Monday, 29 October 2012

सरस मेला 11 अक्टूबर से, शीश महल में




-18 राज्यों के चार सौ कलाकारों की लगेंगी 165 दुकानें
-13 को दलेर मेंहदी नाइट
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
देश भर के गरीब हस्त शिल्पकारों की चीजों की बिक्री के लिए उत्साहित करने वाला सरस मेला एतिहासिक शहर पटियाला के शीश महल में 11 अक्टूबर से शुरु होने जा रहा है। जिला ग्रामीण विकास एजेंसी व केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से लगाए जके वाले 12 दिवसीय मेले की तैयारियां लगभग पूरी की जा चुकी हैं।
इसी संबंध में जिला प्रशासन के अमले के साथ पहुंचे ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा है देश भर में अब तक हुए पांच मेलों में से केवल पंजाब में ही लगने वाला ये तीसरा मेला है। मेले का औपचारिक उद्घाटन मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल 12 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे करेंगे। इसके अलावा हर दिन राज्य का कोई ना कोई मंत्री मेले में अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करवाएगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के आने का भी कार्यक्रम है लेकिन प्रधानमंत्री के साथ बैठक के चलते समय की दिक्कत आ रही है।
रखड़ा ने बताया कि मेले पंजाब के अलावा जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तामिलनाडू, उड़ीसा, गुजरात, बिहार, केरल सहित 18 राज्यों के करीब चार सौ शिल्पकार भाग ले रहे हैं। गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले दस्तकारों की चीजें इस मेले में बेची जाएंगी। इन लोगों को 160 स्टाल अलाट किए गए हैं।  
पहली बार उड़ीसा व पश्चिमी बंगाल के लोक नृत्यों की प्रस्तुति के अलावा 13 अक्टूबर को दलेर मेंहदी नाइट का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का प्रदर्शन भी किया जाएगा। 65 लाख रूपये के अनुमानित खर्च वाले इस मेले में केंद्र सरकार की ओर से 20 लाख रूपये का योगदान दिया जा रहा है।
सरस मेले में मिट्टी के बर्तन, बांस, तिनकों की बनी वस्तुएं, कपड़ा, चमड़ा, शीशे व टेराकोट से तैयार की गई वस्तुएं व झूले विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होंगे। प्रवेश के लिए दस रूपये की टिकट रखी गई है लेकिन दस साल से छोटे बच्चों व सरकारी स्कूलों के  बच्चों के लिए ये निशुल्क होगा।
वहीं एडीसी अनिंनदिता मितरा ने बताया कि फायर ब्रिगेड से लेकर चिक्तिसा तक की लगभग हर व्यवस्था की गई है। इस अवसर पर पनसीड के चेयरमैन सुरजीत सिंह अबलोवाल, मखन सिंह लालका, कर्मजीत सिंह रखड़ा, रवि आहलुवालिया सहित जिला व पुलिस प्रशासन के मुखी मौजूद रहे।
प्रचार में साम, दाम, दंड, भेद के साथ पूरे प्रबंध
-हर बीडीओ को थमाए टिकट, कहा गांवों में बेचो
-गुरुद्वारों के लाउड स्पीकरों से होगी घोषणा, सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त प्रवेश
-सरपंचों व पंचों को निमंत्रण पत्र भेज कहा मुख्यमंत्री होंगे मुखातिब
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सरस मेले को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए अधिकारी किस कदर जुटे हैं। इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि मेले को जन जन तक पहुंचाने के लिए साम दाम दंड भेद का हर उपाय किया जा रहा है।
पिछली बार के सरस मेले की तुलना में ज्यादा लोगों को मेले तक खींच लाने के किए जा रहे प्रयास में इस बार जिले के लगभग हर गांव तक सरस मेले का प्रचार किया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ब्लाक डेवलेपमेंट अफसरों की डयूटी लगाई गई है कि वे जिले के एक हजार से ज्यादा सरपंचों के पास निमंत्रण पत्र पहुंचाए। इनमें से शिरोमणि अकाली दल से नजदीकी रखने वालों के पास पहुंचा है या नहीं इसकी पुष्टि भी कर ली जाए। कहा गया है कि 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इन सरपंचों से मेले में ही मुखातिब होंगे। प्रशासनिक प्रयास हो रहे हैं कि करीब एक हजार सरपंच व पंचों का सम्मेलन पहले ही दिन हो जाए। मुख्यमंत्री से सीधे संवाद का मौका शायद ही कोई सरपंच खोना चाहेगा।
एक एफएम रेडियो को भी मीडिया पार्टनर के रूप में शामिल किया गया है उक्त रेडियो से दिन भर में दस बार विज्ञापन निशुल्क प्रचारित करने का समझौता हुआ है।
जिले में हर बीडीओ को पांच-पांच हजार टिकट थमा दि गए हैं और गांवों में बेचने के लिए कह दिया गया है। हालांकि इस संबंध में एडीशनल डिप्टी कमिश्नर अनिनंदिता मितरा ने तो यह तक कह दिया है कि गांव स्तर तक प्रचार करने के लिए ये जरूरी है। वे चाहती हैं कि हर गांव तक इसका प्रचार हो। जिले व आसपास के क्षेत्रों के गांवों में मौजूद गुरुद्वारा साहिब के लाउड स्पीकर से सरस मेले के बारे में घोषणा करवाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
सरकारी स्कूलों के बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने के अलावा मेले में आने वालों की गिनती दो लाख से बढ़ा कर तीन लाख करने की कवायद में शहर भर में फलैक्स लगाए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में एडीसी कहती हैं कि कोई भी फलैक्स अवैध जगह पर नहीं लगाया गया है। केवल उन्हीं जगहों पर लगाए गए हैं जहां पर नगर निगम अनुमति देता है। इसके लिए नगर निगम को 25 हजार रूपये का भुगतान भी किया गया है।


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