भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच का संतुलन रबी का सीजन आगे बढ़ने के साथ ही बिगड़ने लगा है। किसानों की ओर से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के सामने नियमित रूप से आठ घंटे बिजली दिए जाने की मांग करीब-करीब पूरी होने के साथ ही पावरकॉम ने अगले साल गर्मियों व धान के सीजन के लिए भी इंतजाम अभी से शुरू कर दिए हैं।
पावरकॉम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि राज्य में बिजली की आपूर्ति एक हजार लाख यूनिट के ऊपर बनी हुई है जबकि मांग आठ सौ लाख तक सीमित रही। किसान संगठनों की ओर से प्रतिदिन आठ घंटे बिजली दिए की मांग पूरी होने पर मांग में 95 लाख यूनिट की बढ़ोतरी हो गई।
दिलचस्प है कि इसके बावजूद राज्य में बिजली की मांग आपूर्ति की तुलना में कम ही रही। पावरकॉम के अधिकारी बताते हैं कि बैंकिंग के माध्यम से पंजाब अन्य राज्यों को दो सौ लाख यूनिट बिजली दे रहा है। इसमें से 212 मेगावाट बिजली पिछले साल की लौटाई जा रही है। जबकि 370 लाख यूनिट बिजली अगले साल धान व गर्मियों के सीजन को ध्यान में रख कर पहाड़ी राज्यों के पास जमा करवाई जा रही है।
पावरकॉम के थर्मल प्लांटों में से तीन यूनिटों को बंद रखा गया है। इनमें से बठिंडा की एक यूनिट पूर्ण जीर्णोद्वार की वजह से बंद है जबकि दो को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के चलते बंद रखा गया है। पावरकॉम सर्दियों में क्रमवार एक के बाद एक अपनी सभी यूनिटों को 35 से 45 दिनों के लिए बंद कर मरम्मत कार्य निपटाता है। ऐसे में राज्य में एक से दो घंटे के बिजली कट सभी वर्गो पर लगाए जा रहे हैं।
पावरकॉम के अधिकारी कहते हैं कि पिछले साल की तुलना में पन बिजली उत्पादन की स्थिति भी खासी च्च्छी है। पिछले साल पंजाब के पास 142 लाख यूनिट पन बिजली उपलब्ध थी, वहीं इस साल राज्य का अपना पन बिजली उत्पादन 112 लाख यूनिट के आसपास टिका हुआ है और भाखड़ा व्यास मैनेजमैंट बोर्ड की ओर से भी 105 लाख यूनिट बिजली मिल रही है।
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