-डायरेक्टर यूथ वेलफेयर, डायरेक्टर स्पोर्टस, इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक जैसा हर बड़ा नाम ओएसडी के बिना
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के सर्वोच्च पद पर विराजमान वाइस चांसलर के पास कोई आफिसर ऑन स्पेशल डयूटी नहीं है। इसी प्रकार यूनिवर्सिटी को प्रशासक के रूप में कानूनी रूप से चलाने वाले रजिस्ट्रार के पास भी कोई ओएसडी नहीं है। कुछ ऐसी ही स्थिति अन्य डायरेक्टरों की है जिनके पास ओएसडी नहीं पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जन संपर्क विभाग से जुड़े डायरेक्टर के साथ ओएसडी की तैनाती कर दी है।
यूनिवर्सिटी के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि पंजाबी यूनिवर्सिटी में भाषा व सांस्कृतिक विकास की गतिविधियां चलाने वाले डायरेक्टर यूथ वेलफेयर भी बिना ओएसडी के हैं और खेल क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी मौलाना अबुल कलाम आजाद ट्राफी लाते रहने वाले डायरेक्टर स्पोर्टस और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कालेज चलाने वाले निदेशक जैसा हर बड़ा नाम ओएसडी के बिना ही है। जबकि एक कलर्क, एक चपरासी, एक फोटोग्राफर, एक वीडियोग्राफर के साथ एक एपीआरओ पर ओएसडी की तैनाती की जा रही है।
नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर यूनिवर्सिटी के ही एक अन्य शिक्षक बताते हैं कि चुनावी चर्चा में चल रही पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में लोकतंत्र के आगमन के साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की शुरुआत हो रही है। इसी के तहत यह मामला बाहर आया है। यूनिवर्सिटी चाहे स्वायतशाही संस्था है पर शिक्षक संघ के चुनाव ना होने की वजह से एक पूरी लाबी खामौश थी पर अब हालात बदलेंगे।
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नई नियुक्ति नहीं... नाम से क्या फर्क पड़ता है: रजिस्ट्रार
वहीं युनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डा. एएस चावला कहते हैं कि कोई नई नियुक्ति नहीं की जा रही है। वही वेतन है... वही भत्ते हैं... अगर किसी को उंचा नाम मिलने से तसल्ली होती है तो क्या फर्क पड़ता है। यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार व अन्य डायरेक्टरों के पास ओएसडी ने होने के सवाल पर वे उदाहरण देते हैं कि यदि वे अपने पीए रजिंदर कुमार को ओएसडी कहने लग जाएं तो क्या होगा? डयूटी तो वही रहेगी।
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