बिजली बिलों में देरी, बिलिंग साफ्टवेयर ने लगाया चूना!
- मुख्यालय वाले शहर सहित सात शहरों में चार-चार महीने के बिल आए
-जल्द दुरुस्त होगा सिस्टम, समय पर आएंगे बिल: पावरकाम
फोटो: 10 स्कैन की हुई खबर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बिजली का बिल वैसे ही कम नहीं...अब तो कई महीने हो...गर्मी में वैसे ही डबल होता...इस बार तो सुना है बिजली और मंहगी हो...Ó यह केवल समानिया गेट के रहने वाले कमलेश चंद्र शर्मा ही नहीं शहर की बड़ी आबादी बिजली बिलों के पहुंचने में हो रही देरी से जूझ रही है।
बात यहीं समाप्त नहीं होती महीने का हिसाब किताब लेकर चलने वाले आम आदमी को देरी से भी ज्यादा परेशानी इस बात से भी है कि दो महीनों की बजाए अगर तीन या चार महीनों का बिल एक साथ आता है तो भुगतान उपर की स्लैब की यूनिटों का ज्यादा करना पड़ेगा। साफ है कि पहली सौ यूनिट की सस्ती दरों का लाभ हर दूसरे महीने मिलने की अपेक्षा चौथे महीने मिलेगा और 300 यूनिट के उपर की मंहगी दरों वाली बिजली का भुगतान ज्यादा किया जाएगा।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से बिजली उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले बिजली बिलों को एक सिस्टम से जोडऩे वाले बिलिंग साफ्टवेयर ने पावरकाम को भी करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। वहीं राज्य के कम से कम सात शहरों के हजारों उपभोक्ताओं को इससे भारी परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
'दैनिक जागरणÓ ने इस संबंध में पहले ही चेता दिया था पर अब यह समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। पावरकाम मुख्यालय वाले शहर पटियाला में भी चार चार महीने के बिजली बिल एक साथ आ रहे हैं। दिलचस्प है कि गर्मियों के पीक सीजन का सारा बिजली बिल एक साथ आने की सूरत में एकबारगी आम आदमी को पूरा वेतन बिजली बिल चुकाने में ही देना पड़ रहा है। हालांकि पावरकाम के प्रवक्ता इस बात को स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि जल्द ही सारा सिस्टम दुरुस्त कर लिया जाएगा और नियमित समय पर बिल आने लगेंगे।
उल्लेखनीय है कि राज्य में तत्कालीन पंजाब राज्य बिजली बोर्ड ने 30 हजार से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में बिलिंग सिस्टम को जोडऩे के लिए जर्मनी का सैप नाम साफ्टवेयर लगाया जा रहा है। एंटरप्रेनर रिसोर्स प्लानिंग नाम से इसकी शुरुआत जुलाई 2010 में पटियाला से की गई। डेढ़ साल में ही इसे लागू कर दिया गया। इसके साथ ही मोहाली सहित छह अन्य शहरों में भी यही प्रोजेक्ट शुरु कर दिया गया।
दूसरी ओर पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस प्रोजेक्ट की खामियां सामने आने के बाद और राज्य के इन शहरों में उपभोक्ताओं की लगातार गलत बिलिंग को लेकर बढ़ रही परेशानियों के बाद इस प्रोजेक्ट को अन्य शहरों में लागू न करने की मांग की है।
एसोसिएशन के महासचिव इंजी.संजीव सूद का कहना है कि मुंबई की एक कंपनी को 350 करोड़ में जून 2010 को ठेका सौंपा गया। उस समय मैसर्स सपैनिको का एक अन्य कंपनी मेसर्स एक्सेंचर के साथ करार था। बिजली वितरण के मामले में क्रियांवित करने वाली एक्सेंचर ने अच्छा अनुभव होने के बावजूद हाथ पीछे खींच लिए।
इंजीनियर्स एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि 'गो लाइवÓ नाम से अब एक नया साफ्टवेयर लगाया जा रहा है, जिसे पूरी तरह से टेस्ट भी नहीं किया गया है। खामियां गिनाने के साथ ही एसोसिएशन ने मांग की है कि वितरण क्षेत्र के इंजीनियरों और आईटी विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाए, जो यह समस्या दूर करे। दिलचस्प है कि बिल ज्यादा आने की सूरत में उपभोक्ता परेशान होता है और किसी न किसी तरह से कम करवाने के जुगाड़ में लग जाता है। वहीं बिल कम आने की सूरत में पावरकाम को चूना लग जाता है।
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