Monday, 29 October 2012

मौसम साफ पर गीला आ रहा धान


-17 की बजाए 22-23 फीसद नमी वाला आ रहा है धान
-सरकारी खरीद एजेंसियों ने नहीं की खरीद
-एफसीआई से राजपुरा में करवाई है खरीद: डीएफएसओ
फोटो: 1
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
प्रदेश में बारिश बंद हुए दो सप्ताह बीत जाने के बाद और मौसम के पूरी तरह से साफ रहने पर भी जिले की मंडियों में किसान गीला धान ही लेकर आ रहा है। केंद्र सरकार की ओर से धान के तय किए गए मापदंड और राज्य सरकार की ओर से जारी की गई धान की खरीद नीति अनुसार धान में 17 फीसद तक की नमी होनी चाहिए लेकिन मंडियों में आने वाले धान में 22-23 फीसद नमी पाई जा रही है।
वहीं जिला मंडी बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि कुल 106 मंडियों में से केवल 13 में ही धान की आवक शुरु हुई है और पिछले साल की तुलना में एक तिहाई धान ही आ रहा है। इसमें से भी एक तिहाई की ही खरीद हुई है, वो भी निजी क्षेत्र में। मंडी में लाए जा रहे धान की हालत ऐसी है कि इसे कम से कम दो दिनों तक सुखाना पड़ रहा है। जिले में अब तक धान की कुल आवक 2332 टन हुई है, इसमें से केवल हुई निजी खरीद 867 टन है जबकि पिछले साल आज ही के दिन तक 6894 टन धान मंडियों में आ चुका था।
वहीं राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान सत प्रकाश गोयल कहते हैं कि अभी तो मंडी में जगह है, ऐसे में आप फैला कर जैसे तैसे सुखा लेते हैं पर ये घाटे का सौदा है। पांच रूपये प्रति कट्टा अथवा 15 रूपये प्रति क्विंटल का खर्च बढ़ जाता है। 22 फीसद नमी वाले धान को 17 फीसद पर लाने के साथ ही पांच किलो वजन भी कम हो जाता है। 12 रूपये 80 पैसे किलो के हिसाब से पांच-छह किलो का यह नुकसान भी खरीददार को झेलना पड़ता है। इसके अलावा धान के बदरंग होने का खतरा रहता है सो अलग।  
दूसरी ओर राज्य सरकार की पांचों खरीद एजेंसियों के फील्ड कर्मियों की ओर से धान की खरीद का बायकाट आज तीसरे दिन भी जारी रहा है। ऐसे में सरकारी एजेंसियों की ओर से धान का दाना भी नहीं खरीदा गया है।
जबकि जिला खाद्य एंव आपूर्ति अधिकारी डा. अंजुमन भास्कर ने बताया कि नमी की वजह से ही सरकार धान की खरीद नहीं कर पा रही है। किसानों से भी सूखा धान मंडियों में लाने की अपील की गई है। हालांकि राजपुरा में फूड कारपोरेशन आफ इंडिया ने करीब एक सौ टन की खरीद कर ली है और शेष स्थानों पर निजी क्षेत्र में ही खरीद की जा रही है।

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