भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब के साथ पानी का हर मामला केंद्रीय स्तर पर निपटाने की इच्छा रखने वाले हरियाणा ने हर साल मानसून में तबाही लाने वाली घग्गर की बाढ़ को नियंत्रित करने वाले प्रोजेक्ट घग्गर-द्वितीय चरण को आगे बढ़ाने में एक बार फिर रोड़ा बनते हुए हांसी-बुटाना नहर को साथ जोड़ अड़ंगा लगा दिया है।
पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के कुछ हिस्सों में मार करने वाली इस बरसाती नदी पर हरियाणा का कहना है कि घग्गर की बाढ़ का उपाय करने के लिए एक विस्तृत योजना बने और द्वितीय चरण इसका एक हिस्सा हो। जबकि पंजाब चाहता है कि दोनों ही राज्यों में इस साल भी बाढ़ लाने वाली नदी के लिए कम से कम पूर्व में बने प्रोजेक्टों को हरी झंडी जरूर मिल जाए।
केंद्रीय जल आयोग ने जुलाई में आई बाढ़ के बाद तीनों ही राज्यों को अपनी ओर से घग्गर को नियंत्रित करने वाली योजना के प्रस्ताव देने को कहा। पंजाब ड्रेनेज विभाग के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि उक्त विस्तृत प्रोजेक्ट के लिए तीनों ही राज्यों का एक संयुक्त सर्वेक्षण चल रहा है। लेकिन पंजाब चाहता है कि घग्गर के द्वितीय चरण को पूरा करने की अनुमति पहले दी जाए।
घग्गर का 22.5 किलोमीटर का खन्नौरी से मकरोड़ साहिब का पहला चरण 2009 में पूरा हो चुका है। 17.5 किलोमीटर के मकरोड़ साहिब से नीचे की ओर करहाली गांव तक का प्रोजेक्ट करीब करीब दस सालों से लटक रहा है और मालवा क्षेत्र में अब तक हुआ लगभग हर चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा जाता रहा है। वहीं हरियाणा के रवैये से क्षुब्ध पंजाब ने कड़ी आपत्तिजताते हुए केंद्रीय जल आयोग की 25 अगस्त को हुई बैठक के मिनट वापस भेज दिए हैं और आयोग को लिख भेजा है कि पंजाब द्वारा बैठक में उठाए गए ऐतराज मिनट्स में दर्ज किए जाएं। इसके बाद 11 नवंबर को तीनों राज्यों की बैठक में हिस्सा लेने वाले पंजाब ड्रेनेज विभाग के चीफ इंजीनियर एएस दुल्लत ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से हरियाणा के अधिकारी उनसे हांसी-बुटाना नहर को बनने देने की बात उठाते रहते हैं और कहते हैं कि दोनों काम साथ हों जाएंगे, लेकिन पंजाब के करीब सौ गांवों के लिए ये काम खुदकुशी करने वाला हो जाएगा। ऐसे में सहमति नहीं दी जा सकती।
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