निगम चुनाव
-करीबी रिश्तेदारों-मित्रों के दम पर जीतने की ताल ठोक रहे उम्मीदवार
-राजनीतिक दलों का एजेंडा नहीं सिर्फ भावनात्मक मुद्दे छाए हैं चुनाव पर
फोटो: निगम का लोगो लगाया जा सकता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
जमीनी स्तर पर चुनावी लोकतंत्र हो और शहर का हर इंसान प्रत्यक्ष रूप से जिस राजनीतिक सत्ता के साथ प्रभावी रूप से जुड़ा हो वहां चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी से जुड़ी कोई बात नहीं हो रही है। ना सत्ता पक्ष विकास की बात कर रहा है और ना विपक्ष एंटी इंक्बेंसी की। सत्ता की पहली सीढ़ी पर सिर्फ और सिर्फ एक ही मुद्ïदा छाया है वो है, 'आउट साइडर्सÓ।
दिलचस्प है कि इस मुद्दे से शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सभी परेशान हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने पार्टी स्तर पर चुनाव ना लडऩे की घोषणा कर रखी है और पंजाब पीपल्स पार्टी चुनाव चिन्ह को लेकर जूझ रही है।
पटियाला नगर निगम के चुनावों में अकाली-भाजपा गठबंधन की पूरी तरह से कमान संभाल रहे जिले के इकलौते केबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा स्वीकार करते हैं कि कुछ वार्डों में उम्मीदवार का आउट साइडर होना मुद्दा बन गया है और पार्टी एक दो जगहों पर रणनीति में बदलाव भी करने जा रही है। विकास की बात ना होने के सवाल पर वे कहते हैं कि अभी प्रचार शुरु हुआ है। आने वाले दिनों में गठबंधन सरकार की ओर से सवा पांच सालों में किए गए विकास को जनता के सामने रखा जाएगा।
दूसरी ओर हर उम्मीदवार अपने करीबी रिश्तेदारों-मित्रों के दम पर जीतने की ताल ठोक रहा है और विरोधी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े रिश्तेदारों व व्यवसाय में साथ काम करने वालों का समर्थन मन व धन से खुलकर और तन से देर सवेर प्राप्त कर रहा है। इतना ही राजनीतिक दलों का एजेंडा कहीं दिखाई नहीं दे रहा और सिर्फ भावनात्मक मुद्दे छाए हैं। निगम चुनाव पर करीबी निगाह रखने वाले कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों का एजेंडा तो वैसे ही दिल्ली से चल कर पटियाला के निगम तक आते आते अप्रभावी हो जाता है, जबकि अकाली दल सिर्फ धर्म और क्षेत्र की राजनीति करता है जो शहरों में चल नहीं पाती। चुनावी विश्लेषक ये भी कहते हैं कि शहर में कांग्रेस हाल के विधान सभा चुनावों में बड़े अंतर से जीती है और अकाली दल ने प्रदेश में सत्ता फिर से पाई है। ऐसे में कांग्रेस का शहर में बड़ा वोट बैंक है और राज्य की सत्ता पर अकाली-भाजपा गठबंधन फिर से आया है। ऐसे में कुटुंब ही 'अपने बंदेÓ के लिए जी जान से काम करेगा यह तय है। पार्टी पालीटिक्स संभव है काम ना करे।
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