Monday, 29 October 2012

पंजाब में बिजली मीटर नहीं, तो कनेक्शन नहीं


-पीएसईआरसी ने पावरकाम से कहा दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करो
- इस साल मई से चल रही कमी, स्टाक शून्य हुआ
-पावरकाम ने कहा 80 हजार मीटर आने को हैं
- जले अथवा खराब हुए मीटरों वाले एक लाख 76 हजार 930 उपभोक्ताओं के लिए चार से छह महीने पूरे मजे के
- बिजली बोर्ड के पूर्व सुपरिटेंडिंग  इंजीनियर ने पीएसआरसी के पास दायर की याचिका कहा पावरकाम ने दिया 'चोर रास्ताÓ
भूपेश चट्ठा, पटियाला
उप मुख्यमंत्री की ओर से एक ओर जहां राज्य को बिजली सरपल्स राज्य बनाने के लगातार दावे किए जा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत ये है कि पंजाब में बिजली मीटर ही नहीं है। ऐसे में नए कनेक्शन देना तो दूर की बात पुराने, जले व खराब मीटर बदलने का भी कोई साधन नहीं है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पास उपभोक्ताओं के यहां लगाने व खराब हुए सिंगल फेस मीटरों को बदल नए मीटरों लगाने का स्टाक खत्म होने पर अब पंजाब स्टेट इलेक्ट्रीसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन- पीएसआरसी ने पावरकाम से इस संदर्भ में दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं। पीएसईआरसी की अध्यक्ष रोमिला दूबे ने उक्त आदेश जारी किए हैं।
 हालांकि तीन फेस के मीटरों की भी कमी है, लेकिन सिंगल फेस मीटरों के मामले में हालत खासी पतली चल रही है। इससे एक ओर उपभोक्ताओं की मौज लगी है, वहीं पावरकाम को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस साल मई से ही कमी चल रही थी, लेकिन अब स्टाक शून्य हो गया है। एक नोटिस पर पावरकाम की ओर से पीएसईआरसी के पास यही जबाव दायर किया गया है कि मीटर खत्म है और 80 हजार मीटर आने को है। आर्डर दिया जा चुका है।
वहीं सूत्र बताते हैं कि नवंबर तक हालात कुछ इसी तरह के ही रहने वाले हैं। जले अथवा खराब हुए मीटरों वाले उपभोक्ताओं के लिए चार से छह महीने पूरे मजे के चल रहे है। उपभोक्ता को बिजली मीटर से ना आने की सूरत में एसी से लेकर माइक्रो वेव तक सब जम कर चलने वाली स्थित होती है।
बिजली बोर्ड के ही एक पूर्व सुपरिटेंडिंग इंजीनियर गुरनेक सिंह बराड़ ने इस संबंध में पीएसआरसी के पास याचिका दायर की थी। कहा गया कि खुद पावरकाम प्रबंधन ने ही राजस्व जाने देने का 'चोर रास्ताÓ सुझा दिया है। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 181 के तहत दायर की गई याचिका के साथ ही धारा 142 का हवाला देकर यह भी कहा गया कि पीएसईआरसी मामले में हस्तक्षेप कर सुनिश्चित करे की सीधी सप्लाई ना दी जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि टेस्ट रिपोर्ट के बाद नए मीटर लगवाने वालों की फेहरिस्त और लंबी होती जा रही है। इस साल 31 मार्च को जनरल केटेगरी में टेस्ट रिपोर्ट पेंडिंग के जहां 10411 मामले लंबित सूची में थे वहीं 30 जून तक यह आंकड़ा 17 हजार बढ़ कर 27233 पर आ गया। सिंगल फेस मीटर ना होने की सूरत में नए कनेक्शन जारी नहीं हुए। इसी प्रकार खराब मीटरों का आंकड़ा एक लाख 76 हजार 930 पर आ पहुंचा है।
तकनीकि रूप से खराब, ठप, जले हुए, सील टूटे व बिलकुल खपत ना दिखाने वाले मीटरों का आंकड़ा कुल उपभोक्ताओं की तुलना में एक फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए, जबकि इस समय यह 2.96 फीसद पर जा पहुंचा है।
पावरकाम को जहां दो लाख मीटरों की तुरंत जरूरत है वहीं वास्तविक स्टाक 31 मई को 2223 सिंगल फेस, 3820 थ्री फेस, 29 जून को 3389 सिंगल फेस, 1453 थ्री फेस, 30 जुलाई को 12495 सिंगल फेस, 466 थ्री फेस, 31 अगस्त को 2397 सिंगल फेस, 893 थ्री फेस और सात सितंबर को 1888 सिंगल फेस और 2193 थ्री फेस के मीटर स्टाक में हैं।

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