Saturday, 30 June 2012

...और पटियाला शहर में बचे 3.8 लाख यूनिट, and patiala saved 5.8 lu units electricity in one month

-मई महीने में पिछले साल की तुलना में पटियाला में बिजली की खपत में कमी आई
-ईमानदार पटियालवियों की जेब से बिजली चोरों के हिस्से में हर महीने जा रहे लाखों रूपये रुके
दैनिक जागरण एक्सक्लूसिव
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश-दुनिया और यहां तक कि हर घर में बिजली की मांग में बढ़ोतरी हो रही है। जहां पंखे थे वहां कूलर आ गए हैं और कूलर एयर कंडीशनर से अपग्रेड हो गए, फ्रिज च्यादा खुलने लगा है, टेलीविजन के साथ कंप्यूटर घर की जरूरत हो गया है। लेकिन इस सब के बावजूद पटियाला शहर में बिजली की खपत में खासी कमी आ गई है। यह कुछ सौ या कुछ हजार यूनिट नहीं अपितु 3.8लाख यूनिट से च्यादा है।
दिलचस्प है कि बिजली की मांग बढऩे के बावजूद खपत में कमी आने के पीछे एकमात्र कारण घरों से बिजली मीटरों का बाहर होना है। पटियाला पंजाब का ऐसा पहला शहर बन गया है जहां घरों अथवा किसी भी उपभोक्ता के परिसर में बिजली का मीटर अब नहीं है। इतना भर करने से एक महीने में 3.8 लाख यूनिट सिर्फ एक ही शहर में बच गई है। इसके अलावा पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन का राजस्व बढ़ेगा सो अलग है।
सुपरीटेंडिंग इंजीनियर बलबीर सिंह सिद्धू बताते हें कि इस साल मई महीने में 561.87 लाख यूनिट बिजली की खपत हुई जबकि पिछले साल इसी क्षेत्र में 565.7 लाख यूनिट बिजली जली है। इतना ही नहीं शहर में उपभोक्ताओं के कुल लोड में 20 हजार किलो वाट की बढ़ोतरी भी दर्ज हुई है। पिछले साल कुल लोड चार लाख 58 हजार 456 किलोवाट था जो इस साल बढ़कर चार लाख 78 हजार 762 किलोवाट हो गया है। ये बदलाव शहर के एक लाख 17 हजार 492 मीटरों में से लगभग सभी के बाहर होने पर सामने आ गया है। शहर में टीएंडडी लासेज 22.38 फीसद से कम होकर 16.79 फीसद रह गया है। याद रहे कि टीएंडडी लासेज में अधिकतर हिस्सा बिजली चोरी का ही होता है। ऐसे में चोरी रुकने से बिजली बचत भी होने लगी है और पटियाला शहर में बिजली बचत का आंकड़ा दस फीसद के पास आ गया है।
वहीं पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट इंजी. भुपिंदर सिंह बताते हैं कि जितनी बिजली चोरी होती है उसका वजन ईमानदार उपभोक्ता पर पड़ता है। क्योंकि पीएसपीसीएल कुल राजस्व वसूली व खर्च के आधार पर दाम तय करता है। ऐसे में ईमानदार उपभोक्ता को करीब 41 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त देने पड़ते हैं। यह आंकड़ा ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लासेज कम होने पर कम जरूर हुआ पर दाम बढऩे के साथ फिर वहीं आ गया।
ऐसे में शहर में मीटर बाहर होने के साथ ही ईमानदार पटियालवियों की जेब से बिजली चोरों के हिस्से में हर महीने जा रहे लाखों रूपये भी अब रुक गए हैं। इसी क्रम में पीएसपीसीएल के प्रवक्ता बताते हैं कि औसतन हर साल सात से आठ फीसद की दर से मांग बढ़ रही है और मौसम सूखा होने की स्थिति में यह आंकड़ा दस फीसद पर भी आ जाता है। ऐसे में ये राहत दो गुनी है। पावरकाम मुख्यालय वाले शहर में कुंडी रुकने के बाद आने वाले दिनों में सुखद समाचार अन्य शहरों से भी आ सकते हैं। वे कहते हैं जिसने बिल ही नहीं देना वो भला संयम से बिजली क्यों खर्च करेगा उसके लिए कार की लाइट और घर की टयूबलाइट में कोई फर्क नहीं है।

Tuesday, 12 June 2012

पटियाला निगम चुनाव में किसे कितनी वोटें मिली, Who gets and how many votes!


नगर निगम मतदान -2012
-सबसे कम एक वोट सुधीर धीमान को 29 नंबर वार्ड में एकमात्र वोट मिला
-सबसे अधिक वोटें मेयर अजीतपाल सिंह कोहली ने 3685 वोटें पाई
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
जिला मतदान अधिकारी की तरफ से पटियाला नगर निगम की मतदान में उम्मीदवारों की तरफ से हासिल की वोटें के जारी किए गए आंकड़ों अनुसार वार्ड नं. 2के कुल 5272 वोटरों में से 2536 वोटरों ने अपने हक का इस्तेमाल किया। इस वार्ड में शिअद के गुरविन्दर सिंह धीमान ने 1634, किरपाल सिंह (आजाद) 762, कौशल्या (कांग्रेस) ने 120 और जतिन्दर सिंह (पीपीपी) ने 20 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 3में कुल 3358 वोटें में से कुल 2195 वोटें पड़ीं जिनमें से शिअद की गुरचरन कौर ने 1706 और कांग्रेस की रजिन्दर कौर ने 489 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 4में कुल 5457 वोटें में से 3084 वोटें पड़ीं जिन में से रुलदू राम हंसमुख (भाजपा) ने 1648, बलविन्दरपाल (आजाद) ने 634, किरपाल सिंह (आजाद) ने 320, हरजोत सिंह (कांग्रेस) ने 276, तरनजीत सिंह (आजाद) ने 132, बलविन्दरजीत सिंह (आजाद) ने 40, जगदीश कुमार (आजाद) ने 21 और कुलवंत सिंह (पीपीपी) ने 13 वोटें हासिल की हैं।
जिला चुनाव अधिकारी ने बताया कि वार्ड नं. 5में 6830 वोटरों में से 4093 ने वोटें डालीं जिन में से परमजीत सिंह (शिअद) को 2941, चन्द्र मनी (कांग्रेस) को 533, शेर प्रताप सिंह (पीपीपी) को 371, मनोज कुमार (आजाद) को 120, रुपेश कौशल (आजाद) को 106 और दविन्दर कुमार (आजाद) को 22 वोटें हासिल हुई। वार्ड नं. 6में कुल 6187 वोटरों में से 3403 ने वोटें डालीं इस वार्ड में रणजीत कौर (शिअद) ने 2432, पुष्पा देवी (कांग्रेस) ने 680, कुलदीप कौर (आजाद) ने 192, मनप्रीत कौर (आजाद) ने 68, ज्ञान कौर (आजाद) ने 18, सुरिन्दर कौर (आजाद) ने 9और रचलीन कौर (आजाद) ने 4वोटें हासिल की। वार्ड नं. 7में 6174 वोटरों में से 4060 ने अपनी वोट के हक का इस्तेमाल किया है। इस वार्ड में वेद प्रकाश (कांग्रेस) को 1591, भगवान दास (आजाद) को 1008, सरिता गैरा (आजाद) को 727, वरिन्दर बत्रा (भाजपा) को 483, विजे केसला (आजाद) को 239 और रजिन्दर कुमार (पीपीपी) को 12 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 8में कुल 7238 वोटें में से 3086 वोटें पड़ीं जिन में से रछपाल सिंह (शिअद) को 794, शमशेर सिंह (आजाद) को 767, सरबजीत सिंह (कांग्रेस) को 748, सुरिन्दर सिंह (आजाद) को 694 और प्रीतम सिंह (आजाद) को 83 वोटें हासिल हुई। वार्ड नं. 9में कुल 3916 वोटरों में से 2629 ने वोटें डालीं इस वार्ड में संदीप सिंह (शिअद) को 2260, सुरिन्दरजीत सिंह (कांग्रेस) को 245, कमलजीत (आजाद) को 109, राजविन्दर कौर (आजाद) को 10 और रणजीत सिंह (आजाद) को 5वोटें मिलीं। वार्ड नं. 10 से में कुल 5118 वोटरों में से 3162 ने वोट के हक का इस्तेमाल किया जहां मलविन्दर सिंह (शिअद) को 2603 और अमरनाथ (कांग्रेस) को 559 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 11 के कुल 7139 वोटरों में से 4637 ने वोटें डालीं। इस वार्ड में रविन्दरजीत कौर (शिअद) को 2970, सुरिन्दर कौर (कांग्रेस) को 944, मनिन्दर कौर (आजाद) को 663 और निरमलजीत कौर (आजाद) को 60 वोटें हासिल हुई। वार्ड नं. 12 में कुल 5797 वोटरों में से 3384 ने वोट के हक का इस्तेमाल किया इस वार्ड में रजिन्दर विर्क (शिअद) को 3053, मोहन शर्मा (कांग्रेस) को 199, हरीश चंद (आजाद) को 76, मुकेश शर्मा (आजाद) को 44 और अंकुर (आजाद) को 12 वोटें हासिल हुई। वार्ड नं. 13 के कुल 4817 वोटरों में से 3215 ने वोटें डालीं इस वार्ड में जसपाल सिंह (शिअद) को 2861 और सुखदेव सिंह (कांग्रेस) को 354 वोटें मिलीं।
डिप्टी कमिश्नर जीके सिंह ने बताया कि वार्ड नंबर 14 के कुल 4540 वोटरों में से 2795 वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिनमें शिअद की उम्मीदवार हरप्रीत कौर ने 2356, कांग्रेस की नरिन्दर कौर ने 298, आजाद उम्मीदवार हरप्रीत कौर ने 75 और आजाद आशा गोयल ने 66 वोटें हासिल की, वार्ड नं. 15 के कुल 5367 वोटरों में से 2018 वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिनमें से भाजपा के अवतार सिंह हैपी ने 861, कांग्रेस के प्रवीण कुमार ने 754, रमा पुरी (आजाद) ने 397 और रजिन्दर कुमार ठाकुर (आजाद) ने 6वोटें हासिल की। वार्ड नं. 16 के कुल 4817 वोटरों में से 2366 ने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिनमें से प्रितपाल कौर (आजाद) ने 978, सरबजीत कौर (आजाद) ने 471, सुरिन्दर सिंह (कांग्रेस) ने 340, दर्शना (आजाद) ने 270, दिनेश कुमार (भाजपा) ने 204, राजवीर कौर (आजाद) ने 94 और हरी ओम शर्मा (आजाद) ने 9वोटें हासिल की। वार्ड नंबर 17 में कुल 4022 वोटरों में से 2535 ने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिनमें से सुरिन्दर कौर (शिअद) ने 2232, नवजोत कौर (कांग्रेस) ने 257, मनजीत कौर (आजाद) ने 43 और राजविन्दर कौर (आजाद) ने 3वोटें हासिल की। वार्ड नंबर 18 के कुल 6023 वोटरों 2906 में से वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिनमें से शिअद के रछपाल सिंह धंजू ने 2108, कांग्रेस के नवदीप सिंह ने 686 और आजाद उम्मीदवार बचित्तर सिंह आजाद ने 112 वोटें हासिल की।
वार्ड नं. 19 में कुल 6139 वोटरों में से 2726 ने वोटें डालीं जिनमें से सूरजभान  (कांग्रेस) को 774, अरुण गुप्ता (भाजपा) को 618, मनमिन्दर सिंह (आजाद) को 475, ज्ञान चंद (आजाद) को 331, सीमा वैद्य (आजाद) को 173, परमवीर सिंह (आजाद) को 149, कृपाल सिंह (आजाद) को 101, जसबीर कौर (आजाद) को 35, चंद्र शेखर मित्तल (आजाद) को 20, पायल मोदगिल (आजाद) को 15, मुकेश शर्मा (आजाद) को 11, हरदेव कुमार (आजाद) को 9, भुपिन्दर सिंह (आजाद) को 8, कमलदीप शर्मा (आजाद) को 7वोटें मिलीं। वार्ड नं. 20 के कुल 3723 वोटरों में से 2317 ने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिनमें से  हरजीत कौर (शिअद) ने 1707, बेअंत कौर (कांग्रेस) ने 587 और अमरजीत (आजाद) ने 23 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 21 में कुल 3728 वोटरों में से 2325 ने वोटें डालीं जिनमें से हरिन्दर कोहली (भाजपा) को 1882, राकेश गुप्ता (कांग्रेस) को 393 और जनक राज (आजाद) को 50 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 22 में कुल 4737 वोटें में से 2545 वोटें पड़ी। जिनमें से किशोर कुमार मल्होत्रा (कांग्रेस) को 1152, श्री ओम (भाजपा) को 465, कश्मीर सिंह बाजवा (आजाद) को 334, अशोक कुमार (आजाद) को 279, सुखजिन्दर पाल सिंह (आजाद) को 216, मुनीश शर्मा (आजाद) को 75, चरनजीत सिंह (आजाद) को 10, सोनू (आजाद) को 5, प्रशांत कुमार (आजाद) को 4, शमिन्दर कुमार (आजाद) को 3और हरविन्दरजीत सिंह (आजाद) को 2वोटें मिलीं।
वार्ड नं. 23 में कुल 3687 वोटरों में से 2033 ने अपनी वोट के हक का इस्तेमाल किया इस वार्ड में निर्मला देवी (शिअद) ने 803, विंती (कांग्रेस) ने 638, शारदा देवी (आजाद) ने 336, आशु बाला (आजाद) ने 161 और रीमा देवी (आजाद) ने 95 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 24 के कुल 3374 वोटरों में से 1804 ने वोटें डालीं। इस वार्ड में हरसिमरन कौर छांगा (शिअद) ने 1181, इन्द्रजीत कौर (कांग्रेस) ने 605, नवजोत कौर (आजाद) ने 7, इन्द्रजीत कौर (आजाद) को 5, राज रानी और मनजीत कौर आजाद उम्मीदवारों ने 3-3वोटें हासिल की। वार्ड नं. 25 में कुल 5556 वोटरों में से 3331 ने वोटें डालीं जहां संजीव शर्मा (कांग्रेस) को 1155, विश्वाश सैनी (आजाद) को 1040, राजिन्दर कुमार (भाजपा) को 673, सुरिन्दर सिंह (आजाद) को 379, वीर भान शर्मा (आजाद) को 54, संदीप गोयल (आजाद) को 25 और विकास शर्मा (आजाद) को 5वोटें मिलीं। वार्ड नं. 26 के कुल 5134 वोटरों में से 3848 ने वोटें डालीं जिनमें से शिअद के अजीतपाल सिंह कोहली को 3685 और कांग्रेस के हरीश कुमार को 163 वोटें मिलीं।
जीके सिंह ने बताया कि वार्ड नं. 27 के कुल 11289 वोटरों में से 6684 वोटरों ने अपने वोट पहनने के हक का प्रयोग किया जिसके अंतर्गत शिअद की उम्मीदवार कनिका शर्मा ने 2465, कांग्रेसी उम्मीदवार रेनू नागपाल ने 2347, रेखा अग्रवाल आजाद ने 867, गुरमीत कौर आजाद ने 613, जसबीर कौर आजाद ने 247, रानी आजाद ने 58, अशी नागपाल आजाद ने 45 और सुषमा पीपलज़ पार्टी आफ पंजाब ने 42 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 28 के कुल 4350 वोटरें में से 2777 वोटरों ने वोटें डाली इसमें से संजीव कुमार शर्मा (कांग्रेस) ने 1404, सीमा शर्मा (भाजपा) ने 1117, सुशील नैयर (आजाद) ने 189, तरुण अरोड़ा (आजाद) ने 26, राजेश कुमार (आजाद) ने 17, अनिल सिंगला (आजाद) ने 12, संगीता शर्मा (आजाद) ने 4, राजीव कुमार शर्मा (आजाद) ने 4और लखविन्दर सिंह (आजाद) ने भी 4वोटें प्राप्त की। वार्ड नं. 29 के कुल 5097 वोटरों में से 3435 वोटरों ने अपने वोटरों ने अपने अधिकार का प्रयोग किया जिसके अंतर्गत तरनजीत सिंह भाटिया शिअद को 2780, सुमन शर्मा कांग्रेस को 594, सुखविन्दर कौर आजाद 23, नंद किशोर आजाद को 16, सोनू आजाद को 14, राहुल गौतम आजाद को 7और सुधीर दीवान आजाद को एक वोट पड़ी। वार्ड नं. 30 के कुल 6530 वोटरों में से 3691 वोटरों ने वोटें डालीं जिसमें से लीला रानी (कांग्रेस) को 1130, सुखविन्दर कौर (भाजपा) को 964, शान्ति देवी (आजाद) को 664, सरबजीत कौर (आजाद) को 427, गोलडी (आजाद) को 354, गुरमीत कौर (आजाद) को 111 और गुरिन्दरपाल कौर (आजाद) को 41 वोटें पड़ीं। वार्ड नं. 31 के कुल 5136 वोटरों में से 3024 वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया जिसमें से हरपाल जुनेजा शिअद ने 2865 और हरबीर सिंह कांग्रेस ने 159 वोटें प्राप्त की। वार्ड नं. 32 के कुल 3793 वोटरों में से 1748 वोटरों ने वोटें डालीं जिसमें से रविन्दरपाल सिंह जोनी कोहली कांग्रेस को 943, नरिन्दर सिंह चंढोक शिअद को 744, रवीन्द्र सिंह भूपी आजाद को 57 और रमनप्रीत कौर आजाद को 4वोटें पड़ीं। वार्ड नं. 33 के कुल 4138 वोटरों में से 2700 वोटरों ने अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया जिसमें तरविन्दर कौर शिअद ने 2329, सुरिन्दर शर्मा कांग्रेस ने 356 और अमृत कौर आजाद ने 15 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 34 के कुल 4409 वोटरों में से 2900 वोटरों ने वोटें डालीं जिसमें बलवंत राय भारतीय जनता पार्टी को 1145, अमरचन्द आजाद को 996, ओम प्रकाश पीपीपी को 371, रमेश कुमार कांग्रेस को 350, रवि आजाद को 15, तारा चंद आजाद को 12 और शंकर लाल आजाद को 11 वोटें पड़ीं। वार्ड नं. 35 के कुल 4500 वोटरों में से 2959 वोटरों ने वोटें डालीं जिसमें अजीत सिंह बाबू शिअद को 2460, तजिन्दर सिंह सोढी कांग्रेस को 426, हरीश कुमार मिड्ढा आजाद को 57, करमजीत सिंह पीपीपी को 10, सुरजीत सिंह आजाद को 4और विनोद कुमार बंटी आजाद को 2वोटें पड़ीं। वार्ड नं. 36 के कुल 5254 वोटरों में से 3930 वोटरों ने अपने वोट के अधिकार का प्रयोग किया जिसमें अनिल बजाज भारतीय जनता पार्टी ने 2853, कृष्ण चंद बुद्धू कांग्रेस ने 791, शाम लाल आजाद ने 116, नरिन्दर कुमार सीपीआई (एम) ने 105, कृष्ण धनौला आजाद ने 42, अनिल कुमार आजाद ने 18 और परमिन्दर कुमार आजाद ने 5वोटें हासिल की। वार्ड नं. 37 के कुल 4779 वोटरों में से 3572 वोटरों ने वोटें डालीं जिस के अंतर्गत जगदीश राय भाजपा को 1968, अश्वनी कपूर मिक्की कांग्रेस को 666, रकेश खन्ना आजाद को 543, नरेश कुमार आजाद को 153, मदन लाल आजाद को 147, राकेश शर्मा आजाद को 65, अनिल कपूर आजाद को 21, राजीव खन्ना आजाद को 6और नवीन खन्ना पीपीपी को 3वोटें पड़ीं। वार्ड नं. 38 के कुल 3052 वोटरों में से 1878 वोटरों ने वोटरों में लता अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी को 1199, चारू पुरी कांग्रेस को 546, नीलम जैन आजाद को 101 और अनीता गुप्ता आजाद को 32 वोटें पड़ीं। जबकि वार्ड नंबर 39 में शिअद के जसपाल सिंह प्रधान पहले ही बिना मुकाबला विजेता घोषित किए जा चुके हैं।
जिला चुनाव अधिकारी ने बताया वार्ड नं. 40 के कुल 3717 वोटरों में से 2757 ने अपने हक के वोट का इस्तेमाल किया। इस वार्ड में गुरबखश सिंह सहगल (शिअद) को 1676, नरिन्दरपाल वर्मा (कांग्रेस) को 1006, बलबीर सिंह (आजाद) को 31, रविन्दरपाल सिंह (आजाद) को 19, बचित्तर सिंह (आजाद) को 9, अमरप्रीत सिंह (आजाद) को 7और बलविन्दर सिंह (आजाद) को 7और रवीन्द्र सिंह (आजाद) को 3वोटें मिलीं। वार्ड नं. 41 के कुल 4212 वोटरों में से 2220 ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया। कमला देवी सोफत (शिअद) को 1640, संगीता रानी (कांग्रेस) को 527 और लक्ष्मी देवी (आजाद) को 53 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 42 के कुल 4025 वोटरों में से 1796 वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया। इस वार्ड में हरप्रीत कौर (शिअद) को 1297, परमिन्दर कौर (आजाद) को 342, आशा देवी (कांग्रेस) को 149, और रजनी (आजाद) को 8वोटें मिलीं। वार्ड नं. 43 के कुल 5825 वोटरों में से 3110 वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया। इस वार्ड में हरिन्दरपाल सिंह टोहड़ा (शिअद) को 2532 और मनजीव सिंह (कांग्रेस) को 578 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 44 के कुल 4715 वोटरों में से 2520 ने अपनी वोट डाली। इस वार्ड में शीला देवी (आजाद) को 1177, गोलडी पाठक (भाजपा) को 508, परमजीत कौर (कांग्रेस) को 423, रणजीत कौर (आजाद) को 209, माया रानी (पीपीपी) को 131 और सन्दीप कौर (आजाद) को 72 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 45 के कुल 3861 वोटरों में से 2712 ने वोट के अधिकार का प्रयोग किया। इस वार्ड में अमरिन्दर सिंह बजाज (शिअद) को 2624 और मुकेश (कांग्रेस) को 88 वोटें मिलीं। वार्ड नं. 46 के कुल 4509 वोटरों में से 2111 वोटरों ने अपने वोट के हक का इस्तेमाल किया। इस वार्ड में प्र्रभजीत सिंह डिकसी (शिअद) को 1423, विजय कुमार (कांग्रेस) को 585, संदीप कुमार गर्ग (आजाद) को 45, रणजीत सिंह (आजाद) को 27, हरिन्दर गर्ग (आजाद) को 21, हरबंस सिंह गिल (आजाद) को 5, दविन्दरपाल सिंह (आजाद) को 3और जसविन्दरपाल सिंह (आजाद) को 2वोटें मिलीं। वार्ड नं. 47 के कुल 4943 वोटरों में से 2078 वोटरों ने वोट डाली जिसमें रजनी शर्मा (कांग्रेस) ने 1064, संतोष शर्मा शौरी (शिअद) ने 948, और हरिन्दर कौर (पीपीपी) ने 66 वोटें हासिल की। वार्ड नं. 48 के कुल 4606 वोटरों में से 2706 ने वोटें डालीं इसमें बलबीर सिंह खरौड़ (शिअद) को 1478, गोपाल सिंगला (कांग्रेस) को 1210 और मनजीत सिंह (पीपीपी) को 18 वोटें हासिल हुई। वार्ड नं. 49 के कुल 6610 वोटरों में से 4428 ने वोटें डालीं। इस वार्ड में गुरमुख सिंह (शिअद) को 3027, नरेश कुमार दुग्गल (कांग्रेस)को 1153, जसबीर सिंह ( पीपीपी) को 153 और सुभाष कुमार (आजाद) को 95 वोटें हासल हुई।
जबकि वार्ड नं. 50 में कुल 3771 वोटरों में से 1692 ने अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल किया इस वार्ड में शिअद की गुरमीत कौर बराड़ ने 923, कांग्रेस पार्टी की स्नेह लता ने 564, सीपीआई की रविन्दरजीत कौर ने 162 और आजाद उम्मीदवार उषा रानी ने 43 वोटें हासिल की हैं।

वोटर बोले what voters want


एमसी जो भी बने, हमें बस सड़क चाहिए

 वार्ड 11

- दो साल पहले सीवरेज डालने के बाद से अलीपुर रोड पर बिछे हैं रोड़े
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राजपुरा रोड व सरहिंद रोड को मिलाने वाले बाईपास के इर्द गिर्द व मुख्य रूप से अलीपुर गांव के आसपास के क्षेत्र में फैले वार्ड नंबर 11 से पिछला चुनाव लडऩे वाले दोनों ही प्रमुख दलों के उम्मीदवारों को इस बार इस वार्ड से पार्टी टिकट नहीं मिला है। दिलचस्प है कि क्षेत्र की जनता को इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ता। यहां के लोगों को बेहतर सड़क चाहिए।
करीब दो साल पहले क्षेत्र में पहली बार डाली गई सीवरेज की लाइनों के बाद से सड़क नहीं बनी है। क्षेत्र की प्रमुख सड़क अलीपुर रोड अब मात्र बड़े रोड़ों का रास्ता बनी हुई है।
शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी से पार्षद रहे सुखदेव सिंह को इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया हैं और ठीक इसी तरह से कांग्रेस से एक बार पार्षद रहे और पिछला चुनाव हार चुके गुरदेव सिंह पूनिया भी क्षेत्र की जनता से प्रत्यक्ष रूप से वोटों की राजनीति से दूर हैं।
वार्ड के बाशिंदे लालचंद कहते हैं कि इस बार मुकाबला बराबरी का है और खासा तगड़ा है। वार्ड में काम चलता रहा है। पर काफी कुछ होने वाला भी है। इसी प्रकार गुरप्रीत सिंह कहते हैं कि अलीपुर रोड दो साल से नहीं बनी है। बाई पास से उतरते ही पता चलता है कि गांव क्या है और शहर क्या है।
बाईपास पर ही दुकान चलाते नरेश कुमार, राम लाल से जब पूछा जाता है कि आपका पार्षद कैसा होना चाहिए? तो वे साफ तौर पर कहते हैं कि उन्होंने नहीं देखा है, और ये भी नहीं कह सकते कि पार्षद कैसा होगा? पर जो भी हो, सड़क जरूर बननी चाहिए।

विधान सभा जीती, लोक सभा भी पर 13 नंबर वार्ड...

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
शहर का वार्ड नंबर 13 अपने आप में अलग राजनीतिक पहचान रखता है। कूड़े, कचरे, बरसात में सीवरेज, सड़क में गढढ़े जैसी समस्याओं चाहे अन्य वार्डों के समान हो लेकिन पटियाला में तलाश करने पर भी वार्ड नंबर 13 के अलावा शायद ही कोई दूसरा वार्ड होगा जहां लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस हारी हो, कुछ ऐसी ही स्थित विधान सभा चुनावों में रही है। कुल 50 वार्डों में से मात्र 13 नंबर वार्ड ही ऐसा था जहां शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी ने ढ़ाई सौ से च्यादा वोटों से बढ़त बनाई हो।
पिछली बार की पार्षद बलविंदर कौर चट्ठा के पति जसपाल सिंह बिट्टू चट्ठा चुनाव लड़ रहे हैं तो कांग्रेस के सुखदेव सिंह मैदान में हैं। क्षेत्र के बाशिंदे कहते हैं कि वार्ड में से गुजरती बंधा रोड के बारे में वे सुनते आ रहे हैं कि इस रोड पर सरहिंद की ओर से आने वाले ट्रैफिक को डाइवर्ट किया जाएगा और इसके लिए इसे डबल भी किया जाएगा। संभव है कि रास्ता खुल जाए और हर इंसान को आराम हो जाए।
सुखराम कालोनी के राजकुमार कहते हैं कि सड़कें बन रही हैं, काफी सकारात्मक बदलाव आए हैं। ऐसे ही गुरचरण सिंह कहते हैं कि काम किए गए है और ये होने भी चाहिए। न्यू यादविंदरा कालोनी के जसबीर सिंह चाहते हैं कि खुले बरसाती नालों को सरकार बंद करे और सार्वजनिक स्तर पर पीने के पानी के नल लगे होने चाहिए जबकि गुरूनानक नगर के सतनाम सिंह कूड़े कचरे का पुख्ता व स्थायी प्रबंध चाहते हैं। इसी प्रकार सुखराम कालोनी के ही सतनाम सिंह कहते हैं कि बंधा रोड के बार में सुनते आ रहे हैं कि डबल होगी, इसका उपाय आने वाला एमसी जरूर करे।

जग्गा ने जोर लगाया पर मिंटा की मैनेजमेंट...
 वार्ड-14
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
मुख्य रूप से फैक्ट्री एरिया के आसपास के क्षेत्र से बने वार्ड नंबर 14 में चुनावों में हमेशा से ही कड़ी प्रतिस्पर्धा का दर्शक  बना है लेकिन ये मुकाबला मतदान के दिन ही नजर आता रहा है। इस बार नगर निगम चुनावों में नामांकन दायर होने के साथ ही वार्ड में राजनीति का पारा चढ़ गया है। वार्ड में जहां एक ओर 'जग्गा ने जोर लगाया पर मिंटा की मैनेजमेंट...Ó को भी लोग कम कर नहीं आंक रहे।
दिलचस्प है कि वार्ड के महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाने के बाद दो बार कांग्रेस व शिरोमणि अकाली दल से पार्षद रह चुके सुखमिदंर पाल सिंह मिंटा ने अपनी पत्नि को उतारा है तो ब्रहम महिंदरा के समर्थक जगदीप जग्गा की पत्नि आमने सामने है।
वार्ड में से गोल चक्कर दुरुस्त कर एक कूड़े का ढ़ेर ठिकाने लगा दिया गया है पर मछली बाजार जस का तस है। स्ट्रीट लाइटें जल उठी हैं, सीवरेज सिर्फ बारिश में तंग करता है पर बहुत से इलाके हैं जहां पानी नहीं आता पर पानी का बिल जरूर आ जाता है।
क्षेत्र के डा. संदीप पांधी को लगता है कि पिछले दस सालों में सकारात्मक बदलाव आए हैं जबकि सुरेंदर सिंह कहते हैं कि मछली बाजार का काम अभी होना है। वार्ड के रोहिण शर्मा, जसवंत सिंह व तेज इकबाल सिंह काका बताते हैं कि नया चुना जाने वाला पार्षद अब रेलवे स्टेशन से आने वाले मार्ग पर से भिखरियों, टेंपो व अन्य प्रकार के कब्जे हटवा कर मार्ग को चौड़ा करे तभी दुर्घटनाएं कम होंगी और लोगों की मुसीबत घटेगी।

रास्ता खुल जाए तो इलाका वीआईपी हो जाए
 वार्ड नंबर-15
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
गुरुबक्श कालोनी और गुरुनानक नगर के बीच की मुख्य सड़क ही इस वार्ड की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। हजारों की आबादी के लए मात्र 20 फुट चौड़ी सड़क वो भी दोनों ओर से अतिक्रमण के साथ अब सुबह शाम का सरदर्द है। लोगों का कहना है कि सड़क पूरी तरह से खुल जाए तो ये इलाका भी वीआईपी क्षेत्र हो सकता है।
वार्ड का वोटर कहता है कि कम से कम इस सड़क को दुरुस्त रखा जाए। वार्ड के अशोक सिंगला कहते हैं कि सालों बाद अब मात्र पैचवर्क कर फार्मेल्टी कर दी गई है जबकि सड़क पर कारपेटिंग की जानी चाहिए थी। इसी प्रकार सुरिंदर कौर कहती हैं कि स्ट्रीट लाइट ना केवल जलती रहे बल्कि समय समय पर रिपेयर भी की जाएं।
 सीवरेज और साफ सफाई का प्रबंध हमेशा दुरुस्त रहे ये मांग करने वालों में अशोक सिंगला, सुरिंदर कौर और बिंदू हैं। वार्ड में जहां तहां लगे गंदगी के ढ़ेर और शाम तक ना होने वाली सफाई से वे त्रस्त हैं। जबकि दलजीत कौर और सोनू कहते हैं कि उनका  ऐसा पार्षद ऐसा होना चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद भी मिले और हमारी समस्या का हल करवा सके।

पार्षद सेवा करने, साथ चलने वाला हो
वार्ड-16
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
निरंतर साफ सफाई की व्यवस्था, ना रुकने वाला सीवरेज, पानी की लगातार व अच्छे प्रेशर के साथ मिलने वाली सप्लाई जैसी नगर निगम से मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं वार्ड नंबर 16 के लोगों के लिए भी महत्व रखती हैं, लेकिन वार्ड के लोगों का कहना है कि उनका पार्षद सेवा करने वाला हो और साथ चलने वाला हो।
मुख्य रूप से डीजल लोको मार्डेनाइजेशन वर्कशाप की कालोनी के ज्यादातर क्षेत्र में हालांकि उपलब्ध करवाई जाने वाली सुविधाएं रेलवे की ओर से ही हैं और इसमें नगर निगम पटियाला की भूमिका खासी सीमित हो जाती है।
वार्ड के रमेश कुमार कहते हैं कि उनका पार्षद सेवा करने वाला हो, लोगों के साथ चलने वाला होना चाहिए। इसी प्रकार सुरेश पाल चाहते हैं कि बनने वाला पार्षद प्रत्येक काम करवाए और चुनाव जीतने के बाद भी दिखाई दे। जबकि वार्ड के ही सुमिंग कहते हैं कि स्थानीय निकाय का प्रतिनिधि कोआपरेटिव नेचर का हो और पब्लिक के लिए 24 घंटे हाजिर रहे। वो सभी लोगों के साथ मिल जुलकर काम करने वाला हो जिससे द्वेष ना बढ़े। वहीं आरके शर्मा कहते हैं कि पार्षद युवा होना चाहिए ताकि वो दौड़ धूप कर सके।

'छबील' बनी उम्मीदवारों की पीआर का नया फंडा‘Chabeel’ is new trend of election campaign


-उम्मीदवारों ने झोंका हर तरह का लंगर
-निर्जला एकादशी ने दिया आदर्श चुनाव आचार संहिता से बचने का मौका
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर भर में हर गली नुक्कड़ पर लगी 'छबीलÓ नगर निगम का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए पब्लिक रिलेशन बनाने का सबसे शानदार साधन बन गई है। लोकसभा व विधान सभा के चुनावों में लड्डू तक पर निगाह रखने वाले चुनाव आयोग की निगाह से भी बची हुई है।
दिलचस्प है कि लगभग हर उम्मीदवार ने अपने वार्ड में लगी छबील में 'सेवाÓ निभाई है। छबील एक लगे या दो या चार सत्ता की पहली सीढ़ी चढऩे को बेताब नेता जी के लिए सब बराबर हैं। चुनावी राजनीति से जुड़े एक प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्राइम टाइम में नेता जी को सेवा करते सभी देख लें ये प्रयास किया जाता है। अगर वोटर उचित संख्या में नहीं आए तो जल घर तक 'प्रसादÓ के रूप में भेजने का काम सिरे चढ़ाया जाता है और प्रसाद ले जाने वाले को सख्त हिदायत होती है कि नाम लेकर बता भी दे कि किसने सेवा निभाई है। मौके पर वोटर आ गए तो कहा जाता है कि, 'सेवा कर रहे हैं जनाब मौका दोगे तो पांच साल करते रहेंगेÓ।
ऐसी ही छबीलों पर उम्मीदवारों ने हर तरह का लंगर झोंक दिया है। निर्जला एकादशी के चलते चुनाव आयोग की आदर्श चुनाव आचार संहिता से बचने का मौका भी उम्मीदवारों को मिला हुआ है।
दिलचस्प है कि पंजाब के परंपरागत रिवाज में निर्जला एकादशी को मिट्टी के घड़े दान करने और ठंडा पानी पिलाने और मीठे पानी में थोड़ा दूध मिला तैयार की गई कच्ची लस्सी पिलाने का चलन शामिल रहा है। समय बीतने के साथ ही इसमें तैयार शरबत शामिल हो गया। सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. खोसला कहते हैं कि देसी महीने जेठ के अंतिम दिनों में आने वाली एकादशी में उत्तर भारत के इस क्षेत्र में पारा अपने पूरे चरम पर होता है। बारिश आसपास नहीं होती आसमान और धरती दोनों ही शुष्क होते हैं। ये दिन अंग्रेजों के 21 जून के सबसे बड़े दिन से अलग हैं। जून अंत में पंजाब में प्री मानसून की बौछारें आ चुकी होती है तो लगातार पडऩे वाली चिलचिलाती धूप से राहत मिल चुकी होती है। ऐसे में मीठा पानी ही शांति, ऊर्जा, ठंडक के साथ राहत देता है पर इन दिनों में तो लोग आलू पूरी, ब्रेड पकौड़े, कुल्चे छोले की छबील लगा रहे होते हैं। जिनसे डी-हाइड्रेशन अथवा उल्टी-दस्त की ज्यादा संभावना रहती है।
इतना ही नहीं हिंदु धर्म में तो एकादशी के दिन चावल खाना ही वर्जित है जबकि 'नेता जीÓ अपने वोटरों को देसी घी में बने 'मीठे चावलÓ छका रहे हैं। हालांकि सेहत की दृष्टि से इन्हें गलत नहीं कहा जा सकता।


 'मेहनती' वर्करों, 'पक्के' वोटरों को 'शाम का लंगर'
प्रचार के रंग
-घर में दो वोट वाले भी जुटे हैं 'साप्ताहिकीÓ में

पांच पानियों की धरती पंजाब में चुनाव कहीं भी हों 'छठा दरियाÓ बहने लगता है। बात पंचायत या स्थानीय निकाय के चुनाव की हो तो इस दरिया की शाखाएं हर तरफ फूट पड़ती हैं। पटियाला नगर निगम के हो रहे चुनाव में ये बहता दरिया 'मेहनतीÓ वर्करों, 'पक्केÓ वोटरों को 'शाम के लंगरÓ के रूप में उपलब्ध हो गया है।
शहर में शाम को चुनाव प्रचार का रंग कैसा चल रहा है? सवाल करते ही कुछ वार्डों में अपने बंदों के लिए लोक संपर्क का काम देख रहे मीडिया से जुड़े रहे एक सच्जन बताते हैं कि मारो-मार हो रही है और वोटर बागो-बाग है। वे बताते हैं कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पिछले पांच-सात दिनों से डेरा जमाए हुए हैं और शाम होते ही धमक पड़ते हैं। एक मामले में तो जब उम्मीदवार को उसके समर्थकों ने बताया कि अमुक व्यक्ति पिछले छह दिनों से बोतल लेकर जा रहा है और उसके घर में दो ही वोट हैं। अब इसे ना दी जाए। इस पर उम्मीदवार कहते हैं कि कई बार एक वोट से भी लोग हार जाते हैं, इसे आज फिर दे दो। कोई फर्क नहीं पड़ता, बस 'तसल्ली करवा दोÓ।


लुधियाना जा रही 12 सौ पेटी शराब आबकारी विभाग ने रोकी
-एईटीसी जाखड़ ने कहा कागजों की पड़ताल जारी है
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
समीपवर्ती मैण फैक्ट्री से लुधियाना ले जाई जा रही 12 सौ पेटी शराब से लदे ट्रक को सरहिंद रोड पर आबकारी विभाग के अधिकारियों ने रोक लिया है और मामले की पड़ताल की जा रही है। जबकि शराब से भरा ट्रक अभी विभाग की हिरासत में है। शुरु में शराब के चुनावी होने की आशंका जताई जा रही थी।
वहीं एडीशनल एक्साइज एंड टेक्सेशन कमिश्नर एईटीसी एलएस जाखड़ ने इस संदर्भ में कहा है कि उक्त शराब तो वैध है लेकिन गाड़ी के परमिट व अन्य कागजों की पड़ताल जा रही है। वे बताते हैं कि फैक्ट्री से लुधियाना की ओर जा रहा उक्त ट्रक करीब एक घंटा देरी से चल रहा था। गंतव्य स्थान पर पहुंचने के समय वो सरहिंद रोड पर ही था। पता किया जा रहा है कि ट्रक के लुधियाना पहुंचने में देरी क्यों हुई? इस संबंध में लुधियाना के अधिकारियों से भी सहायता ली जा रही है।
दूसरी ओर आशंका व्यक्त की जा रही है कि शराब के तय परमिट को कहीं ओर प्रयोग किया जा सकता था। चुनावी सीजन है ऐसे में कहीं की शराब कहीं ओर आम तौर पर उतरती रहती है। चाहे वह वैध ही क्यों ना हो।

राजिंदरा अस्पताल से तड़के साढ़े चार बजे कैदी फरार, Prisoner escaped from Rajindera Hospital


-लुधियाना की जेल से भेजा गया था इलाज करवाने
-आपरेशन के बाद तीन महीने से आम वार्ड में  ही रखा हुआ था
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
सरकारी राजिंदरा मेडिकल कालेज अस्पताल से बुधवार तड़के सुबह एक कैदी अपने सुरक्षा गार्डों को चकमा देकर फरार हो गया है।
प्राप्त जानकारी अनुसार लुधियाना की जेल से लाया गया कैदी जगदीप शर्मा सुबह साढ़े चार बजे फरार हो गया है। उक्त कैदी को लुधियाना से ट्रांसफर करवा कर इलाज के लिए मई के पहले सप्ताह में पटियाला लाया गया था और पेट में तकलीफ के चलते 24 मई को आपरेशन किया गया। इसके बाद से उसके जख्मों पर बैंडेज हो रही थी। कैदी के साथ पुलिस कर्मियों की गारद भी तैनात थी। दिलचस्प है कि आपरेशन के बाद कैदी जगदीश को कैदी वार्ड में ना शिफ्ट कर वार्ड नंबर तीन में दाखिल करवा दिया गया।
वहीं मामले की जांच कर रहे माडल टाउन चौंकी के एसएचओ राजेश मलहोत्रा कहते हैं किअभी कैदी के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। लुधियाना मैसेंजर भेजे हुए कि उक्त व्यक्ति को किन मामलों में सजा हुई थी अथवा किन मामलों में आरोपी था। पुराना पता व अन्य मामलों की जानकारी के बाद ही मामला दर्ज किया जाएगा। कैदी कैसे भागा? क्यों भागा जैसे सवाल अभी अधूरे हैं?
बताया जा रहा है कि रात को करीब दो से ढ़ाई बजे के बीच कैदी जगदीश को दर्द अधिक होने के चलते दर्द निवारक दवा का इंजेक्शन भी लगाया गया था। इतना ही नहीं उक्त कैदी के कई जख्म खुले हुए थे और पेशाब करने के लिए अलग से थैली भी लगी हुई थी। यहीं बस नहीं फरारी के समय तक उसे गुलूकोज भी चढ़ रहा था। दिलचस्प है कि कैदी के फरार होने के बाद वार्ड के अन्य मरीजों के रिश्तेदारों ने सुरक्षा गार्डों को उठा कर बताया कि आपका कैदी गायब है इसके बाद उसकी तलाश शुरु हुई।

Monday, 4 June 2012

सस्ता हुआ सरकारी गल्र्स कालेज का खाना, Negative inflation at girl’s college hostel’ mess


 लोगो: मंहगाई को चपत
-23.33 रूपये में दो वक्त का खाना, सुबह का ब्रेकफास्ट और शाम की चाय मट्ठी शामिल
-घरेलू गैस सिलेंडर का भी नहीं होगा प्रयोग, बिजली के चुकाने होंगे तीन हजार रूपये
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश भर में जहां बढ़ती मंहगाई के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं और एक के बाद एक राजनीतिक दल मंहगाई पर अपनी रोटियां सेंक रहा है वहीं शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की राच्य की हाल ही में एक बार फिर आई सरकार के कार्यकाल में पटियाला के प्रतिष्ठित सरकारी गल्र्स कालेज की मेस में खाना सस्ता कर कई लोगों को पाठ पढ़ा दिया है।
 याद रहे कि पटियाला के तत्कालीन महाराजों की ओर से अपनी प्रमुख महारानी के पूरे महल को देकर उत्तर भारत के इस हिस्से में शिमला के बाद गल्र्स कालेज की शुरुआत की गई थी। तब इसे वूमैन कालेज कहा जाता था।
गल्र्स कालेज के प्रबंधन ने किसी तरह के विवाद से बचने के लिए इस बार खुली कोटेशन आंमत्रित किए हैं और सभी के सामने ठेकेदारों के आवेदन खोले हैं। दिलचस्प है कि शहर में जहां हर तरफ दूध, दही, फल, सब्जी, दाल आदि के दाम बढ़ रहे हैं वहीं गल्र्स कालेज की मेस के लिए हुए ठेके में इस बार न्यूनतम बोली पिछले साल की तुलना में 40 रूपये कम रही है। इस बार मात्र 700 रूपये प्रति छात्रा प्रति माह की बोली हुई है जबकि पिछले साल यही दर  740 रूपये प्रति माह पर थी।
दिलचस्प है कि कालेज के होस्टल में रहने वाली हर छात्रा को एक दिन में 23 रूपये 33 पैसे एक दिन की डाइट के खर्च करने होंगे। इस राशि में शानदार दो वक्त का भोजन और सुबह का नाश्ता उपलब्ध होगा, जिसमें दूध-दही के साथ परोंठे व शाम को चाय के साथ मट्ठी अलग से होगी। इतना ही नहीं दो वक्त के खाने में भी किसी तरह की बोरियत ना हो इसके लिए वार के हिसाब से मीनू तय किया गया है। मंगलवार राजमांह के लिए है तो वीरवार कढ़ी चावल के लिए। यहीं पर मंहगाई की चपत समाप्त नहीं होती। छात्राओं के लिए खाने के बाद स्वीट् डिश का प्रबंध भी किया जाता है और गुलाब जामुन से लेकर खीर, हलवा, कस्टर्ड सब कुछ शामिल है।
प्रशासन की ओर से किए गए प्रबंधों में इस बार जिला प्रशासन के आदेशों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। इसमें मेस में ठेकेदार की ओर से खर्च की जाने वाली बिजली के लिए कुल तीन हजार रूपये चुकाने होंगे जबकि अब तक गैस के मिलते आ रहे घरेलू एलपीजी सिलेंडर का प्रयोग भी सरकारी कालेज की मेस में नहीं होगा। यहां पर कामर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग होगा। ऐसे में जहां मंहगाई से लड़ाई लड़ी गई है वहीं कानूनी दायर में रह कर हो यह भी सुनिश्चित किया गया है।

घग्गर को दुरुस्त करना दूसरे ही चरण में अटका, Could not channelized river Ghagger


-दो दशकों में मात्र 17.5 किलोमीटर ही हो पाया चैनेलाइजेशन का काम
-केंद्र ने पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और संगरूर के 12 शहरों के लिए घोषित किया 296.96 करोड़ का प्रोजेक्ट
फोटो: 4
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दक्षिणी-पूर्वी पंजाब में बरसात के दिनों में लगभग हर दूसरे साल तबाही मचाने वाले घग्गर दरिया के 'बल-बिंगÓ निकालने के दावे प्रति दावे के नाम पर मालवा क्षेत्र में नारे लगते रहते हैं, लेकिन कई चरणों में होने वाला काम दूसरे ही चरण में अटक गया है। हालांकि साफ सफाई के नाम पर पूरे घग्गर दरिया को पंजाब व हरियाणा दोनों ने ही एक प्रकार से तिलांजली दे रखी है, लेकिन दोनों ही राज्य घग्गर दरिया का जहां कहीं से भी दोहन हो सकता करने में कोर कसर नहीं छोड़ रहे।
पंजाब में चंडीगढ़ व हिमाचल-हरियाणा   के पास जीरकपुर क्षेत्र में जहां तहां से रेता-बजरी निकालने का काम पंजाब की तरफ से इतना हुआ कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से रोक लगानी पड़ी। हालांकि पंजाब ने अपने जिलों एसएएस नगर, पटियाला, संगरूर, मानसा के बड़े भूभाग के लोगों को फलैश फ्लड से बचाने कहीं भी दरिया की सफाई व किनारे मजबूत करने अथवा तटबंधों पर काम शुरु नहीं किया है।
पंजाब व हरियाणा सीमा पर दोनों तरफ बहने वाले घग्गर के मामले में हरियाणा ने चीका रोड पर हांसी बुटाना नहर के नीचे बने साइफन से मिट्टी निकलाने और प्रति टिपर दो हजार रूपये तक में बेचने का काम बड़े पैमाने पर शुरु कर रखा है। बाकायदा टेंडर भी जारी किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा अंबाला, कैथल जिलों से लेकर दक्षिणी छोर तक कहीं भी सफाई शुरु नहीं की गई है।
बाढ़ की मार सबसे अधिक झेलने वाले पटियाला व संगरूर जिलों में करीब दो सौ किलोमीटर क्षेत्र पर पड़ती है। इस सबके बावजूद घग्गर की बाढ़ नियंत्रण का कार्य दूसरे ही चरण में अटक गया है। पहले चरण में खनौरी से मकरोड़ साहिब के बीच मात्र 17.5 किलोमीटर नदी के चैनेलाइजेशन का काम मुक म्मल हुआ है।
दूसरे चरण के 21.7 किलोमीटर में मकरोड़ साहिब से पंजाब के कड़ैल अथवा हरियाणा के जाखल तक चैनेलाइज करने के बाद अन्य सहायक नदियों के किनारे पक्के करने के प्रोजेक्ट शुरु होने थे। इसी क्रम में हरियाणा राज्य की ओर से अपने क्षेत्र में बांध बनाने को पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में 70 गांवों के आठ फीट पानी में डूबने का हवाले दे आपत्ति जताई गई तो केंद्र की ओर से फरवरी में प्रोजेक्ट रोकने पर उपमुख्य मंत्री सुखबीर बादल ने मूणक में लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
इसके बाद केंद्र ने पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और संगरूर के 12 शहरों के लिए 296.96 करोड़ का प्रोजेक्ट दिए जाने की घोषणा कर रखी है। इसमें डेरा बस्सी, बनूड़, राजपुरा, घनौर, पातड़ां, खनौरी, लहरा गागा, मूणक, फतेह गढ़ साहिब, नाभा, बसी पठाना, मंडीगोबिंद गढ़ के नाम शामिल हैं।

जीवनदायनी नदी हो गई डायन!, The river that gave birth turns to killer


- जहां कभी मछलियां पकडऩे के ठेके होते थे वहां पांव-खुर गलने लगे अब टयूबवेलों के पाइप भी नहीं टिकते
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हिमाचल प्रदेश के डगशाई से शुरु हो पाकिस्तान तक बहने वाली घग्गर नदी से पंजाब-हरियाणा के अलावा राजस्थान भी प्रभावित होता है, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा पटियाला व संगरूर जिलों में है। करीब दो सौ किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली इस नदी में कभी मछली पकडऩे के लिए सरकारी स्तर पर ठेके हुआ करते थे। पर जीवन दायनी ये नदी अब करीब करीब डायन का रूप धारण कर गई है।
पंजाब व हरियाणा सीमा पर बहने वाली घग्गर नदी के एक तो अब बरसाती होकर रह गई है। जब भी पानी आता है तो बाढ़ के रूप इसके अलावा दस महीने इसमें बहने वाले पानी की हालत इन दिनों कुछ ऐसी हो गई है कि आसपास के खेतों में ट्यूबवेल के पाइप भी गलने लगे हैं और कई स्थानों पर अच्छे मैटल की और पानी में ही डूबने के लिए बनी मोटर भी जंग से जूझ रही होती है।
क्षेत्र में धर्मेहड़ी गांव के बाशिंदे हरदीप सिंह बताते हैं कि पहले घग्गर नदी का पानी सिंचाई के काम में भी आता था। नलकूप की जरूरत तो बाद के सालों में ही पड़ी है। लोग याद करते हैं कि अब पशु इस नदी के पास फटकते नहीं हैं। अगर मजबूरी में इंसानों को आना जाना पड़ जाए तो पांव गलने लग जाते है। गुरदयालपुरा बीड़ के पास मरोड़ी गांव के कश्मीर सिंह बताते हैं कि जो लोग आसपास पशु चराने ले आते है और नदी के एक से दूसरे छोर पर आना जाना पड़ जाए तो जानवरों के खुर तक गल जाते हैं। नदी का क्रिस्टल क्लीयर पानी अब काला-भूरा हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि थापर यूनिवर्सिटी और पीपीसीबी के आठ सदस्यों दल की ओर से की गई छह साल पहले की गई मानीटरिंग में सामने आया कि नाइकेटा पेपर मिल मुबारकपुर से पहले लिए गए पानी के सैंपलों मे आर्गेनिक तत्वों, बीओडी सीओडी की मात्र क्रमश 4.2 व 10 माइक्रो ग्राम पाई गई। जिंक 0.46, कैल्शियम 28, मैग्नीशियम 20 एमजी पाया गया। जीरकपुर के आगे अंबाला-चंडीगढ़ पुल पर बीओडी 132, सीओडी 240 एमजी और कैल्शियम 160 व मैग्नीशियम 52 पर आ गया। जल जीवन गिरकर 20 फीसदी रह गया, किसी भी तरह की मछली इस पानी में 96 घंटों में मर जाती है। हालात इसके बाद से बिगड़े ही हैं और जीरकपुर के बाद घग्गर में पंजाब हरियाणा के बनूड़, घनौर, सनौर, अंबाला, राजपुरा, पटियाला आदी कई शहरों का सीवर आ मिलता है और दर्जन भर शराब व गत्ता फैक्ट्रीयां सहित कई इंडस्ट्री अपना योगदान दे रही हैं।

मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में, जांच फिर ठुस्स, Main accused is in jail, police find no clue


फ्लैग: पंजाबी युनिवर्सिटी में फर्जी भर्ती घोटाला
दैनिक जागरण फालोअप
-एक सप्ताह तक दो बार रिमांड ले किसी का पता ना उगलवा पाई पुलिस, पहले दिन के बाद नहीं हुई कोई बड़ी रिकवरी
भूपेश चट्ठा, पटियाला

दो सौ लोगों को पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला व नहरी विभाग में नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों रूपये ठगने और युनिवर्सिटी परिसर में साक्षात्कार से लेकर नियुक्ति पत्र देने और पेरोल पर नाम दर्ज कर हस्ताक्षर तक करवा वेतन तक दे देने के मुख्य आरोपी के दो बार सात दिन से च्यादा पुलिस रिमांड में रहने के बाद अब न्यायिक हिरासत में पहुंच जाने के बाद पूरे प्रकरण की जांच एक बार फिर ठुस्स हो गई है।
दिलचस्प है कि मामले के मुख्य आरोपी अमरजीत सिंह कंग के अलावा उसके पत्नि बच्चे सहित करीब एक दर्जन लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया है, लेकिन कंग की पुलिस रिमांड में हुई 'सख्त जांचÓ के बावजूद पुलिस उसके किसी भी करीबी का पता ठिकाना नहीं जान पाई है। घर के ही रिश्तेदारों ने मुखिया को अपने गायब होने के बाद के छिपने के ठिकाने ना बताए हों ऐसा मानना मुश्किल लगता है। विदेश भाग जाने के भी पुख्ता सुराग नहीं है और पंजाब पुलिस के रिमांड पर एक सप्ताह से च्यादा रहने के बाद आरोपी कुछ ना उगले यह बात भी गले नहीं उतरती। पहले दिन की शानदार रिकवरी के बाद कोई कार्रवाई ना होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। याद रहे कि कंग को 24 मई को पुलिस ने पकड़ लिया और 26 मई को एसएसपी ने आरोपी से क्या क्या मिला का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने रखा। इसमें 51 लाख रूपये की नगदी के अलावा दो कारें, दो कंप्यूटर, 50 जाली नियुक्ति पत्र, मोहरें व प्लाटों की रजिस्ट्रीयां बरामद की गई हैं। इन नियुक्ति पत्रों में युनिवर्सिटी के अलावा नहरी विभाग में कलर्क, सेवादार, ड्राइवर, व बेलदारों के नियुक्ति पत्र शामिल थे। गिरोह ने 69 कलर्क, 87 सेवादार, 6 ड्राइवर, चार पुलिस कंमाडो, नहरी विभाग में नौ बेलदार सहित करीब दो सौ लोगों से ठगी मारी है।
 वहीं 'दैनिक जागरणÓ की ओर से संपर्क किए जाने पर एसपी सिटी दलजीत सिंह राणा कहते हैं कि पहले दिन के बाद भी कुछ रिकवरी तो हुई है। किसी अन्य आरोपी के पकड़े जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि अर्बन एस्टेट थाने के एसएचओ इस मामले पर रेड कर रहे हैं। जल्द ही कुछ लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावना है।
इसी संबंध में अर्बन एस्टेट थाने के प्रभारी मनजीत सिंह कहते हैं कि मुख्य आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और शुरुआती जांच में हुई रिकवरी के बाद च्यादा कुछ नहीं हुआ है। वे इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि अन्य आरोपियों में से किसी ओर की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है।

ना विकास ना एंटी इंक्बेंसी, मुद्ïदा सिर्फ 'आउट साइडर्स', Outsiders the only issue in municipal election


निगम चुनाव
-करीबी रिश्तेदारों-मित्रों के दम पर जीतने की ताल ठोक रहे उम्मीदवार
-राजनीतिक दलों का एजेंडा नहीं सिर्फ भावनात्मक मुद्दे छाए हैं चुनाव पर
फोटो: निगम का लोगो लगाया जा सकता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
जमीनी स्तर पर चुनावी लोकतंत्र हो और शहर का हर इंसान प्रत्यक्ष रूप से जिस राजनीतिक सत्ता के साथ प्रभावी रूप से जुड़ा हो वहां चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी से जुड़ी कोई बात नहीं हो रही है। ना सत्ता पक्ष विकास की बात कर रहा है और ना विपक्ष एंटी इंक्बेंसी की। सत्ता की पहली सीढ़ी पर सिर्फ और सिर्फ एक ही मुद्ïदा छाया है वो है, 'आउट साइडर्सÓ।
दिलचस्प है कि इस मुद्दे से शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सभी परेशान हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने पार्टी स्तर पर चुनाव ना लडऩे की घोषणा कर रखी है और पंजाब पीपल्स पार्टी चुनाव चिन्ह को लेकर जूझ रही है।
पटियाला नगर निगम के चुनावों में अकाली-भाजपा गठबंधन की पूरी तरह से कमान संभाल रहे जिले के इकलौते केबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा स्वीकार करते हैं कि कुछ वार्डों में उम्मीदवार का आउट साइडर होना मुद्दा बन गया है और पार्टी एक दो जगहों पर रणनीति में बदलाव भी करने जा रही है। विकास की बात ना होने के सवाल पर वे कहते हैं कि अभी प्रचार शुरु हुआ है। आने वाले दिनों में गठबंधन सरकार की ओर से सवा पांच सालों में किए गए विकास को जनता के सामने रखा जाएगा।
दूसरी ओर हर उम्मीदवार अपने करीबी रिश्तेदारों-मित्रों के दम पर जीतने की ताल ठोक रहा है और विरोधी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े रिश्तेदारों व व्यवसाय में साथ काम करने वालों का समर्थन मन व धन से खुलकर और तन से देर सवेर प्राप्त कर रहा है। इतना ही राजनीतिक दलों का एजेंडा कहीं दिखाई नहीं दे रहा और सिर्फ भावनात्मक मुद्दे छाए हैं। निगम चुनाव पर करीबी निगाह रखने वाले कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों का एजेंडा तो वैसे ही दिल्ली से चल कर पटियाला के निगम तक आते आते अप्रभावी हो जाता है, जबकि अकाली दल सिर्फ धर्म और क्षेत्र की राजनीति करता है जो शहरों में चल नहीं पाती। चुनावी विश्लेषक ये भी कहते हैं कि शहर में कांग्रेस हाल के विधान सभा चुनावों में बड़े अंतर से जीती है और अकाली दल ने प्रदेश में सत्ता फिर से पाई है। ऐसे में कांग्रेस का शहर में बड़ा वोट बैंक है और राज्य की सत्ता पर अकाली-भाजपा गठबंधन फिर से आया है। ऐसे में कुटुंब ही 'अपने बंदेÓ के लिए जी जान से काम करेगा यह तय है। पार्टी पालीटिक्स संभव है काम ना करे।

ना इंडस्ट्री ना प्लांट, फिर भी प्रदूषण से मुक्ति नहीं, No industry, no plant, still no relief from pollution


पर्यावरण दिवस आज
 जिस नदी अथवा ख्वाजा की पूजा करते बुजुर्ग करते थे उसमें सीवरेज डाल दिया गया

-शहर के फैंफड़े कहे जाने वाली बारांदरी के दुर्लभ पेड़ों की जड़ों में पेस्टीसाइड डाल सांस की नली में छेद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
उत्तर भारत के दूसरे सबसे कम प्रदूषित शहर का दर्जा रखने वाले पटियाला शहर में ना तो जालंधर की तरह लेदर की इंडस्ट्री है और ना ही लुधियाना की तरह इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री और ना ही बठिंडा की तरह कोई थर्मल प्लांट ही लगा है जिससे सोचा जा सके कि 'विकास का पहिया घूमेगाÓ तो थोड़ा बहुत 'साइड इफेक्टÓ बर्दाश्त करना भी पड़ेगा। लेकिन ऐसा कुछ विकासोन्मुखी कारण ना होने के बावजूद शहर को प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
दिलचस्प है कि शहर के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र फैक्ट्री एरिया में अब फैक्ट्री तो कोई रही नहीं और प्लाट कट कर रिहायशी मकान बन पड़े हैं और कुछ यहां ना हुआ तो लोगों ने अपने घरों ा कूड़ा कचरा ही छोटी नदी में उड़ेलना शुरु कर दिया। शुरु में तो सड़क चौड़ी होती रही पर अब लगातार बनी रहने वाली दुर्गंध का कारण बन गई है।
वर्तमान में इंडस्ट्री का हब बनाए गए फोकल प्वाइंट में मार्बल व टाइलों के गोदाम ज्यादा है और उत्पादन करने वाली ईकाइयां कम हैं ऐसे में इंडस्ट्री से होने वाला प्रदूषण कम और वाहनों का धुआं यहां पर ज्यादा दिखाई देता है।
शहर भर के अस्पतालों व सेहत संस्थानों से निकलने वाली बायो मेडिकल वेस्ट को तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दुरुस्त र दिया पर घरेलू कचरा उठवाने में नगर निगम के दावे ठुस्स ही रहें हैं। हालांकि सनौरी अड्डा के पास के डंपिंग ग्राउंड के आसपास के लोगों को राहत जरूर मिल गई है।
शहर की जिस नदी को बुआ का दर्जा प्राप्त था और जिसे समय समय पर यहां के महाराजा 'नत्थ व चूड़ाÓ चढ़ा कर शान्त रहने की गुहार लगाई जाती थी और जिसके  किनारे पर पटियाला बसा था, वो 'पटियाला की रावÓ अब पूरी तरह से गंदा नाला बन गई है। कारण एकमात्र है कि जिस नदी अथवा ख्वाजा की पूजा करते बुजुर्ग करते थे उसमें सीवरेज डाल दिया गया है।
शहर के फैंफड़े कहे जाने वाली बारांदरी में नए पेड़ लगाने के नाम पर अशोका गाड़ दिया गया जबकि आसपास रहने वाले रईसों पेड़ों के गिरे पत्ते पसंद नहीं है या कोई पेड़ कथित रूप से वास्तु दोष उत्पन्न करता है, तो इस शहर में ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्होंने दुर्लभ पेड़ों की जड़ों में पेस्टीसाइड डाल कर एतिहासिक बारांदरी अथवा सांस की नली में छेद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पर्यावरण दिवस पर संकल्प, environment day, resolution


 जिले का पर्यावरण दुरुस्त करना है: डिप्टी कमिश्नर जीके सिंह
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पटियाला के डिप्टी कमिश्नर और पर्यावरण पर अक्सर लिखते रहने वाले जीके सिंह इस साल पर्यावरण दिवस पर बधाई देने के साथ ही कहते हैं कि जिले की हवाओं को जहर मुक्त करना है, जिले के दरियाओं  और धरती को पूरी तरह से सुरक्षित करने की दिशा में पेस्टिसाइड मुक्त खेती को बढ़ावा देना और पौधारोपण के अभियान चलाए जाएंगे।

शहर को डंपिंग ग्राउंड से मुक्त करवाना है: मेयर अजीतपाल सिंह कोहली
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शहर को डंपिंग ग्राउंड से मुक्त करवाना है और शहर के हर नागरिक को प्रदुषण मुक्त स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध करवाना है। मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि अगले पर्यावरण दिवस से काफी पहले ही कूड़ा कचरा हटा दिया जाएगा। हर घर के बाहर से कूड़ा कचरा हटा कर शहर से बाहर ले जाया जाएगा। मेयर कहते हैं कि हम हर चीज पर्यावरण से लेते हैं ऐसे में हमारा भी फर्ज बनता है कि आसपास का पर्यावरण ठीक रखें और मेयर होने की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मोक फ्री बनाना है: वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह
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पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह कहते हैं कि उनका संकल्प है कि इस साल में वे यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मोक फ्री बना दें। पर्यावरण की दिशा में कैंपस को और अधिक हरा भरा बनाने के प्रयास के अलावा पाठयक्रम में वे पर्यावरण को हिस्सा बनाना चाहते हैं। बताते हैं कि जूलोजी विभाग को अब जूलोजी व पर्यावरण विभाग करने के अलावा एमए पर्यावरण नाम से इस साल नया पाठयक्रम से शुरु किया गया है। इसी विषय पर सेमीनार इत्यादि भी करवा कर जागरुकता लाने का प्रयास करेंगे।

छप्पड़ों से प्रदूषित हो रहे भूमिगत जल को बचाना है: पंचायती राज मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा
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गांवों में छप्पड़ों अथवा दूषित पानी के तालाबों से प्रदूषित हो रहे भूमिगत जल को बचाने का सपना संजोए पंचायती राज व ग्रामीण विकास राच्य मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि इन तालाबों का पानी प्रदूषण मुक्त कर सिंचाई के काम लाने तक के प्रयास करने है और पंचायतों को साथ लेकर इसी मानसून में पौधे लगाने का कार्यक्रम है इससे ना केवल अच्छा लेंड स्केप होगा अपितु पर्यावरण भी बेहतर करने में सहयोग मिलेगा है। वे कहते हैं कि साढ़े बारह हजार गांव हैं एक में 50 पेड़ भी लग गए तो पंजाब हरा भरा हो जाएगा।


थर्मल प्लांटों में उपाय किए जा रहे हैं पौधारोपण भी करेंगे: चेयरमैन पावरकाम इंजी. केडी चौधरी
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 पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि पावरकाम थर्मल प्लांटों में से प्रदूषण कम से कम करने के उपाय कर रहा है और आसपास के क्षेत्रों में पौधरोपण करवाया गया है। पिछले साल पावरकाम के विभिन्न कार्यालयों में एक लाख से अधिक पौधे लगाए थे। इस बार इससे भी सघन अभियान चलाया जाएगा। व्यक्तिगत संकल्प के नाम पर वे कहते हैं कि पर्यावरण का वे सदैव ख्याल रखते हैं और जीवन में अपनाया है।