Friday, 25 February 2011

उम्मीद; शगुन योजना को 'अच्छे शगुन' का इंतजार

 चुनावी वर्ष में राशि बढ़ने के प्रस्ताव पर नहीं लगी मुहर 
 मई, 2009 से मिलना है दलित की बेटी को शगुन, कुछ और जातियां भी जोड़ी

भूपेश चट्ठा, पटियाला

साल में विवाह के दो बड़े सीजन और बीच बीच में आने वाले कुछ अच्छे महूर्त अपने क्रम से आ रहे है और बिना किसी जाति, धर्म के द्वेष के विवाह भी भरपूर हो रहे है लेकिन राज्य सरकार की ओर से शगुन योजना के तहत दी जाने वाली राशि को आज भी 'अच्छे शगुन' का इंतजार है।

दिलचस्प है कि राज्य में पिछली तीन सरकारों के चुनावी वर्ष के कार्यकाल का इतिहास गवाह है कि इस अंतिम वर्ष में किसी का शगुन बकाया रहना तो दूर अपितु शगुन राशि भी बढऩे की घोषणाएं भी होती रही है। शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी सरकार के पिछले कार्यकाल में सरकार ने योजना 51 सौ रूपये के साथ शुरू की तो कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इसे 61 सौ रूपये कर दिया और पिछले विधान सभा चुनावों से ठीक पहले राशि को बढ़ा कर 15 हजार रूपये कर दिया गया। अब राज्य के सामाजिक सुरक्षा विभाग के तहत आते अनुसूचित जाती पिछड़ी श्रेणी विभाग की ओर से शगुन राशि बढऩे का प्रस्ताव तैयार तो कर लिया गया पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर इस पर मुहर नहीं लगी है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि शगुन योजना के तहत राशि को बढ़ा कर 21 हजार किए जाने की मांग लगातार आ रही है, जिसके चलते निदेशालय की ओर दसे मुख्यमंत्री के ध्यान में बात लाई गई उन्होने इस पर इंकार तो नहीं किया पर हामी भी नहीं भरी है।

वहीं विभाग की निदेशिका इंदू मिश्रा अपने कार्यकारी निदेशक से बात करवा बताती है कि धन का अभाव आगे आ रहा है। यही सबसे बड़ी समस्या है। याद रहे कि मई 2009 से शगुन योजना के तहत दी जाने वाली राशि नहीं मिली है। दलित की बेटी को विवाह शगुन के रूप में दिए जाने वाले 15 हजार रूपये तो अभी आने है पर सरकार ने पिछड़ी श्रेणी की कुछ और जातियां भी इसमें जोडऩे की घोषणा कर दी है।

दूसरी ओर लोकतंत्र में चुनावी राजनीति पर निगाह रखने वाले कहते है कि अकेले पटियाला जिले में 45 सौ दलितों की बेटियां शगुन का इंतजार कर रही है। और सधारण गणित अनुसार सीधे प्रभावित होने वाले मायका और ससुराल पक्ष के परिवार मिला लें तो यह आंकड़ा दोगुना हो जाता है। ऐसे हर घर की दो पीढिय़ों में मतदाताओं की संख्या आठ-दस से कम नहीं है। ऐसे में एक लाख के करीब पहुंच चुके और लगातार बढ़ रहे वोट बैंक से कोई भी राजनीतिक दल 'पंगा' लेने की हिमाकत नहीं कर सकता। शगुन मिलेगा भी और आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इसके बढऩे की घोषणा होने की भी पूरी संभावना है पर 'अच्छे शगुन' का इंतजार है। संभावित रूप से बढऩे वाली राशि और बकाया अर्जियों का भुगतान करने में होने वाला एक सौ करोड़ रूपये का कुल खर्च बड़ी रकम नहीं है।

Thursday, 24 February 2011

मित्तरां नूं शौंक हथियारां दा..

भूपेश चट्ठा, पटियाला
पेशे से चिक्तिसा विशेषज्ञ व राष्ट्रीय स्तर पर कम्युनिटी मेडीसन के क्षेत्र में अच्छी खासी पहचान और अपने काम के प्रति लगन ऐसी कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के सबसे प्रतिष्ठित 'धनवंतरी पुरस्कार' से सम्मानित हुए। इन उपलब्धियों के साथ ही पुश्तैनी बिस्वेदार-जागीरदार परिवार की पृष्ठभूमि के चलते डा. एएस सेखों को 'एंटीक्स' से कुछ ऐसी मोहब्बत हुई कि वे इन्हें संजोने के इश्क में गिरफ्तार होकर रह गए।

पिछले 30 सालों में पंजाब के विभिन्न मेडीकल कालेजों में अध्यापक से प्रिंसिपल और बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में रजिस्ट्रार की भूमिका निभाने के बाद आज वे ज्ञान सागर मेडीकल कालेज में डीन के रूप में कार्यरत हैं। जब भी उन्हें पंजाबी परंपरा से जुड़ी कलाकृति दिखाई देती है तो उनका दिल उसे पाने के लिए मचलने लगता है। डा. सेखों इसे स्वीकार भी करते हैं कि काफी लंबे अर्से से इस लगाव के चलते कुछ हद तक उनमें भी एक अच्छे संग्रहकत्र्ता के गुण विकसित हो गए हैं। ऐसे में अगर कोई अच्छी चीज मिले तो कीमत चुकाने में भी एतराज नहीं होता।

डा. सेखों ने उनके पिता व तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस स. सिआसत सिंह को 1938 में वायस राय ऑफ इंडिया लार्ड लिंलिथगो से मिली छड़ी आज भी संभाल कर रखी है। यही नहीं, पड़दादा स. चरहट सिंह की दो शताब्दी पुरानी तलवार भी उन्होंने हिफाजत के साथ रखी हुई है। इसके दस्तावेजी प्रमाण के रूप में उनके पास 1816 की तस्वीर की नकल भी है, जिसे इंग्लैंड के विक्टोरिया अलबर्ट म्यूजियम लंदन में 'जिमींदार ऑफ पंजाब' के रूप में लगाया गया है। डा. सेखों के पड़दादा के सेकेंड लांसर के रूप में कंधे पर सुशोभित होने वाले बैच आज घर की दीवार पर विशेष रूप से चमकते हैं।

पटियाला रियासत के संस्थापक बाबा आला सिंह के करीबी रहे उनके पूर्वजों ने अमलोह के निकट कौलगढ़ का निर्माण किया था। आज डा. सेखों का आफिसर कालोनी का घर इसी नाम से लगभग वही सामंतशाही पहचान लिए हुए है। दीवारों पर शिकार खेलने वाले हथियार सजे हैं तो डाइनिंग टेबल की क्रॉकरी से लेकर, शैल्फ, अलमारी हर तरफ एंटीक्स बिछाए हुए हैं।

डा. सेखों बताते हैं कि पंजाबी परंपरा से जुड़ी कलाकृतियां संजोने में वे कहीं भी जा पहुंचते हैं, लेकिन लंदन के नॉटिंघम गेट के निकट पोर्टबेलो स्ट्रीट उनकी पसंदीदा जगह है।

Wednesday, 23 February 2011

...पर अभी और सड़ेगा अनाज

पिछले साल 94 लाख टन था इस साल एक अप्रैल को 87.4 टन होगा

-80 लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ानी थी बढ़ी 4.97 लाख

-दोबारा नई नीति के तहत टेंडर आएंगे: एफसीआई

भूपेश चट्ठा, पटियाला

वर्ष 2008-09 का गेहूं पंजाब में पड़ा है, 2009-10 के गेहूं के साथ चावल और धान भी अभी तक यहीं है, और एक महीने बाद करीब 124 लाख टन गेहूं की फसल आ जानी है, लेकिन दिलचस्प है कि देश भर में जहां मंहगाई का कुचक्र चल रहा है वहीं पंजाब में अनाज को सडऩे से रोकने के उपाय करने की दिशा में रेंगने की गति से 'उपलब्धीÓ हासिल की गई है। ऐसे में आम आदमी के नाम खरीदा गया अनाज अभी और सड़ेगा और करदाता इसका भुगतान करेगा।

फूड कारपोरेशन आफ इंडिया और पंजाब के खाद्य एंव आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पिछले साल किए एक संयुक्त अध्ययन में पाया कि राज्य में 80 लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ाने जरूरत है। हालांकि राज्य में 106 लाख टन कवर्ड स्टोरेज क्षमता है तो करीब 90 लाख टन खुले आसमान में भंडार करने की व्यवस्था है। याद रहे कि पिछले साल टेंडर प्रक्रिया शुरू होते ही पंजाब को 71 लाख टन भंडारण करने को कह दिया, यह हिस्सा एक बार फिर कम कर 50 लाख टन कर दिया गया। पर अब 63 स्थानों पर होने वाला नया भंडारण 14 स्थानों पर होगा वो भी मात्र 4.97 लाख टन।

वहीं एफसीआई के डीजीएम असीम छाबड़ा ने 'दैनिक जागरणÓ को बताया कि पंजाब में पिछले साल एक अप्रैल को गेहूं व धान का भंडारण 94 लाख था और इस साल ये कुछ कम हो कर 87.5 लाख टन रहेगा। राज्य से हर महीने 17 लाख टन अनाज देश के अन्य 16 राज्यों को भेजा जा रहा है। पंजाब में भंडारण क्षमता ना बढ़ाने के सवाल पर वे कहते है कि केंद्र की नीति के तहत पांच रूपये प्रति टन से अधिक पर अलाट नहीं किया जा सकता। अब दोबारा 33 लाख टन के लिए दस साल की अवधि के टेंडर निकालने की प्रक्रिया चलाई जाएगी। प्रदेश में 13 लाख टन क्षमता बढ़ी है।

राज्य में आए ज्यादातर टेंडर 6.10 रूपये की दर से थे। इस दर पर क्षमता 40 लाख टन और बढ़ जाती, राज्य की ओर से ऐसी मांग भी रखी गई पर केंद्रीय नीति ने इसकी इजाजत नहीं दी।

स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के अलावा उपाय

राज्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डीनेशन कमेटी कहती है कि मामला एक राच्य या एक एजेंसी का नहीं है पूरे देश का है ऐसे में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। स्टोरेज के लिए गांव में ही किसान व सरपंच को इंतजाम करने के अलावा आढ़ती की सेवाएं ली जा सकती है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मासिक आधार पर तय हो जाए जिससे बिना कोई खर्च किए कालाबाजारी और जमाखोरी दोनों रूकेंगे भी और फायदा किसान को भी ले सकता है। बीपीएल और एपीएल परिवारों के लिए पहले हम गेहूं खरीद कर गोदाम में भेजते हैं फिर वहां से निकाल कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भेजा जाता है जबकि यह कार्य सीधा भी किया जा सकता है।

2007-08 में 2.90 लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोड़ी
सरकार की एक नीति के तहत 2007-08 में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने पंचायती जमीन पर बनी दो लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोडऩे के आदेश जारी कर दिए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि छहरटा में तो अगले ही साल 40 हजार टन क्षमता की प्लींथें फिर उसी स्थान पर बना भूल सुधार कर लिया गया। यही उपाय अब फिर किए जा रहे है, सूत्र बताते है कि प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

Friday, 18 February 2011

नशे के खिलाफ चलाई सीधी कार्रवाई

भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब के पावर कोरीडोर में पुलिस को लेकर एक जुमला चला आ रहा है कि यहां ऐसा कोई थाना नहीं है जिसके एसएचओ को यह ना पता हो कि उसके इलाके में कौन सा अपराध हो रहा है और कौन सा नशा कहां और कौन बेच रहा है? ठीक ऐसे ही हालात सेहत विभाग में हैं। लेकिन नशा भी बिकता रहता है और लोग पकड़े भी जाते हैं। इन सबसे हट शुक्रवार को यूथ कांग्रेस के कार्यकत्र्ताओं ने सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के राजनीतिक सलाहकार राजेश अत्री के नेतृत्व में दवाओं की होलसेल मार्केट में सीधी कार्रवाई कर दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लड़कों का एक हजूम सुबह करीब दस बजे पॉल मेडिकल हॉल खुलने के साथ ही 'छापा' मारा और और दुकान में घुस कर खुद ही नशीली दवाएं पकड़ ली, दुकान के बाहर धरना-नारेबाजी के अलावा पुलिस को भी बुलवा लिया। मामले की नजाकत को समझते हुए पुलिस ने भी दुकान के मालिक को एक तरह से भीड़ से निकाल अपने साथ ले जाने में ही भलाई समझी। मौके पर ही सेहत विभाग को संदेश भेज कर बुलवाया गया और औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी।
इसी बीच राजेश अत्री, पंजाब स्टूडेंट्स फेडरेशन के संरक्षक गुरउपकार सिंह गोलू विर्क यूथ कांग्रेस के ब्लाक प्रधान विक्रमजीत सिंह हनी वड़ैच और यंग आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के खालसा कालेज प्रधान अमन सैफदीपुर ने बताया कि उक्त दुकानदार को पहले भी चेतावनी दी गई पर वो नहीं माना। ऐसे में कार्रवाई करनी पड़ी। वे कहते हैं कि शहर में ऐसी करीब 20 दुकानों की खबर उन्हें है। अगर नशा बेचना बंद न किया गया तो आगे भी सीधी कार्रवाई करने से गुरेज नहीं किया जाएगा।
दिलचस्प है कि जनता की इस सीधी कार्रवाई के बाद होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन ने भी पल्ला झाड़ लिया है। एसोसिएशन के महासचिव प्रदीप कुमार कोहली का कहना है कि उनके सभी सदस्य युवा वर्ग को ड्रग की लत के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास करते हैं। सभी दुकानें ड्रग अथारिटी के दिशा निर्देशों के अनुसार ही चल रही हैं। साथ ही ऐसे किसी निंदनीय काम में वे किसी दुकानदार के साथ नहीं हैं। और ना ही कोई नशा बेचने वाला उनका सदस्य ही हो सकता है।
वहीं, कोतवाली थाना इंचार्ज हंसराज बताते हैं कि उन्होंने मौके पर ही ड्रग इंस्पेक्टर के माध्यम से पॉल मेडीकल हॉल के मालिक का चालान कर दिया है और अब सेहत विभाग अगली कार्रवाई कोर्ट में करेगा।
सिविल सर्जन डा. जतिंदर कौर ने बताया कि डेढ़ लाख रुपये की नशीली दवाएं सूचना के आधार पर पुलिस को साथ ले सील कर दी गई हैं, यह कार्रवाई ड्रग इंस्पेक्टर जसबीर सिंह ने की है वहीं जसबीर सिंह कहते हैं कि पार्वन स्पॉक, प्राक्सीवन, स्पॉसमो प्राक्सीवन कैप्सूल जैसी प्रतिबंधित दवाएं पॉल मेडिकल से पकड़ी गई हैं, यह इस दुकानदार के खिलाफ दूसरा मामला है पहले भी यहां पर दुकान सील की गई थी।

नशीली दवाएं जब्त
संवाददाता, पटियाला
सेहत विभाग के ड्रग विभाग ने शुक्रवार को करीब दो लाख रुपये की नशीली दवाएं जब्त कीं। सिविल सर्जन डा. जतिंदर कौर के दिशा निर्देश के चलते ड्रग इंस्पेक्टर जसबीर सिंह ने बगीची हेत राम क्षेत्र में स्थित विनय मार्केटिंग कंपनी पर छापा मारा जिस दौरान करीब दो लाख रुपये की नशीली दवाएं जब्त की गईं। डा. सिंह ने बताया कि दवाओं को सील कर दिया गया है। अब सीजेएम कोर्ट में इन दवाओं की बिक्री करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए अपील की जाएगी। साथ ही विभाग के उच्चाधिकारियों को इस दुकान का लाइसेंस रद्द करने के लिए लिखा जाएगा। दूसरी ओर सिविल सर्जन डा. जतिंदर कौर ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।



Wednesday, 16 February 2011

जो इंसान ना कर सका लंगूर ने सस्ते में निपटाया

बंदरों के स्कूल जाने में हुई एक साल की देरी

-पटियाला के मोती बाग बीड़ में तहजीब सिखाने खुलना है, एक करोड़ का पुनर्वासन केंद्र

- यहीं पर हुआ करती थी बदनाम, बदमाश व शराबी बंदरों की जेल

-प्रदेश में आबादी 65 हजार के पार, जिले के छह जंगलों के आस पास दस हजार से ज्यादा

भूपेश चट्ठा पटियाला

बंदरों के लिए अपनी तरह का देश का पहला स्कूल बनने में एक साल की देरी हो गई है और इसमें तहजीब सीखने रखे जाने वाले बंदरों का एडमिशन एक साल और नहीं हो सकेगा। कारण बीते साल इन्हीं दिनों के एडमिशन सीजन में पंजाब के वन्य जीव जंतु विभाग की ओर से भेजे गए इस महत्कांक्षी प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार की मुहर नहीं लग पाई है। हालांकि बंदरों के उत्पात से पटियाला के एक क्षेत्र विशेष की जनता को राहत जरूर मिल गई है। दिलचस्प है कि जो काम वन विभाग के दर्जनों कर्मी नहीं कर पाए वो दो लंगूरों ने ना केवल कर दिया अपितु सस्ते में भी निपटा दिया।

डकाला रोड पर हमेशा खड़ी रहने वाली बदरों की बटालियनें अब गायब हो गई है। इसी सड़क पर केले, चने और गुड़ बचने का काम करने वाले बताते है कि एक निजी स्कूल ने चंडीगढ़ से लंगूरों के ठेकेदार मेंहदी और असगर को सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक बंदरों से निजात दिलाने का ठेका पांच हजार में दिया है और यह सात महीनों का कांट्रेक्ट है। प्रत्यक्षदर्शी बताते है कि शुरू में तो चौकस लंगूर अपने मालिक के साथ एक किनारे से दूसरे किनारे तक 'पैट्रोलिंगÓ किया करते थे पर एक ही सप्ताह के भीतर इतना दबदबा तो कायम ही कर लिया है कि अब उनके गले में घुंघरू बांध कर बंद दूकानों के बाहर बांध दिया है और सारी सड़क पर एक भी बंदर दिखाई नहीं दे रहा।

सड़क पर दुर्घटनाओं में कितनी कमी आई यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा पर राहत गुड़-चना बेचने वालों क अलावा सभी को है।

उधार जिला वन अधिकारी एसके सागर से जब बंदरों की समस्या इंसानों से हल ना होने की बात की गई तो वे कहते है कि विभाग की इन्हें तहजीब सिखा पाना तो किसी के बस की बात नहीं है अलबत्ता पुर्नवासन केंद्र का प्रोजेक्ट भेजा गया है जिसे मंजूरी का इंतजार है। रही बात लंगूर की सो ये बंदर के 'बड़े भाईÓ है और बड़ा भाई कई बार किसी चीज को ज्यादा बेहतर ढ़ंग से 'समझाÓ देता है।

याद रहे कि सेंट्रल जू अथारिटी ने पटियाला के डकाला रोड़ स्थित रियासत काल की शिकारगाह मोती बाग बीड़ में करीब एक सौ बंदरों के लिए वस्तुत: बंदरों के तौर तरीके सिखाने पुनर्वासन केंद्र खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रोजेक्ट की शुरूआत 17-18 बंदरों के साथ की जानी है। जहां विशेषज्ञ ट्रेनर से लेकर वेटरनरी डाक्टर तक रखे जाने है। जो इन बंदरों को बंदरों की जीवन शैली का पाठ पढ़ा कर पुन: जंगलों का रास्ता दिखाएंगे।

वैज्ञानिक तरीके से सभी तरह की सुविधाओं के साथ इन्हें पुन: इनके सामाज में भेजने लायक बनाया जाएगा, जिससे इन्हें देख कर अन्य बंदर भी कम आतंकी हों और वास्तव में किसी जंगल के मूल बंदर के ओरिजनल रूप में व्यवहार कर सकें। यह बंदरों के लिए एक तरह का अस्थाई घर होगा।



सेंट्रल जू अथारिटी ने हालांकि मोती बाग बीड़ के डियर पार्क को मिनी जू का दर्जा दे दिया है, यहां के लिए सभी तरह की योजनाएं कागजों में सिमटी है। अधिकारी कहते हैं कि पैंथर कहां रखा जाएगा और अजगर कहां होगा ? जैसे सात आठ करोड़ रूपये के प्लान हैं। जिन्हें फाइलों से निकाल मूलरूप दिया जाना है।



जंगल से बाहर निकल मनुष्य की संगत में आने के बाद बंदरों का व्यवहार खासा बदल जाता है, टेलीविजन के एंटीना पकड़ हिलाने से लेकर इंसान पर हमला कर जख्मी करना, स्कूल बैग व टिफन की छीना छपटी करनी, घरों में घुस कर कपड़े फाड़ आतंक फैलाना इनकी आदतों में शुमार हो जाता है। पटियाला के इसी क्षेत्र में ही कभी बदनाम, बदमाश व शराबी बंदरों की जेल हुआ करती थी

। वन विभाग का ही एक स्र्वेक्षण बताता है कि प्रदेश में इनकी आबादी 65 हजार के पार है और जिले के छह जंगलों के आस पास दस हजार से ज्यादा बंदर रह रहे है।

Monday, 14 February 2011

पटियाला पैग पोस्टर में हंगामा फेसबुक पर

'हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो...
-किसी ने सरकार पर गुस्सा निकाला तो, किसी को सिस्टम ही खराब लगा
-कांगे्रस अकालियों को छोड़ निजाम बदलने की सलाह भी दी
-शराब पर बने पंजाबी गानों पर प्रतिबंध से शुरूआत की मांग भी उठी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
आईएस जोहर की लोकप्रिय पैरोडी '...है ये अंगूर की बेटी...होती जो बेटा तो क्या गजब ढ़ाहतीÓ शराब से मचने वाले उत्पात की कहानी दशकों पहले ही साफ कर चुकी है और अनुमान भी लगाती है कि थोड़ा सा बदलाव क्या गजब ढ़ाह सकता है। दुनिया के मानचित्र पर अपने बड़े साइज के पैग के लिए मशहूर पटियाला के बस स्टैंड परिसर में लगा एक पोस्टर चंद घंटों में ही सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर हंगामा मचाए हुए है।
हर तरफ से टिप्पणियां आ रही है। शिलांग से अजय सिंहा लिखते है 'सरकार और स्थानीय सरकार क्या कर रही है...ये तो प्रतिबंधित है।
Ó इस पर संगरूर के वकील कमल आनंद लिखते है 'स्थानीय सरकार विज्ञापनउ दाताओं से टैक्स और रिश्वत लेने में व्यस्त हैÓ पैप्सू अकाली दल के पहले प्रधान और सुनाम व संगरूर से पूर्व विधायक के पौत्र जगमान समरा एसजीपीसी पर के साथ लिखते है कि ' ये तो स्कूल जाने वाले बच्चों को दिखाने लगाया गया हैÓ ।
यहीं पर अमृतसर के छायाकार बिृज बेदी कहते है कि सरकार 'गुड गवर्नेसÓ की बात करती है। स्पेन से करमेंदर सिंह औलख की टिप्पणी आती है कि इंडिया में इस तरह की फोस्टर एड सीडी व कैसेट्स के रूप में हर ओर देखी जा सकती है।
अमृतसर का नाम इस बार रश्मि तलवार के साथ आता है पेशे से टीचर का कहना है कि 'लीकर की सेल से सेहत पर खर्च बढ़ेगाÓ इस प्रकार कांगे्रस अकालियों को छोड़ निजाम बदलने की सलाह भी दी गई है यहां तक की गुस्सा पंजाबी गानों पर भी निकला है, ऐसे गानों पर प्रतिबंध से शुरूआत करने की मांग भी उठी है। दिलचस्प है कि सत्ताधारी पार्टी के एक पूर्व विधायक के मीडिया सलाहकार ने जब फेसबुक पर अपनी ओर से लिखा की कुछ सरकारी विभागों ने ग्रीन बैल्ट व लैंड स्केप विकसित करने पर विज्ञापन करने की छूट देनेे दिलचस्पी जताने को कहा है। इस पर भी जब टिप्पणियां आने लगी तो उन्होंने अपनी उक्त बात हटा कर बस इतना भर लिख दिया कि हां मैंने भी वो देखा है।
इस संबंध में मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते है कि यह पोस्टर बस स्टैंड के परिसर के भीतर है और यहां विज्ञापन से आय लेना पैप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन का काम है और यह भी उन्हीं ने तय करना है कि क्या छपे? क्या ना छपे? याद रहे कि ऐसे फोस्टर विज्ञापनों पर तकनीकि रूप से किया कुछ भी नहीं जा सकता लेकिन जागरूकता कि गति इतनी है कि लगभग चंद मिनटों के बाद कोई ना कोई अपने विचार जरूर दे रहा है।

Friday, 11 February 2011

गर्मी होगी दोहरी पर लगेगी थोड़ी!

भूपेश चट्ठा, पटियाला पंजाब में इस साल दोहरी गर्मी तो होगी लेकिन लोगों का पसीना शायद कम बहे। चुनावी वर्ष में आ रहे गर्मी के सीजन में लोगों को ठंडा रखने का इंतजाम राज्य की अकाली दल-गठबंधन सरकार करने जा रही है। सियासी और मौसम की गर्मी में फील गुड कराने की ऐसे तैयारी हो रही है कि लोगों को पावर कट कम झेलने पड़ें। ऐसा इसलिए नहीं कि बिजली उत्पादन बहुत बढ़ने जा रहा है, बल्कि दूसरे राज्यों और निजी कंपनियों से बिजली खरीद कर लोगों को आराम दिया जाएगा

चुनावी साल: अप्रैल से होगी बिजली खरीद
-पावरकाम के टेंडर पर दस निजी कंपनियों ने दिखाई दिलचस्पी
-दो महीने पहले शुरू हो एक महीने देर तक चलेगा बिजली खरीद का सिलसिला
विधान सभा चुनावों के अंतिम धान के सीजन और गर्मियों के मौसम में सरकार कम से कम बिजली के मामले पर विपक्ष को कोई मुद्दा नहीं देना चाहती। ऐसे में राज्य की जनता को गर्मियों में विकास का फील गुड करवाने इस साल अप्रैल से ही पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने बिजली खरीदने के उपाय करने शुरू कर दिए है।
राज्य में बिजली खरीद के किए गए दीर्घकालीन समझौतों, केंद्रीय पूल से ली जाने वाली बिजली, अन्य राज्यों से बैंकिंग के माध्यम और पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन से ली जाने वाली बिजली के अलावा ये बिजली निजी क्षेत्र की कंपनियों से शार्ट टर्म के लिए खरीदी जाएगी। पावरकाम ने इस संदर्भ में टेंडर भी जारी कर दिए है। दिलचस्प है कि सिर्फ एक सीजन के लिएकी जाने वाली ये खरीद धान की रोपाई से दो महीने पहले ही शुरू हो जाएगी और धान की फसल के सितंबर अंत में पक कर आने के बाद अक्टूबर अंत तक जारी रहेगी। याद रहे कि पंजाब में अप्रैल में गेहूं की कटाई के बाद ठीक ठाक से मौसम में बिजली कट लगा कर ही काम चलाया जाता रहा है और पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन की बिजली खरीद संबंधी दिशा निर्देशों को काफी हद तक ध्यान में रखा जाता रहा है।
वहीं पावरकाम के डायरेक्टर वितरण इंजी. अरूण वर्मा ने उक्त जानकारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दस कंपनियों ने उनके पास आवेदन किया है और अगले एक सप्ताह से दस दिनों के बीच तय हो जाएगा कि कितनी बिजली अप्रैल से अक्टूबर के बीच खरीदी जाएगी। बिजली की अनुमानित खरीद पर वे कहते है कि यह हर महीने के लिए अलग होगी। कंपनियों पर डायरेक्टर इंजी. अरुण वर्मा कहते है कि बिजली उत्पादन के निजी क्षेत्र में देश का लगभग हर बड़ा नाम शामिल है जिसके पास अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है।
इतना ही नहीं पावरकाम जनवरी अंत तक अन्य राज्यों विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तरांचल और राजस्थान को भी बैंकिंग के माध्यम से 102 लाख यूनिट बिजली जमा करवा रहा है। इसके अलावा ट्रेडर्स के माध्यम से 57 लाख यूनिट बिजली दे रहा था जबकि ये दोनों आंकड़े पिछले साल मिलकर भी 90 लाख यूनिट से ज्यादा नहीं रहे। पावरकॉम के अधिकारी कहते है कि पिछले साल अगर बिजली खरीद सात सौ लाख यूनिट के पार दस जून के बाद गई थी लेकिन ऐसा इस बार भी होगा पर अप्रैल से ही शुरू होने वाले कट इस बार संभवत: ना लगे या फिर आधे घंटे से ज्यादा ना हों।

Wednesday, 9 February 2011

पावरकॉम ने किया एक और एमओयू साइन

-लांकों के साथ राजपुरा प्लांट का समझौता पहले भी रद्द हो चुका है
-राष्ट्रीय बिजली नीति नहीं कहती एमओयू साइन करो और पीएसईआरसी भी एतराज जता चुकी है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने निजी क्षेत्र की एक और कंपनी के साथ बिजली उत्पादन करने का मैमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग पर हस्ताक्षर किया है। लांको इंफ्राटेक लिमिटेड हैदराबाद के साथ 1320 मेगावाट क्षमता का थर्मल प्लांट लगाने का समझौता किया गया है। कंपनी 660 मेगावाट क्षमता की कोयला आधारित दो इकाईयां लगाएगी। बठिंडा जिले के कोट शमीर में लगने वाला यह प्लांट करीब 1200 एकड़ जमीन पर लगेगा।
कंपनी के साथ एमओयू साइन करने के बाद पावरकॉम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने बताया कि प्लांट को सरहिंद नहर की बठिंडा ब्रांच की फूल डिस्ट्रीब्यूटरी से पानी मिलेगा और सुपर क्रिटीकल तकनीकि पर आधारित यह प्लांट कम प्रदूषण करने वाला होगा और इसकी चिमनियां 270 मीटर उंची होंगी। प्लांट के लिए कोयले का प्रबंध कंपनी खुद करेगी आर इसकी पहली यूनिट 40 महीनों में उत्पादन शुरू कर देगी जबकि दूसरी यूनिट 44 महीने में बिजली उत्पादन चालू कर देगी।
प्रदेश में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में साइन होने वाला यह छटा एमओयू है। आधिकारिक सूत्र बताते है कि राज्य सरकार ने करीब इतने ही स्थान और तलाशे हुए है जहां पर पानी व जमीन उपलब्ध है। ऐसे में बिना उत्पादन व खरीद शर्तें तय किए एमओयू साइन करने में ना तो किसी कंपनी को एतराज है और ना ही पावरकाम का ही कुछ खर्च हो रहा है।
याद रहे कि लांकों के साथ राजपुरा प्लांट का समझौता पहले भी रद्द हो चुका है। जहां पर सिर्फ एक ही कंपनी बोली में शामिल हुई थी और 3.38 रूपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद का समझौता हुआ, जिसे बाद में मोलभाव के बाद आठ पैसे कम कर दिया गया। लेकिन पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीश्न के कड़े रुख के बाद पुन: बोली हुई और एलएंडटी के खाते में प्लांट चला गया। पीएसईआरसी का कहना है कि राज्य को एमओयू साइन करने की बजाए खुली बोली की प्रक्रिया ही अपनानी चाहिए। राष्ट्रीय बिजली नीति भी यही कहती है कि एमओयू साइन ना करो और खुली बोली से निविदांए आंमत्रित करें।

Tuesday, 8 February 2011

अपणा पंजाब होवे.. पर न शराब होवे

अपणा पंजाब होवे पर दारू दी दुकान ना होवे
-71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-विभाग ने पूछा आखिर ऐतराज क्या है, हर्ज क्या है?

भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, घर दी शराब होवे, मूली नाल गंडा (प्याज) होवे, बाण वाला मंजा होवे..।
गुरूदास मान के इस लोकप्रिय हिट का पंजाब के गांवों विशेष रूप से मालवा क्षेत्र की पंचायतों ने नकारना शुरू कर दिया है। आबकारी नीति आने से पहले 71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव पारित कर दिया है कि उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाए और विभाग ने आज कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó
पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ शुरू कर दी है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है।
प्रदेश में पिछले साल ऐसी पंचायतों की संख्या 55 थी और अब बढ़ कर 71 हो गई है। सबसे अधिक जागरुकता लाने वालों में संगरूर जिला है जहां सेे 44 पंचायतों ने ऐसे आवेदन किए है। दिलचस्प है कि पिछले साल आबकारी विभाग ने कुछ पंचायतों का यह आवेदन विभिन्न तर्क दे कर रद्द कर दिया था।
संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है। संगरूर के कुछ एनजीओ ने लोगों को बताया तो इस दिशा में प्रगति हुई है, पिछले साल कि तुलना में इस बार संख्या भी बढ़ी है।
वहीं सकरोदी गांव के सरपंच हरिंदर सिंह कहते है कि अभी तो उनके पंच को आबकारी कमीश्नर ने 'देखते हैÓ का ही आश्वासन मिला है। हम से पूछा गया कि आप गांव का शराब का ठेका क्यों बंद करवाना चाहते हो। तुम्हारे गांव में तो अवैध शराब पकड़ी गई थी मामला भी दर्ज है, लेकिन हमने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ भी नही हुआ हम तो बस इस बीमारी को ही दूर रखना चाहते है।
उधर आबकारी कमीश्नर वैणु प्रसाद बताते है कि इस साल अभी तक उनके पास 71 आवेदन आए है और कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों से बुलवा कर बात की गई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वे मामला देख रहे है।

पंजाब में वर्ष 2009-10 में अंग्रेजी व देशी शराब की करीब 29 करोड़ बोतलें बिकीं। सरकार को शराब बिक्री से वर्ष 2007-08 में शराब से 1800 करोड़ रुपये, 2008-09 में 2000 करोड़ व वर्ष 2010 में 2500 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ। (स्रोत : विभागीय आंकड़े

अकाली रैली संगठन की शक्ति या बसों की गिनती

- हर हल्का इंचार्ज छह हजार रूपये प्रति बस की कुर्बानी देने को तैयार
-उपर से आदेश है तो नंबर बनाने अग्रिम पंक्ति में आने वाला दो चार लाख खर्च करने को तैयार
-अभी पोस्टर वार भी देखेंगे पटियाला के लोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दस फरवरी को शहर के पोलो मैदान में होने जा रही शिरोमणि अकाली दल की युवा ईकाई की रैली युवा नेताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन करने और संगठन की शक्ति से विपक्ष को अवगत करवाने से शुरू हुई पर अब ये संख्या बल दिखाने का काम हवाई वायदों में ज्यादा तबदील होता जा रहा है।
बसों की गिनती बढ़चढ़ कर दिखाई, बताई और रैली प्रबंधकों को लिखाई जा रही है। पार्टी के सूत्र बताते है कि अगर एक विधानसभा क्षेत्र का पार्टी इंचार्ज अपने क्षेत्र में आ कर चार सौ बसों की बात कर रहा है तो दोबारा पूछने पर तीन सौ का आंकड़ा पुष्टि के साथ बताता है और कहता है कि इसमें से दो-ढ़ाई सौ तो पूरी भरी होंगी। बसें कहां से आएंगी? इस पर बठिंडा से हिसार और बीकानेर तक का नाम ले लिया जाता है।
वहीं प्रदेश की राजनीति को चार दशक से करीब से देखते आ रहे ऐसे ही एक प्रबंधक बताते है कि एक व्यक्ति जमीन पर बैठने तीन फीट की जगह लेता है, सर्दी में यह कम तो गर्मी में दायरा बढ़ जाता है और कुर्सी पर घेरा और ज्यादा जगह लेता है। वे बताते है कि पंजाब में कोई भी पांच-सात हजार लोगों की रैली लाख बंदों की हो जाती है। इससे ज्यादा तो शिव कुमार बटालवी को ही लोगों ने सुना है। या धार्मिक दीवान हों तो हों। स्टेज कितने दायरे में है? डी कैसी है? पैसेज कितना छोड़ा गया है? इसके बाद ही वर्ग फीट तय कर देता है कि क्या हुआ।
दूसरी ओर यूथ अकाली दल के पूर्व प्रधान व वर्तमान मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते है कि ये एक साफ सुथरी प्रतिस्पर्धा है और साबित करती है कि हर तरफ उत्साह है, यह भी सही है कि हर कोई शक्ति प्रदर्शन की दौड़ में है पर रैली पार्टी की ही है। एक हल्का इंचार्ज की ओर से 300 बसें भर कर लाए जाने के सवाल पर मेयर कहते है कि सभी युवा नेताओं की ड्यूटियां लगी है किसी ने 35 बसें लाने की बात कही है तो कोई 40 बसें भर लाने की जिम्मेवारी लिखवा आया है। एक बस के शहर में खड़ी करने पर आखिर जगह की भी जरूरत होगी? इस पर मेयर कोहली कहते है कि पोलो मैदान के पास अमर आश्रम के पास खाली पार्किंग और निगम कार्यालय के निकट पीडब्ल्यूडी की जमीन की अनुमति ली गई है। इसी तरह सूलर रोड पर भी दो सौ के करीब बसें खड़ी की जा सकती है। अपने बारे में वे स्पष्ट करते है कि शहर में बसों की जरूरत तो है नहीं, उनकी डयूटी दो हजार बंदों की है, वो पूरी होगी।
दिलचस्प है कि पीआरटीसी के पास 1050 बसें है और इसमें किलोमीटर योजना वाली बसें भी शामिल है, शहर के बस स्टेंड में करीब 200 बसें खड़ी की जा सकती है। 32 गुणा आठ फीट की बस के लिए कम से कम चार सौ वर्ग फीट की जगह चाहिए।
सूत्र कहते है कि चुनावी वर्ष है टिकट किसे नहीं चाहिए? हर हल्का इंचार्ज छह हजार रूपये प्रति बस की कुर्बानी देने को तैयार है। उपर से आदेश है तो नंबर बनाने और अग्रिम पंक्ति में आने वाला सेकेंड लाइन नेता दो चार लाख खर्च करने को तैयार है। शहर के लोग अभी पोस्टर वार भी देखेंगे, कुछ नए पोस्टर लगेंगे, तो कुछ के फट भी सकते है और किसी के आगे बैनर लगा होगा तो किसी के उपर पोस्टर चस्पा होगा।

Friday, 4 February 2011

टोहरा युग के साथ, सिखों के पोप की सत्ता का अंत?



-भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा

-टोहरा काल की रबड़ी जला हुआ दूध रह गई

भूपेश चट्ठा, टोहरा पटियाला


आज से छह साल पहले जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के देहांत पर उत्तर भारत की हर सड़क टोहरा गांव की ओर ही जा रही थी। राज्य में कांग्रेस और केंद्र में संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सत्ता होने के बावजूद शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे स्व. जत्थेदार टोहरा को सिखों का पोप कह उन्हें पंथ रत्न का दर्जा दे दिया गया। गांव में केंसर अस्पताल से लेकर युनिवर्सिटी और स्टेडियम तक की घोषणाएं हो गई। इसके बाद टोहरा गांव में अकालियों कांग्रेसियों के इतने चक्कर लगे कि एक तरह से गांव को वेंटिकन सिटी का दर्जा प्राप्त हो गया पर आज पंथ रत्न की पत्नि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के पाठ पर साफ संदेश देने की कोशिश कर दी गई है कि एक युग का अंत हो गया है और सिखों के पोप की सत्ता का भी औपचारिक अंत हो गया है।

पंथ रत्न की बरसी पर हर बार शामिल होने वाले हरनेक सिंह कहते है कि पिछले सालों में हर बरस होने वाले कार्यक्रमों में संगत लगभग बीस फीसदी की दर से कम होती जा रही थी पर अब तो बिलकुल ही गायब है, सरकार है तो सरकारी अमला है, इंतजाम है पर देखो लंगर भी वापिस भेजा जा रहा है, दरियां पूरी बिछाई ही नहीं गई जबकि जगह सिंगोड़ दी गई है। फिर भी ये हाल है। भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा है या फिर उनके साथ आई एक रंग विशेष की खुफिया पगडिय़ां दिखाई दे रही है।

ऐसे ही भादसों में तैनात सरकारी कर्मी कहते है कि टोहरा काल की रबड़ी आज जला हुआ दूध रह गई है, सड़कें टूट रही है पैच वर्क की जरूरत है पर होगा नहीं यह तय है। पहले लोग अपनी मर्जी से यहां लगंर लगाने जद्दोजहद करते थे आज एसजीपीसी पर निर्भरता है।

दिलचस्प है कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के भोग पर एक बार फिर जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने और एक शानदार स्टडी सेंटर खोले जाने की घोषणा को उपहास की दृष्टि से देखा गया है, भोग पर ही दबी जुुबां से विधान सभा चुनावों में पंथ रत्न की गोद ली पुत्री को टिकट के लिए हो रही कवायद से ज्यादा जोड़ा गया। कहा गया कि बादल साहब बाकी घोषणाएं छोड़ ये कर दे तो सब शांत है। ना कोई मनप्रीत खेमे में अपने बंदे भेजेगा और ना ही कोई कांग्रेसियों के संपर्क में रहेगा।

Wednesday, 2 February 2011

टोहरा स्मारक जल्द बनाए राज्य सरकार: परनीत कौर

विदेश राज्य मंत्री पहुंची बीबी टोहरा के देहांत पर अफसोस करने

भूपेश चट्ठा, टोहरा, पटियाला

शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे पंथ रत्न गुरचरण सिंह टोहरा की स्मृति में घोषित किए गए स्मारक का निर्माण राज्य सरकार को जल्द करवाना चाहिए। ये विचार आज विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने टोहरा गांव में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में व्यक्त किए है।

स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा के देहांत पर अफसोस करने पहुंची परनीत कौर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बीबी टोहरा के लिए कई सुविधाओं की घोषणाएं की थी। इसमें पटियाला में एक घर को खाली भी रखा गया। 15 हजार रूपये मासिक पैंशन के अलावा कैबिनेट रैंक का दर्जा शामिल था। हालांकि अकाली होने का कारण बता कांग्रेस कार्यकाल में स्व. बीबी टोहरा ने उक्त सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया था। जबकि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के 36 महीने बाद पिछले साल अगस्त में बीबी टोहरा को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया है।

इससे पहले परनीत कौर ने स्व. जोगिंदर कौर टोहरा की बेटी कुलदीप कौर टोहरा से मिल कर अफसोस प्रकट किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री व पंथ रत्न के जंवाई हरमेल टोहरा और जिला परिषद सदस्य व नाती हरिंदरपाल सिंह टोहरा भी मौजूद रहे। याद रहे कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा का वृद्धा अवस्था की एक बीमारी के बाद 82 साल की उम्र में 26 जनवरी को देहांत हो गया था।

उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने हाल ही में बहादुर पुर गांव में जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने की घोषणा की है, हालांकि एसजीपीसी के दो पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर और प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर और वर्तमान प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ भी ऐसी ही घोषणाएं कर चुके है। लेकिन सिरे कोई भी नहीं चढ़ी। छह साल पहले बीबी जागीर कौर ने 2004 में मोहाली के गुरूद्वारा अंब साहिब में 'जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा इंस्टीटयूट आफ एडवांस सिख स्टडीजÓ बनाने की घोषणा की तो प्रो. बडूंगर ने पंथ रत्न की याद में चंडीगढ़ के सेक्टर 44 में आईएएस व आईपीएस ट्रेनिंग इंस्टीटयूट की घोषणा की। जबकि जत्थेदार मक्कड़ ने चपड़चिड़ी में एक शैक्षिक संस्थान की घोषणा कर रखी है। यह भी कागजों में ही है।

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी 10 नवंबर 2005 को ऐसा ही शिलान्यास किया लेकिन बात आज भी वहीं पर रुकी है जहां से शुरू हुई थी।

Tuesday, 1 February 2011

पावरकॉम में अधिकारी तलाशने लगे उचित स्थान?

भूपेश चट्ठा, पटियाला
सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान पंजाब राज्य बिजली बोर्ड का विघटन होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के गठन के बाद अब तक चलती शक्तियों के विभाजन की खींचतान संभवत: समाप्त हो गई है और करीब करीब हर कुर्सी के अधिकारों की सेटलमेंट होने के बाद कौन सी कुर्सी कहां रखी जाए यह तय होने लगा है। पावरकॉम के वरिष्ठ अधिकारियों जिनमें कुछ डायरेक्टर स्तर के भी हैं, ने मंगलवार को शक्ति विहार का दौरा किया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आज की सारी कसरत खाली कमरों की तलाश में की गई है। दिलचस्प है कि माल रोड के किनारे स्थित पावरकॉम मुख्यालय सत्ता का केंद्र है ऐसे में कोई भी डायरेक्टर स्तर का अधिकारी यहां से बाहर होना नहीं चाहेगा यदि होता भी है तो चंडीगढ़ से कम पर नहीं जाएगा ऐसे में पावरकॉम मुख्यालय में मौजूद कुछ सुपरीटेंडिंग इंजीनियर(एसई) अथवा इंजीनियर इन चीफ को प्रताप नगर के पास शेडों का रुख करवाया जा सकता है। याद रहे कि पावरकॉम का मुख्यालय तत्कालीन पेप्सू रियासत के हाईकोर्ट के विरासती भवन में है तो शेडों में मौजूद विभागों को पावरकॉम में ही काले पानी की संज्ञा दी जाती रही है।
उधर, पावरकॉम के प्रवक्ता का कहना है कि बोर्ड के समय में प्रबंधन के सदस्यों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी और अब कारपोरेट कल्चर लाने व कंपनियों में बंटने के बाद मुख्यालय में स्थान की कमी पाई जा रही है इसके उपाय किए जा रहे हैं। कौन कहां जाएगा? और कौन कहां रहेगा यह तो अभी निर्धारित नहीं किया जा रहा पर इतना तय है कि डायरेक्टर यहीं रहेंगे और स्थान प्रबंधन करने सिटिंग प्लान बनाया जा रहा है।

यूथ अकाली दल की रैली, प्रधान कोई नहीं

भूपेश चट्ठा, पटियाला
उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की विकास यात्राओं के बीच शिरोमणि अकाली दल की युवा इकाई द्वारा राज्य भर में अपनी उपस्थिति जताने के लिए शुरू की गई रैलियों के तहत पटियाला में युवा शिअद की रैली 10 फरवरी को होने जा रही है। दिलचस्प है कि पटियाला में सत्ताधारी दल की युवा इकाई की प्रधानगी करने वाला कोई नहीं है। हालांकि पार्टी के ही छात्र संगठन स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रधान का दावा है कि पटियाला की रैली प्रदेश भर में रिकार्ड कायम करेगी।
वहीं यूथ अकाली दल का जिला प्रधान न होने के सवाल पर एसओआई के प्रधान व यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना कहते हैं कि पार्टी ने यूथ इकाई भंग कर दी थी और जिले के पूर्व प्रधान जसबीर सिंह जस्सी का गांव अब मोहाली जिले में जा चुका है। ऐसे में यूथ इकाई का जिला प्रधान तो कोई नहीं है पर सभी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें मेयर अजीतपाल सिंह कोहली से लेकर हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा तक सभी शामिल है। एसओआई का भी पूरा समर्थन है। इसी संबंध में आज भी कार्यकर्ताओं की बैठक की गई है जिसमें सभी हलका इंचार्ज और मार्केट कमेटियों के चेयरमैन व अन्य जिले से संबंधित चेयरमैन शामिल हुए।
दो साल पहले इन्हीं दिनों में पोलो ग्राउंड में हुई एसओआई की रैली को इस रैली से जोड़ने के सवाल पर राजू खन्ना कहते है कि वह रैली ऐतिहासिक थी और लोक सभा चुनावों से पहले प्रदेश भर में युवा शक्ति किसके साथ का संदेश दे गई थी, इसी तरह प्रदेश कांग्रेस प्रधान के गृह नगर में होने वाली यह रैली अगले विधान सभा चुनावों की दिशा तय कर देगी।
रैली में यूथ अकाली दल के संरक्षक विक्रमजीत सिंह मजीठिया युवा वर्ग को संदेश तो देंगे ही, लेकिन युवा शक्ति को संगठित करने और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए की जा रही इस रैली से ही नई भर्ती भी की जाएगी और उन कार्यकत्र्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने पार्टी के लिए कार्य किया है।
अगले चुनावों में पार्टी युवा वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व देगी, इस सवाल पर गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना कहते है कि युवाओं का राज्य में प्रतिनिधित्व कर रहे विक्रमजीत सिंह मजीठिया ने 33 फीसदी टिकटों की अलाटमेंट युवाओं के बीच से करने की घोषणा कर रखी है यह सिरे चढ़ेगी और अगली विधान सभा 'थोड़ा और जवान' होगी। हालांकि पार्टी टिकट पाने वाले 'युवा' की उम्र सीमा कहां से शुरू होगी और कहां खत्म पर वे खामोश हो जाते है