Friday, 4 May 2012

पासर पर पार पाना, एक्साइज पर भारी, . Passers running parallel excise department on boarder

-दो नंबरियों के साथ होती है च्यादा मैन पावर
-एक्साइज विभाग का मोबाइल विंग चलता है डेपूटेशन की पुलिस के सहारे
जागरण एक्सकलूसिव
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राच्य आबकारी विभाग के बराबर अपनी सरकार चलाने वाले 'पासरÓ पर पार पाना एक्साइज टीमों के लिए अब भारी पडऩे लगा है। एक ओर विभाग ने सख्ती की है तो दूसरी और पंजाब-हरियाणा और पंजाब-राजस्थान के बीच सामान से लदे ट्रकों को बिना टैक्स चुकाए अवैध रूप से पार करवाने वाले पासरों के हौंसले भी बढ़ गए हैं। इन पॉसरों पर पार पाना एक्साइज विभाग के लिए भारी पडऩे लगा है।
 दो नंबरियों के साथ ना केवल च्यादा मैन पावर होती है बल्कि उनके वाहन व अन्य साधन भी विभाग के कर्मियों से कहीं बेहतर है। सुरक्षा के नाम पर एक्साइज विभाग का मोबाइल विंग डेपूटेशन की पुलिस के सहारे पर है। जबकि राच्य में 37 बैरियर हैं इनमें से अमृतसर व लुधियाना के दो रेलवे स्टेशनों को छोड़ दें तो शेष सभी राच्य की सीमा पर ही है। दिलचस्प है कि सैंकड़ों किलोमीटर की सीमा पर बसे हर गांव में एस्कैप रूट बने हैं। हर बैरियर 40-50 किलोमीटर के दायरे में इनकी संख्या पांच से दस के बीच है।
विभाग के ही एक अधिकारी बताते हैं कि चोर तो मानता नहीं है कि उसने चोरी की है जबकि विभाग का काम होता है कि उसे पकड़ कर ले जाए ऐसे में शुरुआत बहस से होती है, मामला चूंकि अक्सर रात का होता है ऐसे में अपराधी वार कर जाने में कामयाब भी हो जाते हैं। विभाग की टीम के साथ पुलिस  से डेपूटेशन पर आए एक दो लोग सुरक्षा के लिहाज से होते हैं, लेकिन ये पर्याप्त नहीं होने पर, चोर भी एक बार तो हाथ से निकल  जाता है, और अधिकारी अथवा कर्मी को नुकसान भी पहुंचा देता है।

क्या कहते हैं एक्साइज मोबाइल विंग के डायरेक्टर
राच्य आबकारी विभाग में पासर से निपटने अथवा टेक्स चोरी करते वाहनों को पकडऩे बनाए गए मोबाइल विंग के डायरेक्टर अमरीक सिंह बताते हैं कि उनके पास भी इंडियन रिर्जव पुलिस की दो बटालियन हैं और उनके पास आई सूचना के महत्व के अनुसार ही वे भी मैन पावर व अन्य साधन लेकर ही चलते हैं। इन लोगों को दबोचने के साथ ही एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। विभाग का लक्ष्य सौ फीसद अवैध आवाजाही बंद करवाना है। इसमें काफी हो भी गई है। शेष लोगों के साथ भी सख्ती से पेश आया जाएगा।

बाक्स
शराब ठेकेदार की मदद ली तो खुद भी गुनहगार

दिलचस्प है कि आबकारी विभाग पर अक्सर शराब के ठेकेदारों के साथ सूचना का आदान प्रदान करने और ठेकेदारों के बंदों व वाहनों का इस्तेमाल करने के आरोप सामान्य व स्थायी रूप से लगने वाले आरोपों में से हैं। दोनों पक्षों के हित एक दूसरे से जुड़े होते हैं। ऐसे में शराब ठेकेदारों की 'मददÓ लेते ही विभाग भी गुनाहगार हो कटघरे में खड़ा हो जाता है। होता भी कुछ ऐसा है कि पावर आते ही निजी व्यक्ति सरकारी हदें तोड़ देता है।

No comments:

Post a Comment