गतिरोध- सड़क
- अब अकालियों ने घोषणा को चंडीगढ़-पटियाला-बठिंडा तक बढ़ाया
-501 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट अलाट
-दो जगहों पर लगेगा टोल टैक्स
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला-चंडीगढ़ रोड का 60-70 किलोमीटर का रास्ता कभी 45 मिनट में तय होता था, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक ने यह समय बढ़ाकर दोगुना कर दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार वर्ष 2002 में आई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री को अपने गृह जिले व गृहनगर से राजधानी तक जाने में परेशानी होने लगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 20 मिनट की दूरी कम करने के लिए स्वयं तो हैलीकाप्टर का रास्ता चुन लिया, पर आम लोगों के लिए सड़क को फोर लेन करने की घोषणा कर दी। वादा किया गया कि जल्दी ही सड़क फोर लेन होगी, सड़क के बीच डिवाइडर होगा और दोनों और दो-दो गाडिय़ां आसानी से निकल सकेंगी। सरकारें बदल गई पर पटियाला-चंडीगढ़ किलर रोड बन तो नहीं पाई अलबत्ता इस पर काम जरूर चालू हो गया है। अब तक अड़ंगा बनी कुछ जरूरी मंजूरियां अब मिल गई हैं। पटियाला से जीरकपुर तक के रास्ते पर 501 करोड़ रूपयें का प्रोजेक्ट अलाट कर दिया गया है। बिजली, पानी व टेलीफोन की सर्विस लाइनें हटाने का काम शुरु हो गया है जबकि सड़क निर्माण 15 सितंबर से मानसून जाने के बाद चालू होगा। इसी प्रकार पटियाला से बठिंडा तक की सड़क के लिए 16 सौ करोड़ का प्रोजेक्ट दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 'दैनिक जागरणÓ ने बीते साल अपने गतिरोध कालम के तहत एक जून को इस सड़क मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
अब इस सड़क पर चंडीगढ़ तक जाने में दो जगहों पर टोल टेक्स लगा कर बिल्ट आन आपरेट के सिद्धांत पर निजी क्षेत्र के हवाले किया गया है। पंजाब सरकार के प्रस्ताव को केंद्रीय भूतल मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग 64 नंबर होने के चलते इसी मंजूरी की वजह से काम अटका था। राजपुरा से पहले और बनूड़ के पास दो जगहों पर टोल टैक्स भी लगेगा।
हालांकि 18 से 24 फुट चौड़ी सड़क पर दुर्घटनाएं बढ़ती रही और सड़क को किलर रोड का नाम मिल गया। शोर ज्यादा मचा तो सड़क को चौड़ा करने का कार्य शुरू हुआ। साढ़े 17 करोड़ रुपये की लागत से पांच सात फुट सड़क चौड़ी भी हो गई। अब तीन गाडिय़ां निकलने लायक हो गईं। वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पटियाला सरहिंद रोड को चौड़ा कर किलर रोड से ट्रैफिक का भार कम करने का प्रयास मात्र किया। इस सड़क पर पेड़ काटने की दुहाई दे पर्यावरण संजोए रखने की बात भी सामने रख दी गई।
इसी दौरान पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप का सिद्धांत आया इस 64 नंबर राजमार्ग के अलावा कई सड़कें दुरुस्त हुईं पर टोल टेक्स लग गया। राज्य में ऐसी सड़कों की संख्या 107 हो गई। पटियाला-समाना, पटियाला- नाभा रोड इसी नीति अधीन आ गए।
कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई तो प्रोजेक्ट ठंडा पड़ गया। शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सत्ता में आ गया। सरकार बने दो साल बीच चुके हैैं किलर रोड पर होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या का ग्राफ एक बार फिर पुरानी स्थिति में आ गया। और तो और क्षेत्र में नए वाहनों का हो रहा रजिस्ट्रेशन तेजी से बढ़ता जा रहा है। मालवा बेल्ट से अकाली भाजपा गठबंधन को पिछले विधान सभा चुनाव में कड़ी हार का सामना करना पड़ा। अब अकाली भाजपा गठबंधन सरकार ने घोषणा का सिलसिला पटियाला से और डेढ़ सौ किलोमीटर आगे बढ़ते हुए बठिंडा तक कर दिया है। इसे अनुसार चंडीगढ़ से बठिंडा तक एक्सप्रेस हाईवे बनाया जाएगा।
दिलचस्प है कि इस सड़क पर भी करोड़ों खर्च होंगे पर इसी बीच चंडीगढ़ से बठिंडा तक सड़क की एक बार कारपेटिंग की जा चुकी है। पटियाला शहर से बहादुरगढ़ तक सड़क फोरलेन कांग्रेस के कार्यकाल में हो गई राजपुरा में भी थोड़ा क्षेत्र फोर लेन का है। बनूड़ में भी शहरी आबादी वाला हिस्सा फोर लेन हो चुका है। ऐसे ही स्थिति जीरकपुर से पहले और बाद में चंडीगढ़ तक की है। अब इन्हें मिलाया जा रहा है।
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