Monday, 29 October 2012

पावरकाम के बिलिंग साफ्टवेयर ने लगाया चूना?


-पावरकाम को करोड़ों का आर्थिक नुकसान, सात शहरों के उपभोक्ता हुए परेशान
-30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में बिलिंग सिस्टम को जोडऩे लगना है जर्मनी का सैप साफ्टवेयर
- क्रियांविंत करने वाली एक कंपनी ने हाथ खड़े किए
-इंजीनियर्स एसोसिएशन ने गिनाई खामियां, कहा विशेषज्ञों की टीम करे दुरुस्त
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम की ओर से बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिजली बिलों को एक सिस्टम से जोडऩे वाले बिलिंग साफ्टवेयर ने पावरकाम को करोड़ों का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। इतना ही नहीं राज्य के कम से कम सात शहरों के उपभोक्ताओं को इससे भारी परेशानी भी झेलनी पड़ी है।
राज्य में तत्कालीन पंजाब राज्य बिजली बोर्ड ने 30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में बिलिंग सिस्टम को जोडऩे के लिए जर्मनी का एक सैप नाम साफ्टवेयर लगाया जा रहा है। एंटरप्रेनर रिसोर्स प्लानिंग नाम से इसकी शुरुआत जुलाई 2010 में पटियाला से की गई। डेढ़ साल में ही इसे लागू कर दिया गया। इसके साथ ही मोहाली सहित छह अन्य शहरों में भी यही प्रोजेक्ट शुरु कर दिया गया।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस प्रोजेक्ट की खामियां सामने आने के बाद और राज्य के इन शहरों में उपभोक्ताओं की लगातार गलत बिलिंग को लेकर बढ़ रही परेशानियों के बाद इस प्रोजेक्ट को अन्य शहरों में लागू ना करने की मांग की है।
एसोसिएशन के महासचिव इंजी. संजीव सूद का कहना है कि मुंबई की एक कंपनी को 350 करोड़ में जून 2010 को ठेका सौंपा गया। उस समय मैसर्स सपैनिको का एक अन्य कंपनी मैसर्स एक्सेंचर के साथ करार था। बिजली वितरण के मामले में क्रियांविंत करने वाली एक्सेंचर ने अच्छा अनुभव होने के बावजूद हाथ पीछे खींच लिए।
इंजीनियर्स एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि 'गो लाइवÓ नाम से अब एक नया साफ्टवेयर लगाया जा रहा है जिसे पूरी तरह से टेस्ट भी नहीं किया गया है। खामियां गिनाने के साथ ही एसोसिएशन ने मांग की है कि वितरण क्षेत्र के इंजीनियरों, और आईटी विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाए। जो यह समस्या दूर करे। दिलचस्प है कि बिल ज्यादा आने की सूरत में उपभोक्ता परेशान होता है और किसी ना किसी तरह से कम करवाने के जुगाड़ में लग जाता है, वहीं बिल कम आने की सूरत में पावरकाम को चूना लग जाता है।

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