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Tuesday, 7 August 2012

...इतने में तो लग जाता थर्मल प्लांट, Punjab’s electricity purchase bill increases 1.5 crore every hour


-38 करोड़ प्रति दिन पर आया बिजली खरीद का आंकड़ा, 52 दिनों की खरीद दो हजार करोड़ के पार
-चार करोड़ रूपये प्रति मेगावाट थर्मल प्लांट लगाने में तो पांच करोड़ रूपये पन बिजली केंद्र जबकि माइक्रो हायडल पर खर्च साढ़े सात करोड़ रूपये आता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब का बिजली खरीद बिल रिकार्ड स्तर जा पहुंचा है और यह हर घंटे डेढ़ करोड़ रूपये से ज्यादा की गति से और  35 से 38 करोड़ प्रति दिन की दर से बढ़ रहा है। आलम ये है कि 10 जून से धान का सीजन शुरु होने के बाद से अब तक के पहले 52 दिनों में आंकड़ा दो हजार करोड़ के पार जा चुका है। दिलचस्प है कि इतने में पंजाब एक नया थर्मल प्लांट लगा लेता जो अगले 25 साल राज्य को बिना कमाई और कमीशन की बिजली देता।
बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि थर्मल प्लांट लगाने में खर्च चार करोड़ रूपये प्रति मेगावाट पर पहुंच गया है और ये खर्च भी अति आधुनिक सुपर क्रिटिकल व पर्यावरण को कम हानि पहुंचाने वाली तकनीक का है। हालांकि कुछ साल पहले पुरानी तकनीक के प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र में तीन करोड़ प्रति मेगावाट पर भी लगते रहे हैं।
वर्तमान में सात सौ मेगावाट क्षमता की लग रही एक यूनिट के अलावा सस्ती बिजली देने वाले पन बिजली केंद्र पर प्रति मेगावाट कुछ अधिक पांच करोड़ रूपये, जबकि छोटे माइक्रो हायडल पर खर्च साढ़े सात करोड़ रूपये आता है।
इसी संबंध में पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन वर्तमान सरकार की आलोचना भी करती है कहती है कि अपना बिजली उत्पादन बढ़ाने की बजाए बिजली खरीद पर सारा जोर लगाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि  पिछली बार सत्ता में आने के समय 2007-08 में पंजाब में कुल उपलब्ध बिजली का 41 फीसद हिस्सा खरीदी गई बिजली का होता था पर अब बिजली खरीद पर निर्भरता इस कदर बढ़ गई है कि पिछले साल उत्पादन की तुलना में कुल खरीदी गई बिजली का हिस्सा 53 फीसद पर आ गया है और यह किसी भी सूरत में इस साल छह हजार करोड़ से कम नहीं रहने वाला। याद रहे कि इतनी राशि में उस संस्थान के लिए प्लांट लगाना मुश्किल नहीं है जिसके पास अपनी मूलभूत सुविधाओं का पूरा ढ़ांचा हो और प्लांट लगा कर सफलता पूर्वक चलाने का अनुभव रहा हो।
 वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि हर तरह के प्रबंध किए गए है। कुछ 20 से 25 सालों के लंबी अवधि के खरीद समझौते हैं तो कुछ 10 जून से 15 सितंबर के लिए किए गए हैं। पंजाब में थर्मल प्लांट भी लग रहे हैं अगले साल मार्च-अप्रैल में तलवंडी साबो का पहला यूनिट चालू हो जाएगा, अगस्त-सितंबर में राजपुरा में यूनिट बिजली उत्पादन शुरु कर देगा। फिर छह छह माह के अंतराल पर कमीशन होंगे।

Saturday, 4 August 2012

तीन लाख यूनिट बचाने तीन करोड़ का टाइम टेबल बदला, To save 3 lu units, pspcls changes schedule of 3 crores


-हमे खबर थी पर लोगों को संदेश देना जरूरी: चेयरमैन
-सरकारी कार्यालयों में एसी पर प्रतिबंध से बचे दो लाख यूनिट और लाइट के अंतर से एक लाख यूनिट अनुमानित: डायरेक्टर वितरण
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 23 सौ लाख यूनिट का आंकड़ा छूने को है, मांग व आपूर्ति का अंतर पिछले एक महीने 20 दिन से 250 से 395 लाख यूनिट प्रतिदिन के बीच रह रहा है। इसी बीच पंजाब सरकार ने एक आदेश जारी कर सरकारी कार्यालयों का समय बदल दिया और एसी बंद करवा दिए। दिलचस्प है कि सरकार की मशक्कत से बिजली के तो कुल तीन लाख यूनिट बचे पर राज्य की करीब तीन करोड़ की आबादी का टाइम टेबल जरूर बदल गया है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी से इसी संदर्भ में बात किए जाने पर उन्होंने बताया कि एसी बंद करने से दो लाख यूनिट बिजली बची है। साथ ही वे कहते हैं कि सबसे पहले अपने कार्यालयों में एसी बंद करने वाला पावरकाम ही था। वे यह भी स्वीकार करते हैं कि ये मात्रा खासी कम है। उन्हें इस बात की खबर थी पर लोगों को संदेश देना जरूरी है कि सरकारी अफसर गर्मी में बिना एसी चलाए काम कर रहे हैं और इसे देखकर लोग भी किफायत से एसी का प्रयोग करें।
 चेयरमैन कहते हैं कि राज्य में चल रहे सभी एसी का कुल लोड 15 सौ से दो हजार मेगावाट के बीच है। यह खासा अधिक है लोग किफायत से एसी का प्रयोग करें। कम से कम बेतहाशा बर्बादी ना करें और प्रयोग में 50 फीसद कमी भी ले आएं तो कट रोके जा सकते हैं।
दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों में एसी पर प्रतिबंध से बचे दो लाख यूनिट के अलावा समय में हुए बदलाव से लाइट के प्रयोग के अंतर से संभावित रूप से एक लाख यूनिट बचने का अनुमान है। डायरेक्टर वितरण अरुण वर्मा बताते हैं कि सटीक आंकड़े आने अभी शेष है।
याद रहे कि पावरकाम एक दिन में बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच का अंतर रात 12 बजे से अगले दिन रात 12 बजे के बीच 24 घंटों में निकालता है। साधारण परिस्थितियों में बिजली का आंकड़ा किसी भी समय में मेगावाट में तोला जाता है तो पूरे दिन की खपत लाख यूनिट में नापी जाती है।
दूसरी ओर पावरकाम के कुछ अधिकारी कार्यालय समय बदलने के अलावा अभी किसी अन्य प्रकार के उपाय नहीं करने जा रहा है। अपने यहां पर एसी पूरी तरह से प्रतिबंधित होने का दावा करता है तो अन्य कार्यालयों में प्रतिबंध लागू करने की जिम्मेदारी डिप्टी कमिश्नरों पर डालते हैं। इतना ही नहीं पावरकाम के 65 हजार कर्मियों और सरकारी विभागों में काम करते पांच लाख कर्मियों और इन विभागों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी तीन करोड़ की आबादी का टाइम टेबल बदलने पर स्वयं को फिलहाल 'मानीटरÓ के नजरिए से देखते हैं।

बिजली ओवर ड्रा : पंजाब अनुशासित पर यूपी, हरियाणा और राजस्थान.., Power over draw; Punjab is a disciplined state


-जुलाई महीने में 29 तक औसतन ओवर ड्रा- पंजाब ने पांच फीसद, उत्तर प्रदेश ने 31, हरियाणा ने 18 और राजस्थान ने 15 फीसद ज्यादा ली बिजली
-कई बार उत्तर प्रदेश ने 70 फीसद ज्यादा किया ओवर ड्रा, चार बार मिली 'सीÓ ग्रेड की चेतावनी
-हमारे निर्देश स्पष्ट ग्रिड को खतरे में डाल ना हो ओवर ड्रा: चेयरमैन
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
उत्तरी ग्रिड के दो दिनों में लगातार दो बार ठप होने के बाद, बिजली ओवर ड्रा करने के लग रहे आरोपों पर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने पावरकाम मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा है कि उत्तरी ग्रिड से बिजली लेने वाले सभी राज्यों में पंजाब सबसे अधिक अनुशासन में है और ये बात वे नहीं आंकड़े कह रहे हैं।
नार्दन रीजन लोड डिस्पैच सेंटर से प्राप्त जानकारी के हवाले से इंजी. केडी चौधरी ने बताया कि जुलाई महीने में 29 तारीख तक ग्रिड से बिजली लेने वालों के महीने भर के औसत ओवर ड्रा में पंजाब ने पांच फीसद बिजली ली है, जबकि उत्तर प्रदेश ने 31, हरियाणा ने 18 और राजस्थान ने 15 फीसद ज्यादा बिजली ली है।
इसी बीच कई बार ऐसा समय भी आया है जब उत्तर प्रदेश ने 70 फीसद ज्यादा ओवर ड्रा किया है। 'अब ग्रिड ठप हो सकता हैÓ वाली 'सीÓ ग्रेड की चेतावनी उत्तर प्रदेश को चार बार मिली है, जबकि पंजाब को एक बार भी नहीं मिली है। चेयरमैन बताते हैं कि वे अपने पावर कंट्रोल के सिस्टम आपरेशन विभाग में हाल ही में गए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ग्रिड को खतरे में डाल कर ओवर ड्रा ना किया जाए।
इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि बिजली की मांग कभी भी एक स्तर पर नहीं बनी रहती। ऐसे में कभी ग्रिड से ओवर ड्रा होती है तो कभी अंडर ड्रा, लेकिन फ्रिक्वेंसी को ध्यान में रख कर ही किया जाना चाहिए और एक सीमा में ही रहना चाहिए। चेयरमैन कहते हैं कि आज बुधवार को ग्रिड में मांग कम थी तो पंजाब नो 800 मेगावाट बिजली ओवर ड्रा की है, जबकि पंजाब के लिए उपलब्ध ट्रांसमिशन कोटा 5100 मेगावाट ही है और इसे 300 मेगावाट तक बढ़ाने की ही अनुमति है।

बाक्स
हरियाणा ने नहीं किए शार्ट टर्म खरीद समझौते

गर्मी व धान के सीजन में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पंजाब ने 10 जून से बिजली खरीदने के शार्ट टर्म समझौते किए। नार्मल मानसून की रिपोर्ट को देखते हुए मई तक 32 मिलीयन यूनिट बिजली खरीदी गई। मानसून के ठंडा रहने की खबरों के बाद 1100 मिलीयन यूनिट बिजली के शार्ट टर्म समझौते भी पहली दरों 3.91 रूपये प्रति यूनिट की दर पर हो गए। यह काम भी मई अंत तक निपटा लिया गया। जिसने पंजाब को बचाया, जबकि हरियाणा ने ऐसी बिजली नहीं खरीदी। ऐसे में हरियाणा या तो हर रोज खरीद कर रहा है, या फिर ओवर ड्रा कर रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश ने ओवर ड्रा का 70 फीसद तक का आंकड़ा छुआ है।

एक घंटे में चलाई बिजली, तीन में आधी सप्लाई बहाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहले 2004 और फिर 2008 की सर्दियों में उत्तरी ग्रिड के ठप होने से मिले 'सबक' संभव है उत्तर भारत के बिजली इंजीनियर भूल गए हों, लेकिन एक दिन पहले ग्रिड के ठप होने का 'अनुभव' जरूर काम आया है और उत्तरी ग्रिड व पूर्वी ग्रिड के ठप होने के बाद पंजाब में दोपहर 1:08 बजे गुल हुई बिजली को एक घंटे में चालू कर लिया गया, जबकि तीन घंटे में प्रदेश में बिजली की आधी सप्लाई बहाल कर ली गई और शेष काम शाम ढलने से पहले निपटा लिए गए।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पावर कंट्रोल के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि ग्रिड के ठप होते ही पंजाब को अन्य राज्यों के बिजली सिस्टम से डी-लिंक किया गया और सवा दो बजे भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड ने अपना पहला यूनिट चालू कर लिया। भाखड़ा से मिली बिजली को पहले रोपड़ के श्री गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट को दिया गया और फिर बठिंडा के श्री गुरु नानक देव थर्मल प्लांट को। इसी बीच पंजाब के अपने सभी पन बिजली केंद्रों ने उत्पादन शुरू कर दिया। थर्मल प्लांटों के ठंडे होने से बिजली मिल जाने के चलते इन्हें जल्द चालू करने में मदद मिली। सबसे पहले रोपड़ के दो यूनिट चालू किए गए और साढ़े चार बजे तक 50 फीसद क्षेत्रों में बिजली सप्लाई बहाल कर ली गई। शेष सिस्टम को भी शाम ढलने से पहले चला लिया गया।

Saturday, 21 July 2012

बिजली और महंगी PSPCL chairman justifies hike, Consumers have to pay 12.8 % more far electricity


जागरण ब्यूरो, चंडीगढ़ : पंजाब राज्य बिजली रेगुलेटरी अथारिटी ने राज्य में हर क्षेत्र की बिजली दरें बढ़ा दी हैं। बिजली दरों में 12.8 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी के ताजा फैसले से औसतन 53 से 58 पैसे प्रति यूनिट दाम बढ़ गया है। बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ ही सरकार ने बजट में 2000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त संसाधन जुटाने की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। अथारिटी की चेयरपर्सन रोमिला दुबे ने सोमवार यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 39 से 53 पैसे तक बढ़ोतरी की गई है जबकि औद्योगिक क्षेत्र की दरों में 53 से 58 पैसे की बढ़ोतरी होगी। यह दरें पहली अप्रैल, 2012 से लागू होंगी। अथारिटी ने बिजली निगम को सुझाव दिया है कि बिजली की पुरानी बढ़ी राशि को उपभोक्ताओं से एकमुश्त न वसूला जाए बल्कि उसे किस्तों में लिया जाए।कृषि क्षेत्र की बिजली दरों में 53 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि किसानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि प्रदेश सरकार ही किसानों को जारी सब्सिडी का भुगतान बिजली निगम ल्ल शेष पृष्ठ 2 कालम 1 पर
को करेगी। रेलवे ट्रैकशन की दरें पहले ही सबसे ज्यादा थीं, मगर इसमें भी 17 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। पूर्व के 586 पैसे के मुकाबले अब 603 पैसे प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा। रोमिला दुबे ने बताया कि पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने साल 2012-13 के लिए एनुवल रेवेन्यू रिक्वायरमेंट पिछले साल पेश की थी, जिसके मुताबिक बोर्ड के खर्च व आय में 8983.97 करोड़ रुपये का अंतर था। इसी तरह पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड ने भी अपनी एआरआर पेश की थी। अथारिटी ने इस पर आम जनता व सरकार से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे जिसके आधार पर यह फैसला लिया गया है।

पावरकाम चेयरमैन ने दरों में बढ़ोतरी को वाजिब बताया
-कहा अन्य राज्यों की तुलना में कम मंहगी हुई है बिजली
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी  ने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन की ओर से बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी को वाजिब बताया है।
आज चंडीगढ़ से जारी किए गए टैरिफ में बिजली दरों में 12.08 फीसद की बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा है कि अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में बिजली कम मंहगी की गई है। तामिलनाडू में 37 फीसद, राजस्थान में 27 फीसद, दिल्ली में 26 फीसद, आंध्र प्रदेश में 20.24 फीसद और हरियाणा में 17 फीसद की बढ़ोतरी की गई है।
साथ ही वे यह भी कहते हैं कि आवश्यक्ता अनुसार बिजली की दरें बढ़ाई जानी चाहिए जिससे बिजली का उत्पादन, ट्रांसमिशन व वितरण के बढ़ रहे खर्चों को पूरा किया जा सके। वे दावा करते हैं कि इस मामूली बढ़ोतरी से पावरकाम अपने उपभोक्ताओं को बेहतर सप्लाई दे पाएगा।
वहीं राज्य में बिजली के हालात पर इंजी. केडी चौधरी ने कहा है कि जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून में देरी व कमी के बावजूद पावरकाम सभी वर्गों के उपभोक्ताओं को पड़ोसी राज्यों व राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तुलना में कम कट लगा कर बिजली सप्लाई करने में सफल रहा है। हालांकि इसके लिए पावरकाम ने इसी अवधि में 6658 करोड़ रूपये की बिजली खरीदी है। इसी अवधि में बैंकिंग के माध्यम से ली गई बिजली ने भी अपना योगदान दिया है।
चेयरमैन कहते हैं कि देश के कई राज्यों में दो प्रकार की बिजली की दरें हैं। इनमें एक कनेक्टिड लोड के आधार पर और दूसरी प्रयोग की गई बिजली के आधार पर। ऐसे में जिन राज्यों में दरें कम लगती हैं वहां वास्तव में कम होती नहीं है। बिजली का बिल ज्यादा आता है। जबकि पंजाब में ऐसा नहीं है। यहां उपयोग की गई बिजली के आधार पर ही बिल जारी होते हैं। हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक में इंडस्ट्री को दी जाने वाली बिजली खासी मंहगी है।
चेयरमैन बताते हैं कि 53 लाख उपभोक्ताओं में बीपीएल व सूची दर्ज जातियों से संबंधित उपभोक्तओं को 200 यूनिट बिजली मुफ्त मिलती है, जिनका लोड एक किलोवाट तक है।

Saturday, 7 July 2012

मोतीबाग में लोड ठीकठाक, जांच रूटीन मैटर: चेयरमैन, PSPCL checks electricity load at Motibag palace


-टूटी हुई सीलें जोड़ी गई: पावरकाम 
...विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह स्पष्ट रूप से रूटीन मैटर है और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अथवा प्रदेश सरकार की किसी अन्य अथारिटी के निर्देशों पर नहीं किया गया है। यह पीएसपीसीएल के निर्देशों पर की गई जांच है।

भूपेश चट्ठा, पटियाला
'मोतीबाग पैलेस में लोड ठीक-ठाक है...पैलेस में जांचे जा रहे बिजली मीटर एक रूटीन मैटर है...किसी भी सूचना की पुष्टि करना कर्मियों का फर्ज है...यही किया जा रहा हैÓ पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने 'दैनिक जागरणÓ के साथ बातचीत में उक्त टिप्पणी की है।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के निवास स्थान मोतीबाग पैलेस में बिजली मीटरों की जांच करने आज फिर गई पावरकाम के डिस्ट्रीब्यूशन व इंफोर्समेंट विंग की टीम ने अपनी सात से आठ घंटे की जांच में क्या पाया? के सवाल पर पावरकाम चेयरमैन कहते हैं कि 'सब कुछ ठीक है। मीडिया में रिपोर्ट आती है या कहीं से कोई सूचना आती है तो जांच करना जरूरी है अैार यही किया गया है।Ó
प्रदेश भर में पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से बिजली के मीटरों को घरों से बाहर निकाले जाने के चलाए जा रहे अभियान और पटियाला शहर में से एक लाख 17 हजार मीटरों में से लगभग सभी को घरों से बाहर करने  के बावजूद मोतीबाग पैलेस में से आज भी मीटर ना निकाले जाने की चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने पुष्टि करते हुए कहा कि 'यह भी हो जाएगाÓ
वहीं देर सांय पावरकाम की ओर से जारी   गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि मोतीबाग पैलेस में लगाए गए बिजली मीटरों क संदर्भ में सूचना आने अथवा सामान्य हालात में जांच करना पावरकाम के फील्ड कर्मियों का फर्ज है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। पावरकाम ने जहां सीलें नदारद पाई वहां पर उन्हे जोड़ दिया गया। इसी विज्ञप्ति में एक बार फिर दोहराया गया है कि यह स्पष्ट रूप से रूटीन मैटर है और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अथवा प्रदेश सरकार की किसी अन्य अथारिटी के निर्देशों पर नहीं किया गया है। यह पीएसपीसीएल के निर्देशों पर की गई जांच है।
वहीं पावरकाम के सूत्र बताते हैं कि पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने आज मुख्यमंत्री के समक्ष चंडीगढ़ में स्थिति स्पष्ट की है। जबकि पावरकाम की 14 सदस्यों की टीम ने जांच की है। इनमें दो एक्सीयन चार एसडीओ शामिल हैं। मोतीबाग पैलेस के लोड व 11 मीटरों की जांच की है। इनमें से एक एबी स्टड फार्म और आठ स्र्वेंट क्वाटरों और दो कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम हैं। इनमें से सर्वेंट क्वाटरों के मीटरों की सीलें टूटी पाई गई हैं।


मोतीबाग पैलेस में पावरकाम टीम को नहीं जाने दिया
-बिजली के कनेक्शन, लोड और मीटरों की जांच करने गई थी इंफोर्समेंट विंग टीम
-घर पर किसी के ना होने का हवाला दिया गया, सोमवार को फिर से होगी जांच: चेयरमैन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सरकार में विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के निवास मोतीबाग पैलेस में पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम के इंफोर्समेंट विंग की टीम को आज रविवार को नहीं जाने दिया गया। सुरक्षा कर्मियों की ओर से कहा गया कि 'घर में कोई नहीं है...जब मालिक आ जाएं तभी आनाÓ।
सुरक्षा दस्ते की ओर से दिए गए इस टके से जवाब के बाद पावरकाम की टीम बिना कनेक्शनों की जांच किए ही लौट आई।
 पावरकाम के दस्ते ने मोतीबाग पैलेस के बिजली के कनेक्शनों, कुल लोड और मोतीबाग पैलेस में लगे 11 मीटरों की जांच करने उक्त टीम गई थी। इससे पहले टीम पैलेस के लोड का डाटा एकत्र कर चुकी है।
वहीं पावरकाम के चैयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने इस संबंध में 'दैनिक जागरणÓ को बताया कि आज जांच करने गए अधिकारियों से घर पर किसी के ना होने का हवाला दिया गया है, ऐसे में आज जांच नहीं हो पाई है। साथ ही वे स्पष्ट करते हैं कि ये रूटीन जांच है, इसे आप छापामारी नहीं कह सकते। पावरकाम ने अपने कनेक्शन जांचने होते हैं और मीटरों की जांच करनी होती है। चैयरमैन ने कहा कि अब  सोमवार को फिर से जांच की जाएगी।
दूसरी ओर पावरकाम के सूत्र बताते हैं कि 11 में से आठ मीटरों की सीलें टूटी हुई पाई गई हैं। हालांकि ये सभी कैप्टन अमरिंदर के सरवेंट क्वाटरों की हैं, लेकिन है सभी पैलेस के परिसर में मौजूद हैं। दो कनेक्शन कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम हैं जबकि एक उनके एबी स्टड फार्म के नाम से है। सूत्र ये भी बताते हैं कि लोड अधिक पाए जाने की स्थिति में तीन साल के पुराने बिलों के अनुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी। मौके पर धन राशि ना दिए जाने की सूरत में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
उधर मोतीबाग पैलेस के कर्मियों का कहना है कि सरवेंट क्वाटर बंद पड़े हैं ऐसे में बिजली की रीडींग जीरो आना स्वभाविक है।

पावरकाम मुख्यालय में 'आउट साइडर्स' अलाउ नहीं!, No entry for ‘outsiders’ at PSPCL head office


-नहीं घुसने दिया मीडिया को, गेट पर पुलिस की तैनात
फोटो :
भूपेश चट्ठा, पटियाला
ेसेवा का अधिकार देने के साथ भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन देने का दावा करने वाली पंजाब सरकार की सौ फीसद पूंजी वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन व पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के गठन के बाद आए केंद्र के पहले किसी बड़े पदाधिकारी के लिए पावरकाम प्रशासन ने अपने मुख्यालय को किसी किले में तबदील कर दिया और अपने मुख्यालय में 'आउट साइडर्सÓ को तब तक 'अलाउÓ नहीं किया जब तक उनके मुख्य अतिथि गए नहीं। इस अवधि के दौरान पावरकाम के अधिकतर अधिकारियों ने फोन 'नॉट रिसपांसÓ पर लगे रहे। आज सोमवार को पावरकाम मुख्यालय में केंद्र सरकार के ऊर्जा सचिव उमाशंकर ने दौरा किया है।
 दिलचस्प है कि उनका यह दौरा भी 'पूर्ण पारदर्शिताÓ वाले ऑन लाइन सिस्टम को देखने के लिए किया गया बताया जा रहा है। जिसके तहत बिलिंग से लेकर शिकायत तक के निपटारे को पूरी तरह से पारदर्शिता के साथ करने का दावा पावरकाम की ओर से किया जा रहा है।
केंद्रीय सचिव के पावरकाम मुख्यालय के दौरे की 'तैयारियांÓ पिछले दो दिनों के कार्य के अवकाश के दौरान कर दी थी। साथ लगते एक पुराने फिल्म थियेटर परिसर में लगी झाडिय़ों को कुछ हद तक हटवा कर अपने कर्मियों के लिए पार्किंग बनाई और सुबह किसी के मुख्यालय पहुंचने से काफी पहले ही गेट पर पुलिस तैनात कर दी। जहां सीवरेज व पानी की लाइनें बिछाने से सड़क उखड़ी थी वहां रेड कारपेट बिछा दिया गया। अंदर जाने वालों की तलाशी लेना सुरक्षा की जरूरत थी तो गेट पर चुनिंदा कर्मियों को इस तरह से तैनात किया गया कि मीडिया कर्मियों की पहचान कर उन्हें अंदर जाने से रोका जा सके।
पाउरकाम के ही एक अधिकारी का कहना है कि गेट पर पुलिस की तैनाती मीडिया के लिए नहीं की गई थी मीडिया से दूरी बनाने के और भी उपाय हैं। ये तैनाती तो पावरकाम प्रबंधन से  गुस्साए कर्मियों, बेरोजगार लाइनमैनों, मृतक कर्मियों के आश्रितों और बिजली ना मिलने से पावर ग्रिडों पर ताले जडऩे वाले किसानों आदि को रोकने के लिए थी।
दिन भर फोन ना उठाने वाले लोक संपर्क विभाग के अधिकारियों से जब पावरकाम मुख्यालय के दरवाजे खुलने के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि 'खुले हैंÓ। केंद्रीय ऊर्जा सचिव के दौरे पर बताया गया कि वो चले गए।  यहीं पर खबर क्या बनी? जैसे रटे रटाए औपचारिक सवाल पर भी लोक संपर्क विभाग शाम तक स्पष्ट नहीं था। कहा गया कि 'देखते हैंÓ क्या बनती है?


Saturday, 30 June 2012

...और पटियाला शहर में बचे 3.8 लाख यूनिट, and patiala saved 5.8 lu units electricity in one month

-मई महीने में पिछले साल की तुलना में पटियाला में बिजली की खपत में कमी आई
-ईमानदार पटियालवियों की जेब से बिजली चोरों के हिस्से में हर महीने जा रहे लाखों रूपये रुके
दैनिक जागरण एक्सक्लूसिव
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश-दुनिया और यहां तक कि हर घर में बिजली की मांग में बढ़ोतरी हो रही है। जहां पंखे थे वहां कूलर आ गए हैं और कूलर एयर कंडीशनर से अपग्रेड हो गए, फ्रिज च्यादा खुलने लगा है, टेलीविजन के साथ कंप्यूटर घर की जरूरत हो गया है। लेकिन इस सब के बावजूद पटियाला शहर में बिजली की खपत में खासी कमी आ गई है। यह कुछ सौ या कुछ हजार यूनिट नहीं अपितु 3.8लाख यूनिट से च्यादा है।
दिलचस्प है कि बिजली की मांग बढऩे के बावजूद खपत में कमी आने के पीछे एकमात्र कारण घरों से बिजली मीटरों का बाहर होना है। पटियाला पंजाब का ऐसा पहला शहर बन गया है जहां घरों अथवा किसी भी उपभोक्ता के परिसर में बिजली का मीटर अब नहीं है। इतना भर करने से एक महीने में 3.8 लाख यूनिट सिर्फ एक ही शहर में बच गई है। इसके अलावा पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन का राजस्व बढ़ेगा सो अलग है।
सुपरीटेंडिंग इंजीनियर बलबीर सिंह सिद्धू बताते हें कि इस साल मई महीने में 561.87 लाख यूनिट बिजली की खपत हुई जबकि पिछले साल इसी क्षेत्र में 565.7 लाख यूनिट बिजली जली है। इतना ही नहीं शहर में उपभोक्ताओं के कुल लोड में 20 हजार किलो वाट की बढ़ोतरी भी दर्ज हुई है। पिछले साल कुल लोड चार लाख 58 हजार 456 किलोवाट था जो इस साल बढ़कर चार लाख 78 हजार 762 किलोवाट हो गया है। ये बदलाव शहर के एक लाख 17 हजार 492 मीटरों में से लगभग सभी के बाहर होने पर सामने आ गया है। शहर में टीएंडडी लासेज 22.38 फीसद से कम होकर 16.79 फीसद रह गया है। याद रहे कि टीएंडडी लासेज में अधिकतर हिस्सा बिजली चोरी का ही होता है। ऐसे में चोरी रुकने से बिजली बचत भी होने लगी है और पटियाला शहर में बिजली बचत का आंकड़ा दस फीसद के पास आ गया है।
वहीं पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट इंजी. भुपिंदर सिंह बताते हैं कि जितनी बिजली चोरी होती है उसका वजन ईमानदार उपभोक्ता पर पड़ता है। क्योंकि पीएसपीसीएल कुल राजस्व वसूली व खर्च के आधार पर दाम तय करता है। ऐसे में ईमानदार उपभोक्ता को करीब 41 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त देने पड़ते हैं। यह आंकड़ा ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लासेज कम होने पर कम जरूर हुआ पर दाम बढऩे के साथ फिर वहीं आ गया।
ऐसे में शहर में मीटर बाहर होने के साथ ही ईमानदार पटियालवियों की जेब से बिजली चोरों के हिस्से में हर महीने जा रहे लाखों रूपये भी अब रुक गए हैं। इसी क्रम में पीएसपीसीएल के प्रवक्ता बताते हैं कि औसतन हर साल सात से आठ फीसद की दर से मांग बढ़ रही है और मौसम सूखा होने की स्थिति में यह आंकड़ा दस फीसद पर भी आ जाता है। ऐसे में ये राहत दो गुनी है। पावरकाम मुख्यालय वाले शहर में कुंडी रुकने के बाद आने वाले दिनों में सुखद समाचार अन्य शहरों से भी आ सकते हैं। वे कहते हैं जिसने बिल ही नहीं देना वो भला संयम से बिजली क्यों खर्च करेगा उसके लिए कार की लाइट और घर की टयूबलाइट में कोई फर्क नहीं है।

Tuesday, 29 November 2011

16 नवंबर को सजा, 25 को बरी और हर्जाना भी, electricity, open access, pserc, pspcl,

-नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी
-18.45 रूपये जुर्माने की वापसी छह दिसंबर तक और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश
-'ओपन एक्सेसÓ के तहत बाहर से बिजली लेने और पावरकाम बनने के बाद पहला मामला
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बड़े नामों को अक्सर देर से सजा क्यों मिलती है...Ó भ्रष्टाचार व मानव अधिकारों को लेकर बने और न्यायपालिका से लेकर पूरे सिस्टम पर बने और  टेलीविजन पर चल रहे इस विज्ञापन में संभव एक कमी भी है कि 'नाम बड़ा हो तो सजा देना भी आसान नहीं होताÓ और अगर तंत्र में निजी व्यवस्था शामिल हो जाए और नियम कानून लागू करने में एक भी कमी रह जाए तो सारा दांव उलटा पड़ जाता है और वो भी चंद दिनों में।
मनमर्जी से बिजली बिल भेजने और बकाया ना भरने और यहां तक कि किसी बिजली कर्मी के बनते 'मान-सम्मानÓ में थोड़ी भी कसर रहने पर सख्त परिणाम भुगताने के लिए कुख्यात रहे पूर्व पंजाब राच्य बिजली बोर्ड के पुराने दिन भी उसके साथ ही लद चुके हैं। बिजली अधिनियम 2003 के लागू होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड बनने के बाद 'ओपन एक्सेसÓ के तहत अन्य राच्यों अथवा पंजाब के बाहर से इंडस्ट्री को सीधे बिजली लेने देने के निर्णय के बाद पहला मामला सामने आया है जब एक मामले में16 नवंबर को जालंधर की एक फैक्ट्री जेएमपी इंडस्ट्री को पीक लोड आवर में बिजली ड्रा करने पर 'सजाÓ के रूप में बिजली कनेक्शन से हाथ धोना पड़ा।
उक्त इंडस्ट्री पर 18.45 लाख रूपये का जुर्माना ठोकते हुए तीन किश्तों में जमा करवाने के आदेश भी जारी हो गए। इस पर कंपनी ने 6.15 लाख रूपये की एक किश्त जमा करवाने के साथ ही पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास अपील करते हुए अपना केस दायर कर दिया।
दिलचस्प है कि पीएसईआरसी ने सारी सुनवाई के बाद 25 नवंबर को कंपनी को बरी करने के साथ ही ग्राहक को नाहक परेशान करने व अवैध तरीके से नियमों के विपरीत कार्रवाई करने पर हर्जाना देने के आदेश भी जारी कर दिए।
पीएसईआरसी ने पीएसटीसीएल के चीफ इंजीनियर आरके शर्मा और ओपन एक्सेस के सुपरीटेंडिंग इंजीनियर एके मठारू पर नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने पर कार्रवाई करने को भी कहा है। इसके अलावा 18.45 रूपये जुर्माने की राशि में से दी गई पहली किश्त की वापसी छह दिसंबर तक सुनिश्चित करने और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश भी दिए हैं।
वहीं पावरकाम प्रवक्ता का कहना है कि पीएसईआरसी के आदेशों अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई उक्त दोनों अधिकारियों के खिलाफ की जाएगी। साथ ही अधिकारी ये भी बताते हैं कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के नियम पीक लोड के दौरान फ्रिक्वेंसी गिरने की स्थिति में भी बिजली लेने पर खामोश हैं, जबकि प्रदेश में 'ओपन एक्सेसÓ के तहत किसी भी इंडस्ट्री को तय सीमा से अधिक बिजली लेने की अनुमति नहीं है।
याद रहे कि उक्त इंडस्ट्री ने अपनी अपील में कहा कि ओपन एक्सेस में किए गए समझौते में यह कहीं नहीं कहा गया कि पीक लोड समय तक ही बिजली ली जाएगी। ऐसे में उसने बिजली ले कर गलत नहीं किया है। हालांकि बिजली इंजीनियर यह भी कहते हैं कि अगर फ्रिक्वेंसी च्यादा गिरे और उपभोक्ता लगातार बिजली लेते रहें तो ग्रिड के फेल होने का खतरा बन पड़ता है। संभव है कार्रवाई इसी स्थिति में की गई।

Thursday, 16 June 2011

इस बार नहीं लगेगा बिजली का झटका, save electricity, pspcl, demand and supply, paddy



बिजली की मांग 1900 लाख यूनिट तक जाने की उम्मीद
 1875 लाख यूनिट का प्रबंध
 इंडस्ट्री पर अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश के अलावा कोई कट नहीं लगाया जाएगा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
 पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की मानें तो इस बार बिजली झटके नहीं देगी। प्रदेश भर में बिजली के हालात बेहतर रहने वाले हैं। राज्य में इंडस्ट्री पर भी कोई विशेष कट नहीं लगने जा रहा है। पावरकॉम के विशेषज्ञों की ओर से एकत्रित आंकड़ों केमुताबिक राज्य में बिजली की अधिकतम मांग जुलाई महीने में 1900 लाख यूनिट प्रतिदिन तक जाने की उम्मीद है, जबकि जुलाई व अगस्त के महीनों में क्रमश: 1875 व 1870 लाख यूनिट प्रतिदिन का प्रबंध कर रखा है। हालांकि ओपन एक्सेस के तहत निजी क्षेत्र करीब एक सौ लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली अपने स्तर पर ले रहा है। राज्य में बिजली की आंकड़ों पर आधारित मांग से यह हिस्सा अब बाहर हो गया है। पावरकॉम के उच्चाधिकारी बताते हैं कि यदि मानसून धोखा नहीं देता है तो किसी भी वर्ग पर कोई घोषित कट नहीं लगाया जाएगा। मरम्मत अथवा रखरखाव के लिए लगने वाले कट हालांकि इससे अलग ही रहेंगे। सबसे पहले कटों की मार तले आने वाली इंडस्ट्री के सवाल पर अधिकारी कहते हैं कि इस पर अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश के अलावा कोई कट नहीं लगाया जा रहा। यह अवकाश भी लेबर कानूनों के तहत किसी भी फैक्ट्री में होना जरूरी है। इसके अलावा साल भर चलने वाला सांयकालीन समय में तीन घंटे का पीक लोड प्रतिबंध ही जारी रह सकता है। अगर कोई बड़ी तकनीकी रुकावट न आए तो पंजाब का अपना उत्पादन- जून में 750 लाख यूनिट प्रतिदिन, जुलाई व अगस्त में 700 लाख यूनिट, सितंबर में 650 लाख यूनिट और अक्टूबर में 600 लाख यूनिट रह सकता है। जबकि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से पंजाब को जून, जुलाई में 200 लाख यूनिट प्रतिदिन, अगस्त में 175 लाख यूनिट व इसके बाद 110 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली मिलती रहेगी। इसी प्रकार पंजाब को मिल रही बैंकिंग की बिजली जून में 100 लाख यूनिट प्रतिदिन है तो जुलाई में 200 से 225 लाख यूनिट, अगस्त में 200, सितंबर में 175 लाख यूनिट और अक्टूबर में 60 लाख यूनिट प्रतिदिन मिलेगी। लंबी अवधि के खरीद समझौतों के तहत 250 से 350 लाख यूनिट बिजली हर रोज मिलेगी तो शार्ट टर्म के खरीद समझौतों के तहत 24 लाख यूनिट से हुई शुरुआत जून में 220 लाख यूनिट और जुलाई अगस्त में 260 और सितंबर में 240, अक्टूबर में 200 लाख यूनिट प्रतिदिन रहेगी। गैर परंपरागत स्रोतों से करीब नौ लाख यूनिट बिजली लगातार मिलती रहेगी। सेंट्रल पूल से पंजाब को नियमित रूप सेमिलने वाला हिस्सा इससे अलग है।

Thursday, 30 December 2010

बिजली कट : पीएचसीसी ने मांगी अस्पतालों में हॉट लाइन

अभी तक राज्य के चंद बड़े और हार्ट स्पेशलिस्ट अस्पताल में ही है ये सुविधा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गर्मियों में रूलाने वाले और सर्दियों में सताने वाले बिजली कट यदि अस्पताल में किसी के आपरेशन के दौरान लग जाए, तो स्थिति बड़ी कष्टकारी हो जाती है। इलाज के दौरान और इसके बाद अस्पताल में बिजली गुल होना, वैसे भी मरीज को डराने से कम नहीं होता। बिना  सूचना गुल होने बिजली से बचने के लिए पंजाब हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन (पीएचसीसी) ने पावरकॉम से अपने अस्पतालों में हॉट लाइन दिए जाने की मांग की है।
 कुछ अस्पतालों में दी जा रही हॉट लाइन का काम तेज करने की गुहार भी लगाई गई है। हालांकि इसमें से ज्यादातर मालवा क्षेत्र के ही है। पावरकॉम के सूत्रों के अनुसार वीरवार को हेल्थ सिस्टम कारपोरेशन की प्रबंधकीय निदेशक राजी पी श्रीवास्तव ने पावरकॉम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी से मिलकर गुहार लगाई है कि कारपोरेशन के अस्पतालों में बिजली की हॉट लाइन दी जाए। अब तक हॉट लाइन राज्य के चंद बड़े व ह्दय रोग से संबंधित अस्पतालों के पास ही ये सुविधा है। आधिकारिक सूत्रों अनुसार बरनाला के जिला अस्पताल, सब डिवीजन अस्पताल राजपुरा, सब डिवीजन अस्पताल धूरी, कम्यूनिटी सेंटर भुच्चो मंडी, कम्यूनिटी सेंटर भगता में हॉट लाइन उपलब्ध करवाए जाने का काम तेज करने और जल्द निपटाए जाने को कहा गया है।
 इसी प्रकार पावरकॉम के पास नई लगाई गई गुहार में मानसा, मोगा और मुक्तसर के जिला अस्पतालों के अलावा सब डिवीजन अस्पताल पट्टी व सब डिवीजन अस्पताल बटाला के नाम दिए गए है। कारपोरेशन की इस मांग पर करीब 3 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत बताई गई है।

Tuesday, 28 December 2010

ਸਫਰਨਾਮਾ 2010 ਧਮਕੀ , ਹੜਤਾਲ ਤੋਂ ਨਿਲੰਬਨ ਤੱਕ ਚੱਲੀ ਗਤੀਵਿਧੀਆਂ

ਬਿਜਲੀ
- ਥਰਮਲ ਪਲਾਂਟਾਂ ਦੇ ਸ਼ਿਲਾੰਨਿਆਸ ਦੇ ਨਾਮ ਰਿਹਾ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ
- ਮਾਨਸੂਨ ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਦੋ ਦਸ਼ਕ ਬਾਅਦ ਕਟ ਫਰੀ ਯੁੱਧ , ਬੰਨ੍ਹ ਹੋਏ ਲਬਾਲਬ
- ਬਿਜਲੀ ਅਧਿਨਿਯਮ ਲਾਗੁ ਹੋਇਆ , ਕੰਮ ਕਰਣਾ ਪਵੇਗਾ ਪਰਬੰਧਨ ਨੇ ਦਿੱਤਾ ਸੁਨੇਹਾ
ਭੂਪੇਸ਼ ਚੱਠਾ , ਪਟਿਆਲਾ
ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਕਰਣ ਵਾਲੇ ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਬਿਜਲੀ ਬੋਰਡ ਦਾ ਜਿੱਥੇ ਇਸ ਸਾਲ ਨਾਮ ਬਦਲਾ ਉਥੇ ਹੀ ਬਿਜਲੀ ਅਧਿਨਿਯਮ - 2003 ਦੇ ਲਾਗੁ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਿਜਲੀ ਬੋਰਡ ਦੋ ਕੰਪਨੀਆਂ ਪੰਜਾਬ ਸਟੇਟ ਪਾਵਰ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ ਲਿਮਿਟੇਡ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਸਟੇਟ ਪਾਵਰ ਟਰਾਂਸਪੋਰਟੇਸ਼ਨ ਲਿਮਿਟੇਡ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਆਮਲਚੂਲ ਬਦਲਾਵ ਆਇਆ , ਲੇਕਿਨ ਕਰਮੀਆਂ ਅਤੇ ਆਮ ਆਦਮੀ ਦੇ ਨਜਰਿਏ ਨੂੰ ਵੇਖਿਆ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਕਰਮੀਆਂ ਦੀ ਧਮਕੀ , ਮਨਮਰਜੀ ਅਤੇ ਆਏ ਦਿਨ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਬਲੈਕਮੇਲਿੰਗ ਹੜਤਾਲੋਂ ਨਾਲ ਹੁੰਦੀ ਹੋਈ ਸਾਲ ਅੰਤ ਤੱਕ ਨਿਲੰਬਨ ਤੱਕ ਆ ਪਹੁੰਚੀ ਜਿੱਥੋਂ ਪਰਬੰਧਨ ਨੇ ਸਾਫ਼ ਸੁਨੇਹੇ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਕਿ ਕੰਮ ਤਾਂ ਕਰਣਾ ਪਵੇਗਾ ਔਰਅਨੁਸ਼ਾਸਨਹੀਨਤਾ ਬਿਲਕੁਲ ਬਰਦਾਸ਼ਤ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗੀ ।

ਨੌਂ ਬਨਾਮ ਦਸ
ਗੁਜ਼ਰੇ ਸਾਲ ਖ਼ਰਾਬ ਮਾਨਸੂਨ ਨੇ ਜਿੱਥੇ ਬੋਰਡ ਦਾ ਦਿਵਾਲਾ ਮੰਹਗੀ ਬਿਜਲੀ ਖਰੀਦ ਉੱਤੇ ਕੱਢਿਆ ਉਥੇ ਹੀ ਆਮ ਆਦਮੀ ਦੇ ਮੁੜ੍ਹਕੇ ਵੀ ਛੁੜਵਾ ਦਿੱਤੇ , ਅਜਿਹੇ ਵਿੱਚ ਹਰ ਘਰ ਵਿੱਚ ਇੰਨਵਰਟਰ ਪਹੁੰਚਾਣ ਦਾ ਪੁੰਨ ਲੈਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਇਸ ਸਾਲ ਜਮ ਕਰ ਹੋਰ ਬਰਾਬਰ ਅੰਤਰਾਲ ਉੱਤੇ ਹੋਈ ਮੀਂਹ ਨੇ ਹਰ ਇੰਨਵਰਟਰ ਦੀ ਬੈਟਰੀ ਦੀ ਉਮਰ ਲੰਮੀ ਕਰ ਦਿੱਤੀ । ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਵੀ ਬਿਜਲੀ ਮਾਮਲੇ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੜਕਾਂ ਉੱਤੇ ਨਹੀਂ ਉਤਰਨਾ ਪਿਆ । ਹਾਲਾਂਕਿ ਬਿਜਲੀ ਮੀਟਰ ਘਰਾਂ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਕਰਣ ਅਤੇ ਆਮ ਬੱਲਬ ਬਦਲ ਕਰ ਸੀਫਏਲ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਿਲਸਿਲਾ ਹੌਲੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਤੋਂ ਇਸ ਸਾਲ ਵੀ ਜਾਰੀ ਰਿਹਾ । ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਟਰਾਂਸਮਿਸ਼ਨ ਐਂਡ ਡਿਸਟਰੀਬਿਊਸ਼ਨ ਲਾਸੇਜ ਵੀ 19 . 92 ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੇਠਾਂ ਨਹੀਂ ਖਿਸਕ ਪਾਏ ।

ਦਸ ਦਾ ਦਮ
ਵਰਤਮਾਨ ਸਾਲ ਥਰਮਲ ਪਲਾਂਟਾਂ ਦੇ ਸ਼ਿਲਾੰਨਿਆਸ ਦੇ ਨਾਮ ਰਿਹਾ । ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਨੂੰ ਢੱਰੇ ਉੱਤੇ ਲਿਆਉਣ ਰਾਜਪੁਰਾ ਵਿੱਚ 1326 ਮੇਗਾਵਾਟ ਦਾ ਸ਼ਿਲਾੰਨਿਆਸ ਹੋਇਆ ਤਾਂ , ਏਨਟੀਪੀਸੀ ਦੇ ਨਾਲ ਗਿਦੜਬਾਹਾ ਮਂ 2640 ਮੇਗਾਵਾਟ ਲਈ ਕਰਾਰ ਹੋਇਆ , ਨਿਰਮਾਣਾਧੀਨ ਤਲਵੰਡੀ ਸਾਬੋ ਪਲਾਂਟ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ 1980 ਮੇਗਾਵਾਟ ਤੋਂ ਵਧਾ ਕਰ 2800 ਉੱਤੇ ਲਿਆਈ ਗਈ । ਇੰਡਿਆਬੁਲਸ ਨੇ ਵੀ ਪਯੋਣਾ ਵਿੱਚ ਪਲਾਂਟ ਲਗਾਉਣ ਦੀ ਇੱਛਾ ਜਤਾਈ ਹੈ । ਮਾਨਸੂਨ ਨੇ ਵੀ ਦੋ ਦਸ਼ਕ ਬਾਅਦ ਕਟ ਫਰੀ ਯੁੱਧ ਦਿੱਤੀ ਤਾਂ ਬੰਨ੍ਹ ਵੀ ਡੇਢ ਦਸ਼ਕ ਬਾਅਦ ਲਬਾਲਬ ਹੋਏ ਹੈ ।

11 ਵਿੱਚ ਅਸੀ
ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਜਿੱਥੇ ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਗੋਈਂਦਵਾਲ ਸਾਹਿਬ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਦੇ ਚਾਲੂ ਹੋਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਉਥੇ ਹੀ ਨਿਜੀ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਛੋਟੇ ਪ੍ਰੋਜੇਕਟੋਂ ਨਾਲ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਉਤਪਾਦਨ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਗਿਣਨੇ ਲਾਇਕ 14 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਉੱਤੇ ਆਇਆ ਹੈ ਇਸਦੇ ਕਾਫ਼ੀ ਅੱਗੇ ਨਿਕਲਣ ਦੀ ਉਂਮੀਦ ਦੀ ਹੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ । ਮੀਟਰਾਂ ਦੇ ਘਰਾਂ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਹੋਣ ਦਾ ਲਕਸ਼ ਸੰਭਵਤ 31 ਮਾਰਚ ਤੱਕ ਪਾ ਲਿਆ ਜਾਵੇ । ਇੰਜ ਹੀ ਸੀਏਫਏਲ ਵੀ ਜਗਮਗਾਐਂਗੇ । ਮ੍ਰਿਤਕ ਕਰਮੀਆਂ ਦੇ ਆਸ਼ਰਿਤੋਂ ਅਤੇ ਬੇਰੋਜਗਾਰ ਲਾਇਨਮੈਨ ਯੂਨੀਅਨ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਬਿਨਾਂ ਸੱਤਵੀਂ ਮੰਜਿਲ ਉੱਤੇ ਚੜ੍ਹੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਪੱਖ ਵਿੱਚ ਨਿੱਬੜ ਜਾਵੇ ਅਜਿਹੀ ਦੁਆ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ । ਬਾਂਧੋਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਆਵਕ ਬਿਹਤਰ ਲੇਕਿਨ ਹੱਦ ਵਿੱਚ ਰਹੇ , ਮਾਨਸੂਨ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਇੰਦਰ ਦੇਵਤਾ ਦਾ ਆਸ਼ਿਰਵਾਦ ਦੀ ਕਾਮਨਾ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਗਲਤ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗਾ ।

Monday, 27 December 2010

सफरनामा 2010 धमकी, हड़ताल से निलंबन तक चली गतिविधियां

बिजली
-थर्मल प्लांटों के शिलान्यास के नाम रहा बिजली उत्पादन
-मानसून ने दिया दो दशक बाद कट फ्री समर, बांध हुए लबालब
-बिजली अधिनियम लागु हुआ, काम करना पड़ेगा प्रबंधन ने दिया संदेश
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में बिजली का प्रबंध करने वाले पंजाब राज्य बिजली बोर्ड का जहां इस साल नाम बदला वहीं बिजली अधिनियम-2003 के लागु होने से बिजली बोर्ड दो कंपनियों पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसपोर्टेशन लिमिटेड के रूप में आमलचूल बदलाव आया, लेकिन कर्मियों व आम आदमी के नजरिए से देखा जाए तो कर्मियों की धमकी, मनमर्जी और आए दिन होने वाली ब्लैकमेलिंग हड़तालों से होती हुई वर्ष अंत तक निलंबन तक आ पहुंची जहां से प्रबंधन ने साफ संदेश दे दिया कि काम तो करना पड़ेगा औरअनुशासनहीनता बिलकुल बर्दाश्त नहीं होगी।

नौ बनाम दस
बीते साल खराब मानसून ने जहां बोर्ड का दिवाला मंहगी बिजली खरीद पर निकाला वहीं आम आदमी के पसीने भी छुड़वा दिए, ऐसे में हर घर में इंनवर्टर पहुंचाने का श्रेय लेने के बाद इस साल जम कर और बराबर अंतराल पर हुई बारिश ने हर इंनवर्टर की बैटरी की उम्र लंबी कर दी। कृषि क्षेत्र को भी बिजली मामले में ज्यादा सड़कों पर नहीं उतरना पड़ा। हालांकि बिजली मीटर घरों से बाहर करने और आम बल्ब बदल कर सीफएल लगाने का सिलसिला धीमी गति से इस साल भी जारी रहा। बिजली के ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेज भी 19.92 से ज्यादा नीचे नहीं खिसक पाए।

दस का दम
वर्तमान साल थर्मल प्लांटों के शिलान्यास के नाम रहा। राज्य में बिजली उत्पादन को ढर्रे पर लाने राजपुरा में 1326 मेगावाट का शिलान्यास हुआ तो, एनटीपीसी के साथ गिदड़बाहा मं 2640 मेगावाट के लिए करार हुआ, निर्माणाधीन तलवंडी साबो प्लांट की क्षमता 1980 मेगावाट से बढ़ा कर 2800 पर लाई गई। इंडियाबुल्स ने भी पियोणा में प्लांट लगाने की इच्छा जताई है। मानसून ने भी दो दशक बाद कट फ्री समर दी तो बांध भी डेढ़ दशक बाद लबालब हुए है।

11 में हम
बिजली उत्पादन के क्षेत्र में जहां अगले साल गोईंदवाल साहिब में एक यूनिट के चालू होने की संभावना है वहीं निजी क्षेत्र में छोटे प्रोजेक्टों से होने वाला उत्पादन एक साल में गिनने लायक 14 लाख यूनिट पर आया है इसके काफी आगे निकलने की उम्मीद की ही जानी चाहिए। मीटरों के घरों से बाहर होने का लक्ष्य संभवत 31 मार्च तक पा लिया जाए। ऐसे ही सीएफएल भी जगमगाऐंगे। मृतक कर्मियों के आश्रितों और बेरोजगार लाइनमैन यूनियन का मामला बिना सातवीं मंजिल पर चढ़े इन्हीं के पक्ष में निपट जाए ऐसी दुआ की जानी चाहिए। बांधों में पानी की आवक बेहतर लेकिन हद में रहे, मानसून के रूप में इंद्र देवता का आशिर्वाद की कामना भी की जाए तो गलत नहीं होगा।

Monday, 13 December 2010

ਕਿਸਾਨਾਂ ਦੀ ਮੰਗ ਪੂਰੀ , ਨਵੇਂ ਸਾਲ ਦੇ ਇਂਤਜਾਮ ਸ਼ੁਰੂ

ਭੂਪੇਸ਼ ਚੱਠਾ , ਪਟਿਆਲਾ
ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਮੰਗ ਅਤੇ ਆਪੂਰਤੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਦਾ ਸੰਤੁਲਨ ਰਬੀ ਦਾ ਸੀਜਨ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਵਿਗੜਨ ਲਗਾ ਹੈ । ਕਿਸਾਨਾਂ ਵਲੋਂ ਪੰਜਾਬ ਸਟੇਟ ਪਾਵਰ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ ਲਿਮਿਟੇਡ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਨੇਮੀ ਰੂਪ ਤੋਂ ਅੱਠ ਘੰਟੇ ਬਿਜਲੀ ਦਿੱਤੇ ਜਾਣ ਦੀ ਮੰਗ ਕਰੀਬ - ਕਰੀਬ ਪੂਰੀ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਪਾਵਰਕਾਮ ਨੇ ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਗਰਮੀਆਂ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਸੀਜਨ ਲਈ ਵੀ ਇਂਤਜਾਮ ਹੁਣੇ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੇ ਹਨ ।
ਪਾਵਰਕਾਮ ਦੇ ਆਧਿਕਾਰਿਕ ਨਿਯਮ ਦੱਸਦੇ ਹਨ ਕਿ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਆਪੂਰਤੀ ਇੱਕ ਹਜਾਰ ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਦੇ ਉੱਤੇ ਬਣੀ ਹੋਈ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ ਮੰਗ ਅੱਠ ਸੌ ਲੱਖ ਤੱਕ ਸੀਮਿਤ ਰਹੀ । ਕਿਸਾਨ ਸੰਗਠਨਾਂ ਵਲੋਂ ਨਿੱਤ ਅੱਠ ਘੰਟੇ ਬਿਜਲੀ ਦਿੱਤੇ ਦੀ ਮੰਗ ਪੂਰੀ ਹੋਣ ਉੱਤੇ ਮੰਗ ਵਿੱਚ 95 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਦੀ ਵਾਧਾ ਹੋ ਗਈ ।
ਦਿਲਚਸਪ ਹੈ ਕਿ ਇਸਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਮੰਗ ਆਪੂਰਤੀ ਦੀ ਤੁਲਣਾ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਹੀ ਰਹੀ । ਪਾਵਰਕਾਮ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀ ਦੱਸਦੇ ਹਨ ਕਿ ਬੈਂਕਿੰਗ ਦੇ ਮਾਧਿਅਮ ਤੋਂ ਪੰਜਾਬ ਹੋਰ ਰਾਜਾਂ ਨੂੰ ਦੋ ਸੌ ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਬਿਜਲੀ ਦੇ ਰਿਹੇ ਹੈ । ਇਸਵਿੱਚ ਤੋਂ 212 ਮੇਗਾਵਾਟ ਬਿਜਲੀ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਦੀ ਲੌਟਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ । ਜਦੋਂ ਕਿ 370 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਬਿਜਲੀ ਅਗਲੇ ਸਾਲ ਝੋਨਾ ਅਤੇ ਗਰਮੀਆਂ ਦੇ ਸੀਜਨ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਕਰ ਪਹਾੜੀ ਰਾਜਾਂ ਦੇ ਕੋਲ ਜਮਾਂ ਕਰਵਾਈ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ ।
ਪਾਵਰਕਾਮ ਦੇ ਥਰਮਲ ਪਲਾਂਟਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਤਿੰਨ ਯੂਨਿਟਾਂ ਨੂੰ ਬੰਦ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਬਠਿੰਡਾ ਦੀ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਸਾਰਾ ਜੀਰਣੋਦਵਾਰ ਦੀ ਵਜ੍ਹਾ ਨਾਲ ਬੰਦ ਹੈ ਜਦੋਂ ਕਿ ਦੋ ਨੂੰ ਲਾਜ਼ਮੀ ਵਾਰਸ਼ਿਕ ਮਰੰਮਤ ਦੇ ਚਲਦੇ ਬੰਦ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਪਾਵਰਕਾਮ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਕਰਮਵਾਰ ਇੱਕ ਦੇ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਆਪਣੀ ਸਾਰੇ ਯੂਨਿਟਾਂ ਨੂੰ 35 ਤੋਂ 45 ਦਿਨਾਂ ਲਈ ਬੰਦ ਕਰ ਮਰੰਮਤ ਕਾਰਜ ਨਿਪਟਾਤਾ ਹੈ । ਅਜਿਹੇ ਵਿੱਚ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਤੋਂ ਦੋ ਘੰਟੇ ਦੇ ਬਿਜਲੀ ਕਟ ਸਾਰੇ ਵਰਗਾਂ ਉੱਤੇ ਲਗਾਏ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ ।
ਪਾਵਰਕਾਮ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਦੀ ਤੁਲਣਾ ਵਿੱਚ ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ ਦੀ ਹਾਲਤ ਵੀ ਖਾਸੀ ੱੱਛੀ ਹੈ । ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕੋਲ 142 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਪਲੱਬਧ ਸੀ , ਉਥੇ ਹੀ ਇਸ ਸਾਲ ਰਾਜ ਦਾ ਆਪਣਾ ਪਨ ਬਿਜਲੀ ਉਤਪਾਦਨ 112 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਦੇ ਆਸਪਾਸ ਟਿਕਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ਅਤੇ ਭਾਖੜਾ ਵਿਆਸ ਮੈਨੇਜਮੈਂਟ ਬੋਰਡ ਵਲੋਂ ਵੀ 105 ਲੱਖ ਯੂਨਿਟ ਬਿਜਲੀ ਮਿਲ ਰਹੀ ਹੈ ।

ਹੜਤਾਲ ਦਾ ਅਸਰ ਬਿਜਲੀ ਕਰਮੀਆਂ ਉੱਤੇ ਹੀ

ਭੂਪੇਸ਼ ਚੱਠਾ, ਪਟਿਆਲਾ
ਪੰਜਾਬ ਸਟੇਟ ਪਾਵਰ ਕਾਰਪੋਰੇਸ਼ਨ ਲਿਮਿਟੇਡ ਦੇ ਵੱਖਰੇ ਕਰਮਚਾਰੀ ਸੰਗਠਨਾਂ ਦੀ ਪੀਏਸਈਬੀ ਏੰਪਲਾਇਜ ਜਵਾਇੰਟ ਫੋਰਮ ਦੇ ਐਲਾਨ ਉੱਤੇ ਬਿਜਲੀ ਕਰਮੀਆਂ ਦੀ ਦੋ ਦਿਨ ਦੀ ਹੜਤਾਲ ਦਾ ਅਸਰ ਬਿਜਲੀ ਸਪਲਾਈ ਉੱਤੇ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਪਿਆ ਹੈ ਉੱਤੇ ਇਸਤੋਂ ਕਰਮੀਆਂ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ।
ਪਾਵਰਕਾਮ ਦੇ ਆਧਿਕਾਰਿਕ ਨਿਯਮ ਦੱਸਦੇ ਹੈ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਏਕਟ ਦੇ ਤਹਿਤ ਸਾਰੇ ਹੜਤਾਲੀਆਂ ਉੱਤੇ ਕਾੱਰਵਾਈ ਹੋਣਾ ਤੈਅ ਹੈ । ਨਿਯਮਾਂ ਦੇ ਅਧੀਨ ਇਹ ਕਾੱਰਵਾਈ ਆਪਣੇ ਆਪ : ਚਲਣ ਵਾਲੀ ਪਰਿਕ੍ਰੀਆ ਹੈ । ਇਸਦਾ ਪਹਿਲਾ ਅਹਿਸਾਸ ਨਵੇਂ ਸਾਲ ਉੱਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਤਨਖਾਹ ਵਿੱਚ ਵਿਖੇਗਾ ਜਦੋਂ ਹੜਤਾਲੀਆਂ ਦਾ ਦੋ ਦਿਨ ਦਾ ਤਨਖਾਹ , ਨੋ ਵਰਕ ਨੋ ਪੇ ਦੇ ਅਧੀਨ ਕਟ ਕਰ ਆਵੇਗਾ ।
ਅਜਿਹੇ ਕਰਮੀਆਂ ਨੂੰ ਈਏਲ ਅਤੇ ਅਰਜਿਤ ਛੁੱਟੀ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਮਾਂ ਲਈ ਪ੍ਰਤੀਬੰਧਿਤ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ । ਸਰਵਿਸ ਵਿੱਚ ਬ੍ਰੇਕ ਇਸ ਪੀਰਿਅਡ ਆ ਜਾਣ ਉੱਤੇ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਲੰਮੀ ਛੁੱਟੀ ਉੱਤੇ ਜਾਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਹ ਉਸਨੂੰ ਈਏਲ ਸ਼ਾਮਿਲ ਨਾ ਹੋਣ ਦੀ ਵਜ੍ਹਾ ਨਾਲ ਆਗਿਆ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗੀ ।
ਗਰਵਨਮੇਂਟ ਪ੍ਰੋਵਿਡੇਂਟ ਫੰਡ ਤੋਂ ਵੀ ਜੇਕਰ ਹੜਤਾਲ ਵਿੱਚ ਭਾਗ ਲੈਣ ਵਾਲਾ ਕਰਮੀ ਪੈਸੇ ਨਿਕਲਵਾਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਨੂੰ ਵੀ ਇਹ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗਾ ਹਾਲਾਂਕਿ ਇਹ ਰੋਕ ਤੱਦ ਤੱਕ ਜਾਰੀ ਰਹਾਂਗੇ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਦੀਆਂ ਕਰਮੀਆਂ ਅਤੇ ਪਾਵਰਕਾਮ ਪਰਬੰਧਨ ਦੇ ਵਿੱਚ ਅਜਿਹਾ ਕੋਈ ਸਮੱਝੌਤਾ ਨਹੀਂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਕਿ ਹੜਤਾਲ ਦੇ ਦੋਨਾਂ ਦਿਨਾਂ ਨੂੰ ਕਰਮੀਆਂ ਦੀ ਸੇਵਾ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਕਰ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ । ਇਸ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਦੋ ਦਿਨ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕਰਣ ਦੇ ਬਦਲੇ ਸਿਰਫ ਦੋ ਦਿਨ ਦਾ ਅਰਜਿਤ ਛੁੱਟੀ ਏਡਜਸਟ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ । ਦਿਲਚਸਪ ਹੈ ਕਿ ਹੜਤਾਲ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਭਾਗ ਲੈਣ ਵਾਲੇ ਕਰਮੀ ਹੁਣ ਹੜਤਾਲੀਆਂ ਦੀ ਤੁਲਣਾ ਵਿੱਚ ਸੀਨਿਅਰ ਹੋ ਗਏ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਨੌਕਰੀ ਹੁਣ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪੁਰਾਣੀ ਹੈ ।

Thursday, 9 December 2010

हड़ताल का असर बिजली कर्मियों पर ही

भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के विभिन्न कर्मचारी संगठनों की पीएसईबी एम्पलाइज ज्वाइंट फोरम के आह्वान पर बिजली कर्मियों की दो दिन की हड़ताल का असर बिजली सप्लाई पर तो नहीं पड़ा है पर इससे कर्मियों का नुकसान ज्यादा हो गया है।
पावरकॉम के आधिकारिक सूत्र बताते है कि कंपनी एक्ट के तहत सभी हड़तालियों पर कार्रवाई होना तय है। नियमों के अधीन यह कार्रवाई स्वत: चलने वाली प्रक्रिया है। इसका पहला अहसास नए साल पर आने वाले वेतन में दिखेगा जब हड़तालियों का दो दिन का वेतन, नो वर्क नो पे के अधीन कट कर आएगा।
ऐसे कर्मियों को ईएल अथवा अर्जित अवकाश आने वाले समय के लिए प्रतिबंधित हो गया है। सर्विस में ब्रेक इन पीरियड आ जाने पर यदि कोई लंबी छुट्टी पर जाना चाहता है तो वो उसे ईएल शामिल ना होने की वजह से अनुमति नहीं मिलेगी।
गर्वनमेंट प्रोविडेंट फंड से भी यदि हड़ताल में भाग लेने वाला कर्मी पैसे निकलवाना चाहता है तो उसे भी ये लाभ नहीं मिलेगा हालांकि ये प्रतिबंध तब तक जारी रहेंगे जब तक की कर्मियों और पावरकॉम प्रबंधन के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हो जाता कि हड़ताल के दोनों दिनों को कर्मियों की सेवा में शामिल कर लिया गया है। इन लोगों का दो दिन काम न करने के बदले सिर्फ दो दिन का अर्जित अवकाश एडजस्ट किया गया है। दिलचस्प है कि हड़ताल में न भाग लेने वाले कर्मी अब हड़तालियों की तुलना में सीनियर हो गए है क्योंकि उनकी नौकरी अब ज्यादा पुरानी है।

Wednesday, 8 December 2010

किसानों की मांग पूरी, नए साल के इंतजाम शुरू

भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच का संतुलन रबी का सीजन आगे बढ़ने के साथ ही बिगड़ने लगा है। किसानों की ओर से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के सामने नियमित रूप से आठ घंटे बिजली दिए जाने की मांग करीब-करीब पूरी होने के साथ ही पावरकॉम ने अगले साल गर्मियों व धान के सीजन के लिए भी इंतजाम अभी से शुरू कर दिए हैं।
पावरकॉम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि राज्य में बिजली की आपूर्ति एक हजार लाख यूनिट के ऊपर बनी हुई है जबकि मांग आठ सौ लाख तक सीमित रही। किसान संगठनों की ओर से प्रतिदिन आठ घंटे बिजली दिए की मांग पूरी होने पर मांग में 95 लाख यूनिट की बढ़ोतरी हो गई।
दिलचस्प है कि इसके बावजूद राज्य में बिजली की मांग आपूर्ति की तुलना में कम ही रही। पावरकॉम के अधिकारी बताते हैं कि बैंकिंग के माध्यम से पंजाब अन्य राज्यों को दो सौ लाख यूनिट बिजली दे रहा है। इसमें से 212 मेगावाट बिजली पिछले साल की लौटाई जा रही है। जबकि 370 लाख यूनिट बिजली अगले साल धान व गर्मियों के सीजन को ध्यान में रख कर पहाड़ी राज्यों के पास जमा करवाई जा रही है।
पावरकॉम के थर्मल प्लांटों में से तीन यूनिटों को बंद रखा गया है। इनमें से बठिंडा की एक यूनिट पूर्ण जीर्णोद्वार की वजह से बंद है जबकि दो को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के चलते बंद रखा गया है। पावरकॉम सर्दियों में क्रमवार एक के बाद एक अपनी सभी यूनिटों को 35 से 45 दिनों के लिए बंद कर मरम्मत कार्य निपटाता है। ऐसे में राज्य में एक से दो घंटे के बिजली कट सभी वर्गो पर लगाए जा रहे हैं।
पावरकॉम के अधिकारी कहते हैं कि पिछले साल की तुलना में पन बिजली उत्पादन की स्थिति भी खासी च्च्छी है। पिछले साल पंजाब के पास 142 लाख यूनिट पन बिजली उपलब्ध थी, वहीं इस साल राज्य का अपना पन बिजली उत्पादन 112 लाख यूनिट के आसपास टिका हुआ है और भाखड़ा व्यास मैनेजमैंट बोर्ड की ओर से भी 105 लाख यूनिट बिजली मिल रही है।

Thursday, 4 November 2010

नहीं खरीदनी पड़ेगी अतिरिक्त बिजली

भूपेश चट्ठा, पटियाला
खरीफ के सीजन से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) को मिल रहा मौसम का साथ दीवाली के दिन भी जारी रहने वाला है। हर साल सजावटी रोशनी के लिए अन्य राज्यों व निजी कंपनियों से करोड़ों की बिजली खरीदने वाले पावरकॉम के पास इस बार समुचित मात्रा में बिजली उपलब्ध है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली नहीं खरीदी जाएगी। यह भी हो सकता है कि पावरकॉम कुछ मात्रा में पहाड़ी राज्यों में बढ़ी ठंड के चलते इन राज्यों को बिजली अपनी तरफ से दे।
पावरकॉम के अधिकारी बताते हैं कि धान का सीजन खत्म हो चुका है और गेहूं का शुरू नहीं हुआ है। ठीक इसी तरह से गर्मी जा चुकी है और सर्दी अभी पूरी तरह से आई नहीं है। एसी से लेकर कूलर पंखे तक सभी बंद हो चुके हैं, जबकि गीजर व हीटर चलाने की बारी आई नहीं है। ऐसे में मांग खासी कम चल रही है। आज भी पावरकॉम ने 73 लाख यूनिट बिजली पहाड़ी राज्यों को बैंकिंग के माध्यम से दी है। लंबी अवधि के समझौतों के तहत केंद्रीय पूल से पंजाब को 450 लाख यूनिट बिजली मिल रही है, लेकिन पंजाब ने इसमें से मात्र 313 लाख यूनिट ही बिजली की खरीद की है शेष लौटा दी गई। संभवत: यह बिजली शुक्रवार को पूरी ली जाएगी। इसी प्रकार दीवाली के दिन आपेक्षित रूप से बढ़ने वाली मांग को देखते हुए रोपड़ का बंद रखा हुआ दो नंबर यूनिट वीरवार को चला लिया गया है। हालांकि रोपड़ का ही एक अन्य यूनिट अभी कम मांग के चलते बंद ही है। इस यूनिट के शुक्रवार सुबह तक चलने की संभावना है। बठिंडा थर्मल प्लांट का तीन नंबर यूनिट भी बंद चल रहा है। राज्य में बिजली की मांग 977 लाख यूनिट पर चल रही है। पिछले अनुभव बताते हैं कि सजावटी रोशनी ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में ही होती है। इसकी वजह से 250 से 300 मेगावाट मांग और बढ़ेगी, ऐसे में बिना कोई कट लगाए काम चल जाएगा।