...मामला उत्तरी ग्रिड के फेल होने का
-पंजाब का पक्ष साबित हुआ
-ओवर ड्रा व लोड डिस्पैच सेंटरों का ग्रिड कोड की अनदेखी से पहले ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा, घटिया ट्रांसमिशन नेटवर्क को जिम्मेदार बताया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
केंद्र सरकार के संस्थान सेंट्रल इलेक्ट्रीसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के चेयरमैन एएस बक्शी की अध्यक्षता में गठित की गई चार सदस्यों की कमेटी ने 30 व 31 जुलाई को उत्तरी ग्रिड के फेल होने के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं पाया है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आधिकारिक सूत्रों अनुसार कमेटी की रिपोर्ट में ग्रिड ठप होने के कारणों में राज्यों की ओर से बिजली ओवर ड्रा करना व क्षेत्रिय लोड डिस्पैच सेंटरों का 'ग्रिड कोडÓ की अनदेखी से पहले दिए गए कारणों में ट्रांसमिशन लाइनों की सुरक्षा, घटिया ट्रांसमिशन नेटवर्क को ग्रिड ठप होने के प्रमुख कारण बताया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रिपिंग 400 केवीए की बीना-ग्वालियर-आगरा ट्रांसमिशन लाइनों से शुरु हुई। हालांकि पावरग्रिड ने इसी लाइन के एक सर्किट को 765 केवीए के स्तर पर अपग्रेड करने के लिए परमिट ले रखा था। उन दोनों दिनों में 400 केवीए की कई अन्य लाइनें भी बंद थी। इनमें उक्त सर्किट के अलावा 400 केवीए की जेरदा-कांकरोली और भीनमाल-कांकरोली इंसूलेटर की समस्या के चलते उपलब्ध नहीं थी। जिससे उत्तर-पश्चिम का सिस्टम कमजोर कर दिया। यह भी पाया गया कि बीना-ग्वालियर लाइन थमर्ल के लिहाज से ओवर लोड नहीं थी और दोनों ही दिन द्वितीय चरण की सुरक्षा, मैन-दो में जोन-तीन पर ट्रिप हुई जबकि पहले चरण की सुरक्षा मैन-एक ने काम ही नहीं किया। जिसके चलते ग्रिड ठप हो गया।
इससे पहले सीईआरसी व ऊर्जा मंत्रालय की ओर से राज्यों को ग्रिड से अपने हिस्से से ज्यादा बिजली ओवर ड्रा करने पर कड़ी फटकार लगाई और इसे ही प्रमुख कारण बताया गया। इसके बाद 'ग्रिड कोडÓ की पालना ना करने वालों पर जुर्माना लगाया गया। सीईआरसी ने उत्तर भारत के उन सभी राज्यों के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों के प्रभारियों को निर्देशों की पालना न करने के चलते ग्रिड ठप होना बताया था। नार्दन रीजन लोड डिसपेच सेंटर की याचिका पर सीईआरसी ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के अलावा राजस्थान, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड के स्टेट लोड डिस्पैच सेंटरों के अधिकारियों को जहां निर्देशों का उल्लंघन करने का जिम्मेदार पाया गया है वहीं ग्रिड कोड की पूरी तरह से पालना करने प्रति भी जिम्मेवार ठहराया।
वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने कहा है कि पंजाब पहले से ही ग्रिड की सुरक्षा को ध्यान में रख कर बिजली लेता रहा है और इस संबंध में जुलाई आरंभ से ही कड़े निर्देश जारी हैं। जबकि पावरकाम के अधिकारी बताते हैं कि बिजली के मामले में पंजाब अंतिम छोर पर है ऐसे में हमारे यहां ट्रांसमिशन लाइन की गड़बड़ी का असर ग्रिड पर सीमित है।
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