क्षेत्र के बाशिंदे श्री हनुमान मंदिर चौंक के गुरमुख सिंह कहते हैं कि नाले की बदबू में जीना मजबूरी हो गई है पर ये कवर होना चाहिए। समानिया गेट के बलविंदर सिंह बेहतर साफ सफाई चाहते हैं तो राज कालोनी के बलजीत सिंह कहते हैं कि बारिश में हर तरफ पानी जमा होता है और सड़क पर से पानी निकलता नहीं और इंसान का निकलना मुश्किल हो जाता है। गोविंदपुरा मुहल्ला के अजमेर सिंह और महिंदरा कालेज के सोनू पीने के पानी की किल्लत बताते हैं। जबकि ढिल्लों कालोनी के यूके मंगला कहते हैं कि पार्कों को दुरुस्त किया जाना चाहिए।



वार्ड अधीन आते क्षेत्र

राज कालोनी, ढिल्लों कालोनी, महिंदरा कालोनी, कुम्हारां वाला मुहल्ला, ज्योति एनक्लेव, समानिया गेट, ओल्ड पुलिस लाइन स्कूल, श्री महावीर मंदिर, नौहरियां मंदिर, निमवाली गली, सब्जीमंडी का कुछ क्षेत्र, एकता मुहल्ला, रामलीला ग्राउंड के सामने का क्षेत्र, मौरांवाली गली, रागीवाला मुहल्ला, डोगरा स्ट्रीट इत्यादि प्रमुख क्षेत्र।

क्या कहते हैं पार्षद
फोटो: 1
शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन से पार्षद बने इंद्रप्रीत सिंह बब्बी मान इंटरलाकिंग टाइल्स से बनाई गई सड़कों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धी मानते हैं और कहते हैं कि थोड़ी सी बारिश से जहां हर तरफ कीचड़ हो जाता था वो अब नहीं है, सारी प्रमुख सड़कें बन गई है। लेकिन पानी व ड्रेन का सिस्टम खासा पुराना होने के चलते दुरुस्त नहीं हो पाया है, हालांकि दो टयूबवेल लगवा कर पानी की व्यवस्था ठीक करने का प्रयास किया है। फिर भी कई काम करने वाले अभी हैं।  

Wednesday, 9 May 2012

गरीबों का निवाला, अमीरों के प्याले में, Rotten wheat means cheap vodka or sugar free whisky


 -सड़े अनाज से बनेगी वोदका और शूगर फ्री व्हीस्की
-धान से भी बीयर बनाने का आया था विचार
-हिमाचल प्रदेश में सड़ते फलों का उपयोग हुआ है वाइन बनाने में
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब के गोदामों और अनाज भंडारण के लिए खुले में बनाई गई प्लींथों पर रखे हुए अनाज का एक हिस्सा अब देश में गरीब का निवाला नहीं बन पाएगा। इस पर 'नॉट फिट फॉर हयूमन कन्जंपशन' का ठप्पा लग चुका है। लेकिन निराश होने वाली बात नहीं है, केंद्र सरकार की 'भंडारण नीति' और रेलवे की अनाज 'ढुलाई गति' इस सड़े अनाज को अमीर के प्याले में डालने वाली है वो भी भारी सब्सिडी  के साथ।

शराब  पर चाहे जितना आबकारी कर लग रहा हो पर शराब बनाने वाली कंपनियों को पंजाब में सड़ चुका करीब 47 हजार टन अनाज इस साल सब्सिडी के साथ अथवा बाजार भाव स एक तिहाई दामों पर मिलने वाला है। अगले साल भी ग्रेन बेस शूगर फ्री व्हीस्की अथवा सस्ती वोदका  बनाने वाली किसी कंपनी को 'कच्चे मालÓ की कमी ना आए इसका प्रबंध भी सरकार ने कर दिया है। उक्त मात्रा से चार से पांच हजार टन सड़ा अनाज अगले साल भी नीलाम किया जाएगा। संभव है तब तक हमारी व्यवस्था प्राकृति की आड़ में कुछ ऐसे और 'इंतजामÓ कर दे कि फिर आने वाले सालों में भी कमी ना आने पाए।

राज्य सरकार की अनाज खरीद एजेंसियों की तालमेल कमेटी के चेयरमैन भुपिंदर सिंह कहते हैं कि खराब होने वाली गेहूं का आंकड़ा आधा से एक फीसद ही है। इसे बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जा रहा है, लेकिन अगर अनाज खराब हुआ है, तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए पर आप इसे सिर्फ कर्मियों के सिर पर नहीं थोप सकते। केंद्र सरकार के मापदंड अनुसार गेहूं की सेल्फ लाइफ नौ महीने है पर पंजाब के गोदामों में 2009 का गेहूं भी पड़ा है। 2005 में मामला स्र्वोच्च न्यायालय तक जाने के बाद एएफसीआई ने एक साल में ही गेहूं उठवाने की बात स्वीकार की थी पर अब फिर हालात वहीं के वहीं आ गए हैं।  

वहीं पंजाब में एकबारगी सड़कों पर खराब होते धान को ठिकाने लगाने 'नई तकनीकि' की तलाश कर सस्ती बीयर बनाने का विचार भी यहां के नेता दे चुके हैं। वर्ष 2002 के बाद चलाए गए 'डाइवरसीफिकेशन' अभियान के दौरान कहा गया कि द्वी फसलीय चक्र ने जौ व गन्ने की खेती अधीन रकबा खत्म कर दिया है। और हम धान की पैदावार इतनी बढ़ा चुके हैं कि संभल नही रहा। तर्क दिया गया कि हिमाचल प्रदेश के दूर दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में फल उगते ज्यादा हैं पर मैदानों तक लाना खासा मंहगा हो जाता है। ऐसे में वहां की सरकारों ने 'वाइन पालिसी' बनाई और राजस्व बढ़ाने के साथ रोजगार भी उपलब्ध करवा दिया। हाल ही के वर्षों का उदाहरण दे उक्त खुलासे के साथ सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला कहते हैं कि पंजाब के अनाज और देश के हालात का आप इस तरह से नहीं देख सकते। आपको अनाज सडऩे से रोकने के ही उपाय करने होंगे। या तो आप जमीन की कीमत के आधार पर गोदामों का किराया बढ़ाएं या फिर जहां सस्ते गोदाम हैं वहां मानसून आने से पहले गेहूं ले जाएं। डा. खोसला कहते हैं कि गेहूं और धान ही क्यों खराब होता है? केंद्र के संस्थान एफसीआई का चावल तो कभी नहीं सड़ता?  

Tuesday, 8 May 2012

खेती से ऊबने लगा पंजाबी!, trends; Punjabi farmer loosing interest in farming


-गेहूं का उत्पादन रिकार्ड बनाया पर प्राकृति से सहमा है किसान
-धान की 1121 किस्म के दामों में आए उतार चढ़ाव ने भी दिया योगदान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
एक जमाना था जब बुजुर्ग खेती को उत्तम, व्यापार को मध्यम और नौकरी को निकम्मी बताया करते थे। हालात बदले तो खेत का बादशाह किसान 'नौकरीÓ को 'गुलामीÓ कहना बंद कर गया बच्चों को पढ़ लिख कर 'नौकरÓ होने की सलाह देने लगा पर खुद खेती करता रहा। वहीं अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि गेहूं उत्पादन का रिकार्ड बनाने वाला पंजाबी खेती से ही ऊबने लगा है।
इसका प्रत्यक्ष प्रमाण ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वालों के रूझान में इस साल आई कमी है। एक ओर पराई जमीन पर खेती करने वाला किसान प्राकृति से सहमा है वहीं शहर जा कर मजदूरी करने में अधिक दिलचस्पी लेने लगा है। पिछले साल बड़े क्षेत्र में धान पर बाढ़ की मार पड़ी तो दूसरी बार पनीरी लगाने अमृतसर से हरियाणा के करनाल तक के दौरों ने खर्च बढ़ा दिया। अब गेहूं की कटाई पर बारिश की मार पड़ी तो कई लोगों को झटका लगा।
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. बीएस सोहल बताते हैं कि एक अन्य कारण में पिछले सालों में न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ी है पर लागत मूल्य बढ़ा है। खाद, डीजल, बीज, पेस्टिीसाइड और डीएपी व यूरिया के दामों में भारी बढ़ोतरी  से  लगी है। तुलनात्मक रूप से धान की किस्म 1121 के दामों में शेयर बाजार की तरह आए उतार चढ़ाव ने भी किसानों को डरा दिया है।
वहीं नयागांव के लखविंदर सिंह औलख बताते हैं कि दो सीजन पहले तक धान की 1121 किस्म के दाम नई उंचाई छू रहे थे और यही वजह थी कि प्रति एकड़ ठेका 35 हजार के पार चला गया लेकिन पिछले साल इस किस्म के प्रतिबंधित हो जाने पर धान के सीजन में होने वाली कमाई आधी रह गई है। वे याद करते हैं कि साधारण धान की तुलना में तीन गुना दामों पर बिकने वाली और अधिक झाड़ देने वाली किस्म ने ठेके पर खेत के रेट बढ़ाए थे पर अब वैसी उपज व दाम देने वाली किस्म नहीं है और एमएसपी बढऩे की रफ्तार भी कम है। ऐसे में बचत ना होने की स्थिति में ठेके पर जमीन लेकर खेती करने वाले दिखाई नहीं दे रहे। उनके यहां भी पुराने बंदे इस बार कोई बात नहीं कर रहे।
जबकि संगरूर रोड पर संसारपुर के हरजिंदर सिंह बदेशां बताते हैं कि पिछले तीन चार सीजन से हर बार दो सौ रूपये प्रति बीघा ठेका बढ़ रहा था और खेत लेने वाले खुद संपर्क करते थे पर अब वे देख रहें हैं कि खेती करने वाले लोग बिना बात किए पास से गुजर जाते हैं और बात भी नहीं करते। पूछने पर पता चलता है कि अमुक व्यक्ति शहर में दिहाड़ी करने लग गया है।
इसी क्रम में सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम में डा. बलजीत सिंह बताते हैं कि मंहगाई बढऩे के साथ ही दिहाड़ी भी बढ़ी है। तीन साल पहले डेढ़ सौ रूपये में मजदूर मिल जाता था पर अब तीन सौ से कम पर उपलब्ध नहीं है। शहर में अगर कोई दिहाड़ी करता है और गांव में रहता है तो निसंदेह खर्च कम होता है। दाने के अलावा सब्जी और पशुओं से दूध दही, लस्सी मिल जाती है और चिकन-समोसे से लेकर फिल्म-लिपिस्टिक पर खर्चा आए दिन नहीं होता। ऐसे में छह महीने में पूरे परिवार के पास आने वाली उपज की तुलना में मुखिया के पास हर दिन आते पैसे किसे अच्छे नहीं लगते?

Monday, 7 May 2012

बैंक में सेंधमारी कर नौ लाख उड़ाए, Thieves take away 9.46 lakes rupees from state bank of Patiala


 -एसबीओपी की माल रोड स्थित कृषि विकास शाखा में रात के अंधेरे में वारदात को अंजाम दिया
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
स्टेट बैंक आफ पटियाला की माल रोड स्थित कृषि विकास शाखा में बीती रात चोरों ने सेंधमारी कर करीब नौ लाख 46 हजार रूपये उड़ा लिए हैं। अभी तक पुलिस किसी तरह का सुराग ना होने की बात कह रही है। वहीं एसएसपी पटियाला गुरप्रीत सिंह गिल ने नौ लाख रूपये से कुछ अधिक की राशि चोरी किए जाने की जानकारी दी है।
एसबीओपी मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर रात के अंधेरे में कुछ अज्ञात लोगों ने पहले ब्रांच की चारदिवारी फांद कर एक खिड़की को तोड़ा और फिर ब्रांच के अनदरूनी हिस्से में आए। यह भी संभव है कि वे सीढिय़ों से अंदर नीचे उतरे हों और जिस कमरे में स्ट्रांग रूम बना था वहां तक पहुंचने के लिए 13 इंच की कंकरीट की लोहे की सरिए डली दीवार को में जगह बनाई। इसके साथ ही स्ट्रांग रूम पर लगी लोहे की दो संखीचों को काट कर मोड़ा फिर वारदात को अंजाम दिया। इतना ही नहीं सीसीटीवी कैमरे के सामने लगे शीशे का अखबार से टेप चिपकाते हुए ढ़क दिया।
उधर लाहौरी गेट पुलिस ने आईपीसी की धारा 380, 457 दर्ज कर खोजी कुत्तों व फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की मदद से सुराग तलाशने शुरू कर दिए हैं।


बैंक मैनेजर का था पहला दिन और हैड कैशियर छुट्टी पर

सेंधमारों ने जिस बैंक में अपने मंसूबों को सिरे चढ़ाया वहां पर संभव है कि साप्ताहिक अवकाश के साथ मिलने वाली दो रातों के साथ ही निर्वतमान बैंक मैनेजर के तबादले का भी 'ख्यालÓ रखा हो। बैंक मैनेजर यशपाल सूद ने इस शाखा में आज सोमवार को ही कार्यभार संभालना था। इतना ही नहीं बैंक की इस शाखा का हैड कैशियर भी आज सोमवार को इत्तेफाक  से अवकाश पर था। ऐसे में कितने पैसे उड़ाए गए इसका अभी तक सिर्फ नजदीकी अनुमान ही लगाए जा रहे हैं।

चंद दिन पहले वारदात होती तो नुकसान करोड़ों में होता

बैंक की इस शाखा में अधिकतर लेन देन किसानों के साथ होता है और साल में दो महीने ऐसे होते हैं जब लेनदेन चरम पर होता है। इनमें अप्रैल और अक्टूबर के महीनों में किसानों को गेहूं और धान की फसल के भुगतान को आई राशि करोड़ों में होती है, हालांकि इसके बाद के दिनों में थोड़ा बहुत लोन आदी का लेन देन ही चलता रहता है। बैंक के ही एक अधिकारी बताते हैं कि यदि चंद दिन पहले गेहूं के भुगतान के दिनों में बैंक में यही घटना होती तो नुकसान लाखों में ना रह कर करोड़ों में पहुंचा होता।

पुरानी बिल्डिंग में कैसा स्ट्रांग रूम

जिस भवन में बैंक की शाखा काम कर रही है उसे देखने भर से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि बिल्डिंग कितनी मजबूत रही होगी? साधारणतय बैंक तीन तरफ से मोटी दीवारों से घिरे होते हैं लेकिन इस बैंक में तीन तरफ खाली जगह है, और यहां बने खिड़की दरवाजे इसे चोरों के लिए 'मेहमाननवाजीÓ ही प्रस्तुत करते हैं, इतना ही नहीं एक बार पास ही उजाड़ में से निकलती रेलवे लाइन की तरफ से आ पांच-सात फुट की दीवार पार कर ली तो चोकीदार के अलावा, रात भर कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसे में जर्जर बिल्डिंग में स्ट्रांग रूम कितना स्ट्रांग रह सकता है ये चोरों ने बता दिया।

होटलों में कौन ठहरा था?

बैंक शाखा के आसपास के होटलों में पिछले दिनों कौन ठहरा था? किसने रैकी की? कुछ ऐसे ही अनुमानों के साथ पुलिस ने अपने हाथ पांव मारने शुरु कर दिए है। होटलों में ठहरने वालों के पहचान पत्रों व रजिस्टर आदि को खंगाला जा रहा है। होटलों में लगाए गए सीसीटीवी के रिकार्ड की भी मदद ली जा रही है।

अंगहीन पुर्नवासन केंद्र को बैसाखियां देने की कोशिश, Rehabilitation center getting clippers


 रेड क्रास दिवस पर विशेष
फोटो:
- 2007 के बाद से नहीं आया है सरकारी अनुदान
- रेडक्रास पटियाला अब देने लगा कर्मियों को वेतन तो स्टेट बैंक आफ पटियाला देता है छुटकल सामान की ग्रांट
भूपेश चट्ठा, पटियाला
किसी इंसान का कोई हाथ या पांव कट जाए तो जितनी तकलीफ उस व्यक्ति को अथवा उसके परिवार के करीबी सदस्यों को होती है, उससे कहीं ज्यादा अफसोस तब होता है जब वो नकली अंग लगवाने के लिए इधर से उधर भिखारियों की तरह भटकने के बाद कृत्रिम अंग के मंहगा होने के चलते नहीं खरीद पाता है।
बाजार में निजी किंतु बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा तैयार किया गया एक कृत्रिम हाथ सवा लाख रूपये से शुरु होता है और पांच सात लाख रूपये तक एक-एक कृत्रिम अंग अलग अलग देशों की करंसी के हिसाब से मिलते हैं। इनकी उम्र दो से तीन साल की ही होती है। इसके बाद फिर बढ़ी दरों पर खरीदना ऐसे जरूरतमंदों की मजबूरी बन जाती है। कुछ ऐसे ही लाचार करने वाले हालातों से निपटने के लिए केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एंव सशक्तिकरण मंत्रालय ने नवंबर 2000 में अंगहीन पुनर्वासन केंद्र की शुरुआत की। दिलचस्प है कि पहले सात सालों में 1.62 करोड़ रूपये के अंग व अन्य सामान अपाहिजों को देने वाले इस केंद्र ने हजारों को लाभ पहुंचाया, लेकिन फिर ये ठंडा पड़ गया।
2007 में अंतिम 3.85 लाख की ग्रांट के बाद से केंद्रीय मंत्रालय से कोई अनुदान नहीं मिला है, हालांकि हर साल सभी तरह के एस्टीमेट बन कर जाते हैं। लगभग ठप हो चुके केंद्र को अब एक बार फिर बैसाखियां देने की कोशिश की जा रही है।
केंद्र के संचालक मानते हैं कि बुरे दिनों की शुरुआत दाहिने हाथ की कमी से हुई और फिर बढ़ती चली गई। कर्मियों ने महीनों वेतन न मिलने पर आना बंद किया तो कई काम छोटी सी तार, क्लिप, फोम, चमड़े के टुकड़े, रेजिन या प्लास्टिक की पट्टी की वजह से ही रुक जाते थे। पर अब रेडक्रास पटियाला ने कर्मियों को वेतन देने का जिम्मा उठाया है तो स्टेट बैंक आफ पटियाला छुटकल कच्चे माल के लिए ग्रांट देने लगा है। ऐसे में पुरानी पड़ी किटों का प्रयोग होने लगा है।
केंद्र के प्रभारी व युनाइटेड किंगडम से पीएचडी व प्रोस्थेटिक विशेषज्ञ प्रितपाल सिंह सिद्धू बताते हैं कि इस साल 31 मार्च तक उन्होंने दो लाख 90 हजार रूपये मूल्य के सामान व सहायता उपकरण 123 लोगों का कृत्रिम अंग से लेकर क्लीपर आदि दिए हैं। हालांकि व्हील चेयर अथवा ट्राई साइकिल देने की स्थिति में अभी केंद्र नहीं आया है। मंडी बोर्ड की ओर से भेजे गए केस में किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मालवा क्षेत्र के पटियाला डिवीजन के पांच जिलों के लिए बने इस केंद्र में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश से भी मरीज आते रहे हैं। संभव है केंद्र के आंखे मूंद लेने के बाद पंजाब सरकार इस ओर अपनी सीधी निगाह करे और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आटोबक जैसे ब्रांड न सही, पर बेहतर जुगाड़ तो उपलब्ध करवा ही सकती हैं।

Friday, 4 May 2012

समझ नहीं आ रहा आन लाइन सिस्टम!, Pure Punjabi; industry trying to ‘dictate’ computer, feed wrong information in online PPCB system.

-जानकारी छुपाने की 'फितरतÓ करवाती है गलती, कंप्यूटर नही करता 'एडजस्टÓ तो प्रार्थना पत्र हो जाता है रिजेक्ट
-पीपीसीबी टाइप करने के साथ ही खुलने वाली वेबसाइट को 'पंजाबी स्टाइलÓ में ढालने पर हो रहा है विचार
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य की इंडस्ट्री को भ्रष्टाचार के मकडज़ाल से निकाल घर बैठे ही विकास का पहिया बिना देरी किए घुमाने के पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रयास सिरे चढऩे में लगता है कि थोड़ी मशक्कत और करनी पड़ेगी। पंजाब में इंडस्ट्री लगाने वाले 'आम उद्योगपतिÓ की समझ में नहीं आ रहा कि जो बात वो कहना चाहता है वो कंप्यूटर समझता क्यों नहीं है? परिणाम वही हो रहा है कि ऑन लाइन सिस्टम समझ से परे है और मानवीय शक्ति से किया गया काम ही ठीक है चाहे चार पैसे खर्च क्यों ना हो जाएं।
आन लाइन सिस्टम में एपलाई करने के पिछले चार महीनों के पीपीसीबी के आंकड़े खासे बेहतर है सिस्टम देख रहे एक वरिष्ठ एनवायरमेंटल इंजीनियर बताते हैं कि 280 प्रार्थना पत्र रजिस्ट्रेशन के लिए आए हैं। इसके अलावा कंसेंट के 92 और एनओसी के 14 हैं। कंसेट के प्रार्थना पत्रों में से मात्र 24 को ही मंजूरी मिली है जबकि शेष रिजेक्ट हो गए। अधिकारी बताते हैं कि एक भी जानकारी यदि सही ना हो अथवा कालम खाली रह जाए या डाटा पूरा ना भरा हो तो सिस्टम प्रार्थना पत्र रिजेक्ट कर देता है।
दिलचस्प है कि कोई ना कोई जानकारी छुपाने की इंसानी 'फितरतÓ गलती करवा देती है जबकि कंप्यूटर वहीं करता है जो फीड कर दिया गया है। कई मामलों में तो एक के बाद एक प्रयास कर 'धक्केÓ से कंप्यूटर को मनाने का प्रयास भी हुआ है। पर जब कंप्यूटर 'एडजस्टÓ करता तो प्रार्थना पत्र रिजेक्ट हो जाता है।
 गूगल में पीपीसीबी टाइप करने के साथ ही खुलने वाली और हर तरह की जानकारी एक ही झटके में देने वाली इस वेबसाइट को 'पंजाबी स्टाइलÓ में ढालने पर विचार शुरु हो गया है। पीपीसीबी के अधिकारी मानते हैं कि जितनी शानदार व आसान वेबसाइट है उसका प्रयोग उतना नही हो रही रिजेक्ट प्रार्थना पत्रों की संख्या देख लगता है कि सारा सिस्टम ही ठप है।
दूसरी ओर पीपीसीबी के डायरेक्टर लोक संपर्क डा. चरणजीत सिंह नाभा बताते हैं कि यह एक एडीशनल सुविधा है अनिवार्य नहीं। आप चाहें तो पेट्रोल खर्च कर पीपीसीबी के क्षेत्रिय कार्यालय में जाएं और किसी कंसलटेंट की मदद से फीस देकर औपचारिकता पूरी करें या आन लाइन बिना देरी के सूचना आपको सही देनी होगी तभी एनओसी मिलेगी।


क्या है सिस्टम?
पीपीसीबी की ओर से पिछले साल 13 दिसंबर को लार्ज स्केल इंडस्ट्री की रजिस्ट्रेशन करवाने, एनओसी लेने अथवा रिन्यू करवाने के लिए आन लाइन सिस्टम की शुरुआत की गई। तत्कालीन चेयरमैन केएस पन्नू के दिमाग की उपज कहे जाने वाले इस अतिरिक्त सिस्टम के पीछे कारण भ्रष्टाचार को समाप्त करने के अलावा पीपीसीबी की किसी भी स्वीकृति में एक साल तक की देरी भी खत्म करना था। कहा गया कि 15 करोड़ रूपये से अधिक लागत मूल्य पर शुरु किए जाने वाले किसी भी प्लांट के लिए उपलब्ध करवाया गया यह सिस्टम यदि सफल रहा तो अन्य इंडस्ट्री के लिए भी उपलब्ध हो जाएगा। आन लाइन सिस्टम में असिसटेंट एनवायरमेंट इंजीनियर से लेकर चेयरमैन तक की स्वीकृति व प्रार्थना पत्र के स्टेटस की जानकारी हर समय उपभोक्ता के लिए मौजूद रखी गई है।

पासर पर पार पाना, एक्साइज पर भारी, . Passers running parallel excise department on boarder

-दो नंबरियों के साथ होती है च्यादा मैन पावर
-एक्साइज विभाग का मोबाइल विंग चलता है डेपूटेशन की पुलिस के सहारे
जागरण एक्सकलूसिव
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राच्य आबकारी विभाग के बराबर अपनी सरकार चलाने वाले 'पासरÓ पर पार पाना एक्साइज टीमों के लिए अब भारी पडऩे लगा है। एक ओर विभाग ने सख्ती की है तो दूसरी और पंजाब-हरियाणा और पंजाब-राजस्थान के बीच सामान से लदे ट्रकों को बिना टैक्स चुकाए अवैध रूप से पार करवाने वाले पासरों के हौंसले भी बढ़ गए हैं। इन पॉसरों पर पार पाना एक्साइज विभाग के लिए भारी पडऩे लगा है।
 दो नंबरियों के साथ ना केवल च्यादा मैन पावर होती है बल्कि उनके वाहन व अन्य साधन भी विभाग के कर्मियों से कहीं बेहतर है। सुरक्षा के नाम पर एक्साइज विभाग का मोबाइल विंग डेपूटेशन की पुलिस के सहारे पर है। जबकि राच्य में 37 बैरियर हैं इनमें से अमृतसर व लुधियाना के दो रेलवे स्टेशनों को छोड़ दें तो शेष सभी राच्य की सीमा पर ही है। दिलचस्प है कि सैंकड़ों किलोमीटर की सीमा पर बसे हर गांव में एस्कैप रूट बने हैं। हर बैरियर 40-50 किलोमीटर के दायरे में इनकी संख्या पांच से दस के बीच है।
विभाग के ही एक अधिकारी बताते हैं कि चोर तो मानता नहीं है कि उसने चोरी की है जबकि विभाग का काम होता है कि उसे पकड़ कर ले जाए ऐसे में शुरुआत बहस से होती है, मामला चूंकि अक्सर रात का होता है ऐसे में अपराधी वार कर जाने में कामयाब भी हो जाते हैं। विभाग की टीम के साथ पुलिस  से डेपूटेशन पर आए एक दो लोग सुरक्षा के लिहाज से होते हैं, लेकिन ये पर्याप्त नहीं होने पर, चोर भी एक बार तो हाथ से निकल  जाता है, और अधिकारी अथवा कर्मी को नुकसान भी पहुंचा देता है।

क्या कहते हैं एक्साइज मोबाइल विंग के डायरेक्टर
राच्य आबकारी विभाग में पासर से निपटने अथवा टेक्स चोरी करते वाहनों को पकडऩे बनाए गए मोबाइल विंग के डायरेक्टर अमरीक सिंह बताते हैं कि उनके पास भी इंडियन रिर्जव पुलिस की दो बटालियन हैं और उनके पास आई सूचना के महत्व के अनुसार ही वे भी मैन पावर व अन्य साधन लेकर ही चलते हैं। इन लोगों को दबोचने के साथ ही एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। विभाग का लक्ष्य सौ फीसद अवैध आवाजाही बंद करवाना है। इसमें काफी हो भी गई है। शेष लोगों के साथ भी सख्ती से पेश आया जाएगा।

बाक्स
शराब ठेकेदार की मदद ली तो खुद भी गुनहगार

दिलचस्प है कि आबकारी विभाग पर अक्सर शराब के ठेकेदारों के साथ सूचना का आदान प्रदान करने और ठेकेदारों के बंदों व वाहनों का इस्तेमाल करने के आरोप सामान्य व स्थायी रूप से लगने वाले आरोपों में से हैं। दोनों पक्षों के हित एक दूसरे से जुड़े होते हैं। ऐसे में शराब ठेकेदारों की 'मददÓ लेते ही विभाग भी गुनाहगार हो कटघरे में खड़ा हो जाता है। होता भी कुछ ऐसा है कि पावर आते ही निजी व्यक्ति सरकारी हदें तोड़ देता है।

Wednesday, 2 May 2012

पांचवां हिस्सा होगी 'सरकारी' बिजली, शेष प्राइवेट, pvt. sector will dominate power gen. in Punjab


-निजी क्षेत्र में लग रहे हैं प्लांट, बिजली दरों पर पार पाना नहीं होगा संभव
-वर्तमान में बिजली उत्पादन का सरकारी हिस्सा 52 फीसद
-इंजीनियरों ने मांगा 1320 मेगावाट का मुकेरियां प्लांट
भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश में हरित क्रांति आने के बाद के दशकों को 'बिजली की कमीÓ के नाम से जाना गया है जबकि हाल ही की सरकारों की बिजली नीति के चलते आने वाले दशकों में 'बिजली की मंहगाईÓ पसीना निकालने जा रही है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में सिर्फ और सिर्फ बढ़ रहे निजी क्षेत्र के हिस्से के चलते बिजली उत्पादन में 'सरकारीÓ योगदान मात्र पांचवां हिस्सा ही रह जाएगा।
बिजली उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के इंजीनियरों ने ऊर्जा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से 1320 मेगावाट के प्रस्तावित मुकेरियां प्लांट को खुद तैयार करने का प्लान भेजा है। इसमें धन के प्रबंध से लेकर कमीशन तक की योजना है।
 पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रधान इंजी. एचएस बेदी याद दिलाते हैं कि शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी सरकार के 2007 में सत्ता में आने के साथ पावर सरपल्स राच्य बनाने के नारे के साथ ही तीन अलग चैनलों  के माध्यम से थर्मल प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया। इसमें एक निजी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के रास्ते, दूसरा सार्वजनिक और तीसरा संयुक्त उपक्रम के माध्यम से लेकिन 1960 मेगावाट का तलवंडी साबो प्रोजेक्ट वेदांता को, 1400 मेगावाट का राजपुरा प्लांट एलएंडटी को और 540 मेगावाट का गोइंदवाल साहिब का प्रोजेक्ट पहले से ही एमओयू द्वारा जीवीके पावर कंपनी को दे दिया गया।
दिलचस्प है कि गीदड़बाहा क प्रस्तावित प्रोजेक्ट को राच्य की ओर से ही तैयार करने की सलाह हर विशेषज्ञ ने दी लेकिन इस प्रोजेक्ट को 2010 में नैशनल थर्मल पावर कारपोरेशन को दे दिया गया अब एनटीपीसी एक के बाद एक कारण बता पीछे हट रही है।
इसी क्रम में आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फैडरेशन के प्रधान इंजी. पदमजीत सिंह बताते हैं कि इन प्रोजेक्ट के कमीशन होते ही अपना उत्पादन पांचवां हिस्सा ही रह जाएगा और शेष प्राइवेट होगा। केवल निजी क्षेत्र में लग रहे प्लांट से बिजली दरों पर पार पाना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं होगा। वर्तमान में बिजली उत्पादन का सरकारी हिस्सा 52 फीसद से कम हो कर 20 फीसद के नीचे आ जाएगा। अगले दो तीन सालों में उपभोक्ता के लिए बिजली दरें बिजली से च्यादा महत्वपूर्ण होंगी।
इंजी. पदमजीत बताते हैं कि पीएसपीसीएल के प्लांट पुरानी 110, 210 और 250 मेगावाट तकनीकि के हैं जबकि निजी क्षेत्र में सुपर क्रिटिकल तकनीक से 660 और 700 मेगावाट क्षमता की इकाई लगती है।


सरकारी उत्पादन

अंतिम पन बिजली उत्पादन प्लांट
-रणजीत सागर बांध, वर्ष 2000 में क्षमता 600 मेगावाट

अंतिम थर्मल प्लांट
श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट लहरा मुहब्बत
पहला चरण-वर्ष 1998 में क्षमता 420 मेगावाट
दूसरा चरण-वर्ष 2008 में क्षमता 500 मेगावाट