-38 करोड़ प्रति दिन पर आया बिजली खरीद का आंकड़ा, 52 दिनों की खरीद दो हजार करोड़ के पार
-चार करोड़ रूपये प्रति मेगावाट थर्मल प्लांट लगाने में तो पांच करोड़ रूपये पन बिजली केंद्र जबकि माइक्रो हायडल पर खर्च साढ़े सात करोड़ रूपये आता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब का बिजली खरीद बिल रिकार्ड स्तर जा पहुंचा है और यह हर घंटे डेढ़ करोड़ रूपये से ज्यादा की गति से और 35 से 38 करोड़ प्रति दिन की दर से बढ़ रहा है। आलम ये है कि 10 जून से धान का सीजन शुरु होने के बाद से अब तक के पहले 52 दिनों में आंकड़ा दो हजार करोड़ के पार जा चुका है। दिलचस्प है कि इतने में पंजाब एक नया थर्मल प्लांट लगा लेता जो अगले 25 साल राज्य को बिना कमाई और कमीशन की बिजली देता।
बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि थर्मल प्लांट लगाने में खर्च चार करोड़ रूपये प्रति मेगावाट पर पहुंच गया है और ये खर्च भी अति आधुनिक सुपर क्रिटिकल व पर्यावरण को कम हानि पहुंचाने वाली तकनीक का है। हालांकि कुछ साल पहले पुरानी तकनीक के प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र में तीन करोड़ प्रति मेगावाट पर भी लगते रहे हैं।
वर्तमान में सात सौ मेगावाट क्षमता की लग रही एक यूनिट के अलावा सस्ती बिजली देने वाले पन बिजली केंद्र पर प्रति मेगावाट कुछ अधिक पांच करोड़ रूपये, जबकि छोटे माइक्रो हायडल पर खर्च साढ़े सात करोड़ रूपये आता है।
इसी संबंध में पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन वर्तमान सरकार की आलोचना भी करती है कहती है कि अपना बिजली उत्पादन बढ़ाने की बजाए बिजली खरीद पर सारा जोर लगाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछली बार सत्ता में आने के समय 2007-08 में पंजाब में कुल उपलब्ध बिजली का 41 फीसद हिस्सा खरीदी गई बिजली का होता था पर अब बिजली खरीद पर निर्भरता इस कदर बढ़ गई है कि पिछले साल उत्पादन की तुलना में कुल खरीदी गई बिजली का हिस्सा 53 फीसद पर आ गया है और यह किसी भी सूरत में इस साल छह हजार करोड़ से कम नहीं रहने वाला। याद रहे कि इतनी राशि में उस संस्थान के लिए प्लांट लगाना मुश्किल नहीं है जिसके पास अपनी मूलभूत सुविधाओं का पूरा ढ़ांचा हो और प्लांट लगा कर सफलता पूर्वक चलाने का अनुभव रहा हो।
वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि हर तरह के प्रबंध किए गए है। कुछ 20 से 25 सालों के लंबी अवधि के खरीद समझौते हैं तो कुछ 10 जून से 15 सितंबर के लिए किए गए हैं। पंजाब में थर्मल प्लांट भी लग रहे हैं अगले साल मार्च-अप्रैल में तलवंडी साबो का पहला यूनिट चालू हो जाएगा, अगस्त-सितंबर में राजपुरा में यूनिट बिजली उत्पादन शुरु कर देगा। फिर छह छह माह के अंतराल पर कमीशन होंगे।