Wednesday, 23 February 2011

...पर अभी और सड़ेगा अनाज

पिछले साल 94 लाख टन था इस साल एक अप्रैल को 87.4 टन होगा

-80 लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ानी थी बढ़ी 4.97 लाख

-दोबारा नई नीति के तहत टेंडर आएंगे: एफसीआई

भूपेश चट्ठा, पटियाला

वर्ष 2008-09 का गेहूं पंजाब में पड़ा है, 2009-10 के गेहूं के साथ चावल और धान भी अभी तक यहीं है, और एक महीने बाद करीब 124 लाख टन गेहूं की फसल आ जानी है, लेकिन दिलचस्प है कि देश भर में जहां मंहगाई का कुचक्र चल रहा है वहीं पंजाब में अनाज को सडऩे से रोकने के उपाय करने की दिशा में रेंगने की गति से 'उपलब्धीÓ हासिल की गई है। ऐसे में आम आदमी के नाम खरीदा गया अनाज अभी और सड़ेगा और करदाता इसका भुगतान करेगा।

फूड कारपोरेशन आफ इंडिया और पंजाब के खाद्य एंव आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने पिछले साल किए एक संयुक्त अध्ययन में पाया कि राज्य में 80 लाख टन भंडारण क्षमता बढ़ाने जरूरत है। हालांकि राज्य में 106 लाख टन कवर्ड स्टोरेज क्षमता है तो करीब 90 लाख टन खुले आसमान में भंडार करने की व्यवस्था है। याद रहे कि पिछले साल टेंडर प्रक्रिया शुरू होते ही पंजाब को 71 लाख टन भंडारण करने को कह दिया, यह हिस्सा एक बार फिर कम कर 50 लाख टन कर दिया गया। पर अब 63 स्थानों पर होने वाला नया भंडारण 14 स्थानों पर होगा वो भी मात्र 4.97 लाख टन।

वहीं एफसीआई के डीजीएम असीम छाबड़ा ने 'दैनिक जागरणÓ को बताया कि पंजाब में पिछले साल एक अप्रैल को गेहूं व धान का भंडारण 94 लाख था और इस साल ये कुछ कम हो कर 87.5 लाख टन रहेगा। राज्य से हर महीने 17 लाख टन अनाज देश के अन्य 16 राज्यों को भेजा जा रहा है। पंजाब में भंडारण क्षमता ना बढ़ाने के सवाल पर वे कहते है कि केंद्र की नीति के तहत पांच रूपये प्रति टन से अधिक पर अलाट नहीं किया जा सकता। अब दोबारा 33 लाख टन के लिए दस साल की अवधि के टेंडर निकालने की प्रक्रिया चलाई जाएगी। प्रदेश में 13 लाख टन क्षमता बढ़ी है।

राज्य में आए ज्यादातर टेंडर 6.10 रूपये की दर से थे। इस दर पर क्षमता 40 लाख टन और बढ़ जाती, राज्य की ओर से ऐसी मांग भी रखी गई पर केंद्रीय नीति ने इसकी इजाजत नहीं दी।

स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के अलावा उपाय

राज्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डीनेशन कमेटी कहती है कि मामला एक राच्य या एक एजेंसी का नहीं है पूरे देश का है ऐसे में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। स्टोरेज के लिए गांव में ही किसान व सरपंच को इंतजाम करने के अलावा आढ़ती की सेवाएं ली जा सकती है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मासिक आधार पर तय हो जाए जिससे बिना कोई खर्च किए कालाबाजारी और जमाखोरी दोनों रूकेंगे भी और फायदा किसान को भी ले सकता है। बीपीएल और एपीएल परिवारों के लिए पहले हम गेहूं खरीद कर गोदाम में भेजते हैं फिर वहां से निकाल कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भेजा जाता है जबकि यह कार्य सीधा भी किया जा सकता है।

2007-08 में 2.90 लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोड़ी
सरकार की एक नीति के तहत 2007-08 में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने पंचायती जमीन पर बनी दो लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोडऩे के आदेश जारी कर दिए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि छहरटा में तो अगले ही साल 40 हजार टन क्षमता की प्लींथें फिर उसी स्थान पर बना भूल सुधार कर लिया गया। यही उपाय अब फिर किए जा रहे है, सूत्र बताते है कि प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

3 comments:

  1. Gurpreet Singh Nibber Hitting Bulls Eye !!
    15 hours ago · Like

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  2. Bindu Singh mere desh mahan.garibi aur gurbat ek taraf , abundance dusri taraf.
    7 hours ago · Unlike · 2 people

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  3. As per surveys carried by Food Corporation of India at the initial stage Punjab government required 80 lakh tonne of storage space. While a process started to build the storage space 80 lakh tonne of capacity was cut down to 50 lakh tonne by transferring storage space to other states - Haryana and Rajasthan. FCI may right in its decision but Punjab being agrarian state needs proper state storage facility for which the state is struggling for past 40 years since green revolution sets in. The story's focus "Grain would rot in open" I think gives true picture of storage scenario in Punjab.
    - Gurpreet Singh Nibber

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