Wednesday, 9 February 2011

पावरकॉम ने किया एक और एमओयू साइन

-लांकों के साथ राजपुरा प्लांट का समझौता पहले भी रद्द हो चुका है
-राष्ट्रीय बिजली नीति नहीं कहती एमओयू साइन करो और पीएसईआरसी भी एतराज जता चुकी है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने निजी क्षेत्र की एक और कंपनी के साथ बिजली उत्पादन करने का मैमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग पर हस्ताक्षर किया है। लांको इंफ्राटेक लिमिटेड हैदराबाद के साथ 1320 मेगावाट क्षमता का थर्मल प्लांट लगाने का समझौता किया गया है। कंपनी 660 मेगावाट क्षमता की कोयला आधारित दो इकाईयां लगाएगी। बठिंडा जिले के कोट शमीर में लगने वाला यह प्लांट करीब 1200 एकड़ जमीन पर लगेगा।
कंपनी के साथ एमओयू साइन करने के बाद पावरकॉम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने बताया कि प्लांट को सरहिंद नहर की बठिंडा ब्रांच की फूल डिस्ट्रीब्यूटरी से पानी मिलेगा और सुपर क्रिटीकल तकनीकि पर आधारित यह प्लांट कम प्रदूषण करने वाला होगा और इसकी चिमनियां 270 मीटर उंची होंगी। प्लांट के लिए कोयले का प्रबंध कंपनी खुद करेगी आर इसकी पहली यूनिट 40 महीनों में उत्पादन शुरू कर देगी जबकि दूसरी यूनिट 44 महीने में बिजली उत्पादन चालू कर देगी।
प्रदेश में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में साइन होने वाला यह छटा एमओयू है। आधिकारिक सूत्र बताते है कि राज्य सरकार ने करीब इतने ही स्थान और तलाशे हुए है जहां पर पानी व जमीन उपलब्ध है। ऐसे में बिना उत्पादन व खरीद शर्तें तय किए एमओयू साइन करने में ना तो किसी कंपनी को एतराज है और ना ही पावरकाम का ही कुछ खर्च हो रहा है।
याद रहे कि लांकों के साथ राजपुरा प्लांट का समझौता पहले भी रद्द हो चुका है। जहां पर सिर्फ एक ही कंपनी बोली में शामिल हुई थी और 3.38 रूपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद का समझौता हुआ, जिसे बाद में मोलभाव के बाद आठ पैसे कम कर दिया गया। लेकिन पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीश्न के कड़े रुख के बाद पुन: बोली हुई और एलएंडटी के खाते में प्लांट चला गया। पीएसईआरसी का कहना है कि राज्य को एमओयू साइन करने की बजाए खुली बोली की प्रक्रिया ही अपनानी चाहिए। राष्ट्रीय बिजली नीति भी यही कहती है कि एमओयू साइन ना करो और खुली बोली से निविदांए आंमत्रित करें।

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