Friday, 5 October 2012

'प्रतिबंधित' किस्म का धान आने लगा मंडियों में, paddy, govinda, banned, varieties,


फोटो:
- सरकारी खरीद नहीं, अब शुरु होगी मानिटरिंग : जिला मंडी अधिकारी
- गोविंदा अथवा सट्ठी की रोपाई दस जून से पहले करने पर प्रतिबंध और सरकार नहीं खरीदेगी : मुख्य कृषि अधिकारी
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
कृषि क्षेत्र में सब सोयल एक्ट लागू होने के साथ ही भूमिगत जल स्तर को संजोए रखने के शुरु हुए प्रयास में प्रदेश में मात्र 60 दिनों में ही पककर फसल देने वाली धान की सट्ठी अथवा गोविंदा किस्म पर सरकारी तौर पर प्रतिबंध लग गया, लेकिन इस किस्म का धान अब इस सीजन में मंडियों में आने लगा है। वो भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद एजेंसियों की ओर से खरीद शुरु करने से करीब करीब एक महीना पहले।
पटियाला जिले की राजपुरा मंडी से इस धान की शुरुआत हुई है। मंडी कर्मी अश्विनी कुमार ने बताया कि अभी 53 क्विंटल धान की आवक हुई है और नमी अधिक होने के चलते यह 1205 रूपये व 1220 रूपये प्रति क्विंटल के दामों पर बिका है, हालांकि एमएसपी 1280 रूपये रख गया है। वे बताते हैं कि पटियाला तहसील के असरपुर गांव से आई है और गोविंदा किस्म है।
इसी संबंध में जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख आश्चर्य व्यक्त करते हुए बताते हैं कि यह काफी जल्दी है। अभी सीजन शुरु होने में दो से तीन सप्ताह शेष हैं। वे कहते हैं कि मंडी बोर्ड की धान पर मानीटरिंग अभी शुरु नहीं की है और न ही धान की सरकारी खरीद शुरु हुई है।
दूसरी ओर धान की गोविंदा अथवा सट्ठी किस्म पर मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि सरकार ने इन किस्मों की खरीद करने से इन्कार किया था और दस जून से पहले इनकी रोपाई पर रोक लगाई है। किसान चाहे तो अपने रिस्क पर उगा सकता है पर एमएसपी पर सरकारी एजेंसी नहीं खरीदेगी। वे स्वीकार करते हैं कि इन किस्मों को मात्र 40 दिन ही पानी की जरूरत रहती है जबकि अन्य प्रचलित किस्में 120 से 135 दिनों की होती हैं और 70 दिन पानी की जरूरत रहती है।
डा. सोहल ने बताया कि कम अवधि वाली इन किस्मों को किसान उगा तो लेगा, लेकिन इसे तैयार कर बनने वाला चावल जिसने बेचना है उसने भी गुणवत्ता का ध्यान रखना होता है। ऐसा धान उस अंतिम व्यक्ति की भी जरूरत पूरी करता हो।

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