-नहीं घुसने दिया मीडिया को, गेट पर पुलिस की तैनात
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
ेसेवा का अधिकार देने के साथ भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन देने का दावा करने वाली पंजाब सरकार की सौ फीसद पूंजी वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन व पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के गठन के बाद आए केंद्र के पहले किसी बड़े पदाधिकारी के लिए पावरकाम प्रशासन ने अपने मुख्यालय को किसी किले में तबदील कर दिया और अपने मुख्यालय में 'आउट साइडर्सÓ को तब तक 'अलाउÓ नहीं किया जब तक उनके मुख्य अतिथि गए नहीं। इस अवधि के दौरान पावरकाम के अधिकतर अधिकारियों ने फोन 'नॉट रिसपांसÓ पर लगे रहे। आज सोमवार को पावरकाम मुख्यालय में केंद्र सरकार के ऊर्जा सचिव उमाशंकर ने दौरा किया है।
दिलचस्प है कि उनका यह दौरा भी 'पूर्ण पारदर्शिताÓ वाले ऑन लाइन सिस्टम को देखने के लिए किया गया बताया जा रहा है। जिसके तहत बिलिंग से लेकर शिकायत तक के निपटारे को पूरी तरह से पारदर्शिता के साथ करने का दावा पावरकाम की ओर से किया जा रहा है।
केंद्रीय सचिव के पावरकाम मुख्यालय के दौरे की 'तैयारियांÓ पिछले दो दिनों के कार्य के अवकाश के दौरान कर दी थी। साथ लगते एक पुराने फिल्म थियेटर परिसर में लगी झाडिय़ों को कुछ हद तक हटवा कर अपने कर्मियों के लिए पार्किंग बनाई और सुबह किसी के मुख्यालय पहुंचने से काफी पहले ही गेट पर पुलिस तैनात कर दी। जहां सीवरेज व पानी की लाइनें बिछाने से सड़क उखड़ी थी वहां रेड कारपेट बिछा दिया गया। अंदर जाने वालों की तलाशी लेना सुरक्षा की जरूरत थी तो गेट पर चुनिंदा कर्मियों को इस तरह से तैनात किया गया कि मीडिया कर्मियों की पहचान कर उन्हें अंदर जाने से रोका जा सके।
पाउरकाम के ही एक अधिकारी का कहना है कि गेट पर पुलिस की तैनाती मीडिया के लिए नहीं की गई थी मीडिया से दूरी बनाने के और भी उपाय हैं। ये तैनाती तो पावरकाम प्रबंधन से गुस्साए कर्मियों, बेरोजगार लाइनमैनों, मृतक कर्मियों के आश्रितों और बिजली ना मिलने से पावर ग्रिडों पर ताले जडऩे वाले किसानों आदि को रोकने के लिए थी।
दिन भर फोन ना उठाने वाले लोक संपर्क विभाग के अधिकारियों से जब पावरकाम मुख्यालय के दरवाजे खुलने के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि 'खुले हैंÓ। केंद्रीय ऊर्जा सचिव के दौरे पर बताया गया कि वो चले गए। यहीं पर खबर क्या बनी? जैसे रटे रटाए औपचारिक सवाल पर भी लोक संपर्क विभाग शाम तक स्पष्ट नहीं था। कहा गया कि 'देखते हैंÓ क्या बनती है?
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