Monday, 4 June 2012

जीवनदायनी नदी हो गई डायन!, The river that gave birth turns to killer


- जहां कभी मछलियां पकडऩे के ठेके होते थे वहां पांव-खुर गलने लगे अब टयूबवेलों के पाइप भी नहीं टिकते
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हिमाचल प्रदेश के डगशाई से शुरु हो पाकिस्तान तक बहने वाली घग्गर नदी से पंजाब-हरियाणा के अलावा राजस्थान भी प्रभावित होता है, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा पटियाला व संगरूर जिलों में है। करीब दो सौ किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली इस नदी में कभी मछली पकडऩे के लिए सरकारी स्तर पर ठेके हुआ करते थे। पर जीवन दायनी ये नदी अब करीब करीब डायन का रूप धारण कर गई है।
पंजाब व हरियाणा सीमा पर बहने वाली घग्गर नदी के एक तो अब बरसाती होकर रह गई है। जब भी पानी आता है तो बाढ़ के रूप इसके अलावा दस महीने इसमें बहने वाले पानी की हालत इन दिनों कुछ ऐसी हो गई है कि आसपास के खेतों में ट्यूबवेल के पाइप भी गलने लगे हैं और कई स्थानों पर अच्छे मैटल की और पानी में ही डूबने के लिए बनी मोटर भी जंग से जूझ रही होती है।
क्षेत्र में धर्मेहड़ी गांव के बाशिंदे हरदीप सिंह बताते हैं कि पहले घग्गर नदी का पानी सिंचाई के काम में भी आता था। नलकूप की जरूरत तो बाद के सालों में ही पड़ी है। लोग याद करते हैं कि अब पशु इस नदी के पास फटकते नहीं हैं। अगर मजबूरी में इंसानों को आना जाना पड़ जाए तो पांव गलने लग जाते है। गुरदयालपुरा बीड़ के पास मरोड़ी गांव के कश्मीर सिंह बताते हैं कि जो लोग आसपास पशु चराने ले आते है और नदी के एक से दूसरे छोर पर आना जाना पड़ जाए तो जानवरों के खुर तक गल जाते हैं। नदी का क्रिस्टल क्लीयर पानी अब काला-भूरा हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि थापर यूनिवर्सिटी और पीपीसीबी के आठ सदस्यों दल की ओर से की गई छह साल पहले की गई मानीटरिंग में सामने आया कि नाइकेटा पेपर मिल मुबारकपुर से पहले लिए गए पानी के सैंपलों मे आर्गेनिक तत्वों, बीओडी सीओडी की मात्र क्रमश 4.2 व 10 माइक्रो ग्राम पाई गई। जिंक 0.46, कैल्शियम 28, मैग्नीशियम 20 एमजी पाया गया। जीरकपुर के आगे अंबाला-चंडीगढ़ पुल पर बीओडी 132, सीओडी 240 एमजी और कैल्शियम 160 व मैग्नीशियम 52 पर आ गया। जल जीवन गिरकर 20 फीसदी रह गया, किसी भी तरह की मछली इस पानी में 96 घंटों में मर जाती है। हालात इसके बाद से बिगड़े ही हैं और जीरकपुर के बाद घग्गर में पंजाब हरियाणा के बनूड़, घनौर, सनौर, अंबाला, राजपुरा, पटियाला आदी कई शहरों का सीवर आ मिलता है और दर्जन भर शराब व गत्ता फैक्ट्रीयां सहित कई इंडस्ट्री अपना योगदान दे रही हैं।

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