Tuesday, 8 February 2011

अपणा पंजाब होवे.. पर न शराब होवे

अपणा पंजाब होवे पर दारू दी दुकान ना होवे
-71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-विभाग ने पूछा आखिर ऐतराज क्या है, हर्ज क्या है?

भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, घर दी शराब होवे, मूली नाल गंडा (प्याज) होवे, बाण वाला मंजा होवे..।
गुरूदास मान के इस लोकप्रिय हिट का पंजाब के गांवों विशेष रूप से मालवा क्षेत्र की पंचायतों ने नकारना शुरू कर दिया है। आबकारी नीति आने से पहले 71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव पारित कर दिया है कि उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाए और विभाग ने आज कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó
पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ शुरू कर दी है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है।
प्रदेश में पिछले साल ऐसी पंचायतों की संख्या 55 थी और अब बढ़ कर 71 हो गई है। सबसे अधिक जागरुकता लाने वालों में संगरूर जिला है जहां सेे 44 पंचायतों ने ऐसे आवेदन किए है। दिलचस्प है कि पिछले साल आबकारी विभाग ने कुछ पंचायतों का यह आवेदन विभिन्न तर्क दे कर रद्द कर दिया था।
संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है। संगरूर के कुछ एनजीओ ने लोगों को बताया तो इस दिशा में प्रगति हुई है, पिछले साल कि तुलना में इस बार संख्या भी बढ़ी है।
वहीं सकरोदी गांव के सरपंच हरिंदर सिंह कहते है कि अभी तो उनके पंच को आबकारी कमीश्नर ने 'देखते हैÓ का ही आश्वासन मिला है। हम से पूछा गया कि आप गांव का शराब का ठेका क्यों बंद करवाना चाहते हो। तुम्हारे गांव में तो अवैध शराब पकड़ी गई थी मामला भी दर्ज है, लेकिन हमने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ भी नही हुआ हम तो बस इस बीमारी को ही दूर रखना चाहते है।
उधर आबकारी कमीश्नर वैणु प्रसाद बताते है कि इस साल अभी तक उनके पास 71 आवेदन आए है और कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों से बुलवा कर बात की गई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वे मामला देख रहे है।

पंजाब में वर्ष 2009-10 में अंग्रेजी व देशी शराब की करीब 29 करोड़ बोतलें बिकीं। सरकार को शराब बिक्री से वर्ष 2007-08 में शराब से 1800 करोड़ रुपये, 2008-09 में 2000 करोड़ व वर्ष 2010 में 2500 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ। (स्रोत : विभागीय आंकड़े

3 comments:

  1. by Adv Hc Arora on facebook
    apna punjab hove
    ethe naa sharaab hove
    Nanak de baani hove
    mardaane de rabaab hove

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