Saturday, 21 July 2012

मानसून ठंडा, डीजल गर्म, मीटर चालू, Paddy cultivation; Input cost increases


जागरण एक्सक्लूसिव
-एक से डेढ़ हजार रूपये प्रति एकड़ की लागत अब तक बढ़ चुकी है
-धान की उपज पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे कृषि विशेषज्ञ
भूपेश चट्ठा, पटियाला
 मानसून का सीजन कब शुरु हुआ किसी को खबर नहीं हुई अलबत्ता दो-तीन बारिशों के बाद ठंडे पड़े मानसून ने किसानों को अपने डीजल पंप सैट गर्म करने को मजबूर कर दिया है। बिजली के आधिकारिक रूप से ठीक ठाक रहने के बावजूद किसानों का खर्च मीटर तेजी से चल पड़ा है।
प्रदेश में खरीफ की मुख्य फसल धान की दस जून से शुरु होने वाली रोपाई यों शुरु से ही जून की बारिश के इंतजार में ढ़ीली चल रही थी लेकिन किसान ने जैसे तैसे रोपाई कर ली है पर प्री मानसून की बौछारें नहीं आई। जुलाई के दूसरे सप्ताह में हुई बारिशों ने थोड़ी राहत जरूर दी और जिन किसानों की रोपाई शेष थी उनका भी काम सस्ते में चल गया। पर अब एक सप्ताह तक मानसून के दूर रहने पर पंजाब कृषि विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर बीज व मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि किसान का लागत मूल्य निसंदेह बढ़ गया है। अभी तक धान पर लागत एक से डेढ़ हजार रूपये प्रति एकड़ बढ़ चुकी है।
धान को लगने वाले पानी पर डा. सोहल कहते हैं कि रोपाई के दौरान एक एकड़ क्षेत्र में पानी भरने करीब पांच घंटे मोटर चलानी पड़ती है। इसके बाद होने वाली सिंचाई में अगर जमीन सख्त है तो तीन-चार दिन बाद दो से ढ़ाई घंटे पानी लगाना पड़ता है और मिट्टी में बालू के कण च्यादा हैं तो दूसरे तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ती है। आठ घंटे कि बिजली से यह संभव नहीं है कि पांच एकड़ भी संभाल लिए जाएं। ऐसे में डीजल जल रहा है और अतिरिक्त पंप चल रहे हैं।
इसी संबंध में नयागांव के ठाकुर सिंह डकालवी बताते हैं कि एक डीजल पंप हर घंटे पांच से सात लीटर डीजल पी जाता है। पहले रोपाई के वक्त डीजल जलाया और अब लगाई गई फसल को बचाने के लिए पंप चला रहे हैं। ऐसे ही पंजाब हरियाणा सीमा पर घग्गर नदी के किनारे खेती कर रहे किसान सोनू को यह तो पता नहीं कि खर्च कितना बढ़ गया पर इतनी समझ जरूर है कि आठ दस घंटे में डीजल का पंप पूरी टैंकी खपा रहा है और उसके पिता अब सोच रहे हैं कि मोटर बड़ी रखवाएं या फिर एक दो कनेक्शन और लेने का कोई 'जुगाड़Ó बिठाएं।
वहीं बारिश ना होने से धान की उपज पर क्या प्रभाव पड़ सकता है इस पर कृषि विशेषज्ञ फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। कहते हैं कि अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दी होगी।  

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