भूपेश चट्ठा, पटियाला
सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान पंजाब राज्य बिजली बोर्ड का विघटन होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के गठन के बाद अब तक चलती शक्तियों के विभाजन की खींचतान संभवत: समाप्त हो गई है और करीब करीब हर कुर्सी के अधिकारों की सेटलमेंट होने के बाद कौन सी कुर्सी कहां रखी जाए यह तय होने लगा है। पावरकॉम के वरिष्ठ अधिकारियों जिनमें कुछ डायरेक्टर स्तर के भी हैं, ने मंगलवार को शक्ति विहार का दौरा किया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आज की सारी कसरत खाली कमरों की तलाश में की गई है। दिलचस्प है कि माल रोड के किनारे स्थित पावरकॉम मुख्यालय सत्ता का केंद्र है ऐसे में कोई भी डायरेक्टर स्तर का अधिकारी यहां से बाहर होना नहीं चाहेगा यदि होता भी है तो चंडीगढ़ से कम पर नहीं जाएगा ऐसे में पावरकॉम मुख्यालय में मौजूद कुछ सुपरीटेंडिंग इंजीनियर(एसई) अथवा इंजीनियर इन चीफ को प्रताप नगर के पास शेडों का रुख करवाया जा सकता है। याद रहे कि पावरकॉम का मुख्यालय तत्कालीन पेप्सू रियासत के हाईकोर्ट के विरासती भवन में है तो शेडों में मौजूद विभागों को पावरकॉम में ही काले पानी की संज्ञा दी जाती रही है।
उधर, पावरकॉम के प्रवक्ता का कहना है कि बोर्ड के समय में प्रबंधन के सदस्यों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी और अब कारपोरेट कल्चर लाने व कंपनियों में बंटने के बाद मुख्यालय में स्थान की कमी पाई जा रही है इसके उपाय किए जा रहे हैं। कौन कहां जाएगा? और कौन कहां रहेगा यह तो अभी निर्धारित नहीं किया जा रहा पर इतना तय है कि डायरेक्टर यहीं रहेंगे और स्थान प्रबंधन करने सिटिंग प्लान बनाया जा रहा है।
उधर, पावरकॉम के प्रवक्ता का कहना है कि बोर्ड के समय में प्रबंधन के सदस्यों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी और अब कारपोरेट कल्चर लाने व कंपनियों में बंटने के बाद मुख्यालय में स्थान की कमी पाई जा रही है इसके उपाय किए जा रहे हैं। कौन कहां जाएगा? और कौन कहां रहेगा यह तो अभी निर्धारित नहीं किया जा रहा पर इतना तय है कि डायरेक्टर यहीं रहेंगे और स्थान प्रबंधन करने सिटिंग प्लान बनाया जा रहा है।
No comments:
Post a Comment