Saturday, 21 July 2012

बिजली और महंगी PSPCL chairman justifies hike, Consumers have to pay 12.8 % more far electricity


जागरण ब्यूरो, चंडीगढ़ : पंजाब राज्य बिजली रेगुलेटरी अथारिटी ने राज्य में हर क्षेत्र की बिजली दरें बढ़ा दी हैं। बिजली दरों में 12.8 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी के ताजा फैसले से औसतन 53 से 58 पैसे प्रति यूनिट दाम बढ़ गया है। बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ ही सरकार ने बजट में 2000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त संसाधन जुटाने की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। अथारिटी की चेयरपर्सन रोमिला दुबे ने सोमवार यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 39 से 53 पैसे तक बढ़ोतरी की गई है जबकि औद्योगिक क्षेत्र की दरों में 53 से 58 पैसे की बढ़ोतरी होगी। यह दरें पहली अप्रैल, 2012 से लागू होंगी। अथारिटी ने बिजली निगम को सुझाव दिया है कि बिजली की पुरानी बढ़ी राशि को उपभोक्ताओं से एकमुश्त न वसूला जाए बल्कि उसे किस्तों में लिया जाए।कृषि क्षेत्र की बिजली दरों में 53 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि किसानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि प्रदेश सरकार ही किसानों को जारी सब्सिडी का भुगतान बिजली निगम ल्ल शेष पृष्ठ 2 कालम 1 पर
को करेगी। रेलवे ट्रैकशन की दरें पहले ही सबसे ज्यादा थीं, मगर इसमें भी 17 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। पूर्व के 586 पैसे के मुकाबले अब 603 पैसे प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा। रोमिला दुबे ने बताया कि पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने साल 2012-13 के लिए एनुवल रेवेन्यू रिक्वायरमेंट पिछले साल पेश की थी, जिसके मुताबिक बोर्ड के खर्च व आय में 8983.97 करोड़ रुपये का अंतर था। इसी तरह पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड ने भी अपनी एआरआर पेश की थी। अथारिटी ने इस पर आम जनता व सरकार से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे जिसके आधार पर यह फैसला लिया गया है।

पावरकाम चेयरमैन ने दरों में बढ़ोतरी को वाजिब बताया
-कहा अन्य राज्यों की तुलना में कम मंहगी हुई है बिजली
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी  ने पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन की ओर से बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी को वाजिब बताया है।
आज चंडीगढ़ से जारी किए गए टैरिफ में बिजली दरों में 12.08 फीसद की बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा है कि अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब में बिजली कम मंहगी की गई है। तामिलनाडू में 37 फीसद, राजस्थान में 27 फीसद, दिल्ली में 26 फीसद, आंध्र प्रदेश में 20.24 फीसद और हरियाणा में 17 फीसद की बढ़ोतरी की गई है।
साथ ही वे यह भी कहते हैं कि आवश्यक्ता अनुसार बिजली की दरें बढ़ाई जानी चाहिए जिससे बिजली का उत्पादन, ट्रांसमिशन व वितरण के बढ़ रहे खर्चों को पूरा किया जा सके। वे दावा करते हैं कि इस मामूली बढ़ोतरी से पावरकाम अपने उपभोक्ताओं को बेहतर सप्लाई दे पाएगा।
वहीं राज्य में बिजली के हालात पर इंजी. केडी चौधरी ने कहा है कि जून से जुलाई के पहले सप्ताह तक मानसून में देरी व कमी के बावजूद पावरकाम सभी वर्गों के उपभोक्ताओं को पड़ोसी राज्यों व राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तुलना में कम कट लगा कर बिजली सप्लाई करने में सफल रहा है। हालांकि इसके लिए पावरकाम ने इसी अवधि में 6658 करोड़ रूपये की बिजली खरीदी है। इसी अवधि में बैंकिंग के माध्यम से ली गई बिजली ने भी अपना योगदान दिया है।
चेयरमैन कहते हैं कि देश के कई राज्यों में दो प्रकार की बिजली की दरें हैं। इनमें एक कनेक्टिड लोड के आधार पर और दूसरी प्रयोग की गई बिजली के आधार पर। ऐसे में जिन राज्यों में दरें कम लगती हैं वहां वास्तव में कम होती नहीं है। बिजली का बिल ज्यादा आता है। जबकि पंजाब में ऐसा नहीं है। यहां उपयोग की गई बिजली के आधार पर ही बिल जारी होते हैं। हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक में इंडस्ट्री को दी जाने वाली बिजली खासी मंहगी है।
चेयरमैन बताते हैं कि 53 लाख उपभोक्ताओं में बीपीएल व सूची दर्ज जातियों से संबंधित उपभोक्तओं को 200 यूनिट बिजली मुफ्त मिलती है, जिनका लोड एक किलोवाट तक है।

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