-भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा
-टोहरा काल की रबड़ी जला हुआ दूध रह गई
भूपेश चट्ठा, टोहरा पटियाला
आज से छह साल पहले जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के देहांत पर उत्तर भारत की हर सड़क टोहरा गांव की ओर ही जा रही थी। राज्य में कांग्रेस और केंद्र में संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सत्ता होने के बावजूद शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे स्व. जत्थेदार टोहरा को सिखों का पोप कह उन्हें पंथ रत्न का दर्जा दे दिया गया। गांव में केंसर अस्पताल से लेकर युनिवर्सिटी और स्टेडियम तक की घोषणाएं हो गई। इसके बाद टोहरा गांव में अकालियों कांग्रेसियों के इतने चक्कर लगे कि एक तरह से गांव को वेंटिकन सिटी का दर्जा प्राप्त हो गया पर आज पंथ रत्न की पत्नि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के पाठ पर साफ संदेश देने की कोशिश कर दी गई है कि एक युग का अंत हो गया है और सिखों के पोप की सत्ता का भी औपचारिक अंत हो गया है।
पंथ रत्न की बरसी पर हर बार शामिल होने वाले हरनेक सिंह कहते है कि पिछले सालों में हर बरस होने वाले कार्यक्रमों में संगत लगभग बीस फीसदी की दर से कम होती जा रही थी पर अब तो बिलकुल ही गायब है, सरकार है तो सरकारी अमला है, इंतजाम है पर देखो लंगर भी वापिस भेजा जा रहा है, दरियां पूरी बिछाई ही नहीं गई जबकि जगह सिंगोड़ दी गई है। फिर भी ये हाल है। भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा है या फिर उनके साथ आई एक रंग विशेष की खुफिया पगडिय़ां दिखाई दे रही है।
ऐसे ही भादसों में तैनात सरकारी कर्मी कहते है कि टोहरा काल की रबड़ी आज जला हुआ दूध रह गई है, सड़कें टूट रही है पैच वर्क की जरूरत है पर होगा नहीं यह तय है। पहले लोग अपनी मर्जी से यहां लगंर लगाने जद्दोजहद करते थे आज एसजीपीसी पर निर्भरता है।
दिलचस्प है कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के भोग पर एक बार फिर जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने और एक शानदार स्टडी सेंटर खोले जाने की घोषणा को उपहास की दृष्टि से देखा गया है, भोग पर ही दबी जुुबां से विधान सभा चुनावों में पंथ रत्न की गोद ली पुत्री को टिकट के लिए हो रही कवायद से ज्यादा जोड़ा गया। कहा गया कि बादल साहब बाकी घोषणाएं छोड़ ये कर दे तो सब शांत है। ना कोई मनप्रीत खेमे में अपने बंदे भेजेगा और ना ही कोई कांग्रेसियों के संपर्क में रहेगा।
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