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Friday, 5 October 2012

'ग्रिड ठप होने का कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं' , failed, load dispatched center, northern grid


...मामला उत्तरी ग्रिड के फेल होने का
-पंजाब का पक्ष साबित हुआ
-ओवर ड्रा व लोड डिस्पैच सेंटरों का ग्रिड कोड की अनदेखी से पहले ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा, घटिया ट्रांसमिशन नेटवर्क को जिम्मेदार बताया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
केंद्र सरकार के संस्थान सेंट्रल इलेक्ट्रीसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के चेयरमैन एएस बक्शी की अध्यक्षता में गठित की गई चार सदस्यों की कमेटी ने 30 व 31 जुलाई को उत्तरी ग्रिड के फेल होने के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं पाया है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आधिकारिक सूत्रों अनुसार कमेटी की रिपोर्ट में ग्रिड ठप होने के कारणों में राज्यों की ओर से बिजली ओवर ड्रा करना व क्षेत्रिय  लोड डिस्पैच सेंटरों का 'ग्रिड कोडÓ की अनदेखी से पहले दिए गए कारणों में ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा, घटिया ट्रांसमिशन नेटवर्क को ग्रिड ठप होने के प्रमुख कारण बताया है।
 रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रिपिंग 400 केवीए की बीना-ग्वालियर-आगरा ट्रांसमिशन लाइनों से शुरु हुई। हालांकि पावरग्रिड ने इसी लाइन के एक सर्किट को 765 केवीए के स्तर पर अपग्रेड करने के लिए परमिट ले रखा था। उन दोनों दिनों में 400 केवीए की कई अन्य लाइनें भी बंद थी। इनमें उक्त सर्किट के अलावा 400 केवीए की जेरदा-कांकरोली और भीनमाल-कांकरोली इंसूलेटर की समस्या के चलते उपलब्ध नहीं थी। जिससे उत्तर-पश्चिम का सिस्टम कमजोर कर दिया। यह भी पाया गया कि बीना-ग्वालियर लाइन थमर्ल के लिहाज से ओवर लोड नहीं थी और दोनों ही दिन द्वितीय चरण की सुरक्षा, मैन-दो में जोन-तीन पर ट्रिप हुई जबकि पहले चरण की सुरक्षा मैन-एक ने काम ही नहीं किया। जिसके चलते ग्रिड ठप हो गया।
 इससे पहले सीईआरसी व ऊर्जा मंत्रालय की ओर से राज्यों को ग्रिड से अपने हिस्से से ज्यादा बिजली ओवर ड्रा करने पर कड़ी फटकार लगाई और इसे ही प्रमुख कारण बताया गया। इसके बाद 'ग्रिड कोडÓ की पालना ना करने वालों पर जुर्माना लगाया गया। सीईआरसी ने उत्तर भारत के उन सभी राज्यों के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों के प्रभारियों को निर्देशों की पालना न करने के चलते ग्रिड ठप होना बताया था। नार्दन रीजन लोड डिसपेच सेंटर की याचिका पर सीईआरसी ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के अलावा राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों के अधिकारियों को जहां निर्देशों का उल्लंघन करने का जिम्मेदार पाया गया है वहीं ग्रिड कोड की पूरी तरह से पालना करने प्रति भी जिम्मेवार ठहराया।
वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने कहा है कि पंजाब पहले से ही ग्रिड की सुरक्षा को ध्यान में रख कर बिजली लेता रहा है और इस संबंध में जुलाई आरंभ से ही कड़े निर्देश जारी हैं। जबकि पावरकाम के अधिकारी बताते हैं कि बिजली के मामले में पंजाब अंतिम छोर पर है ऐसे में हमारे यहां ट्रांसमिशन लाइन की गड़बड़ी का असर ग्रिड पर सीमित है।

Saturday, 4 August 2012

बिजली ओवर ड्रा : पंजाब अनुशासित पर यूपी, हरियाणा और राजस्थान.., Power over draw; Punjab is a disciplined state


-जुलाई महीने में 29 तक औसतन ओवर ड्रा- पंजाब ने पांच फीसद, उत्तर प्रदेश ने 31, हरियाणा ने 18 और राजस्थान ने 15 फीसद ज्यादा ली बिजली
-कई बार उत्तर प्रदेश ने 70 फीसद ज्यादा किया ओवर ड्रा, चार बार मिली 'सीÓ ग्रेड की चेतावनी
-हमारे निर्देश स्पष्ट ग्रिड को खतरे में डाल ना हो ओवर ड्रा: चेयरमैन
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
उत्तरी ग्रिड के दो दिनों में लगातार दो बार ठप होने के बाद, बिजली ओवर ड्रा करने के लग रहे आरोपों पर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने पावरकाम मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा है कि उत्तरी ग्रिड से बिजली लेने वाले सभी राज्यों में पंजाब सबसे अधिक अनुशासन में है और ये बात वे नहीं आंकड़े कह रहे हैं।
नार्दन रीजन लोड डिस्पैच सेंटर से प्राप्त जानकारी के हवाले से इंजी. केडी चौधरी ने बताया कि जुलाई महीने में 29 तारीख तक ग्रिड से बिजली लेने वालों के महीने भर के औसत ओवर ड्रा में पंजाब ने पांच फीसद बिजली ली है, जबकि उत्तर प्रदेश ने 31, हरियाणा ने 18 और राजस्थान ने 15 फीसद ज्यादा बिजली ली है।
इसी बीच कई बार ऐसा समय भी आया है जब उत्तर प्रदेश ने 70 फीसद ज्यादा ओवर ड्रा किया है। 'अब ग्रिड ठप हो सकता हैÓ वाली 'सीÓ ग्रेड की चेतावनी उत्तर प्रदेश को चार बार मिली है, जबकि पंजाब को एक बार भी नहीं मिली है। चेयरमैन बताते हैं कि वे अपने पावर कंट्रोल के सिस्टम आपरेशन विभाग में हाल ही में गए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ग्रिड को खतरे में डाल कर ओवर ड्रा ना किया जाए।
इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि बिजली की मांग कभी भी एक स्तर पर नहीं बनी रहती। ऐसे में कभी ग्रिड से ओवर ड्रा होती है तो कभी अंडर ड्रा, लेकिन फ्रिक्वेंसी को ध्यान में रख कर ही किया जाना चाहिए और एक सीमा में ही रहना चाहिए। चेयरमैन कहते हैं कि आज बुधवार को ग्रिड में मांग कम थी तो पंजाब नो 800 मेगावाट बिजली ओवर ड्रा की है, जबकि पंजाब के लिए उपलब्ध ट्रांसमिशन कोटा 5100 मेगावाट ही है और इसे 300 मेगावाट तक बढ़ाने की ही अनुमति है।

बाक्स
हरियाणा ने नहीं किए शार्ट टर्म खरीद समझौते

गर्मी व धान के सीजन में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पंजाब ने 10 जून से बिजली खरीदने के शार्ट टर्म समझौते किए। नार्मल मानसून की रिपोर्ट को देखते हुए मई तक 32 मिलीयन यूनिट बिजली खरीदी गई। मानसून के ठंडा रहने की खबरों के बाद 1100 मिलीयन यूनिट बिजली के शार्ट टर्म समझौते भी पहली दरों 3.91 रूपये प्रति यूनिट की दर पर हो गए। यह काम भी मई अंत तक निपटा लिया गया। जिसने पंजाब को बचाया, जबकि हरियाणा ने ऐसी बिजली नहीं खरीदी। ऐसे में हरियाणा या तो हर रोज खरीद कर रहा है, या फिर ओवर ड्रा कर रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश ने ओवर ड्रा का 70 फीसद तक का आंकड़ा छुआ है।

एक घंटे में चलाई बिजली, तीन में आधी सप्लाई बहाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहले 2004 और फिर 2008 की सर्दियों में उत्तरी ग्रिड के ठप होने से मिले 'सबक' संभव है उत्तर भारत के बिजली इंजीनियर भूल गए हों, लेकिन एक दिन पहले ग्रिड के ठप होने का 'अनुभव' जरूर काम आया है और उत्तरी ग्रिड व पूर्वी ग्रिड के ठप होने के बाद पंजाब में दोपहर 1:08 बजे गुल हुई बिजली को एक घंटे में चालू कर लिया गया, जबकि तीन घंटे में प्रदेश में बिजली की आधी सप्लाई बहाल कर ली गई और शेष काम शाम ढलने से पहले निपटा लिए गए।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पावर कंट्रोल के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि ग्रिड के ठप होते ही पंजाब को अन्य राज्यों के बिजली सिस्टम से डी-लिंक किया गया और सवा दो बजे भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड ने अपना पहला यूनिट चालू कर लिया। भाखड़ा से मिली बिजली को पहले रोपड़ के श्री गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट को दिया गया और फिर बठिंडा के श्री गुरु नानक देव थर्मल प्लांट को। इसी बीच पंजाब के अपने सभी पन बिजली केंद्रों ने उत्पादन शुरू कर दिया। थर्मल प्लांटों के ठंडे होने से बिजली मिल जाने के चलते इन्हें जल्द चालू करने में मदद मिली। सबसे पहले रोपड़ के दो यूनिट चालू किए गए और साढ़े चार बजे तक 50 फीसद क्षेत्रों में बिजली सप्लाई बहाल कर ली गई। शेष सिस्टम को भी शाम ढलने से पहले चला लिया गया।