जल संरक्षण
-दस जिलों में राष्ट्रीय खादय सुरक्षा मिशन के तहत प्रति एकड़ किसान को मिलेगा तीन हजार का अनुदान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
धान की पनीरी लगाने वाले मजदूरों की कमी और बैड प्लांटेशन के माध्यम से रोपाई करने वाली मशीनों के लोकप्रिय ना होने के चलते आखिरकार जल संरक्षण करने वाली धान की सीधी बिजाई को प्रचारित करने केंद्र व राज्य सरकार दोनों ही सहमत हो गए हैं। ऐसे में अब धान का भी गेहूं की चाल से चलना तय हो गया है।
धान की आम किस्मों के बाद गेहूं की तरह बासमती और दुनिया का सबसे लंबा चावल और किसान को सर्वाधिक फायदा देने वाली 1121 किस्म की सीधी बिजाई कृषि विभाग करवाने जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार, प्रदेश के दस जिलों में 18 हजार हैक्टेयर में बिजाई करवाएगा। कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (बीज) रहे और वर्तमान में मुख्य कृषि अधिकारी का कार्यभार संभाल रहे डा. बीएस सोहल बताते हैं कि 3-4 जुलाई से शुरू होने वाले इस अभियान में पहली बार पंजाब के किसानों को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय खादय सुरक्षा मिशन के तहत प्रति एकड़ किसान को तीन हजार रूपये का अनुदान भी दिया जा रहा है। पंजाब में हालांकि कुल 27.80 लाख हैक्टेयर में हो रही धान की खेती हो रही है। ऐसे में यह आंकड़ा पौना फीसद से भी कम है, लेकिन किसानों में 'सीधी बिजाईÓ का संदेश देने के लिए काफी है। योजना के तहत प्रत्येक ब्लाक में तीन तरफ से सजी हुई एक वैन घूमेगी। साहित्य बांटा जाएगा। कृषि विकास अधिकारी किसानों की ओर से पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देगा। कृषि विशेषज्ञ डा. सोहल कहते हैं कि बासमती व 1121 किस्म की सीधी बिजाई का फायदा यह है कि इन दोनों को सबसे ज्यादा लगने वाली बीमारी 'फुट रोटÓ बिलकुल नहीं लगती। इससे पौधा एकदम से लंबा होकर गिर जाता है। इसी बीमारी से सहमे पंजाब के किसान ने उम्दा व लाभदायक किस्मों से तौबा की थी।
दस जिलों को ही योजना में शामिल किए जाने पर कंसोरटियम आफ इंडियन फार्मर एसोसिएशन के प्रधान सतनाम सिंह बहरू कहते हैं कि ये योजना तो पूरे प्रदेश में लागू की जानी चाहिए।
दूसरी ओर विभाग के संयुक्त निदेशक डा. गुरसेवक सिंह संधू बताते हैं कि पंजाब से धान की रोपाई मात्र पर 750 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। और रोपाई करने से प्रति वर्ग मीटर 20-22 पौधे ही लग पाते हैं जबकि ड्रिल से 33 पौधे लग जाते हैं। इससे उपज अधिक होती है। खेत को लगातार लबालब पानी से नहीं भरना पड़ता ऐसे में पानी की बचत खासी है। हर साल खुदवाने और गहरे करवाने वाले टयूबवेल से किसान को अलग से छुटकारा मिलता है।
किसान के खर्च में सात हजार की कटौती
भूमिगत जल स्तर को होने वाले फायदे को एक ओर कर दें तो भी किसान को प्रति एकड़ सात हजार रूपये का फायदा है अथवा धान की रोपाई पर होने वाले खर्च में सीधी कटौती। इस अनुसार
-दो हजार रूपये पनीरी लगाने का खर्च सीधे तौर पर बचेगा
-खेत तैयार करने में ट्रैक्टर व अन्य मशीनरी की घिसाई और डीजल का खर्च नहीं होगा
- पनीरी लगाने से पहले खेत में किए जाने वाले कद्दू करने (जमीन पर पानी रोकने के लिए सुहागा फेर कर उसे सख्त बनाना) पर होने वाली मेहनत व डीजल का खर्च और टै्रक्टर को कोई नुकसान नहीं।
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